उपचुनाव में रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में भाजपा को मिली हार के बाद अब संगठन में घमासान के आसार नजर आ रहे हैं. भाजपा संगठन संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को इसी वर्ष पूरा कराकर नया अध्यक्ष बनाने की कवायद करने में जुटेगा.
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में पूरी ताकत लगाने के बाद मिली हार के कारण भाजपा नहीं समझ पा रही है. पूरा संगठन इस हार को लेकर चिंतित हो गया है. यहां तक की प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भी अपनी प्रतिक्रिया में यह कह चुके हैं कि हार से सबक सीखने की जरूरत है. सहस्त्रबुद्धे ने खुद इस संसदीय क्षेत्र में रहकर चुनाव प्रचार किया था, साथही कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उनसे एकजुट होकर पार्टीप्रत्याशी निर्मला भूरिया के पक्ष में काम करने को कहा था, मगर संगठन के नेताओं की बात का उस संसदीय क्षेत्र के कार्यकर्ताओं पर प्रभाव न पड.ने के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूरा संगठन अब चिंतित हो उठा है. यहां पर सबसे ज्यादा सवाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की कार्यशैली को लेकर भी उठने लगे हैं. संगठन ने उपचुनाव के कारण प्रदेश में चल रही संगठनात्मक चुनाव की गतिविधि को पूर्व में झाबुआ, रतलाम, अलीराजपुर, देवास जिलों में रोक दिया था. अब यहां पर यह प्रक्रिया 29 नवंबर से फिर शुर की जा रही है. इसकी घोषणा भी चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह कर चुके हैं. सिंह के अनुसार इन जिलों में 29 एवं 30 नवंबर को स्थानीय सतितियों का गठन किया जाएगा, जबकि प्रदेश के शेष सभी जिलों में मंडलों के गठन की प्रक्रिया 5 एवं 6 दिसंबर को होगी. उपचुनाव के बाद भाजपा में अब संगठनात्मक चुनाव को लेकर घमासान भी तेज होता नजर आने लगा है. संगठन के कुछ पदाधिकारी और भाजपा नेता अब यह चाहते हैं कि संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को जल्द ही यानि दिसंबर माह में ही पूरा करा लिया जाए. साथ ही भाजपा अध्यक्ष का निर्वाचन भी दिसंबर माह में ही पूरा कराया जाए.
यहां उल्लेखनीय है कि नरेंद्र सिंह तोमर के बाद उनके शेष कार्यकाल के लिए नंदकुमार सिंह चौहान को अध्यक्ष बनाया गया था. संगठन चुनाव की प्रक्रिया के साथ ही यह माना जा रहा था कि चौहान दूसरा कार्यकाल भी पूरा करेंगे, मगर रतलाम संसदीय क्षेत्र में मिली हार अब उनके लिए भी संकट खड. करेगी. अध्यक्ष पद के लिए वैसे पूर्व में ही कई नाम सामने आए थे, मगर अब अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की संख्या में इजाफा हो सकता है. यह माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व इस मामले को अब गंभीरता से लेगा.
कोर कमेटी की बैठक 29 को
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में मिली हार के बाद भाजपा कोर कमेटी हार के कारणों को जानने के लिए समीक्षा बैठक 29 नवंबर को भोपाल में कर रही है. बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, प्रदेश भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे के अलावा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी उपस्थित रहेंगे. बैठक में संगठनात्मक ढांचा कहां पर कमजोर हुआ इस बात को लेकर गंभीरता से मंथन किया जाएगा. साथ ही यह कारण भी जानने का प्रयास होगा कि इस संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ता एक साथ इतना क्यों रुठा. कार्यकर्ताओं को साधने के पूरे काम किए, मगर उसने संगठन की बात को ध्यान क्यों नहीं दिया. इस बात को लेकर पूरा संगठन चिंतित है. संगठन के नेता यह तो मान रहे हैं कि रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र वैसे तो परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ. रहा है, मगर 2014 के चुनाव में सीट भाजपा के हाथ में आने के बाद यहां पर भाजपा को उम्मीद थी कि इस सीट पर वह अब अपना कब्जा बरकरार रखेगी. मगर ऐसा नहीं हो पाया. संगठन नेताओं का मानना है कि जब मतदाता के बीच पहुंचकर खुद मुख्यमंत्री ने विकास और सरकार के कामों को बताया, उसके बाद भी अगर संघ के इस गढ. में भाजपा को हार मिली तो कहीं न कही कार्यकर्ता की नाराजगी और संगठन की कमजोरी सामने आ रही है.
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में पूरी ताकत लगाने के बाद मिली हार के कारण भाजपा नहीं समझ पा रही है. पूरा संगठन इस हार को लेकर चिंतित हो गया है. यहां तक की प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भी अपनी प्रतिक्रिया में यह कह चुके हैं कि हार से सबक सीखने की जरूरत है. सहस्त्रबुद्धे ने खुद इस संसदीय क्षेत्र में रहकर चुनाव प्रचार किया था, साथही कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उनसे एकजुट होकर पार्टीप्रत्याशी निर्मला भूरिया के पक्ष में काम करने को कहा था, मगर संगठन के नेताओं की बात का उस संसदीय क्षेत्र के कार्यकर्ताओं पर प्रभाव न पड.ने के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूरा संगठन अब चिंतित हो उठा है. यहां पर सबसे ज्यादा सवाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की कार्यशैली को लेकर भी उठने लगे हैं. संगठन ने उपचुनाव के कारण प्रदेश में चल रही संगठनात्मक चुनाव की गतिविधि को पूर्व में झाबुआ, रतलाम, अलीराजपुर, देवास जिलों में रोक दिया था. अब यहां पर यह प्रक्रिया 29 नवंबर से फिर शुर की जा रही है. इसकी घोषणा भी चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह कर चुके हैं. सिंह के अनुसार इन जिलों में 29 एवं 30 नवंबर को स्थानीय सतितियों का गठन किया जाएगा, जबकि प्रदेश के शेष सभी जिलों में मंडलों के गठन की प्रक्रिया 5 एवं 6 दिसंबर को होगी. उपचुनाव के बाद भाजपा में अब संगठनात्मक चुनाव को लेकर घमासान भी तेज होता नजर आने लगा है. संगठन के कुछ पदाधिकारी और भाजपा नेता अब यह चाहते हैं कि संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया को जल्द ही यानि दिसंबर माह में ही पूरा करा लिया जाए. साथ ही भाजपा अध्यक्ष का निर्वाचन भी दिसंबर माह में ही पूरा कराया जाए.
यहां उल्लेखनीय है कि नरेंद्र सिंह तोमर के बाद उनके शेष कार्यकाल के लिए नंदकुमार सिंह चौहान को अध्यक्ष बनाया गया था. संगठन चुनाव की प्रक्रिया के साथ ही यह माना जा रहा था कि चौहान दूसरा कार्यकाल भी पूरा करेंगे, मगर रतलाम संसदीय क्षेत्र में मिली हार अब उनके लिए भी संकट खड. करेगी. अध्यक्ष पद के लिए वैसे पूर्व में ही कई नाम सामने आए थे, मगर अब अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की संख्या में इजाफा हो सकता है. यह माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व इस मामले को अब गंभीरता से लेगा.
कोर कमेटी की बैठक 29 को
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में मिली हार के बाद भाजपा कोर कमेटी हार के कारणों को जानने के लिए समीक्षा बैठक 29 नवंबर को भोपाल में कर रही है. बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, प्रदेश भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे के अलावा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी उपस्थित रहेंगे. बैठक में संगठनात्मक ढांचा कहां पर कमजोर हुआ इस बात को लेकर गंभीरता से मंथन किया जाएगा. साथ ही यह कारण भी जानने का प्रयास होगा कि इस संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ता एक साथ इतना क्यों रुठा. कार्यकर्ताओं को साधने के पूरे काम किए, मगर उसने संगठन की बात को ध्यान क्यों नहीं दिया. इस बात को लेकर पूरा संगठन चिंतित है. संगठन के नेता यह तो मान रहे हैं कि रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र वैसे तो परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ. रहा है, मगर 2014 के चुनाव में सीट भाजपा के हाथ में आने के बाद यहां पर भाजपा को उम्मीद थी कि इस सीट पर वह अब अपना कब्जा बरकरार रखेगी. मगर ऐसा नहीं हो पाया. संगठन नेताओं का मानना है कि जब मतदाता के बीच पहुंचकर खुद मुख्यमंत्री ने विकास और सरकार के कामों को बताया, उसके बाद भी अगर संघ के इस गढ. में भाजपा को हार मिली तो कहीं न कही कार्यकर्ता की नाराजगी और संगठन की कमजोरी सामने आ रही है.