शनिवार, 31 जनवरी 2026

कांग्रेस को अब ’सुर’ और ’साज’ वाले योद्धाओं की तलाश

वक्ता, लेखक और वादकों के लिए खुला प्रदेश कांग्रेस का द्वार

मध्यप्रदेश कांग्रेस इस बार अपने संगठन को एक नए और रचनात्मक अवतार में ढालने की तैयारी कर रही है। पार्टी अब ऐसे कर्मठ लोगों की तलाश में है जो चुनावी राजनीति की आपाधापी से दूर रहकर अपनी कला के जरिए संगठन को मजबूती दे सकें। इसके लिए बाकायदा एक ’टैलेंट हंट’ अभियान शुरू किया जा रहा है, जिसमें गायकों, वादकों और साहित्यकारों को तरजीह दी जाएगी।
कांग्रेस इस बार साहित्य और कला की विधाओं के जरिए जनता तक अपनी विचारधारा पहुंचाना चाहती है। पार्टी को ऐसे हुनरमंदों की तलाश है जिनकी आवाज में जादू हो और जो वाद्य यंत्र (म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट) बजाना जानते हों। इसके अलावा लेखन में माहिर, कवि, शायर, और चुटीले मुहावरे गढ़ने वाले लोगों को भी संगठन से जोड़ा जाएगा। पार्टी का मानना है कि जो लोग बेहतर नारे लिख सकते हैं और मंच का शानदार संचालन कर सकते हैं, वे संगठन की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे।
चुनावी महत्वाकांक्षा से दूरी अनिवार्य
इस टैलेंट सर्च की सबसे प्रमुख शर्त यह है कि आवेदन करने वाले व्यक्ति चुनावी महत्वाकांक्षा से दूर हों। पार्टी ऐसे निस्वार्थ चेहरों को आगे लाना चाहती है, जो पूरी तरह से रचनात्मक कार्यों और संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहें। पार्टी चाहती है कि ये लोग केवल संगठन की मजबूती और रचनात्मक कार्यों के लिए समर्पित रहें। पार्टी इन विधाओं के माहिर लोगों की प्रतिभा का लाभ चुनावी प्रचार और जनसंपर्क में लेना चाहती है। इस अनूठे अभियान को फरवरी माह के भीतर ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  अभियान की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस ने दो दिग्गज पदाधिकारियों को इसकी कमान सौंपी है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र जोशी और प्रदेश प्रभारी (मतदाता सूची पुनरीक्षण) ललित सेन को चयन की जिम्मेदारी दी गई है।
सोशल मीडिया और विचारधारा की होगी परीक्षा
पार्टी केवल आवेदन लेकर ही संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि आवेदकों की गहरी छानबीन के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी दो मुख्य पैमानों पर काम करेगी। इंटरव्यू के माध्यम से यह परखा जाएगा कि आवेदक कांग्रेस की विचारधारा से कितना मेल खाता है। कमेटी आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगालेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि आवेदक अपनी विधा (जैसे गायन या लेखन) से संबंधित क्या कंटेंट पोस्ट करता है और उस पर जनता का रिस्पॉन्स कैसा है। साथ ही, उसके राजनीतिक पोस्ट की रीच (पहुंच) और कंटेंट के स्तर का भी बारीकी से मूल्यांकन होगा।
पांच फरवरी तक मंगवाए आवेदन
प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले द्वारा जारी पत्र के अनुसार, सभी जिला और शहर अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों से योग्य प्रतिभाओं के आवेदन 5 फरवरी तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भिजवाएं। जिला अध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्रों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि छुपी हुई प्रतिभाएं सामने आ सकें।

रविवार, 25 जनवरी 2026

 कलम, कला और कर्म का त्रिवेणी संगम, प्रदेश की तीन विभूतियों को पद्मश्री

साहित्य के शिखर कैलाश चंद्र पंत, सागर के मार्शल आर्ट गुरु भगवानदास रैकवार और समाजसेवी मोहन नागर का हुआ चयन

भोपाल। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ’पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा कर दी है। इस वर्ष मध्य प्रदेश की झोली में तीन पद्मश्री सम्मान आए हैं। प्रदेश का नाम रोशन करने वाली इन हस्तियों में भोपाल के प्रख्यात लेखक व वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत, सागर के बुंदेली कला को लुप्त होने से बचाने वाले कलाकार भगवानदास रैकवार और मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर शामिल हैं। नागर को पर्यावरण के क्षेत्र में किए कार्य के लिए यह सम्मान मिला है। 


विशेष रूप से, साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में कैलाश चंद्र पंत के चयन को समूचे हिंदी जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उन्हें ’अनसंग हीरोज’ (अनाम नायक) श्रेणी में यह सम्मान दिया गया है। 89 वर्षीय कैलाश चंद्र पंत का जीवन हिंदी भाषा और राष्ट्रभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा है। 26 अप्रैल 1936 को महू (इंदौर) में जन्मे पंत का पैतृक नाता उत्तराखंड से है। उन्होंने हिंदी के प्रति अपने अनुराग के कारण सरकारी नौकरी का मोह त्याग दिया और स्वतंत्र पत्रकारिता की राह चुनी। उन्होंने 22 वर्षों तक साप्ताहिक ’जनधर्म’ का प्रकाशन किया। उनका स्थायी कॉलम ’’’चलती चक्की’’’ देश भर के साहित्यकारों और पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय था। भोपाल में ’हिंदी भवन’ और ’किसान भवन’ को एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने महू में ’स्वाध्याय विद्यापीठ’ की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में भी अलख जगाई। उनके द्वारा रचित ’कौन किसका आदमी’ और ’धुंध के आर-पार’ जैसी कृतियाँ साहित्य जगत की अनमोल धरोहर मानी जाती हैं। पंत को साहित्य भूषण, निराला साहित्य सम्मान, संस्कृति गौरव और बृजलाल द्विवेदी सम्मान से भी नवाजा गया है। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति (वर्धा) के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में हिंदी का वैश्विक प्रचार में उनकी अह्म भूमिका रही है।  वर्ष 1995 में भोपाल में नागरिक अभिनंदन किया गया और ’मालवांचल में कूर्मांचल’ ग्रंथ का संपादन।
पारंपरिक कलाओं को लुप्त होने से बचाया

बुंदेली लोक कला और पारंपरिक युद्ध कौशल के संरक्षण में अपना संपूर्ण जीवन होम करने वाले भगवानदास रैकवार को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से विभूषित किया गया है। भारत सरकार ने उन्हें ’गुमनाम नायकों’ की श्रेणी में चुना है। यह उन व्यक्तित्वों का समूह है जिन्होंने बिना किसी प्रचार-प्रसार की आकांक्षा के समाज और संस्कृति की निस्वार्थ सेवा की। 2 जनवरी 1944 को सागर की पावन धरा पर स्वर्गीय गोरेलाल रैकवार के आंगन में जन्मे भगवानदास  बुंदेलखंड की उस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं, जहाँ शौर्य और कला का अद्भुत संगम मिलता है। रैकवार ने न केवल बुंदेली माटी की अखाड़ा संस्कृति और पारंपरिक युद्ध कलाओं को लुप्त होने से बचाया, बल्कि उन्होंने प्राचीन शस्त्रों के संचालन की कला को जीवित रखा, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और बुंदेली लोक नृत्यों के मूल स्वरूप को संरक्षित किया।

जल और पर्यावरण के अघोषित दूत मोहन नागर


जमीनी स्तर पर समर्पित पर्यावरण योद्धा मोहन नागर को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ’पद्मश्री’ सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा हुई है। जल संरक्षण और पर्यावरण चेतना के प्रति उनके दशकों के अथक परिश्रम को केंद्र सरकार ने सर्वोच्च मान्यता दी है, जिससे संपूर्ण प्रदेश गौरवान्वित है। 23 फरवरी 1968 को जन्मे मोहन नागर (पुत्र स्व. भवरलाल नागर एवं स्व. गुलाबदेवी नागर) ने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से प्राप्त की। हालाँकि, उनका मन सत्ता की राजनीति के बजाय प्रकृति की सेवा में अधिक रमा। उन्होंने बैतूल जिले की सोना घाटी में वर्षा जल संचयन और नवीन जल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से एक मृतप्राय प्राकृतिक जल चक्र को पुनर्जीवित कर दिखाया। नागर वर्तमान में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष है। मध्यप्रदेश स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य और नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रबंधन मंडल में भी है।

मंगलवार, 15 जुलाई 2025

सेवानिवृत्ति वाले बयान से वरिष्ठ नेताओं की बढ़ी चिंता

संघ प्रमुख के बयान से उम्र दराज नेता हो रहे  असहज 


भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा 75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति को लेकर दिए गए बयान से मध्यप्रदेश भाजपा में सियासी हलचल तेज हो गई है। भागवत के इस बयान को लेकर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता असहज नजर आ रहे हैं। कुछ नेताओं ने इसे आदर्श बताया है तो कुछ ने इसे अव्यवहारिक बताया है। प्रदेश में करीब एक दर्जन नेता ऐसे हैं, जो या तो इस उम्र सीमा में आ चुके हैं या जल्द पहुंचने वाले हैं, ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया ने भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सिर्फ उम्र के आधार पर किसी वरिष्ठ नेता को दरकिनार करना उचित नहीं है। कई बार अनुभव युवाओं से कहीं ज्यादा उपयोगी साबित होता है। वहीं नर्मदापुरम विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सीतासरन शर्मा ने संघ प्रमुख के बयान को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि एक तय उम्र के बाद नेताओं को खुद पहल करते हुए युवाओं को अवसर देना चाहिए। अगर पार्टी कहेगी, तो मैं खुद इस्तीफा देने को तैयार हूं। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने बयान को अनुचित बताते हुए कहा कि “अगर कोई नेता 75 की उम्र के बाद भी सक्रिय रूप से पार्टी के लिए कार्य कर रहा है, तो उसे रिटायर करना तर्कसंगत नहीं है। योग्यता और क्षमता को भी महत्व देना चाहिए। वैसे देखा जाए तो संघ प्रमुख के बयान के बाद पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती है कि वह उम्र और अनुभव के संतुलन को कैसे साधे। भविष्य की राजनीति में युवाओं की भूमिका और वरिष्ठों की भागीदारी पर भाजपा की नीति अब नए मोड़ पर है।
चंद नेताओं पर लागू हुआ है उम्र का पैमाना
भाजपा में इससे पहले भी 75 की उम्र पार कर चुके नेताओं को किनारे किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, पूर्व मंत्री सरताज सिंह, पूर्व मंत्री कुसुम महदेले और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जैसे नेताओं को उम्र के आधार पर चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था। हालांकि, यह नियम सभी पर समान रूप से लागू नहीं किया गया।
ये नेता हैं 75 पार या नजदीक
मध्यप्रदेश में फिलहाल कई विधायक और नेता इस उम्र सीमा में हैं या अगले चुनाव तक पहुंच जाएंगे। इनमें  75 पारः नागेंद्र सिंह (गुढ़), नागेंद्र सिंह (नागोद), जयंत मलैया (दमोह), डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद), बिसाहूलाल सिंह (अनूपपुर), सत्यनारायण जटिया (उज्जैन) है। जबकि निकट भविष्य में 75 के करीबः गोपाल भार्गव (रहली), विश्वनाथ सिंह पटेल (तेदूखेड़ा), अजय विश्नोई (पाटन), रमाकांत भार्गव (बुधनी), ढाल सिंह बिसेन, गौरीशंकर बिसेन।

बुधवार, 9 जुलाई 2025

फिर दिखेगा बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

जैन को नही मिली सेवावृद्धि तो नए मुख्य सचिव के लिए दौड़ होगी तेज


भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले महीने एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। मौजूदा मुख्य सचिव अनुराग जैन और अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया अगस्त में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में यदि जैन को सेवावृद्धि नहीं मिली, तो प्रदेश को नया मुख्य सचिव मिलेगा और इसके लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की दौड़ शुरू हो जाएगी।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने 1 अक्टूबर 2024 को कार्यभार संभाला था। जैन की सेवावृद्धि को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अंतिम फैसला केंद्र की अनुमति और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहमति से ही होगा। अगर सेवावृद्धि नहीं होती है, तो मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर मुख्य सचिव रहे डा राजेश राजौरा सबसे वरिष्ठ दावेदार होंगे।  इसी के साथ केंद्र सरकार में सचिव पद पर कार्यरत वरिष्ठ आईएएस अलका उपाध्याय ने भी प्रदेश लौटने में रुचि दिखाई है। पशुपालन विभाग में सचिव के रूप में पदस्थ अलका बीते दो माह में मध्यप्रदेश के कई दौरों पर रही हैं, जिससे उनके सक्रिय होने के संकेत मिलते हैं। ऐसे में राजौरा के साथ अलका उपाध्याय भी मुख्य सचिव की दौड़ में मानी जा रही हैं।
सेवावृद्धि पर केंद्र और मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी
मुख्य सचिव की सेवा वृद्धि का फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार की अनुमति और मुख्यमंत्री की सहमति पर निर्भर है। जैन को सेवा विस्तार नहीं मिलने की स्थिति में नए मुख्य सचिव की घोषणा अगस्त के पहले सप्ताह में हो सकती है।
गुप्ता होंगे 31 को सेवानिवृत्त
उज्जैन संभागायुक्त और धर्मस्व विभाग के प्रमुख संजय गुप्ता इसी माह 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। गुप्ता के सेवानिवृत्त होते ही मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन में नए संभागायुक्त की पदस्थापना की जाएगी। इसके लिए भी वरिष्ठ अफसरों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है।

रविवार, 29 जून 2025

शिवराज के साथ मुख्यमंत्री निवास पहुंचे आदिवासी

मुख्यमंत्री के निर्देश पर हटाए गए सीहोर के डीएफओ


भोपाल। प्रदेश के खिवनी अभयारण्य का मामला गर्मा गया है। आदिवासियों को पट्टे से किए जा रहे बेदखली के मामले में कांग्रेस और जयस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा हैं, वहीं आज केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रभावित आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डा मोहन यादव से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले को लेकर सीहोर के डीएफओ को हटाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आदिवासियों को आश्वस्त पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
देवास जिले के खातेगांव विधानसभा क्षेत्र के खिवनी अभयराण्य क्षेत्र के आदिवासियों के घर तोड़े जाने के मामले पर आदिवासी समाज का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बीते 23 जून को खिवनी में वन विभाग ने आदिवासियों के 50 से ज्यादा घरों पर बुल्डोजर चला दिया था। इस घटना को लेकर आदिवासी संगठन जयस और कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। जयस और कांग्रेस नेताओं का प्रदर्शन जारी है। वहीं आज केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खिवनी के आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री डा मोहन यादव से मुलाकात की और आदिवासियों की समस्याओं से अवगत कराया।
सरकार प्रभावितों के साथ
मुख्यमंत्री डा यादव ने शिकायतों और आदिवासियों की पीड़ा को सुना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्रवाई पर खेद व्यक्त करते हुए, स्थिति का उचित समाधान निकालने, शिकायतों की जांच करवाने, दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्यवाही करने और क्षेत्र के लोगों को सभी शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री  ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावितों के साथ है। यह सुनिश्चित किया जाएगा की बरसात में किसी को कोई तकलीफ ना हो, राहत के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जांएगी।
डीएफओ का हटाया
आदिवासियों को वन क्षेत्र की जमीन से हटाने की करवाई से भड़के केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी के बाद मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के निर्देश पर रविवार को सीहोर वन मंडल के वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) मगन सिंह डाबर को हटा दिया गया है। उनकी जगह लघुवानोपज संघ की उप वन संरक्षक अर्चना पटेल को सीहोर डीएफओ बनाया गया है।
अधिकारी कर रहे सरकार की छवि खराब करने का काम
सीहोर कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को हुई दिशा की बैठक के दौरान सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शिवराज सिंह चौहान से मिलने पहुंचे थे। आदिवासियों का आरोप था कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा आदिवासियों के मकान तोड़ने और जमीन से बेदखल करने की कार्रवाई की गई है, जिस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अधिकारियों पर भड़क गए। शिवराज सिंह ने कहा था कि वन विभाग के अधिकारी सरकार की छवि को खराब करने का काम कर रहे हैं। इसके चलते इस तरह की कार्रवाई की जा रही है।
शाह को लेना पड़ा ट्रैक्टर टाली का सहारा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मंत्री विजय शाह रविवार को खिवनी गांव पहुंचे। इसके लिए उन्हें कई किमी तक पैदल चलना पड़ा। कीचड़ भरे रास्तों से होते हुए मंत्री विजय शाह किसी तरह गांव पहुंचे और प्रभावितों से बातचीत की। वनवासियों से मुलाकात करने के बाद उन्हें वापस लौटने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली में बैठना पड़ा।

मातृ-शिशु मृत्युदर पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

करोड़ों  खर्च के बावजूद प्रदेश में नतीजे शून्य


भोपाल। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार न होने पर सरकार को घेरा है। उन्होंने हाल ही में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की स्थिति देश में सबसे खराब है, जबकि सरकार इस दिशा में हजारों करोड़ खर्च कर चुकी है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिख सवाल किया कि जब सरकार ने बीते पांच वर्षों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर दस हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए, तब भी नतीजे निराशाजनक क्यों हैं? उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या यह पैसा सिर्फ चाय-नाश्ते और चर्चाओं पर खर्च किया गया? एसआरएस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में हर 1000 में से 40 नवजात एक वर्ष का होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। पटवारी ने कहा कि 4500 करोड़ रुपए के वार्षिक स्वास्थ्य बजट के बावजूद यदि यह हाल है, तो यह दर्शाता है कि ‘कागजी विकास’ ही हो रहा है। उन्होंने कैग रिपोर्टों में उजागर कुपोषण से जुड़े घोटालों की भी पत्र में चर्चा की है।
अस्पतालों को बना दिया रेफरल सेंटर?
पटवारी ने स्वास्थ्य अधोसंरचना पर सवाल उठाते हुए बताया कि 2022 में राज्य के 547 स्वास्थ्य केंद्रों में से सिर्फ 120 में सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध थी। उन्होंने पूछा कि क्या शेष अस्पताल सिर्फ नाम मात्र के हैं या उन्हें केवल ’रेफरल सेंटर’ बनाकर छोड़ दिया गया है? उन्होंने अंत में पूछा कि क्या “स्वस्थ मध्यप्रदेश” सरकार की प्राथमिकता में है, या फिर यह सिर्फ भाषणों और विज्ञापनों का एक सपना बनकर रह गया है?

शनिवार, 28 जून 2025

भाजपा को जल्द मिलेगा नया प्रदेश अध्यक्ष, दौड़ में शामिल हुए उईके भी

महिला नेतृत्व की भी संभावना, वर्गवार कई दावेदार हैं दौड़ में


भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा को जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष पद के नाम की घोषणा जुलाई के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। प्रदेश अध्यक्ष चयन की प्रक्रिया के तहत एक जुलाई को नाम निर्देशन पत्र दाखिल किए जाएंगे, जिसके बाद भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में औपचारिक घोषणा की जाएगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में आदिवासी वर्ग से ताल्लुक रखने वाले बैतूल सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके का नाम भी अब प्रमुखता से सामने आ रहा है। उईके वर्तमान में दूसरी बार बैतूल से सांसद हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में मंत्री हैं। प्रदेश की लगभग 22 प्रतिशत आदिवासी जनसंख्या, विशेषकर 13 प्रतिशत गोंड समुदाय, को देखते हुए भाजपा संगठन में उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इसके पहले बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम प्रबल दावेदारों के रूप में सामने आया था।
संघ की पृष्ठभूमि और आदिवासी समाज में मजबूत पकड़
दुर्गादास उईके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले वे सरकारी शिक्षक थे। आदिवासी समाज में वे एक निर्विवाद और स्वीकृत चेहरा माने जाते हैं। संगठनात्मक मामलों में संघ की सहमति को अहम माना जाता है, और ऐसा माना जा रहा है कि संघ, सत्ता और संगठनकृतीनों ही उईके के नाम पर सहमत हो सकते हैं।
महिला अध्यक्ष की भी चर्चा में
मध्यप्रदेश को भाजपा की राजनीतिक प्रयोगशाला माना जाता है, और ऐसे में पार्टी संगठनात्मक बदलावों के जरिए आगामी चुनावों के लिए नई रणनीति गढ़ने में जुटी है। इसके चलते प्रदेश भाजपा में महिला अध्यक्ष की भी संभावना जताई जा रही है। 2028 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दे होंगे, पार्टी महिला नेतृत्व को आगे लाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की योजना पर भी विचार कर रही है।

वर्गवार प्रमुख दावेदार

ब्राह्मण वर्गः डॉ. नरोत्तम मिश्रा, राजेन्द्र शुक्ल, रामेश्वर शर्मा
वैश्य वर्गः हेमंत खंडेलवाल, सुधीर गुप्ता
क्षत्रिय वर्गः अरविंद भदौरिया, बृजेन्द्र प्रताप सिंह
अनुसूचित जातिः प्रदीप लारिया, लाल सिंह आर्य, हरिशंकर खटीक
अनुसूचित जनजाति : गजेन्द्र सिंह पटेल, दुर्गादास उईके, फग्गन सिंह कुलस्ते, सुमेर सिंह सोलंकी