रविवार, 3 जनवरी 2016

आश्वस्त चौहान, दावेदार मौन

मुख्यमंत्री पर भरोसा है नंदु भैया को, कुलस्ते सहित अन्य दावेदार नहीं खोल रहे पत्ते

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए कल सोमवार को होने वाले चुनाव को लेकर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान दोबारा ताजपोसी को लेकर आश्वस्त हैं, वहीं अन्य दावेदार इस मामले पर अब मौन साधे हुए हैं. वे कल ही अपने पत्ते खोलेंगे. 
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए  कल होने वाले चुनाव को लेकर वैसे तो गहमागहमी का माहौल शांत नजर आ रहा है. दावेदार भी दो दिनों से मौन रहकर अपनी जमावट में जुटे हैं, मगर इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन के अलावा अन्य पदाधिकारियों की बैठक के बाद करीब-करीब यह तय माना जा रहा है कि चौहान के नाम पर सहमति बनाई गई है. अमित शाह खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष के होने वाले चुनाव को देखते हुए प्रदेशों में फिलहाल किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं.  शाह की सहमति के बाद मुख्यमंत्री की ओर से नंदकुमार सिंह चौहान को करीब-करीब यह आश्वासन मिल गया है कि अध्यक्ष पद के लिए उनकी दोबारा ताजपोशी तय है. यही वजह है कि चौहान अपने अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे और समर्थकों के साथ खण्डवा में धुनिवाले दादा के दरबार पहुंचकर मत्था टेका और चादर भी चढ़Þाई. यहां पर उन्होंने अपने समर्थकोें के साथ चर्चा भी की. 
दावेदार हुए मौन
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने वाले दावेदार अब शांत हो गए हैं. इन दावेदारों ने मौन रहकर अपनी जमावट शुरु की है,अब सोमवार को ही वे अपने पत्ते खोलेंगे. मण्डला से सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते प्रमुख दावेदारों में से थे, मगर आज वे मौन हैं. कुलस्ते ने लोकमत समाचार से चर्चा में कहा कि वे कल भोपाल पहुंचेंगे, इसके बाद क्या स्थिति बनती है, तभी वे कुछ कह पाएंगे. कुलस्ते के अलावा अन्य दावेदारों राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल, अरविंद भदोरिया भी मौन है. वहीं परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह और राजस्व मंत्री रामपाल सिंह का नाम भी इस पद के लिए चला है. इसके अलावा पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने भी संकेत दिए हैं कि वे भी इस पद के लिए दावेदार है. भार्गव ने जिला अध्यक्ष चयन प्रक्रिया के दौरान सागर जिला अध्यक्ष को लेकर नाराजगी जताई थी और कहा था कि संगठन चाहे तो वे अध्यक्ष बन जाएंगे.
तोमर हैं नाराज, झा ने किया समर्थन
केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नंदकुमार चौहान के नाम पर खुलकर सहमत नजर नहीं आ रहे हैं. वे अरविंद भदोरिया के लिए प्रयासरत थे. मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के यह कहने पर की भविष्य की स्थिति को देखते हुए उनकी पसंद का अध्यक्ष वे चाहते हैं. इसके बाद भी उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर की. इस मतदाता सूची से राष्ट्रीय नेताओं के नाम दूर रखे जाने से तोमर खफा है. वहीं झा ने चौहान को अपना समर्थन दिया है, मगर सोमवार को परिस्थिति क्या निर्मित होती है, इसे देखकर झा भी अंमित झणों में अपना फैसला बदल सकते हैं. यहां उल्लेखनीय है कि 2012 में जब झा का नाम भी चौहान की तरह तय माना जा रहा था, तब तोमर का चयन कर सभी को चौंका दिया था. इसके बाद से झा खुद नाराज हैं.


अध्यक्ष के लिए तेज हुईकवायद


नेताओं में बेचैनी, कहीं 2012 जैसी न बन जाए स्थिति
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए 4 जनवरी को होने वाले चुनाव को लेकर दावेदारों ने कवायद तो तेज की है, मगर खुलकर कोईदावेदार सामने नहीं आ रहा है. यही वजह है कि भाजपा नेता बैचेन नजर आ रहे हैं, उन्हें यह लगने लगा है कि कहीं एक बार फिर 2012 के चुनाव की पुनरावृत्ति न हो जाए.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए वैसे तो यह माना जा रहा है कि वर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के नाम पर सहमति बना ली जाए, मगर दावेदारों की सक्रियता इस समीकरण को बिगाड.ती नजर आ रही है. दावेदार सक्रिय हैं, वे अपने स्तर पर दावेदारी भी कर रहे हैं, मगर मौन रहकर. अब तक केवल सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते ही एक ऐसे दावेदार सामने आए जिन्होंने खुलकर दावेदारी दिल्ली में राष्ट्रीय नेताओं के सामने की है. उनके अलावा अन्य नेताओं में से कोई भी दावेदार खुलकर सक्रिय नजर नहीं आ रहा है. हालांकि वे दावेदारी कर रहे हैं और वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी बात रख भी रहे हैं. ये दावेदार अधिकतर दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेताओं से मेल-मुलाकात कर रहे हैं. वैसे इस मामले में चुनाव अधिकारी की नियुक्ति और मतदान के तारीख तय होने के बाद अब दावेदारों की कवायद भी तेज हुई है. साथ ही खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सक्रिय नजर आ रहे है. इंदौर में राष्ट्रीय संगठन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर हुईउनकी करीब 10 मिनटकी मुलाकात को इससे जोड.कर देखा जा रहा है. दोनों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, हालांकि किस नाम को लेकर चर्चा हुई इस बात का खुलासा नहीं हुआ है. 
वैसे फिलहाल मुख्यमंत्री की पसंद नंदकुमार सिंह चौहान ही बने हुए हैं. इसके अलावा संगठन महामंत्री अरविंद मेनन भी उनके साथ हैं, मगर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राज्यसभा सांसद प्रभात झा का साथ चौहान को नहीं है, यह माना जा रहा है. झा इस बार मौन रहकर 2012 में मिले झटके से उबरने का प्रयास कर सकते हैं. पिछले चुनाव में झा का नाम भी ठीक चौहान की ही तरह तय माना जा रहा था, मगर ऐन वक्त पर पासा पलटा और तस्वीर बदल गई. झा के स्थान पर तोमर का नाम आ गया. इसी तरह इस बार भी किसी अप्रत्याशित विस्फोट को संगठन के नेता होना मान रहे हैं. इसके पीछे उनका मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में जो शांति है, वह किसी तूफान का संकेत भी दे रही है.
 भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की है. इस दिन दोपहर 4 से 4.30 बजे तक नामांकन भरने का समय तय किया है. 5 बजे नामांकन वापस लेने का समय तय किया है. इसके बाद यह तय हो जाएगा कि अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन है. वहीं चुनाव अधिकारी रामदास अग्रवाल आज इंदौर प्रवास पर रहे. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष चुनाव को लेकर प्रदेश के नेताओं से चर्चाकी है. यह माना जा रहा है कि आज इंदौर में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा के बाद किसी एक नाम पर सहमति बनाने की कवायद भी शुरु हुई है. 
क्षेत्रवाद भी बन रहा मुद्दा
भाजपा संगठन में एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर क्षेत्रवाद का मामला उठते नजर आ रहा है. पिछले दिनों दिल्ली पहुंचे महाकौशल के नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कुछ और नेताओं से चर्चाकी. इस चर्चा में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से कहा कि लंबे समय से चंबल-ग्वालियर, मालवा, निमाड. को अध्यक्ष पद प्रतिनिधित्व मिला है. इस बार महाकौलश के अलावा विंध्य या बुंदेलखंड से अध्यक्ष पद के लिए किसी एक व्यक्ति के नाम पर सहमति बनाईजाए. वैसे महाकौशल से विनोद गोटिया इस पद के लिए दावेदार के रुप में सामने भी आए हैं. इसके अलावा विंध्य एवं बुंदेलखंड के नेता मौन रहकर दावेदारी कर हैं.