बुधवार, 30 जून 2021

खंडवा में स्थानीय उम्मीदवार के पक्ष में नहीं है संघ

 सर्वे के बाद मध्यक्षेत्र इकाई को भेजी रिपोर्ट

मध्यप्रदेश भाजपा के लिए खंडवा संसदीय क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा को दमदारप्रत्याशी की तलाश है। वहीं भाजपा के लिए संघ के सर्वे ने चिंता बढ़ा दी हैं। संघ के सर्वे में स्पष्ट कहा गया है कि स्थानीय दावेदार को अगर यहां पर टिकट दिया गया तो भाजपा के लिए संकट खड़ा हो सकता है। संघ की इस रिपोर्ट के बाद माना जा रहा है कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित ष्षाह भी यहां पर एक सर्वे कराएंगे, इसके बाद ही भाजपा प्रत्याषी का चयन करेगी।
मध्यप्रदेष के खंडवा संसदीय क्षेत्र के लिए भाजपा प्रत्याषी की तलाष में हैं। वहीं भाजपा के अलावा संघ ने भी यहां सक्रियता बढ़ा दी है। संघ ने एक सर्वे किया जिसके बाद इसकी रिपोर्ट मालवा प्रांत के जरिए मध्यप्रांत को भेजी गई है। इस सर्वे में यह बात स्पश्ट कर दी गई है कि स्थानीय नेताओं को अगर यहां पर प्रत्याषी बनाया जाता है और कांग्रेस की ओर से अरूण यादव प्रत्याषी होते है तो वे सभी प्रत्याषी कमजोर साबित होंगे। खासकर  कमजोर प्रत्याषी के रूप में दावेदारी कर रही पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, पूर्व महापौर और वन मंत्री विजय शाह की पत्नी भावना शाह, सुभाष कोठारी के अलावा नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन सिंह चौहान के नाम माने जा रहे हैं।  संघ की खंडवा इकाई द्वारा कराए गए सर्वे की यह रिपोर्ट  मालवा प्रांत को भेजी गई थी। इसके बाद यह रिपोर्ट  मध्यप्रांत तक पहुंची है। इसके बाद संगठन को इसकी जानकारी भी दी गई है। बताया जाता है कि अब संगठन की ओर से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा और प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत खंडवा का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे। इसके बाद संघ की रिपोर्ट के साथ केन्द्रीय नेतृत्व को स्थिति से अवगत कराएंगे।
 शाह   भी कराएंगे सर्वे
संघ के सर्वे के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी खंडवा संसदीय क्षेत्र के लिए प्रत्याषी चयन प्रक्रिया के पहले एक सर्वे कराएंगे। इसके बाद ही केन्द्रीय नेतृत्व यहां पर प्रत्याषी के नाम की घोषणा करेगा। सूत्रों की माने तो संघ की रिपोर्ट के आधार पर अगर भाजपा ने प्रत्याषी चयन की प्रक्रिया को अपनाया तो यहां पर  कैलाश विजयवर्गीय, कृष्ण मुरारी मोघे और दीपक जोशी में से किसी एक नाम पर मोहर लग सकती है। 

बुधवार, 12 मई 2021

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटेरिया का निधन


मध्य प्रदेश के जाने-माने पत्रकार शिव अनुराग पटेरिया का कोरोना संक्रमण की वजह से निधन हो गया। पटेरिया का इलाज इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में चल रहा था और वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। लगातार उनका आक्सीजन लेवल बहुत कम हो गया था, इसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। उनके निधन की खबर आते ही पत्रकारिता जगत में शोक की लहर छा गई है। अस्सी के दशक में हुए छतरपुर कांड में नायक की भूमिका निभाने के साथ  पत्रकारिता के क्षेत्र में वे चार दशकों से कार्यरत थे।

स्वर्गीय शिव अनुराग पटेरिया ने आंचलिक पत्रकार के तौर पर 1978 में छतरपुर से उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत की। तीन दशक से ज्यादा समय से वो मीडिया में सक्रिय थे। न्यूज चैनल के डिबेट्स में भी वो काफी हिस्सा लेते थे। स्वर्गीय पटेरिया पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए लगभग चार दशक से कार्यरत। इस दौरान नईदुनिया (इंदौर), जनसत्ता (मुंबई), चैथा संसार (भोपाल), आई.टी.वी., संडेमेल, जन्मभूमि, दैनिक नईदुनिया (भोपाल), में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य। इतने सालों में वो प्रदेश के हस्ताक्षर बनकर उभरे। 

शिव अनुराग पटैरिया लंबे समय से लोकमत अखबार से जुड़े हुए थे। प्रदेश की नब्ज पर उनकी गहरी पकड़ थी। वे प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित थे। उन्हें राजेन्द्र माथुर फैलोशिप, मेदिनी पुरस्कार, डॉ. शंकरदयाल शर्मा अवार्ड और स्वर्गीय सत्यनारायण तिवारी लाइफ टाइम अचीवमेंट जैसे कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

पटेरिया के निधन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने शोक व्यक्त करते हुए उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी नेताओं ने  पटेरिया के परिजनों को यह गहन दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की है।

गुरुवार, 14 जनवरी 2021

बयान देकर उलझे पूर्व मंत्री वर्मा, मिला नोटिस


भाजपा हुई आक्रामक, कहा माफी मांगे, नहीं तो कांग्रेस निकाले बाहर

मध्यप्रदेष के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा लड़कियों की ष्षादी की उम्र को लेकर दिए बयान पर घिर गए हैं। उनके बयान पर बाल संरक्षण आयोग ने उन्हें नोटिस दिया हैं। वहीं वर्मा के बयान पर भाजपा आक्रामक हो गई है और कहा है कि वर्मा अपने बयान को लेकर माफी मांगे, नहीं तो कांग्रेस उन्हें पार्टी से बाहर निकाले।
राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग ने सज्जन सिंह वर्मा को उनके बयान को लेकर नोटिस जारी कर दो दिनों के अंदर इस पर जवाब देने को कहा है। आयोग ने कहा कि यह बयान बाल संरक्षण और अधिकारों के विरुद्ध हैं। सोशल मीडिया या पब्लिक प्लेटफार्म पर दिए गए ऐसे असंगत और गैरजिम्मेदाराना बयान लड़कियों के प्रति भेदभाव पूर्ण हैं। यह नोटिस  के उस बयान पर आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि डॉक्टर कहते हैं कि 15 साल के बाद ही बच्ची प्रजनन के योग्य हो जाती है. लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने की क्या जरूरत है? शिवराज सिंह चैहान बड़े डॉक्टर हो गए हैं क्या? वर्मा के इस बयान की खूब आलोचना हो रही है। इससे पहले मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने एक कार्यक्रम में कहा था कि जब लड़के के लिए शादी की उम्र 21 साल है, तो फिर लड़की के परिपक्वता की उम्र भी 21 साल होनी चाहिए।  अब समाज को लड़कियों के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए. लड़कियों की शादी भी 21 साल होनी चाहिए इसलिए इस पर विचार हो, लेकिन इस बीच अब सज्जन सिंह वर्मा के बयान से मामला गर्मा गया है।
 महिलाओं का किया अपमान
भाजपा प्रवक्ता नेहा बग्गा ने इसे महिलाओं का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि सज्जन सिंह वर्मा अपने नाम के विपरीत चले गए. उन्हें तत्काल माफी मांगनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदेश के नहीं देश की बेटियों का अपमान किया है।  वर्मा शायद भूल गए कि उनकी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद महिला हैं। वर्मा से सार्वजनिक माफी मंगवाना चाहिए। साथ ही पार्टी से उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। वर्मा ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है इससे उन्होंने अपनी पार्टी और खुद के संस्कारों को सामने रख दिया है।
सौ साल पुरानी पार्टी की सौ साल पुरानी सोच
कांग्रेस नेता के बयान पर भाजपा के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि 100 साल पुरानी पार्टी की सोच 100 साल पुरानी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि बार -बार महिलाओं के प्रति कांग्रेस नेताओं की ओछी सोच सामने आई है। कभी जन-सभाओं में महिलाओं के लिए अपशब्द का इस्तेमाल, कभी गर्ल चाइल्ड पर अभद्र टिप्पणी, तो अब मीडिया में लड़कियों की शादी की उम्र के विषय में अयोग्य बयान, यह अत्यंत निंदनीय है और मातृशक्ति का घोर अपमान है। ऐसी विकृत मानसिकता शर्मनाक है। 21वीं सदी के भारत में ऐसी पिछड़ी विचारधारा समाज के लिए हानिकारक है। ये दर्शाता है कि 100 साल पुरानी पार्टी की सोच 100 साल पुरानी है।