मंगलवार, 20 मई 2025

भाजपा की सरकार में दर्जन भर मंत्री दे चुके हैं इस्तीफा

किसी को बयानबाजी, किसी को 75 साल की उम्र के कारण देना पड़ा था इस्तीफा


भोपाल। भाजपा सरकार के अब तक के कार्यकाल में करीब दर्जन भर  मंत्रियों को अलग-अलग कारणों से मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी शामिल हैं, जिन्होंने करीब आठ माह तक मुख्यमंत्री रहने के बाद पद से इस्तीफा देकर तिरंगा यात्रा निकाली थी। जबकि मंत्रियों में किसी को बयानबाजी तो किसी को उम्र की अधिकता के कारण इस्तीफा देना पड़ा था।
भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक अलग-अलग कारणों से कई मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा था। कोई बयानबाजी को लेकर इस्तीफा देने को विवश हुआ था तो कोई आयकर और लोकायुक्त छापों के चलते इस्तीफा देने को मजबूर हुआ था। मंत्रियों के अधिकांश इस्तीफे शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते हुए हुए थे। प्रदेश में उमाभारती के नेतृत्व में भाजपा ने 2003 में सरकार बनाई थी। उमा भारती 8 दिसंबर 2003 को मुख्यमंत्री बनी। इसके बाद 23 अगस्त 2004 तक वे मुख्यमंत्री रहीं। तिरंगा मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस्तीफा दे दिया। उमा भारती के बाद उनके मंत्री मंडल में मंत्री रहे सुनील नायक से तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने इस्तीफा ले लिया था। नायक से इस्तीफा लेने की वजह उनके बयान बने थे। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रिमंडल के एक मंत्री जुगल किशोर बागड़ी से इस्तीफा मांगा था, क्योंकि लोकायुक्त ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। चौहान के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कई मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा था। इसी तरह 2008 में अजय विश्नाई ने अपने रिश्तेदारों के आवासीय परिसरों पर आयकर के छापे पड़ने की कार्रवाई के चलते इस्तीफा दिया था। इन छापों ने विश्नोई पर भी सवालिया निशान लगा दिया था। नतीजतन, चौहान और पार्टी संगठन ने उनसे इस्तीफा मांगने का फैसला किया। साल  2010 में बेलागांव में हुई गोलीबारी की घटना में अपने परिवार के सदस्यों का नाम आने के कारण तत्कालीन मंत्री अनूप मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ा था। फिर भी मिश्रा और उनके परिवार के सदस्यों को इस घटना में क्लीन चिट मिल गई थी। इसके बाद वे फिर से मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। 2013 में राज्य के तत्कालीन वित्त मंत्री राघवजी भाई को एक सेक्स स्कैंडल के वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि अब राघवजी को इस मामले में क्लीनचिट मिल गई है।
75 की उम्र के चलते दिया था इस्तीफा
वर्ष 2016 में शिवराज सरकार के दो कद्दावर मंत्रियों को केवल इस कारण इस्तीफा देना पड़ा था कि वे 75 साल की उम्र को पार कर चुके थे। इनमें तत्कालीन मंत्री बाबूलाल गौर और सरताज सिंह के नाम ष्शामिल है। दोनां ही मंत्रियों इस्तीफा मांगे जाने पर नाराज थे, मगर केन्द्रीय नेतृत्व के आगे दोनों की नहीं चली और दोनों को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में दोनों ही मंत्रियों के टिकट भी भाजपा ने काट दिए थे।
चुनाव हारे तो इन्होंने दिया इस्तीफा
शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते हुए इमरती देवी, गिर्राज दंडोतिया और ऐदल सिंह कंसाना को चुनाव हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। डा मोहन यादव के नेतृत्व वाली कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले एकमात्र मंत्री रामनिवास रावत थे। उन्होंने चुनाव हारने के कारण इस्तीफा दिया था।
बयानबाजी के चलते फिर घिरे हैं विजय शाह
राज्य के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह से इन दिनों एक बार फिर बदजुबानी के चलते इस्तीफे की मांग उठ रही है। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए बयान के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर विजय शाह से इस्तीफे मांग की जा रही है। इतना ही नहीं भाजपा के कई नेताओं ने भी शाह से इस्तीफे की मांग की है। फिलहाल संगठन और सरकार दोनों ने मौन साध रखा है। मगर उनके मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी जांच के बाद संभावना जताई जा रही है कि संगठन को कोई कदम उठाना पड़ेगा।