सोमवार, 29 अप्रैल 2024

चुनाव आयोग के लिए चुनौती बना मतदान प्रतिशत बढ़ाना

भोपाल। प्रदेश में तीसरे चरण के मतदान ने एक बार फिर चुनाव आयोग की चिंता को बढ़ा दिया है। आयोग इस बार ग्वालियर-चंबल अंचल की चारों लोकसभा सीटों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लेकर चिंतित है। यहां मतदान का प्रतिशत बढ़ाना उसके लिए चुनौती भी बना हुआ है। पिछले तीन सालों का मतदान प्रतिशत देखा जाए तो केवल गुना ही ऐसा संसदीय क्षेत्र हैं, जहां सम्मानजनक मतदान हुआ है। बाकि मुरैना, भिंड और ग्वालियर में आयोग चाहकर भी मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़वा पाया है।

लोकसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण के बाद अब कम मतदान को लेकर चुनाव आयोग की चिंता भी बढ़ी है। तीसरे चरण के लिए होने वाले ग्वालियर-चंबल अंचल में पिछले तीन सालों के मतदान प्रतिशत को देखते हुए आयोग की िंचता ज्यादा बढ़ रही है। इस अंचल की चार लोकसभा सीटों में से गुना में ही मतदान का प्रतिशत अच्छा रहा है, बाकि तीन सीटों पर मतदान का प्रतिशत हमेशा कम रहा है। चुनाव आयोग मतदान फीसदी बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। चुनाव आयोग के साथ सियासी दल भी मतदान बढ़ाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। फिर भी ग्वालियर-चंबल अंचल की इन चार लोकसभा सीटों पर मतदान का प्रतिशत बढ़ाना आयोग के लिए फिलहाल तो चुनौती बना हुआ है। बीते तीन लोकसभा चुनाव में हुए मतदान को देखते हुए चुनाव आयोग इन सीटों पर विशेष फोकस कर रहा है।
पिछले तीन साल में कहां कितना हुआ था मतदान
साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में भिंड संसदीय सीट पर महज 38.45 फीसदी मतदान हुआ था।  जबकि ग्वालियर में 41.16, मुरैना में 53.11, और गुना संसदीय सीट पर 54.05 फीसदी मतदान हुआ था। इसी तरह 2014 के चुनाव में भिंड संसदीय सीट में 45.22 फीसदी, ग्वालियर में 52.57, मुरैना में 49.90 और गुना संसदीय सीट पर 60.05 फीसदी मतदान हुआ था। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भिंड संसदीय सीट पर 54.53 फीसदी, ग्वालियर में 59.52, मुरैना में 61.77, और गुना संसदीय सीट पर 69.58 फीसदी मतदान हुआ था।  इन सीटों में सबसे बेहतर गुना सीट पर ही मतदान हुआ।

बम के कांग्रेस छोड़ने पर अपने ही उठा रहे सवाल


हाईकमान और बड़े नेताओं को बना रहे निशाना

भोपाल। इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस नेता ही सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का गुस्सा अब हाईकमान और प्रदेश संगठन के नेताओं पर फूट रहा है।
कांग्रेस के इंदौर से प्रत्याशी अक्षय कांति बम के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब कांग्रेस हाईकमान और बड़े नेताओं पर उतर रही है। इंदौर के कार्यकारी जिला अध्यक्ष देवेन्द्र यादव का इस नाराजगी को लेकर किसी नेता से फोन पर चर्चा करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे किसी नेता से फोन पर चर्चा करते हुए र भड़कते हुए नजर आ रहे हैं और साफ-साफ ये भी कह रहे हैं कि उन्हें पहले से इस बात का यकीन था कि बम पीछे हट जाएगा और नाम वापस ले लेगा लेकिन किसी भी नेता ने उसकी बात नहीं सुनी। चर्चा है कि देवेन्द्र यादव ने सीधे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को फोन लगाया था और उन्हें भी खरी-खोटी सुनाई है।
पार्टी पैसे देकर टिकट देती है, अब भुगतो खामियाजा
यादव का जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें वे यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि मैंने टिकट ताकत से मांगा था और कहा था कि इससे अच्छे से चुनाव लड़ूंगा। लेकिन पैसे को देखते हुए हमारे कांग्रेस के नेताओं ने टिकट दिया, क्यों टिकट दिया उसको ? क्या योगदान था उसका कांग्रेस के लिए, उसने कौन सा संघर्ष किया कांग्रेस के लिए जो आपने उठाकर उसको टिकट दिया ? ये पार्टी कार्यकर्ताओं को देखना चाहिए कांग्रेस हम जैसे कार्यकर्ताओं को मार रही है। हमने टिकट भी दमदारी से मांगा था और आज भी यहां दमदारी से खड़ा हूं वो निकल गया नहीं तो बताते उसको। सब पार्टी की गलती है पार्टी क्यों ऐसे लोगों को टिकट देती है क्यों पैसे देखकर टिकट देती है? अब भुगतो इसका खामियाजा।
तुम तो फुस्सी बम निकले, तुमसे अच्छी तो वेश्याएं
कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अक्षय बम, तुम तो ’फुस्सी बम’ निकले, तुमसे अच्छी तो वेश्याएं हैं। जो अपने फ़्रोफ़ेशन के प्रति ईमानदार होती हैं, कितने में बिके हो? वक्त हमेशा बदलता है। जिस कारण बिके हो। वही कारण हमेशा कायम रहेगा। वही तुम्हें भविष्य में शिकंजे में भी लेगा। उन्होंने लिखा कि लिखा है कि विश्वासघात महंगा पड़ेगा। मुझे मालूम था तुम्हारी क़ीमत लग चुकी है। इससे मैं 15 पहले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को बता चुका था, आख़रिकार वह सच साबित हुआ। इसी ख़ातिर मैंने तुम्हारे पक्ष में आज तक कुछ नहीं बोला, क्योंकि मुझे मालूम था कि मेरी भावनाएं किसी ’गद्दार’ को समर्पित हो सकती हैं।

कांग्रेस के 75 साल के काम गिनाए कमलनाथ ने

भोपाल। भाजपा द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से पूछे जा रहे 75
साल के कामों को लेकर सवालों का आज पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जवाब दिया है। उन्होंने भाजपा को यह बताया कि कांग्रेस ने 75 साल में क्या किया।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि आजादी के समय यानी 1947 में भारत में साक्षरता की दर 18 फीसदी थी जो वर्ष 2023 में बढ़कर 77.7 फीसदी हो चुकी है। आजादी के समय देश में 27 विश्वविद्यालय थे, आज इनकी संख्या 1100 से अधिक है।  उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत में गिने चुने इंजीनियरिंग कॉलेज थे, लेकिन आज भारत में दुनिया के सबसे अधिक प्रशिक्षित इंजीनियर तैयार होते हैं। पंडित नेहरू के समय में स्थापित किए गए आईआईटी आज भी भारत के सर्वश्रेष्ठ और दुनिया के सबसे बेहतरीन इंजीनियरिंग कॉलेज में शामिल हैं। आजादी के तुरंत बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने एम्स की स्थापना की। आज भी एम्स भारत का सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान है। आज दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर भारत में तैयार होते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इसरो की स्थापना की ताकि अंतरिक्ष की दुनिया में भारत अपना मुकाम हासिल करे। आज इसरो भारत ही नहीं, दूसरे देशों के लिए भी सैटेलाइट लॉन्च करता है।
70 फीसदी किसानों को बनाया जमीन का मालिक
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित नेहरू के समय में कांग्रेस ने जमींदारी प्रथा का उन्मूलन कर देश के 70 फीसदी किसानों को उनकी जमीन का मालिक बनाया। आजादी से पहले देश में ज्यादातर जमीन असिंचित थी, पंडित नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी ने बड़े पैमाने पर बांध और नहरें बनाकर पूरे देश में जमीन को सिंचित किया। इसे हरित क्रांति कहते हैं। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में किसानों को फसल का उचित मूल्य देने के लिए एमएसपी का प्रावधान किया गया। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में पंचायती राज व्यवस्था शुरू की गई। नरसिंह राव के कार्यकाल में इसे और मजबूत किया गया। डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में देश के किसानों का बड़े पैमाने पर कर्ज माफ किया गया। इसी कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क और मनरेगा जैसी योजनाओं से गांव को मजबूत किया गया।

इंदौर में कांग्रेस को करारा झटका, प्रत्याशी ने नामांकन लिया वापस

भाजपा में हुए शामिल, सूरत के बाद कांग्रेस के सामने खड़ा हुआ संकट



भोपाल। मध्य प्रदेश खजुराहो संसदीय सीट पर इंडिया गठबंधन को लगे झटके के बाद अब इंदौर संसदीय सीट पर कांग्रेस को करारा झटका लगा है। कांग्रेस के प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने आज अपना नामांकन फार्म वापस ले लिया। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा की सदस्यता भी ग्रहण कर ली। कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर हमले तेज कर दिए हैं।
लोकसभा चुनाव के बीच मध्यप्रदेश में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को आज करारा झटका लगा है। इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने मैदान छोड़ दिया है। अक्षय ने सोमवार को कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और भाजपा विधायक रमेश मेंदोला के साथ निर्वाचन कार्यालय जाकर नामांकन वापस ले लिया। नामांकन वापस लेने के बाद अक्षय सीधे भाजपा कार्यालय पहुंचे और भाजपा का दामन थाम लिया है। अक्षय के भाजपा जॉइन करने के बाद भाजपा कार्यालय में मंत्री विजयवर्गीय के साथ उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, विधायक रमेश मेंदोला, भाजपा शहर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक संजय शुक्ला। चौथे चरण के चुनाव के लिए आज नाम वापसी के आखिरी दिन अक्षय के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
देश का विनाश की तरफ ले जा रही कांग्रेस
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा में शामिल हुए हैं। कांग्रेस देश को विनाश की तरफ ले जा रही है, इसलिए उनके उम्मीदवार भी पार्टी छोड़कर भाजपा में आ रहे हैं। अब उम्मीदवार का भी भरोसा कांग्रेस पर नहीं है। उनका विश्वास अब मोदी जी पर है। इसलिए पार्टी छोड़कर भाजपा में आ रहे हैं।
खजुराहो में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी का खारिज हुआ था नामांकन
इंदौर के पहले खजुराहो संसदीय सीट पर इंडिया गठबंधन के तहत सपा के खाते में गई खजुराहो लोकसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन खारिज हो गया था। इसे लेकर सपा और कांग्रेस ने भाजपा और प्रशासनिक अधिकारियों पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद इंडिया गठबंधन ने यहां पर ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार आरबी प्रजापति को समर्थन कर दिया। मगर यह प्रत्याशी वैसे ताकत नहीं दिखा पाया, जिस तरह की उम्मीद की जा रही थी।
विपक्ष विहीन प्रजातंत्र चाहती है भाजपा ?
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि अक्षय बम इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन वापस करके भाजपा क्या सिद्ध करना चाहती है कि वह विपक्ष विहीन प्रजातंत्र इस देश में चाहती है ? विपक्ष मुक्त भारत? सूरत और इंदौर के मतदाताओं के साथ घोर प्रजातांत्रिक अन्याय। चुनाव आयोग से क्या अपेक्षा हम कर सकते हैं ?
 

शनिवार, 27 अप्रैल 2024

ग्वालियर-चंबल में बागी बिगाड़ रहे समीकरण

सियासी पकड़ वाले नेताओं के गढ़ में बसपा की सेंधमारी


भोपाल। ग्वालियर-चंबल अंचल की चार में से तीन सीटों ग्वालियर, मुरैना और भिंड में कांग्रेस के बागियों ने भाजपा और कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। तीनों ही स्थानों पर कांग्रेस के बागी बसपा के प्रत्याशी बनकर मैदान में है। इसके चलते सियासी पकड़ वाले नेताओं के गढ़ में राजनीतिक समीकरण भी बिगड़ रहे हैं। दोनों ही दलों के नेताओं की नाराजगी के बीच मतदाता मौन है।
लोकसभा और विधानसभा दोनों ही चुनाव में ग्वालियर-चंबल अंचल की अहम भूमिका रही है। इस अंचल की चार सीटों गुना, मुरैना, भिंड और ग्वालियर में 7 मई को मतदान होना है। इनमें गुना को छोड़कर सभी तीनों सीटों पर करीब-करीब त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं। तीनों ही लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के बागियों ने बसपा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरकर भाजपा और कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। ग्वालियर में कांग्रेस के कल्याण सिंह कंसाना टिकट के दावेदार थे, कांग्रेस ने उनके स्थान पर विधानसभा चुनाव हारे प्रवीण पाठक को चुनाव मैदान में उतारा तो कंसाना कांग्रेस का साथ छोड़ा और हाथी की सवारी कर ली। वे ग्वालियर सीट से मैदान में उतरे हैं। इसके चलते ग्रामीण अंचल में गुर्जर वोटों में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के समीकरण भी बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
ग्वालियर की ही तरह भिंड संसदीय सीट पर भी कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे देवाशीश जरारिया ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थामा और चुनाव मैदान में उतर गए हैं। यहां पर कांग्रेस के विधायक फूलसिंह बरैया मैदान में हैं। जरारिया के मैदान में उतरने से बरैया की चिंता बढ़ गई है। वैसे भाजपा ने भी यहां वर्तमान सांसद संध्या राय को मैदान में उतारा है, जिसके चलते स्थानीय नेताओं के अलावा मतदाता की भी नाराजगी सामने आई है। यहां बसपा प्रत्याशी के मैदान में उतरने से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है।
मुरैना में हुआ कड़ा और रोचक मुकाबला
मुरैना संसदीय सीट पर कांग्रेस ने सत्यपाल सिकरवार को चुनाव मैदान में उतारा है। इससे नाराज उद्योगपति रमेशचंद्र गर्ग ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थामा और वे भी चुनाव मैदान में उतरे हैं। सिकरवार को टिकट देने से कांग्रेस के दूसरे नेता भी नाराज नजर आ रहे हैं। इसके कारण यहां समीकरण बिगड़े हैं। हालांकि इस सीट पर बसपा के पूर्व विधायक बलवीर दंडोतिया को भाजपा ने अपने पाले में लाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास जरूर किया है, मगर फिलहाल तो दोनों ही दलों के लिए बसपा ने परेशानी खड़ी कर दी है। यहां मुकाबला कड़ा और रोचक हो गया है। 

कम मतदान, भाजपा, कांग्रेस के जीत के अपने-अपने दावे

भोपाल। लोकसभा चुनाव में दूसरे चरण के छह लोकसभा क्षेत्रों में कम मतदान प्रतिशत ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस कम मतदान को लेकर उत्साहित नजर आ रही है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि भाजपा को इससे नुकसान हो रहा है। दूसरी और भाजपा नेता इस अपनी हार नहीं मान रहे, बल्कि उनका कहना है कि परिणाम आने के बाद उसके और विपक्षी पार्टी के बीच 20 प्रतिशत के मत का अंतर होगा।

छह लोकसभा क्षेत्रों में कम हुए मतदान के बाद प्रदेश में नई बहस भी छिड़ रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता अपने-अपने तरीके से इसकी समीक्षा कर तर्क दे रहे हैं कि कम मतदान उनके पक्ष में ही रहेगा। भाजपा का मानना है कि परिणाम आने पर जीत सुनिश्चित है। वहीं कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि कम मतदान होना भाजपा के लिए चिंता का कारण है, उसके पक्ष में मतदान नहीं हुआ है। दोनों ही दल अपनी जीत का दावा भी कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश में दूसरे चरण में 6 सीटों पर 58.26 प्रतिशत मतदान हुआ है। बीते लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर हुए मतदान को देखें तो करीब नौ प्रतिशत मतदान कम हुआ  है। 2019 में इन छह सीटों पर औसतन 67.77 प्रतिशत मतदान हुआ था।
पहले चरण से भी कम हुआ मतदान
लोकसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण में शुक्रवार को 58.26 फीसदी मतदान हुआ, जबकि 2019 में 67.64 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस तरह इसमें 9.29 फीसदी की गिरावट आई। पहले चरण में 67.75 फीसदी मतदान हुआ था, जो कि 2019 के 75.24 फीसदी के मुकाबले 7.47 कम था।
जनता ने नफरत की राजनीति को नकाराः कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कांग्रेस को मजबूत स्थिति में बताया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने नफरत की राजनीति को नकार दिया है। कमलनाथ ने लिखा है कि लोकसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण के मतदान के बाद स्पष्ट हो गया है कि देश की जनता ने नफरत की राजनीति को नकार दिया है। मध्यप्रदेश की 6 सीटों समेत पूरे देश की 88 सीटों पर कांग्रेस बेहद मज़बूत स्थिति में है। जनता ने कांग्रेस के पाँच न्याय का समर्थन कर देश में परिवर्तन के लिए मतदान किया है।
कम हो रहा प्रधानमंत्री मोदी का जादू : मुकेश नायक
मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक का कहना है कि यह केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी है। मतदान प्रतिशत के कम होने से साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी का जादू कम हो रहा है। इससे उस दावे की भी पोल खुल रही है, जिसमें प्रधानमंत्री को ग्लोबल लीडर और चार सौ पार की बात कही जा रही थी। पिछली बार भाजपा जिन शहरी क्षेत्रों से जीती, उन्हीं जगह मतदान में कमी आ रही है। इस चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी से परेशान मतदाता अपने मत का प्रयोग कर रहा और जिसे अब मोदी से कोई उम्मीद नहीं है वो वोट डालने नहीं जा रहा है।
विपक्षी पार्टियों का मतदान कम हो रहा : आशीष अग्रवाल
मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है की, प्रदेश में विपक्षी पार्टियों का मतदान कम हो रहा है। उनके कार्यकर्ताओं में हताशा और निराशा है। उनका ना कोई नेता है ना कोई नीति है। ना कार्यों का लेखा जोखा है। इस चुनाव में मत प्रतिशत कम होने के बाद जो परिणाम आएंगे, वो नजीर बनेंगे। भाजपा और विपक्षी पार्टी के बीच 20 प्रतिशत के मत का अंतर होगा।  
3 धार और खरगौन में प्रधानमंत्री की 6 मई को होगी सभाएं
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रदेश में आठ जनसभा एवं रोड शो कर चुके हैं। इसके बाद भी प्रदेश में उनकी मांग बढ़ती जा रही है। प्रदेश में चुनाव चार चरण में होना है इसके हिसाब से चुनाव प्रबंधन समिति ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम तैयार किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी अब 6 मई को धार एवं खरगौन में सभा करेंगे।
प्रदेश में पहले चरण में जहां मतदान होना था उस हिसाब से चुनाव प्रबंधन समिति ने प्रधानमंत्री  मोदी के कार्यक्रम तैयार किए थे, जिसमें जबलपुर में रोड शो  और बालाघाट में जनसभा की थी। इसके बाद दूसरे चरण के मतदान को ध्यान में रखते हुए नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के पिपरिया और दमोह में जनसभा का कार्यक्रम बनाया गया। इसके बाद सागर हरदा और भोपाल का कार्यक्रम तैयार किया गया। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश के महाकौशल एवं मध्यभारत के साथ बुदेलखंड के क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशियों का प्रचार किया, लेकिन प्रधानमंत्री का मालवा-निमाड़ में अभी तक कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है इसको ध्यान में रखते हुए पार्टी ने आगामी मई माह में 6 तारीख को मालवा-निमाड़ के धार और खरगौन में कार्यक्रम तैयार किया है, यहां चौथे चरण में 13 मई को चुनाव होना है।

दिग्विजय ने बताए अमित शाह के आठ झूठ

कहा सभा में मेरा नाम 17 बार लिया, यह उनका मेरे प्रति अपार प्रेम


भोपाल। लोकसभा चुनाव के चलते नेताओं के बीच अब एक-दूसरे पर आरोपों का दौर तेज हो चला है। प्रदेश में मतदान के दो दौर होने के बाद अब तीसरे दौर के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के राश्टीय नेताओं की सक्रियता भी बढ़ती नजर आ रही है साथ ही नेता एक-दूसरे को घेरते और जवाब देते aभी दिखाई दे रहे हैं। आरोपों के दौर में केन्द्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा दिग्विजय सिंह पर लगाए गए आरोपों को लेकर आज दिग्विजय सिंह ने पलटवार किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री और राजगढ़ संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ संसदीय सीट के खिलचीपुर में ष्शुक्रवार को केन्द्रीय मंत्री अमित ष्शाह द्वारा लगाए गए उन पर आरोपों को लेकर पलटवार किया है। सिंह ने कहा कि कल खिलचीपुर की सभा में अमित शाह जी ने अपने भाषण में 17 बार मेरा नाम लिया। यह उनका मेरे प्रति जो अपार प्रेम है वह दर्शाता है। मैं उनका आभारी हूँ। लेकिन जो झूठ बोलने के संस्कार उनके गुरू नरेन्द्र मोदी ने उन्हें दिये हैं, वह उनके भाषण में 8 बार नज़र आए।
भाजपा के नेता निकालना चाहते हैं मेरी अर्थी
आशिक का जनाजा वाले बयान पर भी दिग्विजय सिंह ने अमित शाह पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मुझ पर अमित शाह की इतनी कृपा रही और उनका मेरे प्रति इतना प्रेम है कि वो आए और मेरा जनाज़ा निकालने की बात कह गए, यानि मेरी अर्थी भाजपा के नेता निकालना चाहते हैं और क्यों? क्योंकि मैं आप सबकी चिंता करता हूँ। मैं चाहता तो मना कर देता कि चुनाव नहीं लड़ूँगा, लेकिन मेरे गृहक्षेत्र की जनता की उपेक्षा ने मुझे यह चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया।  मैं आखिरी दम तक आपके बीच आपकी लड़ाई लड़ता रहूँगा, चाहे आप मुझे कंधे पर उठाएँ या सिर आँखों पर बिठाएँ। अब आपकी मर्ज़ी है लेकिन मैं सदैव आप का था और रहूँगा।
दिग्विजय ने बताए अमित शाह के 8 झूठ
दिग्विजय सिंह की सलाह से राहुल गांधी ने घोषणा पत्र में मुस्लिम पर्सनल लॉ डाला।
तथ्यः- कांग्रेस के घोषणा पत्र में कोई मुस्लिम पर्सनल लॉ नहीं है !
अमित शाह का झूठः- दिग्विजय सिंह ने भगवा आतंकवाद कहा !
तथ्य :- मैंने कभी भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं किया !
अमित शाह का झूठ :- दिग्विजय सिंह ने अफजल गुरु की फांसी का विरोध किया !
तथ्यः-  मैंने अफजल गुरु की फांसी को जल्द करवाने के लिए पत्र लिखा था कि अफजल गुरु को जल्द फांसी दी जाए !
अमित शाह का झूठः- दिग्विजय सिंह ने पीएफआई पर बैन लगाने का विरोध किया
तथ्यः-  मैंने कभी पीएफआई पर बैन का विरोध नहीं किया, बल्कि सिमी पर सबसे पहले प्रतिबंध मेरी ही सरकार ने लगाया था ! सच्चाई भारतीय जनता पार्टी ने पीएफआई की राजनीतिक इकाई के साथ कर्नाटक में गठबंधन करके लोकल चुनाव लड़ा !
अमित शाह का झूठः-  दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोरोना का टीका मत लगाओ
तथ्यः- मैंने कभी भी कोरोना का टीका ना लगाने की अपील नहीं की !
अमित शाह का झूठः-  कोरोना महामारी में राजनीति करी !
सच्चाई और तथ्य :- जब राजगढ़ जिले के लोग ऑक्सीजन और सिलेंडर के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे थे तब मैंने दिल्ली से ऑक्सीजन सिलेंडर भेजकर इलाज की व्यवस्था करायी!
अमित शाह :- मेडिकल कॉलेज हमने दिया !
तथ्यः- राज्य में कांग्रेस की सरकार थी , जयवर्धन सिंह प्रभारी मंत्री थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से राजगढ़ जिला मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव केंद्र को भिजवाया !
अमित शाहः- भोपाल रामगंज मंडी रेलवे लाइन हमने 2 हजार करोड़ प्रस्तावित किया !
तथ्यः- सन 2000 - 2001 प्रस्ताव स्वीकृति वर्ष था, उस समय राज्य में कांग्रेस सरकार थी !
लागत 2 हजार करोड़ नही अमित शाह  उस समय 3032 करोड़ रुपए रखी गई थी !

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2024

दिग्विजय सिंह को सम्मान के मुताबित लीड से हराकर करें राजनीतिक विदाई


दिग्विजय  
के गढ़ में गरजे अमित शाह, बोले आशिक का जनाजा है ज़रा धूम से निकले

भोपाल। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि आशिक का जनाजा जरा धूमधाम से निकले,े राजगढ़ लोकसभा के निवासी दिग्विजय सिंह को उनके सम्मान के हिसाब की लीड से उन्हें हराएं और उनकी राजनीति से सम्मानजनक विदाई करें।
अमित शाह ने यह बात आज राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के खिलचीपुर में भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर के पक्ष में जनसभा को संबोधित करते हुए कही। सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कहा कि दिग्विजय सिंह की परमानेंट विदाई करने का वक्त आ गया है। शाह ने कहा “बहुत बार ये आए और बहुत बार गए। अब समय आ गया है इनको परमानेंट विदाई देने का। राजनीति से दिग्विजय सिंह की परमानेंट विदाई राजगढ़ ंवालों को करना है, मगर मेरी एक रिक्वेस्ट है। राजनीति से उनकी परमानेंट विदाई जरूर करो, मगर आशिक का जनाजा है ज़रा धूम से निकले, दिग्विजय सिंह को बड़ी लीड से हराएं।“
शाह ने कहा कि दिग्गी राजा की सलाह से अपने घोषणा पत्र में कहा है कि कांग्रेस सरकार आएगी, तो मुस्लिम पर्सनल लॉ लाएंगे। इनकी सरकार तो आनी नहीं है, मगर मैं फिर भी आपसे पूछता हूं कि क्या शरिया कानून से देश चलना चाहिए? ये कांग्रेस पार्टी पर्सनल लॉ की बात करके, पिछले दरवाजे से देश में शरिया कानून लाने की बात करती है।
गुना वालों को सिंधिया और यादव दोनों मिलेंगे
खिलचीपुर से पहले शाह ने गुना संसदीय सीट के प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में पिपरई में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राजा साहब ज्योतिरादित्य मेरे मित्र हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता भी हैं। ज्योतिरादित्य को दिया हुआ एक-एक वोट नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने वाला है। मैं कई क्षेत्रों में जाता हूं तो लोग कहते हैं कि हम प्रत्याशी को जिताकर भेज रहे हैं, आप हमारे सांसद को आगे बढ़ाना। आपको तो मोदी जी ने बना-बनाया मंत्री यहां से चुनाव लड़ने भेजा है। मैं यह भी कहकर जाता हूं कि केपी यादव ने इस क्षेत्र की बहुत अच्छी सेवा की है। केपी यादव की चिंता मुझ पर छोड़ देना। आपको उनकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। भाजपा हमारे भाई केपी यादव को आगे बढ़ाने की और सभी प्रकार की चिंता करेगी। गुना वालों को दो नेता मिल रहे हैं। ज्योतिरादित्य भी मिलेंगे और केपी यादव भी मिलेंगे।  

अपना रिपोर्ट कार्ड तो दिया नहीं, कांग्रेस का घोषणा पत्र लेकर मैदान में उतरी भाजपा


कांग्रेस ने भाजपा पर किया हमला,़ लोगों को भ्रमित कर रही भाजपा

भोपाल। कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि हमें चुनाव के पहले यह उम्मीद थी कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अपने दस साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच देगा, मगर उसने ऐसा तो किया नहीं, बल्कि कांग्रेस का घोषणा पत्र लेकर मैदान में उतरा है।
सुप्रिया श्रीनेत ने न्याय पत्र को लेकर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अन्याय के खिलाफ न्याय पत्र निकाला है। बेरोजगारी, महिलाओं और तमाम लोगों के लिए कांग्रेस के मेनिफेस्टो में सभी समाधान है। उन्होंने आगे बताया कि मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल को लोगों ने देखा है, 10 साल में 700 किसानों की मौत हुई है। लेकिन कांग्रेस की सरकार आती है तो किसानों की मौत पर लगाम लगेगी। कांग्रेस की सरकार आते ही किसानों की कर्जमाफी की जाएगी। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा का कोई भी नेता मेनिफेस्टो को देखकर बताएं कहां लिखा है मुस्लिम लीग? भाजपा एक नया भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। आपसे आपका पैसा लेकर बांट देगी, प्रधानमंत्री ने अपने पद की गरिमा नहीं रखी है। उन्हें मंगलसूत्र नहीं बोलना चाहिए, अगर दांपत्य की इज्जत नहीं करते तो उन्हें मंगलसूत्र की बात नहीं करनी चाहिए। मंगलसूत्र के नाम पर झूठ पीएम ने बोला है। 55 साल में कांग्रेस सरकार में रही, लेकिन किसी का पैसा लेकर किसी और को नहीं दिया।
जाति आधारित गणना का सदन में समर्थन, सभा में विरोध
उन्होंने कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण समाप्त करने की बात करते हैं पर ये जानते ही नहीं कि बिना संसद के यह संभव ही नहीं है। जाति आधारित गणना का सदन में समर्थन करते हैं और सभाओं में विरोध जताते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता के सामने खुलकर बोलें कि वे जाति आधारित गणना का समर्थन करके हैं या विरोध।
दस साल सत्ता में रहने के बाद भी नेहरू को कोस रहे
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि, ’हमारे मैनोफेस्टो के बारे में इतना कहा कि लोग डाउनलोड कर रहे है और पढ़ रहे है।  केंद्र कि भाजपा सरकार पिछले 10 साल से सत्ता में रहने के बाद भी नेहरू को ही कोसती है। अगर ऐसा ही था तो क्या 10 साल से भाजपा के लोग झुनझुना बजा रहे थे। उन्होंने कहा कि, ’हमने पांच न्याय अपने मैनोफेस्टो मे दिए है। हार आपके सामने है और इसे देखते हुए भाजपा बौखला गई है। भाजपा लोगों को बरगला रही है। मैं सिर्फ मोदी जी से इतना ही कहना चाहूंगी कि दाम्पत्य के मंगलसूत्र का अपमान न कीजिए।
 

तीसरे चरण की सीटों ने बढ़ाई भाजपा की चिंता

अमित शाह ने की पहले चरण की सीटों की समीक्षा


भोपाल। राज्य में लोकसभा चुनाव के दो चरणों के मतदान हो चुके हैं। इसके बाद भाजपा में अब तीसरे चरण की नौ सीटों के लिए होने वाले मतदान की चिंता बढ़ी है। यही वजह है कि केन्द्रीय मंत्री अमित शाह भोपाल पहुंचे और रात्रि विश्राम कर उन्होंने पहले चरण में जिन सीटों के लिए मतदान हुआ उनकी समीक्षा की और तीसरे चरण के मतदान वाले क्षेत्रों को फोकस करते हुए भाजपा नेताओं को रणनीति के तहत काम करने की बात कही। तीसरे चरण के लिए होने वाले मतदान वाली नौ सीटों में से तीन सीटों पर दिग्गज नेताओं के मैदान में होने से भाजपा के अलावा कांग्रेस भी बेचैन है।
प्रदेश में दो चरणों के मतदान होने के साथ ही बारह लोकसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। अब राज्य में तीसरे चरण में नौ सीटों मुरैना, भिंड, गुना, ग्वालियर, सागर, भोपाल, विदिशा, राजगढ़ और बैतूल संसदीय सीटों के लिए 7 मई को मतदान होना है। इन नौ सीटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों की सक्रियता नजर आई है। भाजपा के दिग्गजों खासकर स्टार प्रचारकों की सभाएं पहले से ही इन सीटों पर हो चुकी है। जबकि भोपाल, बैतूल और मुरैना में खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभाएं और रोड ष्शो के जरिए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया है। इसी तरह केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुना और राजगढ़ पर अपना चुनाव प्रचार केन्द्रित कर सभाएं की है। गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया, विदिशा में शिवराज सिंह चौहान और राजगढ़ में दिग्विजय सिंह के मैदान में होने से सभी की निगाहें भी इन सीटों पर टिकी हुई है। भाजपा गुना और विदिशा में जीत को लेकर आश्वस्त है, मगर राजगढ़ संसदीय सीट पर वह मेहनत करने की बात कर रही है। इस सीट को लेकर खुद केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने प्रदेश के नेताओं के साथ बीती रात बातचीत की और जीत की रणनीति पर काम करने को कहा।
प्रदर्शन नहीं सुधरा तो हो सकता है नुकसान
सूत्रों की माने तो अमित शाह के साथ हुई प्रदेश के नेताओं की बैठक में शाह ने पहले तो पहले चरण की छह सीटों पर हुए मतदान की समीक्षा की। बताया जाता है कि इन सीटों में से भाजपा को छिंदवाड़ा और मंडला सीट पर कमजोर आंका गया है। हालांकि भाजपा नेता मंडला में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। वहीं छिंदवाड़ा के परिणाम पर खुलकर कोई बात कहते नजर नहीं आया। इसके बाद दूसरे चरणी की सभी छह सीटों पर भाजपा नेता अपने प्रत्याशियों की जीत मान रहे हैं। वहीं शाह ने तीसरे चरण की नौ सीटों पर ध्यान रखते साफ संदेश दिया कि अगर समय रहते प्रदर्शन नहीं सुधरा तो भाजपा को मध्यप्रदेश में नुकसान हो सकता है। इसके चलते तीसरे चरण और चौथे चरण के मतदान वाली सत्रह सीटों पर फोकस करते हुए जीत की रणनीति के साथ मैदान में उतरा जाए।
मतदान प्रतिशत बढ़ाने की जिम्मेदारी विधायकों को
सूत्रों के अनुसार शाह ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विधायकों को जिम्मेदारी सौंपी है। हर विधायक को प्रति बूथ 370 वोट बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस हिदायत में यह भी जोड़ा गया है कि लोकसभा चुनाव के मतदान स्तर के आधार पर विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर ही उनकी अगली रूपरेखा तय होगी।


गुरुवार, 25 अप्रैल 2024

प्रदेश की सियासत से शिवराज की विदाई लगभग तय

पहले चरण में कम हुआ मतदान, तो मामा को फिर किया सक्रिय


भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर बुधवार को हरदा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए बयान के बाद अब चर्चा तेज हो गई है कि मध्यप्रदेश कभी ना छोड़ने की बात कहने वाले मामा की प्रदेश की सियासत से विदाई लगभग तय है। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री की केन्द्र में सक्रियता ज्यादा नजर आती दिखाई देगी।
प्रदेश में भाजपा की तीन बार सरकार बनाकर मामा और भैया की छवि बनाने वाले नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर अब भाजपा का प्रदेश ही नहीं, बल्कि केन्द्रीय नेत्त्व भी यह मानने लगा है कि प्रदेश में अगर जनता के बीच चेहरा है तो वे शिवराज ही है। इसका उदाहरण देखने को मिला जब बुधवार को हरदा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर बड़ी बात मतदाताओं से कही। हरदा में मोदी ने सभा मंच से कहा कि मैं शिवराज को दिल्ली ले जाना चाहता हूं। इस दौरान मंच पर शिवराज सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने भी खड़े होकर मतदाता का अभिवादन किया। मोदी के इस बयान के बाद अब यह तय हो गया कि शिवराज सिंह की केन्द्र में भूमिका तय हो गई है। उनकी भूमिका क्या होगी यह तो लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद ही पता चलेगा, मगर उनकी प्रदेश की सियासत से विदाई तय मानी जा रही है।
पहले चरण के मतदान के बाद बढ़ी थी सक्रियता
पहले चरण में कम मतदान होने के बाद भाजपा का राष्टीय और प्रदेश संगठन यह बात को समझ गया था कि प्रदेश में अब भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही ऐसे नेता हैं, जो मतदाता से सीधे जुड़े हैं। विधानसभा चुनाव में लाड़ली बहना का असर दिखा, मगर पहले चरण के मतदान वाले क्षेत्रों में महिलाओं के मतदान करने की संख्या कम नजर आई। इसके बाद संगठन ने उन्हें सक्रिय किया। पहले चरण के मतदान के दौरान शिवराज सिंह चौहान केवल होशंगाबाद और छिंदवाड़ा पहुंचे थे। मगर अब दूसरे चरण के मतदान में वे नौ स्थानों पर सभाएं कर चुके हैं।
अलग-थलक पड़े पर जनता से जुड़ाव को रखा बरकरार
विधानसभा चुनाव के बाद जब प्रदेश में मुख्यमंत्री बदला गया तो इसके बाद शिवराज सिंह चौहान करीब-करीब अकेले पड़ते से नजर आ रहे थे। उनके नामांकन भरने में भी नेताओं का वह लाव लश्कर नजर नहीं आया था, जिसके लिए वे कभी जाने जाते थे। मगर शिवराज अपनी लकीर को कैसे बढ़ाएं इस बात को अच्छी तरह जानते थे। वे मौन रहकर सबकुछ करते रहे, मगर अनुशासन में रहकर उन्होंने अपने काम की शैली और जनता से जुड़ाव को बनाए रखा। इसका असर पहले चरण के मतदान के बाद दिखाई दिया। संगठन में फिर उनकी पूछ परख पहले जैसे बढ़ती नजर आई।
 

कांग्रेस के घोषणा पत्र में देश की असली आवाज


भोपाल। लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के पहले प्रदेश में राजनीतिक दलों द्वारा एक-दूसरे को घोषणा पत्रों के जरिए घेरने की कवायद तेज हुई है। इसी बीच कांग्रेस के वरिश्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस के घोशणा पत्र को देश की असली आवाज बताया और कहा कि घोशणा पत्र में हर वर्ग को संबल और शक्ति देने का अभिवन प्रयास कांग्रेस ने किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस के मैनिफ़ेस्टो में जनता की ज़रूरतों और सही मुद्दों को जगह दी गई है। यह मैनिफ़ेस्टो देश की असली आवाज़ है, जिसे राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सुना, समझा और महसूस किया है। कांग्रेस के पाँच न्याय युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और भागीदारी न्याय के माध्यम हर कमजोर वर्ग को संबल और शक्ति देने का अभिनव प्रयास है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ आईये और सभी को न्याय दिलाने के महाअभियान को मज़बूत करिये। हम युवाओं को रोज़गार, किसानों को कर्जमाफी, एमएसपी, महिलाओं को 8500 रूपये महीने, श्रमिकों को 400 रूपये प्रतिदिन का पारिश्रमिक, जातिगत जनगणना जैसी अनेकों जनहितैषी योजनाओं के साथ आपके बीच हैं।
छिंदवाड़ा के विद्यार्थियों को दी शुभकामना
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश के हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी परीक्षा 2023-24 के परीक्षा परिणाम में छिंदवाड़ा के बच्चों का प्रदर्शन शानदार रहा है। हम सबके लिये गौरव की बात है कि हायर सेकंडरी परीक्षा कक्षा 12 वीं में प्रदेश की टॉप लिस्ट में अकेले छिन्दवाड़ा के पांच विद्यार्थियों ने अपना स्थान बनाया है। मैं छिन्दवाड़ा के होनहार छात्र तनुश्री शिवा प्रदेश में चौथा स्थान, प्रथम सोनी एवं शिवम सनोडिया प्रदेश में पाँचवा स्थान, दीपाली वर्मा प्रदेश में छटवां स्थान एवं पाखी चौहान को प्रदेश में दसवाँ स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई एवं उज्जवल भविष्य के लिये शुभकामनाएँ देता हूँ।

रोड शो का आधा खर्च प्रत्याशी की खातें में जोड़ा जाए

कांग्रेस ने चुनाव आयोग का शिकायत कर की मांग


भोपाल। राजधानी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रोड ष्शो के खर्च को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने आज चुनाव आयोग को शिकायत की है कि मोदी के रोड ष्शो का खर्च भाजपा ने अपने फंड में जोड़ा है, जबकि भाजपा प्रत्याशी प्रधानमंत्री के साथ उपस्थित रहे, इसके चलते आधा खर्च प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जाए।
कांग्रेस की ओर से आज कांग्रेस नेता जे पी धनोपिया और मनोज ष्शुक्ला ने चुनाव आयोग को शिकायती पत्र सौंपा है। इस शिकायती पर के जरिए कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भोपाल दौरे के दौरान रोड शो का जीतना भी खर्चा आया है, वह पार्टी फंड से दिया गया है। जबकि रोड ष्शो में भाजपा के भोपाल से प्रत्याशी आलोक शर्मा भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ मौजूद थे, जिसके बाद इसका पूरा खर्च पार्टी फंड से ना जाकर आलोक शर्मा की तरफ से होना चाहिए।
पांच करोड़ खर्च का अनुमान
कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री के रोड ष्शो में आठ सौ गाड़ियों का काफिला ष्शामिल कराया गया। तीन सौ स्थानों पर भव्य स्टेज बनाकर स्वागत कार्यक्रम किए गए। नियमानुसार स्टार प्रचारक साथ प्रत्याशी के उपस्थित होने पर समूचे खर्च का आधा प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़ने जाने का नियम है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रोड ष्शो, होर्डिंग्स, वाहन, अन्य व्यवस्था, विज्ञापन आदि मिलाकर करीब पांच करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान है।
नरेला विधानसभा में 15 हजार से ज्यादा फर्जी मतदाता
चुनाव आयोग को शिकायत पत्र में कहा कि भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र में फर्जी मतदाता होने की शिकायत लगातार की जा रही है तथा विधानसभा 2023 में भी मतदाताओं के नाम दो-दो स्थानों पर होने की स्थिति में अवगत करवाया गया था, लेकिन इस पर आपके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने शिकायत पत्र में  लिखा कि भोपाल में लोकसभा की वोटिंग 7 मई को होनी है, लेकिन अकेले नरेला विधानसभा क्षेत्र में करीब 15810 मतदाता हैं। कांग्रेस नेताओं ने फर्जी मतदाताओं की एक सूची भी आयोग को सौंपी है।
 

विरासत कर पर तेज हुआ सियासी संग्राम, भाजपा हमलावर है कांग्रेस पर

कभी लगता था विरासत टैक्स, 1985 में कर दिया था समाप्त

भोपाल। लोकसभा चुनाव के दौरान सैम पित्रोदा के बयान के बाद विरासत कर को लेकर सियासी संग्राम गर्मा उठा है। भाजपा इसे लेकर रोजाना कांग्रेस पर हमला  कर रही है। हालांकि दुनिया के कई देशों में इसे लेकर नियम हैं, मगर भारत में 1985 में विरासत कर वसूलने के कानून को समाप्त कर दिया है। आज फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुरैना में इस कर को लेकर कांग्रेस को घेरा है। उन्होंने कहा कि इस कर को राजीव गांधी ने अपनी संपत्ति बचाने के लिए खत्म किया था।
दरअसल राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान एक सभा में कहा था कि अगर इंडिया गठबंधन सरकार में आता है तो एक सर्वे कराया जाएगा कि किसके पास कितनी संपत्ति है। राहुल गांधी के इसी बयान को लेकर सैम पित्रोदा ने सवाल किए थे। इसके जवाब में उन्होंने अमेरिका में लगने वाले विरासत टैक्स का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका में 80 फीसदी टैक्स लगाया जाता है। पित्रोदा ने कहा था कि ’भारत में आपके पास ऐसा नियम नहीं है। अगर किसी की संपत्ति 10 अरब है और वह मर जाता है, तो उसके बच्चों को 10 अरब मिलते हैं और जनता को कुछ नहीं मिलता। इसलिए लोगों को इस तरह के मुद्दों पर बहस और चर्चा करनी होगी।’ पित्रोदा ने कहा कि  ’यह एक नीतिगत मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी एक ऐसी नीति बनाएगी, जिसके माध्यम से धन का बांटना बेहतर होगा।’  इस बयान के बाद देश में सियासी संग्राम छिड़ गया है और इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
विवाद को देख कांग्रेस ने किया था खंडन
भाजपा हमलावर हुई तब कांग्रेस ने इसे लेकर खंडन किया। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि कांग्रेस के ’न्याय पत्र’ में ’विरासत कर’ का कोई जिक्र नहीं हैं। यह हमारा एजेंडा नहीं है। हकीकत ये है कि 1985 में राजीव गांधी जी ने विरासत कर को हटाया था। भाजपा के कई नेताओं ने साल 2014-19 के बीच में इसकी वकालत की थी और आज प्रधानमंत्री हम पर आरोप लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि कांग्रेस के ’न्याय पत्र’ में ’धन पुनर्वितरण’ की बात हो रही है।  हमने न्याय पत्र में एक शब्द इस्तेमाल नहीं किया है, जो ’धन पुनर्वितरण’ की बात करता है। ये प्रधानमंत्री मोदी का झूठ नंबर 2 है।
 संपत्ति बचाने राजीव गांधी ने खत्म किया विरासत कानून
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के मुरैना में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए विरासत कर का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने अपनी संपत्ति बचाने के लिए विरासत कानून को खत्म किया था, ताकि संपत्ति सरकार के पास ना जाए। उन्होंने कहा कि विरासत कर से जुड़े तथ्य आंखें खोलने वाले हैं, जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु हुई, तो उनके बच्चों को उनकी संपत्ति मिलने वाली थी। पहले एक नियम था कि संपत्ति बच्चों को जाने से पहले उसका कुछ हिस्सा सरकार ले लेती थी। संपत्ति को बचाने के लिए ताकि वह सरकार के पास न जाए, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विरासत कानून को खत्म कर दिया।
विरासत टैक्स तो नेहरू परिवार पर लगना चाहिए
मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने इंदौर में कहा कि कांग्रेस विरासत टैक्स की बात करती है, लेकिन विरासत टैक्स तो सबसे पहले नेहरू परिवार पर ही लगाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेहरू जी की विरासत सबसे पहले इंदिरा गांधी के पास आई। उसके बाद बेटे राजीव गांधी और फिर बहू के पास आई। बहू ने पीछे से सरकार चलाई और अब पोते आ गए हैं। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में चुनाव लड़ते हैं और कानून अमेरिका के लागू करने की बात करते हैं। विरासत कर सिर्फ़ उनके परिवार पर लगना चाहिए।
क्या है विरासत कर
विरासत कर विरासत में मिलने वाली संपत्ति पर लगता है। ये कर किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी संपत्ति के बंटवारे पर लगता है। दुनिया में इसको लेकर अलग-अलग कानून और अलग-अलग कर वसूलने के नियम है। हमारे देश में संपत्ति शुल्क 1985 में समाप्त कर दिया गया। राजीव गांधी की सरकार में इसे खत्म किया गया था। 1980 के दशक के मध्य में दरें 85 फीसदी के शिखर पर पहुंच गईं थी। इसके तहत 1984-85 में 20 करोड़ का कर इसके तहत वसूला गया था। इसके अतिरिक्त, भारत ने 2015 में संपत्ति कर और 1998 में उपहार कर को समाप्त कर दिया। हालांकि भारत में एक विशिष्ट विरासत कर का अभाव है, विरासत में मिली संपत्तियों पर अभी भी आयकर का प्रभाव पड़ सकता है।

बुधवार, 24 अप्रैल 2024

आचार संहिता के दौरान 19 करोड़ से अधिक की नकदी जब्त


भोपाल। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया है कि लोकसभा चुनाव की आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील होने के बाद पुलिस एवं अन्य एन्फोर्समेंट एजेंसियों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि 16 मार्च से 22 अप्रैल तक 19 करोड़ 54 लाख 85 हजार 81 रुपये नगद राशि सहित 244 करोड़ 55 लाख 10 हजार 762 रुपये मूल्य की विभिन्न सामग्री जब्त की गयी हैं।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2019 में आदर्श आचरण संहिता के दौरान 85 करोड़ 12 लाख रुपये मूल्य की विभिन्न सामग्री जब्त की गयी थीं। लोकसभा चुनाव 2024 की आदर्श आचरण संहिता अवधि में मात्र 37 दिन में ही गत लोकसभा निर्वाचन की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक मूल्य की विभिन्न अवांछित सामग्री की जब्ती की जा चुकी हैं। 22 अप्रैल तक 22 लाख 72 हजार 657 लीटर से अधिक मदिरा भी जब्त की गयी है, जिसका मूल्य 33 करोड़ 77 लाख 34 हजार 911 रुपये है। इसी तरह 22 करोड़ 23 लाख 46 हजार 953 रुपये मूल्य के 16 हजार 715 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स और 11 करोड़ 59 लाख 64 हजार 619 रुपये मूल्य की 2 हजार 144 किलोग्राम से अधिक कीमती धातुएँ भी जब्त की गई हैं। साथ ही 157 करोड़ 39 लाख 79 हजार 198 रुपये मूल्य की अन्य मूल्यवान सामग्री भी जब्त की गई हैं।
संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर बरतें सतर्कता
प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने आज ग्वालियर चंबल संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर तीसरे चरण के मतदान वाले लोकसभा क्षेत्रों की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में  संवेदनशील मतदान केंद्र को लेकर विशेष निर्देश जारी किए गए है। इन केंद्रों पर अतिरिक्त सेक्टर अधिकारी और पुलिस अधिकारी तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही वेब कास्टिंग की व्यापक व्यवस्था और पेट्रोलिंग भी की जा रही है। चुनाव के पहले भी असामाजिक तत्वों की धरपकड़ का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, मैं सभी को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि इस इलाके में फ्री फेयर और पीसफुल मतदान संपन्न होगा।

तीन अभियानों के जरिए भाजपा को घेरने की रणनीति

दिग्विजय सिंह 25 से शुरुआत करेंगे किसान, युवा और महिला संपर्क अभियान


भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ संसदीय सीट पर भाजपा को घेरने के लिए पदयात्रा के साथ-साथ संपर्क अभियान चलाने की बात कही है। वे इस अभियान के तहत किसानों, युवाओं और महिलाओं से सीधा संपर्क करेंगे और उन्हें कांग्रेस की गारंटियों की जानकारी देकर मोदी की गारंटी का सच बताएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री और राजगढ़ संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने 25 अप्रैल से तीन अभियान चलाने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि 25 से 27 अप्रैल के बीच किसान अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान हर मतदान केंद्र पर हमारे बूथ समितियों के द्वारा विशेष किसान संपर्क अभियान चलाया जाएगा जिसमें हमारे कार्यकर्ता और नेता पोलिंग बूथ के हर किसान परिवार से संपर्क करेंगे और भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के बारे में चर्चा करेंगे। हमारे नेता, कार्यकर्ता किसानों समझाएंगे किस प्रकार से भाजपा के राज में किसान की आय नही बल्कि किसान की लागत दो गुना हो गई है। इसके बाद  28 अप्रैल से 1 मई के बीच हर मतदान केंद्र पर हमारे बूथ समितियों के द्वारा विशेष युवा संपर्क अभियान चलाया जाएगा जिसमें हमारे कार्यकर्ता और नेता पोलिंग बूथ पर 18-35 वर्ष के बीच युवा मतदाताओं से संपर्क करेंगे। मोदी सरकार के द्वारा हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की वादा खिलाफी एवं सरकारी रिक्त पदों की बढ़ती हुई संख्या भाजपा सरकार की प्रमुख विफलता है।
महिला संपर्क अभियान
सिंह ने बताया कि 2 मई से 5 मई के बीच हर मतदान केंद्र पर हमारे बूथ समितियों के द्वारा विशेष महिला संपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसमें हमारे कार्यकर्ता और नेता पोलिंग बूथ की महिलाओं से चर्चा करेंगे और कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र में दी गयी हर गरीब परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला को 1 लाख प्रतिवर्ष के अनुदान देने की कांग्रेस की गारंटी के बारे में जानकारी देंगे।

रीवा लोकसभा : सात बार जीते निर्दलीय और अन्य दल

सपा नहीं खोल पाई खाता, बसपा ने तीन बार हासिल की जीत


भोपाल। प्रदेश की रीवा लोकसभा सीट इकलौती ऐसी सीट है, जिस पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय और दूसरे दलों के प्रत्याशियों को भी जीत हासिल होती रही है। एक-दो बार नहीं बल्कि सात मर्तबा ऐसा हुआ है जब भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को यहां पर हार का सामना निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशियों से करना पड़ा है।
विंध्य अंचल की सीटों में रीवा सीट पर इस बार भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल पूरी ताकत से जीत के लिए जुटे हैं। जातिगत आधार पर परिणाम देने वाली इस सीट पर इस बार दोनों ही दलों ने ब्राहम्ण उम्मीदवारों को टिकट दिया है। भाजपा ने सांसद जनार्दन मिश्रा को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने यहां पर पूर्व विधायक नीलम मिश्रा पर दाव खेला है। विंध्य की इस सीट पर मुकाबला कड़ा हो गया है। शुरुआती दौर में यहां पर मुकाबला एकतरफा लग रहा था, मगर अब यहां पर कांटे की टक्कर नजर आ रही है।
1999 के बाद से अब तक कांग्रेस को जीत का इंतजार
रीवा लोकसभा के चुनावी इतिहास की बात करें तो यहां 1967 के बाद से कांग्रेस काफी कमजोर हैं। 1962 के चुनाव के बाद यहां से कांग्रेस को कभी भी लगातार दो मर्तबा जीत हासिल नहीं हुई है। कांग्रेस को 1999 में अंतिम बार इस सीट पर जीत हासिल हुई है। इस चुनाव में कांग्रेस के सुंदरलाल तिवारी जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद से कांग्रेस यहां पर जीत के लिए इंतजार कर रही है।
बसपा ने जीते तीन चुनाव, सपा नहीं खोल पाई खाता
बहुजन समाज पार्टी ने इस सीट पर तीन मर्तबा जीत हासिल की है। रीवा के अलावा इसी अंचल की सतना सीट पर भी बसपा ने एक बार जीत हासिल की है। प्रदेश की केवल यही सीट ऐसी हैं, जहां बसपा और अन्य दलों को जीत हासिल हुई है। रीवा में बसपा के अलावा निर्दलीय, जनता पार्टी और जनता दल के प्रत्याशी भी जीत हासिल कर चुके हैं। इस सीट पर 1952 के बाद से अब तक सत्रह बार के चुनावों में कांग्रेस को  6 बार और  भाजपा को 4 बार जीत हासिल हुई है। इसके अलावा सात बार निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशी जीते हैं।
कब किसे मिली जीत
1971  मार्तण्ड सिंह निर्दलीय
1977 यमुना प्रसाद शास्त्री जनता पार्टी
1980 मार्तण्ड सिंह निर्दलीय
1989 यमुना प्रसाद शास्त्री जनता दल
1991 में भीमसेन पटेल बसपा
1996 बुद्धसेन पटेल बसपा
2009 देवराज सिंह पटेल बसपा

भाजपा कर रही संविधान बदलने की कोशिश : तन्खा

भोपाल। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि भाजपा चार सौ सीटें जीतने की बात कहकर संविधान बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि आज संविधान खतरे में है, प्रजातंत्र खतरे में है। इसे बचाने की जरूरत है।

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने यह बात आज मीडिया से चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भाजपा कहती है चार सौ सीट हम जीतेंगे। भाजपा संविधान बदलने की कोशिश में है। बाबा साहेब ने संविधान के जरिए देश को जोड़े रखा। संविधान की कुछ मूलभूत बातो को बदला नहीं जा सकता हैं। भाजपा विचारधारा वाले लोगों को देश के उच्च पद मिलते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान खतरे में है, प्रजातंत्र खतरे में है। चुनाव के माध्यम से जनता संविधान को बचा सकती है, मैंने आपातकाल का विरोध किया था।
तन्खा के बयान पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता सत्येंद्र जैन ने कहा कि संविधान कांग्रेस बदलती है, भाजपा पूजा करती है। संविधान तब बदला गया था जब आपातकाल लगा था। संविधान तब बदला गया था जब लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया था। संविधान का बदला गया था जब तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया गया था।
संविधान और लोकतंत्र को बचाने की है लड़ाई
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि आज संविधान और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। पिछले 10 साल में 17 सरकारें गिराई गई।  सरकारी माफिया का काम विपक्ष नेताओं को अपने पक्ष में लाना है।  मोदी जी शो मैन का आज रोड शो है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को कल भगवान हनुमान का रूप बताया गया। पटवारी ने राज्य सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि लाड़ली बहनों को 3 हजार रुपए कब मिलेगा. गरीब महिलाओं को घर, उज्जवला योजना का लाभ कब मिलेगा. किसानों से जो वादा किया वो कब पूरा होगा. 2700 की कीमत किसानों को नहीं मिली उल्टा खरीदी बंद हो गई। उन्होंने कहा कि 40 परीक्षाएं हुईं, सभी में घपले हो गए हैं। जांच एजेंसी क्या जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आती है वो सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती।
मुसलमान, ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले यह 10 साल के प्रधानमंत्री की भाषा है
पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अच्छे दिन, विकसित भारत, विकास से नाता जैसी बातें कही थी, परंतु अब मंगलसूत्र, मांस, मटन, मछली, माओवादी सोच, मुसलमान, घुसपैठिया, ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले, यह 10 साल के प्रधानमंत्री की भाषा है यह दुखद है। मध्य प्रदेश की जनता के इन सवालों पर जवाब क्यों नही देते प्रधानमंत्री? झूठ बोलो, जोर से बोलो, बार बार बोलो की गारंटी ही क्या मोदी गारंटी है? मोदी जी की सबसे सफल गारंटी झूठ की गारंटी है?

मंगलवार, 23 अप्रैल 2024

मोहन भैया मध्यप्रदेश में नफरत की दुकान पर ग्राहक नहीं आते


पटवारी का मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मोहन भैया, अपने मध्यप्रदेश में नफरत की दुकान पर ग्राहक बिल्कुल नहीं आते हैं, पता नहीं आप इस दुकान में गुजरात का सामान क्यों भरना चाहते हैं। यहां प्रेम, विश्वास, भाईचारे का माहौल है। यह चुनाव भी थोड़े दिन में खत्म हो जाएंगे! फिर जुबान में ऐसा जहर क्यों?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि आका की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए आपने भी रंग बदल लिया। मुझे तो लगा था कि पहले दौर के मतदान से केवल मोदीजी ही डरे हुए हैं,  आपकी आवाज और अंदाज में जो बदलाव दिखाई दे रहा है, वह भी उसी डर को जता-बता रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आपको हैडलाइंस के लिए भाषण ही देना है, या “पर्ची की खर्ची“ के रूप में भक्ति-गान को स्वर देना है, तो ’गुजरात घराने’ के पास ढेर सारे झूठे सपने हैं।  थोड़े से आंकड़े, थोड़े से जुमले और साथ में नौटंकी का तड़का - सच में थोड़ी ताली तो मिल ही जाएगी, लेकिन, भगवान के लिए मध्यप्रदेश को ’घृणा का घर’ मत बनाइए।  जो ’बुद्धिजीवी’ भाषण की पर्ची आपको दे रहे हैं, उन्हें भी थोड़ा समझाइए या बोलने से पहले पढ़ने की आदत डालिए। पद की गंभीरता समझिए, ओहदे के अनुसार अब आचरण भी कीजिए। 

अर्जुन सिंह, शिवराज सिंह का रिकार्ड बना मुख्यमंत्री के लिए चुनौती

सभी सीटें जीतने के दावे पर कितना खरा उतरेगी भाजपा


भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के नेतृत्व में अगर भाजपा प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत हासिल करती है, तो वे अर्जुन सिंह के बाद पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिनके मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी पार्टी ने सभी सीटों पर कब्जा किया है। अर्जुन सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में 1984 में अविभाजित मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने सभी चालीस सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भाजपा ने 2014 में 27 और 2019 में 28 सीटों पर जीत हासिल की है।
प्रदेश में लोकसभा की सभी 29 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा के लिए पहले चरण के मतदान के बाद चुनौती खड़ी हुई है। मगर मुख्यमंत्री डा मोहन यादव से लेकर पूरा संगठन अब भी प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। अगर मुख्यमंत्री अपने दावे पर खरे उतरे तो प्रदेश में पहली बार ऐसा होगा जब भाजपा सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी और मुख्यमंत्री यादव अर्जुन सिंह के बाद दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिनके कार्यकाल में उनकी पार्टी प्रदेश की सभी सीटों पर जीत हासिल करने वाली बनेगी।
1996 से कांग्रेस का गिरता रहा ग्राफ
मध्यप्रदेश में 1996 के लोकसभा चुनाव से कांग्रेस का ग्राफ गिरता रहा है। 1996 में प्रदेश की 40 सीटों में से उसे 8 पर जीत हासिल हुई थी। जबकि भाजपा को 27 और बसपा को 2 सीटों पर जीत मिली थी। 3 सीटें अन्य के खातें कई थी। इसके बाद 1998 में भाजपा को 30 और कांग्रेस को 10 सीटों पर जीत हासिल हुई। 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा 29 और कांग्रेस को 11 सीटों पर सफलता हासिल हुई। इसके बाद 2004 में भाजपा के पास 25 सीटें थीं। यह सफलता बाबूलाल गौर के संक्षिप्त शासनकाल में भाजपा को मिली थी। इसके बाद 2009  में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया। इस चुनाव में भाजपा को 16 सीटों पर जीत मिली थी। 12 सीटों पर कांग्रेस और एक पर बसपा ने कब्जा किया था। इसी तरह 2014 का लोकसभा चुनाव भी शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा ने लड़ा था, जब भाजपा को 27 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं 2019 में भी उन्हें के नेतृत्व में भाजपा ने 28 सीटों पर जीत हासिल की थी।
1984 में जीती थी कांग्रेस ने सभी सीटें
प्रदेश में अविभाजित मध्यप्रदेश की सभी 40 लोकसभा सीटों पर 1984 में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की हत्या के चलते कांग्रेस को सहानुभूति लहर के रूप में लड़ा गया था। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह रहे थे। उनके नेतृत्व में पहली बार सभी सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इसके बाद देश में चली राम लहर के बावजूद भी प्रदेश में 1989 में भाजपा को प्रदेश की सिर्फ 27 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। इस बार भाजपा ने देश में 370 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत का लक्ष्य भाजपा के प्रदेश संगठन ने तय किया है। मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के लिए यह लक्ष्य चुनौती बना हुआ है।

यादव ने पचौरी को बताया टिकट कटाऊ नेता


नर्मदापुरम आने के लिए नेताजी से पूछना पड़ता था

भोपाल। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी पर अब कांग्रेस ने खुलकर हमला किया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव ने उन्हें होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र में टिकट कटाऊ नेता बताया। इतना ही नहीं पचौरी को लेकर यादव ने कहा कि उन्हें होशंगाबाद आने के लिए पहले उनसे स्वीकृति लेनी होती थी, इसके बाद वे अनुमति देते तो ही वे किसी कार्यकर्ता के यहां जा सकते थे।
पूर्व केन्द्रीय  मंत्री अरुण यादव ने इटारसी में एक सभा में इस बात का खुलासा किया। यादव ने पचौरी को लेकर कहा कि सुरेश पचौरी मजबूत नेताओं का टिकट कटवाते थे। मंच से अरुण यादव ने कहा कि इटारसी (नर्मदापुरम) आने से डर लगता था। नर्मदापुरम आने से पहले एक बार नेताजी से पूछना पड़ता था। इशारों-इशारों में सुरेश पचौरी पर निशाना साधा है। नमर्दापुरम आने के लिये यहां के बड़े नेता की परमिशन लेना पड़ती थी। यहां के नेता टिकट कटाऊ नेता बन गए थे। वो अच्छे लोगों को टिकट देने ही नहीं देने देते थे।
बिना चुनाव लड़े 24 साल रहे सांसद
यादव ने कहा कि मैं आपकी जानकारी में ला दूं कि हिंदुस्तान के इतिहास में और कांग्रेस के इतिहास में एक नेता ऐसा हुआ जो 30 साल तक बिना चुनाव लड़े राज्यसभा का सदस्य रहा। मंत्री रहा। कांग्रेस पार्टी के तमाम ओहदों पर रहे। जो कोई भी चुनाव नहीं लड़ा और अगर लड़ा तो एक बार 27 हजार, एक बार 32 हजार से हारे। हमने तो इस बार भी कहा था लड़ लीजिए। हमारी तरफ से तो कोई मना ही नहीं था। पता चला कि वे तो चुनाव की पहले ही चले गए। सुरेश पचौरी एकमात्र ऐसे नेता है जो बिना चुनाव जीते 24 साल सांसद रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे है।

कांग्रेस का स्वभाव है पलटी मार देना : मुख्यमंत्री

सभी संसाधन पर किसी एक वर्ग का हक होना निंदनीय

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज कांग्रेस के घोषणा पत्र पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हम किसी एक वर्ग के लिए नहीं हो सकते। मनमोहन सिंह ने कहा था सभी संसाधन पर किसी का हक है तो मुसलमान का है, यह काफी निंदनीय है। हम इसकी निंदा करते हैं इसके लिए कांग्रेस देश से माफी मांगे। कांग्रेस कुछ भी कहे, लेकिन जो घोषणा पत्र में लिख कर दिया है वह झुठलाया नहीं जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने आज प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमने कल कांग्रेस का मेनिफेस्टो देखा। कांग्रेस का स्वभाव है कि वो पलटी मार देती है। वो अपनी बात को छिपाकर ले जाने का प्रयास करती है। एक वर्ग का संसाधन पर अधिकार होना यह कौन सी बात है। मनमोहन सिंह ने कहा था कि संसाधनों पर किसी का हक है तो वो केवल मुसलमानों का है। कांग्रेस को जनता से माफी मांगना चाहिए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के दागी नेताओं के भाजपा में शामिल होने पर सवाल उठाया था, इस पर मोहन यादव ने कहा कि यदि दागी नेता भाजपा में आ रहे हैं तो विक्रम अहाके को तो उन्होंने वापस कैसे ले लिया। पहले चरण में वोट प्रतिशत कम होने पर के सवाल पर उन्होंने कहा कि शादी ब्याह बहुत ज्यादा थे। फसल कटाई का समय भी है। इस कारण वोट प्रतिशत घट गया।
पांचवीं बार मध्यप्रदेश आएंगे प्रधानमंत्री
मुख्यमंत्री ने बताया कि चुनावी माहौल में  प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी पांचवीं बार मध्यप्रदेश आ रहे हैं। मोदी की सागर, हरदा में सभा होगी और भोपाल में रोड शो करेंगे। रोड शो 1 किलोमीटर का होगा। मोदी के स्वागत के लिए 200 मंच सजाए जाएंगे। मंच से पुष्पवर्षा होगी। बिना शोर मोदी रोड शो करते हैं। मोदी हाथ में कमल का फूल लेकर मौन रूप से भी वोट की अपील करते हैं। मोदी से बाकी पार्टियों को भी यह सीखना चाहिए।
दुल्हन की तरह भोपाल सजाया जाएगा
 मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवा के प्रति कांग्रेस को आपत्ति होगी, हमारे मन में बरसों से भगवा है। हमारे संस्कृति उदार संस्कृति है। दुल्हन की तरह भोपाल सजाया जाएगा। संघ ध्वनि के साथ मोदी का अभिनंदन होगा। आदिवासी अंचल के कलाकार लोक नृत्य की प्रस्तुति देंगे। आदि कवि कालिदास ने जो कल्पना की थी कि जैसे स्वर्ग लोक उतर आया है, इसी तरह की कोशिश की जा रही है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बाद भी मोदी जनता के बीच सहजता से पहुंच जाते हैं। एमपी के मन में मोदी, मोदी के मन में एमपी यह भाव रहेगा।

रविवार, 21 अप्रैल 2024

कांग्रेस के लिए फिर मुसीबत बनेगी बसपा

विंध्य, ग्वालियर-चंबल में बसपा प्रत्याशी बिगाड़ सकते हैं समीकरण


भोपाल।  विधानसभा के 2023 के चुनाव की तरह इस बार फिर लोकसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशी कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ सकते हैं। विंध्य की सतना, ग्वालियर-चंबल की भिंड, मुरैना और ग्वालियर सीट पर बसपा ने कांग्रेस और दूसरे दलों से आए नेताओं को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकाणीय बना दिया है। 

प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में कई स्थानों पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने कांग्रेस की जीत की राह में रोड़ा अटकाया था, ठीक उसी तर्ज पर इस बार लोकसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशी कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी करते नजर आ रहे हैं। इनमें सतना, भिंड, मुरैना और ग्वालियर चारों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस और दूसरे दलों से आए नेताओं को बसपा ने एक बार फिर मैदान में उतारा है। सतना में भाजपा से विधायक रहे नारायण त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतारा है। यहां भाजपा के गणेश सिंह और कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाह मैदान में है। इसके अलावा बसपा के त्रिपाठी ने मैदान में उतरकर यहां त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है। इसके चलते यहां पर फिलहाल तो दोनों ही दलों के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं, मगर नुकसान का देखा जाए तो कांग्रेस को खासा नुकसान यहां हो सकता है। 

सतना के अलावा भिंड में कांग्रेस के टिकट के दावेदार देवाशीश जरारिया को एनवक्त पर बसपा ने अपने पाले में लाकर कांग्रेस की राह में मुसीबत खड़ी कर दी है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया के लिए जरारिया परेशानी बनते जा रहे हैं। जबकि ग्वालियर लोकसभा सीट पर भी बसपा ने कांग्रेस के कल्याण सिंह कंसाना को मैदान में उतारा है। वहीं मुरैना में बसपा ने रमेश चंद्र गर्ग को प्रत्याशी बनाया है। इनके मैदान में उतरने से भाजपा और कांग्रेस के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं और मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। 

गौरतलब है कि भिंड, मुरैना और ग्वालियर तीनों से लोकसभा सीटों पर बसपा ने जिन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, वे तीनों कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे थे, मगर कांग्रेस ने इन्हें टिकट नहीं दिया। इसके चलते तीनों ने दल बदलकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। 

सतना और मुरैना में मजबूत रहती है बसपा

सतना और मुरैना संसदीय सीटों पर बसपा का खासा प्रभाव और वोट बैंक हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े देखें तो इस सीट पर बसपा ने करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारा था। उन्हें 1 लाख 29 हजार 280 वोट हासिल हुए थे। वे इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीं सतना संसदीय सीट पर इस चुनाव में बसपा को 1 लाख से ज्यादा वोट हासिल हुए थे और बसपा प्रत्याशी अच्छेलाल कुशवाहतीसरे स्थान पर रहे थे। लोकसभा चुनाव में इन दोनों ही सीटों पर बसपा ने भाजपा और कांग्रेस के समीकरणों को बिगाड़ने का काम किया है। 


बालाघाट में पुरूषों से ज्यादा महिलाओं ने डाले वोट

छिंदवाड़ा में महिला मतदाता की कम दिखी रूचि

भोपाल। प्रदेश के छह लोकसभा क्षेत्रों के लिए हुए मतदान में महिलाओं मतदाताओं की रूचि काफी कम नजर आई है। सिर्फ बालाघाट लोकसभा सीट ऐसी रही, जहां पुरूषों से ज्यादा मतदान महिला मतदाताओं ने किया है। इन छह लोकसभा क्षेत्रों में 55 लाख 88 हजार 669 महिला मतदाताओं में से 37लाख 39 हजार 296 महिलाओं ने ही मतदान किया है। बालाघाट में 6 लाख 93 हजार 226 महिला मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि यहां पर 6 लाख 82 हजार 972 पुरूष मतदाताओें ने मतदान किया है। 

पहले चरण के जिन छह लोकसभा क्षेत्रों के चुनाव हुए उनमें 1 करोड़ 13 लाख 09 हजार 636 मतदाता थे। इनमें से 76 लाख 62 हजार 447 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। इनमें 37 लाख 39 हजार 296 महिला मतदाता थी, जबकि 39 लाख 23 हजार 078 पुस्ष मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया। 

कहां किसने  कितने डले वोट

लोस क्षेत्र   कुल मतदाता पुरूष महिला      अन्य   वोट डाले

सीधी     2028451     597586  548562       2        1146150

शहडोल  1777185     589515 559980      11      1149506

जबलपुर  1896346     609806   546891     25       1156722

मंडला    2101811     773460   757387       14      1530861

बालाघाट  1873653    682972    693226     9        1376207

छिंदवाड़ा 1632190     669739    633250     12      1303001


शनिवार, 20 अप्रैल 2024

कांग्रेसियों के भाजपाई बनने से भाजपा की बढ़ती जा रही मुसीबत

अपने नेता हो रहे नाराज, पूर्व मंत्री को मनाने घर पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष


भोपाल। भाजपा द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान न्यू ज्वाइनिंग टोली के जरिए बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं को भाजपा की सदस्यता दिलाई जा रही है। इससे कई भाजपा नेता नाराज नजर आ रहे हैं। खुलकर तो कोई सामने आकर नाराजगी नहीं जता रहा, मगर नाराज नेता घर बैठते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही पूर्व मंत्री और नागौद से विधायक नागेन्द्र सिंह की नाराजगी सामने आई है, जिन्हें मनाने खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी ष्शर्मा को उनके घर जाना पड़ा, मगर उनकी नाराजगी कम नहीं हुई है।
भाजपा ने अपना कुनबा बढ़ाने के लिए कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भाजपा में लाने के लिए अभियान तो चला दिया, मगर उसके लिए यह अभियान अब मुसीबत भी बन रहा है। पहले चरण के मतदान होने के बाद भाजपा नेताओं की नाराजगी को संगठन ने महसूस भी किया है। इसके चलते अब रूठों को मनाने की कवायद भी की जा रही है। दरअसल खजुराहो संसदीय सीट की नागौद विधानसभा सीट से विधायक और पूर्व मंत्री नागेन्द्र सिंह कांग्रेस नेताओं के भाजपा में शामिल किए जाने से नाराज चल रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह ने भाजपा की सदस्यता ली है। उनके और उनके साथ अन्य कांग्रेस नेताओं के भाजपा में आने के साथ ही पूर्व मंत्री नागेंद्र सिंह नाराज चल रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपनी नाराजगी को खुलकर जाहिर नहीं किया। मगर संगठन के सामने उनकी नाराजगी की जानकारी तब आई जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सभा लेने पहुंचे थे, मगर पूर्व मंत्री उनकी सभा में नहीं पहुंचे। इसके बाद यह बात सामने आई कि वे संगठन से नाराज हैं। संगठन को जब इस बात की जानकारी मिली तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी ष्शर्मा को खुद पूर्व मंत्री के निवास पर जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री के बीच बंद कमरे में आधा घंटे की चर्चा हुई है। उन्होंने पूर्व मंत्री को मनाने का प्रयास तो किया है, मगर सूत्रों की माने तो वे अब तक नाराज हैं। एक तरह से वे सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर नजर आ रहे हैं।
भाजपा को हो सकता है नुकसान
पूर्व मंत्री नागेन्द्र सिंह का विधानसभा क्षेत्र नागौद सतना संसदीय सीट में आता है। अगर उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई तो भाजपा प्रत्याशी को यहां नुकसान हो सकता है। सतना संसदीय सीट पर वैसे भी त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। यहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा ने पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी को मैदान में उतारा है। इसके चलते समीकरण बिगड़ने आसार भी नजर आ रहे हैं। नागेन्द्र सिंह खजुराहो संसदीय सीट से 2014 के लोकसभा चुनाव में सांसद भी निर्वाचित हुए हैं, उनका खासा प्रभाव सतना के अलावा खजुराहो संसदीय सीट पर भी है।

पिछले चुनाव की तुलना में 8 फीसदी कम हुआ मतदान

भोपाल। राज्य में पहले चरण में छह लोकसभा सीटों के लिए हुआ मतदान पिछले चुनाव 2019 की तुलना में 8 फीसदी कम रहा है। चुनाव आयोग इसे तेज गर्मी के चलते कम होना मान रहा है। वहीं राजनीतिक दल इसकी समीक्षा कर रहे हैं।


प्रदेश में पहले चरण के रण में 6 लोकसभा सीटों सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा में मतदान हुआ। राजनीतिक दलों के साथ निर्वाचन आयोग के मतदान बढ़ाने के प्रयासों के बाद भी मतदान का प्रतिशत 2019 की तुलना में 8 फीसदी कम 67.04 फीसदी ही रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्हीं 6 सीटों पर 75.07 फीसदी मतदान हुआ था। सबसे ज्यादा वोटिंग छिंदवाड़ा में 79.18 फीसदी और सीधी में सबसे कम 55.19 फीसदी हुई है। यहां भी 2019 की तुलना में मतदान कम है। छिंदवाड़ा में 3.21 फीसदी तो सीधी में 13.31 फीसदी कम मतदान हुआ है। शहडोल में 11 फीसदी तो जबलपुर में 8.91 फीसदी कम मतदान हुआ है।  मतदान कम होने का कारण राजनीतिक दल मतदाताओं की उदासीनता को बता रहे हैं। निर्वाचन आयोग गर्मी के कारण मतदान कम होने की बात कह रहा है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन का कहना है कि गर्मी के कारण मतदान कम हुआ है। प्रदेश में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हुआ।  
भाजपा नेताओं की बढ़ी चिंता
प्रदेश के छह संसदीय क्षेत्रों में कम मतदान होने से भाजपा की चिंता ब़ढ़ी है। सीधी में पिछले चुनाव की तुलना में 13 फीसदी वोट कम हुआ है। जबकि छिंदवाड़ा में 7 फीसदी, बालाघाट में 4.7 फीसदी, जबलपुर में 8.84, मंडला में 5.3 फीसदी, शहडोल में 11.03 फीसदी मतदान कम हुआ है। भाजपा ने कम मतदान को देखते हुए अब फिर से बूथ मैंनजमेंट पर फोकस करने की रणनीति तय की है। कार्यकर्ता को हर बूथ पर सक्रिय करने और घर-घर जाकर मतदाता को घरों से निकालने पर जोर देने की रणनीति पर अगले चरणों में काम करने पर फोकस किया है।
 

मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष ने मुझ पर लगाए झूठे लांछ


दिग्विजय सिंह ने पुलिस में की लिखित शिकायत

भोपाल। राजगढ़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि यादव ने रामद्रोही और शर्मा ने आतंकियों को गले लगाने की बात कहकर उन पर झूठा लांछन लगाया है। सिंह ने इसे लेकर राजगढ़ के कोतवाली थाने में दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।  
पूर्व मुख्यमंत्री और राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ कोतवाली थाने में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के खिलाफ लिखित शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया है। साथ ही दोनों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है। कोतवाली थाना प्रभारी वीर सिंह ठाकुर ने कहा कि दिग्विजय सिंह का कोतवाली थाने में शिकायती आवेदन आया है। उसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
दरअसल  15 अप्रैल को राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर का नामांकन दाखिल कराने मुख्यमंत्री डा मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा राजगढ़ आए थे। इस दौरान उन्होंने राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को रामद्रोही और आतंकवादियों के गले लगाने वाला बताया था। इसके संबंध में 16 अप्रैल को अपने नामांकन के दौरान वीडी शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए वीडियो उपलब्ध कराने और एफआईआर दर्ज कराने की बात कही थी। इसके बाद 19 अप्रैल को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने निर्वाचन अभिकर्ता अशोक क्रांति के माध्यम से कोतवाली थाने में मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के विरुद्ध शिकायती आवेदन दिया है। इसमें लिखा गया है कि आपको विदित है कि देश में आम चुनाव हो रहे हैं। इसके लिये चुनाव आयोग द्वारा बनाई गई आदर्श आचार संहिता प्रभावशील है। लोकसभा क्षेत्र राजगढ़ में दिनांक 15 अप्रैल को भाजपा के प्रत्याशी रोड़मल नागर के नामांकन के संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव तथा . भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित करते हुये मुझे, कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के विरूद्ध अनर्गल आरोप लगाए और उनके द्वारा भाषण में उपयोग की गई भाषा का स्पष्ट उद्देश्य मेरे विरुद्ध हिन्दूओं की भावनाओं को भड़काना और क्षेत्र की जनता, जिसमें विभिन्न धर्मों और संप्रदाय के लोग निवास करते है, विशेषकर हिन्दू और मुसलमान की भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया है। उक्त दोनों व्यक्ति, जो भाजपा के स्टार प्रचारक भी हैं, ने मुझे सबसे बड़ा रामद्रोही बताया है। आतंकवादियों को गले लगाने वाला कहा है। दोनों के ही लांछन नितांत झूठे हैं।