कमलनाथ, उमंग सिंघार ने अलग-अलग दिन विधायकों को किया आमंत्रित
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर भोज की राजनीति शुरू होने जा रही है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा अलग-अलग दिन कांग्रेस विधायकों को दिए जाने वाले भोज की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के भोज से कांग्रेस विधायकों को कोई नया संदेश मिल सकता है। यह संदेश क्या होगा, इसका जानकारी तो विधायकों को कमलनाथ के यहां होने वाले भोज के बाद ही मिलेगी।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते एक दिन पहले अपने विधायकों को भोज पर बुलाने की परंपरा वैसे तो कांग्रेस की रही है। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के एक दिन पहले कांग्रेस विधायकों को भोज पर आमंत्रित किया है। इसी दिन वे विधायक दल की बैठक भी करने वाले हैं। नेता प्रतिपक्ष ने विधायकों को अपने बंगले के बजाय राजधानी के एक होटल में भोज पर बुलाया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि विधायक दल की बैठक में सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी। विधायकों के भोज को लेकर उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते वे पार्टी की परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी 16 दिसंबर को अपने बंगले पर कांग्रेस विधायकों को भोज पर आमंत्रित किया है। इस दौरान वे खुद राजधानी में रहेंगे। कमलनाथ के यहां होने वाले विधायकों के भोज को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कमलनाथ भोज के बहाने एक बार फिर सक्रियता दिखाएंगे। संभावना है कि इस बहाने विधायकों से उनकी बनी दूरी को करीबी में बदलें। वैसे कमलनाथ पूर्व में भी एक बार ऐसा कर चुके हैं। तब उन्होंने कहा था कि वरिष्ठ होने के नाते और विधायकों के कहने पर उन्होंने भोज दिया है। मगर वर्तमान में कांग्रेस में चल रही उठापटक के चलते कांग्रेस नेताओं को ही यह भोज चिंता में डाल रहा है। माना जा रहा है कि कमलनाथ के यहां होने वाले विधायकों के भोज से विधायकों को कोई संदेश भी मिल सकता है। वह एकता का होगा या फिर कोई और। यह तो भोज के बाद ही पता चलेगा।
उमंग के भोज में शामिल होंगे कमलनाथ !
कमलनाथ खुद छिंदवाड़ा से विधायक हैं और कांग्रेस विधायक दल में सबसे वरिश्ठ विधायक भी है। इस नाते नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उन्हें भी भोज में आमंत्रित किया है, मगर सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि क्या कमलनाथ उमंग द्वारा आयोजित किए जाने वाले भोज में ष्शामिल होंगे। फिलहाल उनके राजधानी पहुंचने का समय और दिन तय नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि 15 की शाम को या फिर 16 दिसंबर की सुबह भोपाल पहुंचेंगे।
बुधवार, 11 दिसंबर 2024
सोमवार, 9 दिसंबर 2024
जीतू ने किया अपमान, किन्नर समाज का लगेगा श्राप
पूर्व विधायक शबनम मौसी ने पूछा कांग्रेस इनकी बपौती है क्या ?भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में पहली किन्नर विधायक रही शबनम मौसी ने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि मैं जीतू पटवारी से मिलने गई, मगर उनके सहयोगियों ने मिलने नहीं दिया। उन्होंने किन्नर का अपमान किया है। किन्नर समाज का उन्हें श्राप लगेगा। शबनम ने कहा कि कोई मिल नहीं रहा था तो जीतू को अध्यक्ष बनाया दिया, क्या कांग्रेस इनकी बपौती है।
पूर्व विधायक शबनम मौसी आज राजधानी भोपाल पहुंची थी। वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से मिलने पहुंची, मगर उनकी मुलाकात नहीं हुई। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी वे कांग्रेस में शामिल होने के लिए पहुंची थी, मगर उस वक्त भी नेताओं ने उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया। आज वे प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से मिलना चाहती थी, मगर उनके सहयोगियों ने मुलाकात नहीं कराई। उन्होंने कहा कि यह किन्नर का अपमान है। किन्नर समाज का श्राप लगेगा, इन्हें। कांग्रेस की आज जो प्रदेश में स्थिति है, वह इन्हीं जैसे नेताओं के कारण है। कांग्रेस इनकी बपौती है क्या, जिनसे चाहे मिलेंगे और जिन्हें चाहे ठुकरा देंगे? उन्होंने कहा पटवारी में लोगों को जोड़ने की क्षमता नहीं है। कोई अध्यक्ष मिल नहीं रहा था इसलिए जीतू को अध्यक्ष बना दिया। शबनम मौसी ने कहा कि जीतू को अध्यक्ष बनाने के बाद कांग्रेस और खराब हो रही है। जीतू के आचरण ऐसा है, तभी लोग छोड़ के जा रहे हैं। पहले भी सदस्यता लेने आई थी तो अपमानित किया था, मैं बहुत दुखी हूं।
उल्लेखनीय है कि देश की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी ने साल 2000 में शहडोल जिले की सोहागपुर सीट से उपचुनाव जीता था। उन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को 17,800 से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। हालांकि, साल 2003 के विधानसभा चुनावों में वह केवल 1400 वोट पाने में सफल रहीं और हार गईं थीं।
खोया जनाधार पाने बसपा प्रदेश में करेगी सामाजिक सम्मेलन
भोपाल। प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रदेश में फिर अपना वोट बैंक मजबूत करने की तैयारी कर रही है। खोए जनाधार को पाने के लिए बसपा द्वारा अब प्रदेश में अलग-अलग जातियों को जोड़ने के लिए सामाजिक सम्मेलन कराने का फैसला लिया है। सर्वसमाज के नारे पर बसपा फिर से प्रदेश में अपने को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।ब्हुजन समाज पार्टी को प्रदेश में 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। दोनों ही चुनाव में उसने प्रत्याशी तो मैदान में उतारे मगर एक भी स्थान पर उसे जीत नहीं मिली। इसके बाद से बसपा का संगठन और भी कमजोर हुआ। अब बसपा प्रदेश में एक बार फिर संगठन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। बसपा ने तय किया है कि पार्टी में जिस समाज के जो पदाधिकारी हैं एवं पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और हारे हुए प्रत्याशी अपनी-अपनी समाज के सामाजिक सम्मेलन कराएंगे। हालांकि ये सम्मेलन समाजों में जन्मे महापुरुषों संतों के नाम पर कराए जाएंगे। रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, देवी अहिल्या बाई होल्कर, संत गाडगे जी महाराज, नामदेव महाराज, संत रविदास, ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों के नाम पर यह आयोजन होंगे।
जनाधार वाली विधानसभा सीटों पर फोकस
बसपा अब उन सीटों पर फोकस कर रही है जहां उसका वोट बैंक निर्णायक रहा है। सुपर-30 के फॉर्मूला पर बसपा जनवरी से मजबूत जनाधार वाली 30 विधानसभाओं में संगठन को मजबूत करेगी। इन 30 विधानसभाओं में बूथ वार कमेटियों के गठन के साथ ही कमजोर बूथों पर वोट बैंक बढ़ाने के लिए प्रदेश, सेक्टर, जोन के इंचार्ज बैठकें करेंगे। करीब 3 महीने बाद अगले फेज में सुपर-30 के तहत 30 अन्य विधानसभाओं में काम शुरू किया जाएगा।
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