सोमवार, 24 दिसंबर 2012
सांसद हुए आमने-सामने
भारतीय जनता पार्टी के दो सांसद एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं़ भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले आनन-फानन में सांसद अशोक अर्गल सहित तीन सदस्यों की सदस्यता समाप्त और एक सदस्य का नाम मतदाता सूची में नहीं होने का मामला तूल पकड़ गया है़ मामले को लेकर अर्गल ने अदालत की शरण ली है, वहीं वर्तमान राज्य मुख्य आयुक्त ने मामले की जांच कराने की बात कही है़
भारतीय जनता पार्टी के दो सांसद जीतेन्द्र बुंदेला और अशोक अर्गल एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं़ इस बार फिर भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के लिए जनवरी माह की 24 तारीख को वाले चुनाव को लेकर मामला गर्मा गया है़ पिछले तीन साल पहले जब इस पद के लिए चुनाव हुए थे, तब भी दोनों के बीच मामला गर्मा गया था़ चुनाव मैदान में अर्गल और बुंदेला आमने सामने थे, मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हस्तक्षेप के कारण मामला टल गया और अर्गल मैदान से हट गए थे़ पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार अधिसूचना जारी होने के पहले भारत स्काउट गाइड की कार्यकारिणी की बैठक में अशोक अर्गल सहित उनके दो समर्थकों चंद्रप्रकाश शिवहरे, महेन्द्र अग्रवाल की सदस्यता समाप्त करने और डी़एस़ राघव के नाम मतदाता सूची मे नहीं होने का फैसला कर डाला़ इस बात की खबर जब अर्गल और उनके समर्थकों को लगी तो मामले ने तूल पकड़ना शुरु कर दिया़ बात इतनी बड़ी की अर्गल और उनके समर्थकों ने एन चुनाव के पहले उन्हें अयोग्य घोषित कर सदस्य भी नहीं रहने दिया तो मामले को अदालत ले गए़ उधर जब मामला अदालत पहुंचने की खबर राज्य मुख्य आयुक्त जीतेन्द्र बुंदेला तक पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच बैठा कर इस बात से पल्ला छाड़ लिया कि अधिसूचना जारी हो गई है अब वे कुछ नहीं कर सकते़ हालांकि बुंदेला तर्क देते हैं कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही वे इस मामले में कुछ कह पाएंगे़
भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त और खजुराहो संसदीय क्षेत्र से भाजपा के सांसद जीतेन्द्र बुंदेला ने लोकमत समाचार से कहा कि जिस दिन कार्यकारिणी की बैठक थी वे बैठक में शामिल नहीं हुए़ वे गुजरात चुनाव के कारण और परिवार के आयोजन होने की वजह से बैठक में नहीं पहुंचे थे़ अर्गल का उनके पास जब पत्र आया तो उन्होंने इस मामले में जांच बैठा दी है़ जांच समिति जल्द ही रिपोर्ट देगी, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है़ वैसे इस मामले में अब अधिसूचना जारी हो चुकी है, इस कारण वे अब कुछ कर नहीं सकते हैं़
अयोग्य घोषित किए गए चंद्रप्रकाश शिवहरे का कहना है कि उन्हें जब अयोग्य घोषित कर सदस्य भी नहीं रहने दिया तो उन्होंने और सांसद ने मामले को अदालत तक पहुंचा दिया है़ फिलहाल अवकाश है, जनवरी माह के पहले सप्ताह तक ही अदालत इस मामले में कुछ कदम उठाएगी़
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