आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह ने की घोषणा
भोपाल। शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को प्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह ने तोहफा दिया है। उन्होंने कहा कि 62 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक आदिम जाति कल्याण विभाग में आवेदन करें, उन्हें विभाग के स्कूलों में 65 साल की आयु तक सेवा करने का अवसर दिया जाएगा।
आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह आज खंडवा में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुए थे। शाह ने कहा कि शिक्षकों का जितना सम्मान किया जाए वह काम है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी ,विज्ञान, खेल और गणित के विषयों के शिक्षकों की बड़ी कमी है। इस विषय के जो शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए हैं और अपनी सेवा देना चाहते हैं, वह 65 साल की उम्र तक पे माइनस पेंशन योजना के तहत अपने सेवा दे सकेंगे। जल्दी ही इस तरह का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि आदिम जाति विभाग में आवेदन करें। हम उन्हें 11-11 महीनों तक विस्तार देते हुए 65 साल तक उनकी सेवा लेंगे। मंत्री ने कहा कि सेवा विस्तार के लिए पांच साल की परफारेंस चेक की जाएगी। बेहतर परिणाम वाले शिक्षकों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
गुरुवार, 5 सितंबर 2024
बुधवार, 4 सितंबर 2024
सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों वाला जनजातीय गांव
प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में भी दे रहे सेवाएं
भोपाल। मालवा अंचल का एक गांव है पड़ियाल, जिसकी जनसंख्या 5 हजार 500 है। इस गांव से 100 से अधिक अधिकारी है, जो देश-प्रदेश सहित आसपास के राज्यों में सेवारत है। इस गांव के हर घर में औसत एक शासकीय कर्मचारी भी हैं, जिनकी संख्या 300 है। यहां के युवकों में प्रतियोगी परीक्षाओं में आने की होड़ आजादी के समय से ही शुरू हो गई थी। इतना ही नहीं आजादी के बाद हुए विधानसभा चुनाव में यहां के बापू सिंह अलावा कुक्षी विधानसभा के पहले विधायक रहे।
यह गाँव धार जिले के डही विकासखंड के अंतर्गत आता है। जहां साक्षरता दर 90 प्रतिशत है। अधिकारियों के गांव के नाम से मशहूर पड़ियाल में लोग सिर्फ अफसर बनने का सपना देखते हैं। साथ ही यहाँ के युवा अमेरिका और मलेशिया जैसे देशों में कोई इंजीनियर है तो कोई बिजनेस कर रहा है। गाँव में हायर सेकेंडरी स्कूल है, जिसमें 23 शिक्षकों द्वारा 702 विद्यार्थियों को पढ़ाया-लिखाया जाता है।
गांव का सामाजिक ताना-बाना शिक्षा पर है केंद्रित
इस क्षेत्र में लंबे समय से बीआरसी के पद पर कार्य कर रहे मनोज दुबे ने शिक्षा की बेहतरी के लिए कई कार्य किए हैं। नतीजतन यहां शिक्षा की दर काफी ऊंची है। उन्होंने बताया कि गांव के 12 अधिकारी सेवानिवृत्त होकर जन-सेवा के कार्य कर रहे है। वर्तमान में अध्ययन कर रहे युवा बड़ों से प्रेरणा पाकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे है। गांव का सामाजिक ताना-बुना शिक्षा पर केन्द्रित रहता है। बीआरसी दुबे के मुताबिक पड़ियाल में कक्षा 6 से 12 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल में स्मार्ट क्लासेस शुरु की गई है। इस साल नीट में यहां के 4 विद्यार्थी जबकि जेईई मेंस में 3 विद्यार्थी चयनित होकर डॉक्टर और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे है।
इनसे जाना जाता है गांव
एसपी सिंह (डीआईजी), लक्ष्मण सिंह सोलंकी (एडिशनल एसपी), नरेंद्र पाल सिंह (कार्यपालन यंत्री), एमपी सिंह (एसी पीडब्ल्यूडी), डीएस रणदा (अपर संचालक ग्रामीण विकास), नवल सिंह डोडवा (एसडीओ पीडब्ल्यूडी), बीएस चौहान (डीपीओ गृह विभाग), अर्जुन सिंह जमरा (एसडीओ पीडब्ल्यूडी), महेंद्र सिंह अलावा (महाप्रबंधक एयरपोर्ट नई दिल्ली), पर्वत सिंह अलावा (आईईएस रेलवे), महेंद्र पाल अलावा (आईईएस वायरलेस एंड लोकल लूप, मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर सुमेर सिंह अलावा, डॉक्टर के.सी. राणे, डॉक्टर केवल सिंह जमरा, लोकेन्द्र अलावा (एसडीओ आरईएस), करण रणदा (एसीएफ), सुखलाल अलावा (परियोजना अधिकारी जिला पंचायत), सुरेंद्र अलावा (प्रबंधक हेल्थ विभाग), मनीष अलावा (प्रबंधक उद्योग), मुकेश नंदा (एईओ आबकारी), विजेंद्र सिंह मुझाल्दा (प्लाटून कमांडर) सहित अन्य उच्च पदों पर अधिकारी बन देश-प्रदेश में सेवाएं दे रहे है।
गांव की बेटियों ने भी किया नाम रोशन
इस गाँव की बेटियाँ भी किसी से कम नहीं है। यहाँ से पढ़-लिख कर अनेक बेटियों ने गाँव का नाम रोशन किया है। इसमें बबीता बामनिया (डीएसपी), कौशल्या चौहान (टीआई), शकुंतला बामनिया (टीआई), प्रियंका अलावा (थानेदार), रिंकी बामनिया (वाणिज्यिकर अधिकारी), शीतल अलावा (एई एमपीईबी), प्रिया रणदा (एईओ आबकारी), सुनयना डामोर (सिविल जज), गरिमा अलावा (उप निरीक्षक आबकारी), किरण जमरा (नायब तहसीलदार), सुचित्रा रणदा (कराधान अधिकारी), मीना अलावा (सहायक आयुक्त), डॉ. निधि सिंह (एमएस), डॉ. वस्ती रणदा (एमडी), डॉ. निलमणी अलावा (एमएस), डॉ. रिंकू रणदा (एमडी), डॉ. रश्मि रणदा (एमडी), डॉ. अंजना अलावा (प्रोफेसर), डॉ. अनुभूति अलावा (बीडीएस), डॉ. नेहा अलावा (एमएस), डॉ. शर्मिला जमरा (एमडी), संतोषी अलावा (प्रोफेसर), बसंती अलावा (प्रोफेसर) सहित अन्य बेटियाँ उच्च पदों पर पदस्थ है।
भोपाल। मालवा अंचल का एक गांव है पड़ियाल, जिसकी जनसंख्या 5 हजार 500 है। इस गांव से 100 से अधिक अधिकारी है, जो देश-प्रदेश सहित आसपास के राज्यों में सेवारत है। इस गांव के हर घर में औसत एक शासकीय कर्मचारी भी हैं, जिनकी संख्या 300 है। यहां के युवकों में प्रतियोगी परीक्षाओं में आने की होड़ आजादी के समय से ही शुरू हो गई थी। इतना ही नहीं आजादी के बाद हुए विधानसभा चुनाव में यहां के बापू सिंह अलावा कुक्षी विधानसभा के पहले विधायक रहे।
यह गाँव धार जिले के डही विकासखंड के अंतर्गत आता है। जहां साक्षरता दर 90 प्रतिशत है। अधिकारियों के गांव के नाम से मशहूर पड़ियाल में लोग सिर्फ अफसर बनने का सपना देखते हैं। साथ ही यहाँ के युवा अमेरिका और मलेशिया जैसे देशों में कोई इंजीनियर है तो कोई बिजनेस कर रहा है। गाँव में हायर सेकेंडरी स्कूल है, जिसमें 23 शिक्षकों द्वारा 702 विद्यार्थियों को पढ़ाया-लिखाया जाता है।
गांव का सामाजिक ताना-बाना शिक्षा पर है केंद्रित
इस क्षेत्र में लंबे समय से बीआरसी के पद पर कार्य कर रहे मनोज दुबे ने शिक्षा की बेहतरी के लिए कई कार्य किए हैं। नतीजतन यहां शिक्षा की दर काफी ऊंची है। उन्होंने बताया कि गांव के 12 अधिकारी सेवानिवृत्त होकर जन-सेवा के कार्य कर रहे है। वर्तमान में अध्ययन कर रहे युवा बड़ों से प्रेरणा पाकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे है। गांव का सामाजिक ताना-बुना शिक्षा पर केन्द्रित रहता है। बीआरसी दुबे के मुताबिक पड़ियाल में कक्षा 6 से 12 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल में स्मार्ट क्लासेस शुरु की गई है। इस साल नीट में यहां के 4 विद्यार्थी जबकि जेईई मेंस में 3 विद्यार्थी चयनित होकर डॉक्टर और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे है।
इनसे जाना जाता है गांव
एसपी सिंह (डीआईजी), लक्ष्मण सिंह सोलंकी (एडिशनल एसपी), नरेंद्र पाल सिंह (कार्यपालन यंत्री), एमपी सिंह (एसी पीडब्ल्यूडी), डीएस रणदा (अपर संचालक ग्रामीण विकास), नवल सिंह डोडवा (एसडीओ पीडब्ल्यूडी), बीएस चौहान (डीपीओ गृह विभाग), अर्जुन सिंह जमरा (एसडीओ पीडब्ल्यूडी), महेंद्र सिंह अलावा (महाप्रबंधक एयरपोर्ट नई दिल्ली), पर्वत सिंह अलावा (आईईएस रेलवे), महेंद्र पाल अलावा (आईईएस वायरलेस एंड लोकल लूप, मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर सुमेर सिंह अलावा, डॉक्टर के.सी. राणे, डॉक्टर केवल सिंह जमरा, लोकेन्द्र अलावा (एसडीओ आरईएस), करण रणदा (एसीएफ), सुखलाल अलावा (परियोजना अधिकारी जिला पंचायत), सुरेंद्र अलावा (प्रबंधक हेल्थ विभाग), मनीष अलावा (प्रबंधक उद्योग), मुकेश नंदा (एईओ आबकारी), विजेंद्र सिंह मुझाल्दा (प्लाटून कमांडर) सहित अन्य उच्च पदों पर अधिकारी बन देश-प्रदेश में सेवाएं दे रहे है।
गांव की बेटियों ने भी किया नाम रोशन
इस गाँव की बेटियाँ भी किसी से कम नहीं है। यहाँ से पढ़-लिख कर अनेक बेटियों ने गाँव का नाम रोशन किया है। इसमें बबीता बामनिया (डीएसपी), कौशल्या चौहान (टीआई), शकुंतला बामनिया (टीआई), प्रियंका अलावा (थानेदार), रिंकी बामनिया (वाणिज्यिकर अधिकारी), शीतल अलावा (एई एमपीईबी), प्रिया रणदा (एईओ आबकारी), सुनयना डामोर (सिविल जज), गरिमा अलावा (उप निरीक्षक आबकारी), किरण जमरा (नायब तहसीलदार), सुचित्रा रणदा (कराधान अधिकारी), मीना अलावा (सहायक आयुक्त), डॉ. निधि सिंह (एमएस), डॉ. वस्ती रणदा (एमडी), डॉ. निलमणी अलावा (एमएस), डॉ. रिंकू रणदा (एमडी), डॉ. रश्मि रणदा (एमडी), डॉ. अंजना अलावा (प्रोफेसर), डॉ. अनुभूति अलावा (बीडीएस), डॉ. नेहा अलावा (एमएस), डॉ. शर्मिला जमरा (एमडी), संतोषी अलावा (प्रोफेसर), बसंती अलावा (प्रोफेसर) सहित अन्य बेटियाँ उच्च पदों पर पदस्थ है।
रविवार, 1 सितंबर 2024
मुस्लिम महिलाएं मस्जिदों में पढ़ सकेंगी नमाज
ईदगाह की मस्जिद से हुई इसकी शुरूआत
भोपाल। राजधानी की मस्जिदों में अब मुस्लिम महिलाएं भी नमाज अदा कर सकेंगी। महिलाओं के मस्जिद में सजदा करने की यह रिवायत 94 साल पहले खत्म हो चुकी थी। इसकी शुरुआत बीते शुक्रवार यानी 30 अगस्त को जुमे की नमाज अदा करने के साथ की गई।
मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में जाकर नमाज अदा करने के लिए राजधानी की ईदगाह की नजमुल मस्जिद में तमाम खास इंतजाम किए गए। बीते शुक्रवार 30 अगस्त को महिलाओं ने मस्जिद में नमाज अदा की। इसे लेकर ऑल इंडिया वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाहिस्ता अंबर ने कहा है, भोपाल में महिलाओं की नमाज अदायगी पूरे हिंदुस्तान के लिए पैगाम है। इसके बाद आम नमाजों में भी इसकी शुरुआत की जाएगी। आने वाले शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज शहर की महिलाओं के लिए खास होगी। मस्जिद की प्रबंधन कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां नमाज पढ़ने आने वाली महिलाओं के लिए पर्दे के साथ अलग फ्लोर पर इंतजाम किए गए हैं। महिलाओं के वुजू और वॉशरूम का भी अलग से इंतजाम किया गया है। मस्जिद नजमुल में जुमे की नमाज का खुतबा दोपहर एक बजे शुरू होता है। यहां आने वाली महिलाएं एक अलग फ्लोर पर खुतबा भी सुन पाएंगी। साथ ही इमाम द्वारा पढ़ाई जाने वाली नमाज में जमात के साथ शामिल हो सकेंगी।
नवाबों के शासन में महिलाएं मस्जिद में पढ़ती थी नमाज
भोपाल की रियासत अक्सर बेगमों के हाथ में रही है। उस जमाने में महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की पूरी इजाजत थी। बकायदा मस्जिद में नमाज के लिए उनको अलग से सुविधाएं मुहैया कराई जाती थी। भोपाल की कुलसुम बिया, मस्जिद मांजी साहिबा, मस्जिद नन्हीं बिया जैसी कई मस्जिदें महिलाओं के ही नाम पर हैं। जब तक बेगमों का शासन रहा तब तक महिलाओं का मर्दों की तरह मस्जिदों में नमाज अदा करना आम बात थी। हालांकि, भोपाल में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में महिलाओं के नमाज पढ़ने की अलग से व्यवस्था है।
बेगमों का दौर खत्म हुआ तो महिलाओं सीमित कर दिए दायरे
भोपाल में साल 1930 में नवाब सुल्तान जहां बेगम का जब निधन हुआ, उसके बाद ही समाज में कायम रिवाजों में बदलाव आने शुरू हुए। साल 1950 आते-आते महिलाओं ने मस्जिदों में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। हालांकि, यह किसी फतवे या मर्दों के द्वारा चलाई गई मुहिम के कारण नहीं हुआ था, बल्कि बेगमों का दौर खत्म होते ही महिलाओं ने अपने दायरे सीमित कर लिए थे।
मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में जाकर नमाज अदा करने के लिए राजधानी की ईदगाह की नजमुल मस्जिद में तमाम खास इंतजाम किए गए। बीते शुक्रवार 30 अगस्त को महिलाओं ने मस्जिद में नमाज अदा की। इसे लेकर ऑल इंडिया वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाहिस्ता अंबर ने कहा है, भोपाल में महिलाओं की नमाज अदायगी पूरे हिंदुस्तान के लिए पैगाम है। इसके बाद आम नमाजों में भी इसकी शुरुआत की जाएगी। आने वाले शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज शहर की महिलाओं के लिए खास होगी। मस्जिद की प्रबंधन कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां नमाज पढ़ने आने वाली महिलाओं के लिए पर्दे के साथ अलग फ्लोर पर इंतजाम किए गए हैं। महिलाओं के वुजू और वॉशरूम का भी अलग से इंतजाम किया गया है। मस्जिद नजमुल में जुमे की नमाज का खुतबा दोपहर एक बजे शुरू होता है। यहां आने वाली महिलाएं एक अलग फ्लोर पर खुतबा भी सुन पाएंगी। साथ ही इमाम द्वारा पढ़ाई जाने वाली नमाज में जमात के साथ शामिल हो सकेंगी।
नवाबों के शासन में महिलाएं मस्जिद में पढ़ती थी नमाज
भोपाल की रियासत अक्सर बेगमों के हाथ में रही है। उस जमाने में महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की पूरी इजाजत थी। बकायदा मस्जिद में नमाज के लिए उनको अलग से सुविधाएं मुहैया कराई जाती थी। भोपाल की कुलसुम बिया, मस्जिद मांजी साहिबा, मस्जिद नन्हीं बिया जैसी कई मस्जिदें महिलाओं के ही नाम पर हैं। जब तक बेगमों का शासन रहा तब तक महिलाओं का मर्दों की तरह मस्जिदों में नमाज अदा करना आम बात थी। हालांकि, भोपाल में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में महिलाओं के नमाज पढ़ने की अलग से व्यवस्था है।
बेगमों का दौर खत्म हुआ तो महिलाओं सीमित कर दिए दायरे
भोपाल में साल 1930 में नवाब सुल्तान जहां बेगम का जब निधन हुआ, उसके बाद ही समाज में कायम रिवाजों में बदलाव आने शुरू हुए। साल 1950 आते-आते महिलाओं ने मस्जिदों में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। हालांकि, यह किसी फतवे या मर्दों के द्वारा चलाई गई मुहिम के कारण नहीं हुआ था, बल्कि बेगमों का दौर खत्म होते ही महिलाओं ने अपने दायरे सीमित कर लिए थे।
सनातन संस्कृति को निरंतर कायम रखा हमारे संतों ने
- मुख्यमंत्री ने जैन आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज से लिया आशीर्वाद
मुख्यमंत्री डा मोहन यादव आज राजस्थान के झालरापाटन में जैन मुनि श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के 52 वें जन्म दिवस और 36 वें चातुर्मास कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों का आर्शीवाद पूंजी की तरह है। हमारे देश में संतों और धर्माचार्यों का स्थान सर्वोच्च है। सम्पूर्ण समाज संतों से मार्गदर्शन प्राप्त करता है। हमारे संतों ने सनातन संस्कृति को निरंतर कायम रखा है। किसी मनुष्य ने स्वर्ग नहीं देखा लेकिन संतों का सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना जीवन को धन्य करने और स्वर्गिक आनंद की अनुभूति प्राप्त करने जैसा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि काल के प्रवाह में यूनान,रोम और कई देशों का अस्तित्व और सभ्यता खत्म हो गई क्योंकि उन देशों में संत परंपरा नहीं थी।
मेरी जन्म वर्षगांठ पर निरंतर तीन वर्ष आकर हैट्रिक बनाई
जैन मुनि प्रज्ञा सागर जी महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश की उन्नति के लिए समर्पित और ऊर्जावान मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. यादव ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद भी दिया। आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेरे 50 वें और 51 वें जन्मदिवस पर उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में पधारे थे। आज वे मुख्यमंत्री के रूप में आए हैं। निश्चित ही उनका यह भाव प्रभावित करता है। उन्होंने मेरी जन्म वर्षगांठ के अवसर पर निरंतर तीन वर्ष आकर हैट्रिक बनाई है। इस चातुर्मास कार्यक्रम और महोत्सव को उन्होंने बहुमुखी बना दिया है।
अच्छे काम मनुष्य को बना देता है देव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रोटरी क्लब उज्जैन द्वारा संचालित इंटरसिटी साक्षरता कार्यक्रम के प्रतिनिधियों को आज वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कई जन्मों के पुण्य के बाद मनुष्य का जन्म प्राप्त होता है। इसके साथ ही सेवा का अवसर भी मिलता है। अपने सद्कर्मों से मानव बना जा सकता है। अच्छे कार्य मनुष्य को देव बना देते हैं। देव या देवता वही होता है जो देने का भाव रखे। मुख्यमंत्री ने रोटरी क्लब के सदस्यों को उज्जैन में रक्तदान जैसे पुण्य कार्य के लिए अधोसंरचना तैयार करने और रतलाम में रोगियों के लिए डायलेसिस की सुविधा प्रारंभ करने की प्रशंसा की।
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