बुधवार, 26 जनवरी 2022

शिवराज का वादा, दो लाख को रोजगार, हिन्दी में इंजीनियरिंग, मेडिकल की पढ़ाई

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वादा किया है कि उनकी सरकार हर महीने दो लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराएगी। साथ ही इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई भी अब अंग्रेजी के साथ साथ हिन्दी में कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर इंदौर में प्रदेश के नागरिकों से वादा करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने समृद्ध, विकसित और आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश बनाने का बीड़ा उठाया है, तमाम योजनाओं के जरिए गरीबों और राज्य के जरूरतमंद लोगों के लिए विकास कार्य एवं सौगातें जारी रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले 22 महीने में राज्य की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम किया है, चाहे कोरोना वायरस का मामला हो या विकास योजनाएं चलाने का सभी कार्यों में सरकार द्वारा ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। मध्यप्रदेश में वैक्सीनेशन का काम तेजी से हो रहा है, अब तक 97 प्रतिशत से अधिक लोगों को प्रथम डोज़ और 93 प्रतिशत से अधिक लोगों को कोविड-19 की दोनो डोज लग चुकी है, इस कार्य में मध्यप्रदेश अग्रणी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ ही आने वाले समय में 1 लाख नौकरियां सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में देने की नीति पर कर रहे काम।
बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए बना रहे सीएम राइजिंग स्कूल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्टार्टअप के लिए नई नीति लागू होगी और स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के उपयोग में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है. राज्य में 38 हजार करोड़ का निवेश आ चुका है। हमारी पूरी कोशिश है कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों को भी अच्छे स्कूलों में शिक्षा दिला सकें, इसलिए सीएम राइजिंग स्कूल बना रहे हैं। उन्होंने कहा अगले साल से मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की पढ़ाई भी हिंदी में हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के मकान बनाएगी। माफियाओं के नहीं, गलत काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएंगा।
जल्द ही लाएंगे स्टार्टअप नीति
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बेरोजगारों को रोजगार देने की बात की है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के क्षेत्र में इंदौर के नौजवानों ने अद्भुत रेकॉर्ड बनाया है। हम जल्द ही स्टार्टअप की नई नीति लाने वाले हैं। बेटा-बेटियों अगर तुम्हारे पास इनोवेटिव आइडिया हैं, तो उस आईडिया को इंप्लीमेंट करने के लिए हम ऐसी नीति बनाएंगे कि तुम्हें धन की कमी ना हो। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं, इंदौर देश में स्टार्टअप की राजधानी बने। उन्होंने कहा कि आज कुछ बच्चों से मैं बात भी कर रहा हूं, जिन्होंने स्टार्टअप के क्षेत्र में बेहतर काम किया है।
बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा प्रदेश
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली की पूर्ति के लिए एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट लगभग बनकर तैयार हो चुका है. ओंकारेश्वर बांध पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट बनाकर बिजली उत्पन्न की जाएगी ताकि प्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके. इस मौके पर गणमान्य लोग भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री की माफिया को चेतावनी
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि माफिया चाहे किसी भी प्रकार का हो, मध्यप्रदेश की धरती पर कुचल दिया जाएगा। इसलिए पिछले दिनों पूरे मध्यप्रदेश में माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया गया है। चाहे वह जमीन हथियाने वाला माफिया हो, गरीबों के प्लॉट हड़पने वाले माफिया हो, चाहे अलग तरह से समाज को विकृति की ओर ले जाने वाले हो। मध्यप्रदेश की धरती पर हमने इनको कुचल कर समाप्त करने का फैसला किया है।
हर शहर, हर गांव मनाए अपना जन्मदिन
इंदौर में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नागरिकों से आग्रह किया कि  सबसे आग्रह है कि हर शहर, हर गांव अपना जन्मदिन साल में एक दिन मनाएं। इंदौर भी अपना जन्मदिन मनाए और जब दुनियाभर में रहने वाले इंदौरी यहां आएं तो इसके विकास का संकल्प लें। सब मिलकर इंदौर को और आगे बढ़ायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी निवासियों से एक अपील करना चाहता हूं कि एक समरस ग्राम का निर्माण करें। हम इसके लिए समरस ग्राम अभियान चलाएंगे। आपस के मतभेद भी मिल-बैठ कर सुलझा लें। कोशिश ये रहनी चाहिए कि गाँव के मसले थाने तक न जाने पाएं। ग्रामसभा गाँव के विकास का माध्यम बने।
बेटियों के साथ भोजन कर बढ़ाया उत्साह
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  इंदौर स्थित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने देखा कि बेटियां स्कूल नहीं जाती थीं। जानकारी मिली कि मम्मी-पापा बेटियों को दूसरे गांव के स्कूल नहीं भेजना चाहते। तब हमने स्कूलों को अपग्रेड करना प्रारंभ किया। फिर बेटियों के लिए साइकिल योजना प्रारंभ की, ताकि वह दूसरे गांव जाकर भी पढ़ाई कर सकें।  उन्होंने कहा कि बेटियों से कहना चाहता हूं कि शासकीय सेवा में मौका मिल जाए तो उसकी तैयारी करें। पीएससी, यूपीएससी की तैयारी करें, सेना में जाएं।  हमने तय किया है कि पुलिस में भी 30 प्रतिशत भर्तियां बेटियों की होंगी। शिक्षक भर्ती में 50 प्रतिशत बेटियों को मौका देने का निर्णय लिया है। समारोह के बाद मुख्यमंत्री ने सपत्नीक छात्राओं के साथ भोजन भी किया।

बुधवार, 19 जनवरी 2022

धोती-कुर्ता पहन लगाए चौके छक्के

कॉमेंट्री भी संस्कृत में, खिलाड़ी बोले धावनम-धावनम


विश्व स्तर पर जहां कोरोना संक्रमण का भय व्याप्त है, वहीं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में संस्कृत को बचाने के लिए वैदिक ज्ञान अर्जित करने वाले विद्यार्थियों ने अंग्रेजों के खेल क्रिकेट को अपने पुरातन सभ्यता से जोड़कर खेला। क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ी धोती-कुर्ता पहने थे, तो संस्कृत में मैंच की कॉमेंट्री भी की जा रही थी। इतना ही नहीं खिलाड़ियों के माथे पर त्रिपुंड था तो गले में रूद्राक्ष की माला थी। खिलाड़ियों के इस मैच को देखते दर्शक भी पहुंचे, जिन्होंने भी खूब आनंद उठाया।
प्राचीन भाषा संस्कृत को  जीवंत करने के लिए मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक विद्यालय ने अनूठा प्रयोग किया। अंग्रेजों के खेल क्रिकेट में पंडिताई का ज्ञान ले रहे विद्यार्थियों को प्राचीन वेशभूशा में मैदान में उतार दिया। खिलाड़ियों ने भी संस्कृति को बचाने के लिए संस्कृत भाशा में खेल खेलते हुए बातचीत की और मैच को लुत्फ उठाकर संदेश दिया कि संस्कृत का त्याग नहीं करें, बल्कि संस्कृत को भी अन्य भाशाओं की तरह अर्जित करें। संस्कृत ही हमारी वह भाषा है कि जिसमें वेद, पुराण लिखे गए हैं।
दरअसल हुआ यह है कि राजधानी भोपाल महर्शि महेश योगी की जयंती पर वैदिक पंडितों ने संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए इस प्रतियोगिता का आयोजन किया था। प्रतियोगिता में पंडित और पंडिताई का ज्ञान अर्जित कर रहे विद्यार्थियों ने भाग लिया। पारंपरिक धोती कुर्ता पहने दोनों बल्लेबाज तेजी से रन भागने की कोशिश में और नेपथ्य में धाराप्रवाह संस्कृत में कमेंट्री का आनंद अपने आप में अनूठा ही माना जाएगा।  वैदिक मंत्रों के साथ हुई। धोती-कुर्ता पहनकर क्रिकेट के मैदान में सभी खिलाड़ी उतरे। क्रिकेट की पिच पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चित और पट कर टॉस किया गया। । मैच के दौरान शॉट लगाने के बाद बल्लेबाज रन भागते हुए ’धावनम-धावनम’ यानी रन दौड़ो कहते हुए सुनाई दिए। इस मैच की खास बात यह थी कि भले ही  खिलाड़ी आम क्रिकेट खिलाड़ियों से कुछ अलग लग रहे हों, लेकिन उनमें जीत को लेकर जुनून की कोई कमी नहीं थी। वहीं संस्कृत में हो रही कमेंट्री मैच में चार चांद लगा रही थी।
गौरतलब है कि भोपाल में हर वैदिक क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हर दो साल में किया जाता है। इसे लोग लुंगी और धोती क्रिकेट भी कहते हैं। खिलाड़ियों का ड्रेस ऐसा ही होता है। खिलाड़ी लुंगी और धोती पहनकर ही मैदान में खेलते हैं।
संस्कृत को बढ़ावा देने खेला ऐसा खेल
मैच के आयोजकों के अनुसार इस तरह की प्रतियोगिता का  उद्देश्य संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना है।राजधानी भोपाल में दो साल पहले भीं ऐसा मैच खेला गया था, जिसमें खिलाड़ी धोती कुर्ता पहने नजर आए थे। उनके माथे पर त्रिपुंड, टीका, गले में रुद्राक्ष की माला थी। प्रतियोगिता का यह दूसरा साल था।
 नाम भी संस्कृत में
बल्लेबाज को वल्लक, बॉलर को गेंदक, पिच को क्षिप्या, बाल को कुंदुकम, विकेटकीपर को स्तोभरक्षक, छक्के को षठकम, चौक को चतुष्कम, रन को धावनम और फील्डर को क्षेत्ररक्षक नाम दिए गए। इतना ही नहीं मैच की कॉमेंट्री भी संस्कृत में ही की गई।
पुरस्कार के रूप में वेदों की किताब
दो साल पहले खेले पहले क्रिकेट मैच में प्लेयर ऑफ द मैच को वेद की किताब दी गई थी, जबकि प्लेयर ऑफ द सीरीज को पंचांग दिया गया था। इस बार भी विजेता टीमों को नकद पुरस्कार के साथ खिलाड़ियों को वैदिक पुस्तकें और सौ साल का पंचांग दिया गया।
वेदों के अनुसार अनुष्ठान कराने वाले होते हैं खिलाड़ी
संस्कृति बचाओ मंच के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि इस स्पर्धा में वे खिलाड़ी भाग लेंगे जो वेदों के अनुसार अनुष्ठान कराते हैं। उन्होंने बताया कि यह स्पर्धा का दूसरा साल है और सारे प्रतियोगी वैदिक पंडित हैं जो पारंपरिक धोती कुर्ता पहनते हैं। वे एक दूसरे से संस्कृत में बात करते हैं और मैच की कमेंट्री भी संस्कृत में होती है। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट के आयोजन का उद्देश्य संस्कृत भाषा को बढावा देना और वैदिक परिवार में खेल भावना बढाना है। विजेता टीमों को नकद पुरस्कार के साथ खिलाड़ियों को वैदिक पुस्तकें और सौ साल का पंचांग दिया जाएगा।