सोमवार, 30 मई 2022

भाईचारा बनाए रखने निर्विरोध निर्वाचन पर शिवराज का जोर

मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में समरस पंचायतों पर जोर है। वे चाहते हैं कि पंचायतों में चुनाव के दौरान लड़ाई-झगड़े ज्यादा होते हैं, इससे भाईचारा पर प्रभाव पड़ता है। इसके लिए प्रदेश में पंचायत चुनाव में समरस पंचायत याने



निर्विरोध निर्वाचन पर जोर दिया जाए और अधिक से अधिक पंचायतों में पदाधिकारियों का निर्वाचन निर्विरोध हो। मुख्यमंत्री ने इसके लिए ऐसी पंचातयों को पुरस्कृत करने भी की घोषणा की है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में लोगों के बीच प्रेम, भाईचार और समरसता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। वे इसके लिए लगातार पंचायतों को लेकर चुनाव में समरस पंचायतों पर जोर देकर लोगों को इस बात के लिए प्रेरित कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव याने गांव की सरकार में अधिक से अधिक पंचायतों में बिना चुनाव कराए निर्विरोध पदाधिकारियों का निर्वाचन हो। इससे झगड़े तो कम होंगे साथ ही समरसता भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अधिकारियों के साथ बैठक भी की और इस बात पर जोर भी दिया कि समरस पंचायतों को लेकर काम किया जाए।
भाईचारे में न आए कमी
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव उत्सव के समान हैं। लोकतंत्र के इस विशाल आयोजन में आपसी भाईचारे, प्रेम और समरसता में किसी भी तरह की कमी नहीं आए, इसलिए निर्विरोध निर्वाचन को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। अतः समरस पंचायतों और विकास की दृष्टि से आदर्श ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। ऐसी ग्राम पंचायतें, जहाँ निर्विरोध और सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न होंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।
गांवों का भला होगा तो अच्छा होगा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि पंचायत के चुनाव में कई बार लड़ाई झगड़ा बहुत बढ़ती है, एक कोशिश यह हो जाए की कुछ पंचायत ऐसी हो जाएं समरस पंचायत वहां चुनाव नहीं होंगे हम मिलकर तय करेंग। ताकि इन समरस पंचायतों में कुछ सुविधाएं हम देंगे। जैसे उस पंचायत में जितने भी हितग्राही हैं विभिन्न योजनाओं के सभी को एक साथ लाभान्वित कर देंगे आउट ऑफ द वे जाकर। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे गांव में हम गरीब कल्याण और बाकी योजनाओं को शत प्रतिशत सैचुरेट कर देंगे, आप इसके लिए उन्हें प्रेरित करें. गांव का भला हो जाएगा तो अच्छा रहेगा।
काम कठिन, पर कोशिश करें
मुख्यमंत्री अधिकारियों से कहा कि मैं मानता हूं कठिन काम है लेकिन, कई जगह हो सकता है और जहां हो सकते हैं वहां आप लोग पूरी कोशिश करिए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री और विधायकों को भी इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि वे पंचायतों में निर्विरोध चुनाव के लिए प्रेरित करे सके।  
सरपंच के निर्विरोध निर्वाचन पर 5 लाख रूपए
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी पंचायत में सरपंच का निर्वाचन अगर निर्विरोध रूप से किया जाता है तो उस पंचायत को 5 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। संपूर्ण पंचायत अर्थात समस्त पंच और सरपंच निर्विरोध निर्वाचित होते हैं तो पंचायत को 7 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरपंच पद के लिए वर्तमान निर्वाचन और पिछला निर्वाचन निरंतर निर्विरोध रूप से होने पर पंचायत को 7 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
सभी पदों पर महिलाओं के निर्विरोध निर्वाचन पर 15 लाख रूपए
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि अगर पंचायत में सरपंच एवं पंच के सभी पदों पर महिलाओं का निर्वाचन होता है तो पंचायत को 12 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार पंचायत में सरपंच एवं पंच के सभी पदों पर महिलाओं का निर्वाचन निर्विरोध रूप से होने पर पंचायत को 15 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

भाजपा मैदान में सक्रिय, कांग्रेस बैठकों तक सीमित

शिवराज, वीडी शर्मा कर रहे कसावट, कमलनाथ दे रही नसीहत

प्रदेश में पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने सक्रियता बढ़ा दी है। भाजपा जहां तैयारियों के मामले में कांग्रेस से काफी आगे नजर आ रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी ष्शर्मा दोनों ही लगातार रणनीति के साथ सरकार और संगठन में कसावट करते नजर आ रहे हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस अब तक बैठकों तक सिमट कर रही गई है। बैठकों में कमलनाथ नेताओं को नसीहत देकर मैदान में जाने की बात कह रहे हैं। 

प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखें घोशित हो गई है और नगरीय निकाय चुनाव की तारीखों की घोशणा होने का इंतजार है। चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने सक्रियता दिखानी तेज कर दी है। भाजपा में लगातार बैठकों के बाद अब बूथ स्तर पर कार्यकर्ता को सक्रिय करने मैदान में उतार दिया है। वहीं  सांसदों, मंत्रियों और विधायकों को जिम्मेदारी देकर सक्रिय कर दिया गया है। संगठन पदाधिकारियों को भी मैदानी सक्रियता दिखाने को कहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा खुद संगठन में कसावट लाने लगातार कार्यकर्ता और पदाधिकारियों से संपर्क कर रहे है। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया। बार बार संगठन द्वारा शिकायत मिलने के बाद उन्होंने जिलों में अधिकारियों की सुबह की बैठकें लेने का दौर तेज कर दिया। इन बैठकों में मुख्यमंत्री अधिकारियों पर नाराजगी भी उतार रहे हैं साथ ही भ्रश्टाचार पर लगाम लगाने की बात कहते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री की ये बैठकें भी पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में अधिकारियों पर कसावट का संदेश दे रही है। 

कांग्रेस से आगे निकली भाजपा

चुनावी तैयारियों में अगर देखा जाए तो भाजपा कांग्रेस से काफी आगे निकल चुकी है। पंचायत चुनाव की घोशणा के पहले से ही जब सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा था, तब से भाजपा में बैठकों का दौर तेज हो चला था। संगठन ने पदाधिकारियों के अलावा कार्यकर्ता को मैदान में सक्रिय कर दिया था। वहीं कांग्रेस अब भी बैठकों में सिमट कर रह गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बैठकें लेकर नेताओं को मैदान में सक्रिय करने नसीहतें दे रहे हैं। वे बार बार यही बात दोहरा रहे हैं कि अगर अब भी एकजुट होकर चुनाव मैदान में नहीं दिखे तो परिणाम आप खुद जान सकते हैं। 

मुख्यमंत्री के साथ दोनों अध्यक्षों की प्रतिश्ठा दाव पर

पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव को एक तरह से विधानसभा 2023 की तैयारियां से जोड़कर देखा जा रहा है। इस लिहाज से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने कसावट करनी भी ष्शुरू कर दी है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा की प्रतिश्ठा इन चुनावों में दाव पर है। वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की प्रतिश्ठा लगी हुई है। वे बार बार 2023 में कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं, मगर माना जा रहा है कि इन चुनावों का परिणाम ही दोनों दलों को आईना दिखाएगा।