बुधवार, 23 दिसंबर 2015

होगा जिला अध्यक्षों के काम का आकलन


 कांग्रेस नये साल में बदलेगी डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिला अध्यक्ष

प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों के चार माह के काम काज का आकलन करेगी. यह आकलन ही यह बताएगा कि व्यक्ति पद पर बना रहेगा या नहीं. इस आकलन की रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा प्रदेश के राष्ट्रीय नेताओं को दी जाएगी, ताकि वे भी यह जान सकेंगे की उनका समर्थक पद पर रहने काबिल है या नहीं.
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद  जब विरोध के स्वर मुखरित हुए तो प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला टाल दिया था. इसके बाद जिला अध्यक्षों की बैठक में उन्हें जिला स्तर पर सक्रियता दिखाने को कहा गया था. अब प्रदेश अध्यक्ष नये साल में याने जनवरी माह के पहले सप्ताह में एक बैठक जिला अध्यक्षों की लेने जा रहे हैं. इस बैठक में जिला अध्यक्षों से पिछले चार माह में उनके जिलों किए गए कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन और अन्य गतिविधियां जिसमें जिला अध्यक्ष की सक्रियता दिखाई दे, वह रिपोर्ट साथ लाने को कहा जा रहा है. प्रदेश अध्यक्ष ने यह रास्ता इसलिए निकाला है कि ताकि जहां पर उन्हें जिला अध्यक्ष को बदलना है, वे वहां बदलकर किसी दबाव से बच जाएं. जिला अध्यक्ष अपने चार माह के कामकाज की रिपोर्ट बनाने में जुटे हैं. सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने यह इसलिए तय किया है कि वे जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अगर करते हैं तो विवादों से बच जाएं साथ ही जिला अध्यक्षों के कामकाज का आकलन भी किया जा सके. राजधानी में होने वाली जिला अध्यक्षों की इस बैठक प्रदेश पदाधिकारी जिला अध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट लेंगे. इसके बाद इस रिपोर्ट को प्रदेश अध्यक्ष यादव ने वरिष्ठ नेताओं खासकर प्रदेश  प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा दिग्विजयसिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी को भी भेजने की रणनीति तय की है. जिला अध्यक्षों के इस लेखा-जोखा की रिपोर्ट तैयार कराने के पीछे प्रदेश कांग्रेस का मकसद साफ है कि जिला इकाईयों को और अधिक सक्रिय किया जाए साथ ही जहां पर निष्क्रिय जिला अध्यक्ष हंै उन्हें बदला जाए.
बच जाएंगे वरिष्ठों के दबाव से
प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव जिन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, मगर वहां पर दिग्गज नेताओं के कारण वे नहीं बदल पा रहे हैं. इस स्थिति से बचने के लिए उन्होंने यह रास्ता निकाला है. जिला अध्यक्षों को लेखा-जोखा भी वे इसलिए वरिष्ठ नेताओं को भेजकर यह दिखाना चाहते हैं कि आपके समर्थक नेता जिले में कितने सक्रिय हैं. सूत्रों की माने तो इस रिपोर्ट के साथ वे उन जिलों के जिला अध्यक्षों की जानकारी भी वरिष्ठों देंगे, जहां से उनकी शिकायतें आई हैं. 
डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में बदले जाएंगे अध्यक्ष
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के साथ ही यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे वर्तमान जिला अध्यक्षों में से करीब दो दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, अगर उस वक्त विरोध न होता तो वे अध्यक्षों की नियुक्ति कर देते, मगर विरोध के कारण यह सूची अटक गई है. इसके बाद यादव ने अब फिर नये साल में जिला अध्यक्षों को बदलने का मन बनाया है, मगर इस बार वे पहले जिला अध्यक्षों के कामकाज का लेखा-जोखा देंखेंगे. इसी कामकाज के आधार पर ही यह तय होगा कि वर्तमान जिला अध्यक्ष बने रहेगा या नहीं. फिलहाल इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, राजगढ़, सीहोर, होशंगाबाद, विदिशा, उज्जैन सहित डेढ़Þ दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी यादव कर चुके हैं.

अध्यक्ष को लेकर घमासान

सहमति से जिला अध्यक्ष निर्वाचन कराना चाहती है भाजपा, दिल्ली तक पहुंच रहे दावेदार
प्रदेश भाजपा में चल रहे संगठनात्मक चुनाव को लेकर अब जिला अध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों की सक्रियता तेज हो गई है. इस पद के लिए घमासान को देखते हुए संगठन ने वर्तमान जिला अध्यक्षों और चुनाव अधिकारियों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में इस बात पर सहमति बनाने का प्रयास किए जाएंगे कि जिला अध्यक्ष का निर्वाचन सहमति से हो.
भाजपा में संगठनात्मक चुनाव के तहत अब जिला अध्यक्षों के चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है. इस प्रक्रिया के शुरू होने के पहले ही पद के लिए दावेदारों का घमासान मच गया है. हर जिले में एक से ज्यादा दावेदार इस पद के लिए सामने आ रहे हैं. इस वजह से संगठन खुद अब चिंतित हो उठा है. जिला अध्यक्ष पद के लिए जब दावेदारों की दावेदारी बढ.ती नजर आईतो संगठन ने अब जिला अध्यक्षों और जिला चुनाव अधिकारियों की बैठक मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में बुलवाई है. इस बैठक में सभी जिलों की जानकारी मंगवाईगई है. साथ ही इस बैठक में संगठन इस बात की गाइड लाइन तय करना चाहता है कि जिन जिलों में चुनाव की प्रक्रिया होनी है, वहां सहमति से चुनाव कराए जाएं और मतदान की स्थिति निर्मित न हो. प्रदेश चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह के मुताबिक जिला अध्यक्ष निर्वाचन की प्रक्रिया इसी माह की 27-28 तारीख को कराईजानी है. प्रयास इस बात का है कि सभी जिलों में सहमति से जिला अध्यक्ष का निर्वाचन हो जाए. 
दूसरी ओर दावेदारों ने अपने आकाओं पर पद पाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है. दावेदार किसी भी रूप से इस पद को पाना चाहते हैं. कुछ दावेदार तो इसके लिए दिल्ली तक पहुंच गए और कुछ ने भोपाल में डेरा डाल रखा है. सबसे ज्यादा संकट भाजपा के लिए भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर शहर जिला अध्यक्ष का पद बन गया है. यहां पर दावेदारों की संख्या काफी है. इन शहरों में वर्तमान जिला अध्यक्ष और स्थानीय विधायक आमने-सामने होते नजर आ रहे हैं. विधायक अपने सर्मथक को जिला अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, तो वर्तमान अध्यक्ष अपने सर्मथकों को आगे बढ.ा रहे हैं. अध्यक्ष पद पाने के लिए दावेदारी कर रहे लोग अपने आकाओं के पास निरंतर पहुंच रहे हैं. जिला अध्यक्षों के निर्वाचन के बाद इस महीने में सांसदों और विधायकों की बैठक भी आयोजित की जा रही है. इस बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर चर्चा की जाएगी. इसके बाद अगले माह भाजपा को नया अध्यक्ष भी मिल जाएगा. इन जिलों में नए चेहरों की तलाश
भोपाल, सीहोर, राजगढ., विदिशा, छिंदवाड.ा, बैतूल, होशंगाबाद, भिंड, बड.वानी, आगर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, नीमच, रतलाम, अलीराजपुर, गुना, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर नगर, ग्वालियर ग्रामीण, सागर, टीकमगढ., पन्ना, रीवा, सीधी,सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, जबलपुर नगर, जबलपुर ग्रामीण में संगठन नया चेहरा जिला अध्यक्ष के रूप में लाना चाहता है.
वहीं रायसेन, खरगोन, खंडवा, मंदसौर, धार, शिवपुरी,अशोक नगर, अनुपपूर, सिवनी में मौजूदा अध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी सौंपे जाने का संगठन ने करीब-करीब मन बना लिया है. जबकि सतना में जिला अध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया जा रहा है.इसी तरह की स्थिति सागर की भी है. यहां पर वर्तमान जिला अध्यक्ष के पक्ष में परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह हैं, जो चुनाव नहीं कराना चाहते हैं. मगर अन्य नेता यहां पर चुनाव कराने का मन बना चुके हैं.

लामबंद हो रहे पांच दल

गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाईदल प्रदेश में एक साथ करेंगे हर जिले में संघर्ष
प्रदेश में हाल ही में हुए लोकसभा के उपचुनाव में एक होकर ताकत दिखाने का प्रयास कर चुके पांच राजनीतिक दलों ने अब एक और साझा कार्यक्रम बनाया है. ये दल अब एक साथ 2018 को लक्ष्य बनाकर प्रदेश के हर जिले में संघर्षकरेंगे. इन दलों के प्रदेश प्रमुखों ने तय किया है कि इस दौरान वे जनता के बीच पहुंचकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अब तक प्रदेशहित के लिए क्या किया इसकी जानकारी देंगे. 
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में हाल में हुए उपचुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे से दूरी बनाकर चलने वाले पांच राजनीतिक दल एक हुए और उपचुनाव लड.ा. इसके बाद उनका हौसला कुछ ज्यादा बढ.ता नजर आने लगा है. अब इन पांच दलों जनता दल यू, माकपा, भाकपा, राष्ट्रीय समानता दल और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने यह तय किया कि वे प्रदेश में अब अपनी नींव को मजबूत करेंगे. अलग-अलग होकर चुनाव लड.ने के बजाय संगठित होकर वे चुनाव लडे.ंगे. इन दलों के प्रदेश प्रमुखों ने राजधानी में हाल ही में एक बैठक की और बैठक में रतलाम-झाबुआ उपचुनाव की समीक्षा की. समीक्षा के बाद यह तय किया गया कि चुनाव लड.ने के साथ-साथ वे अब संगठित होकर जनता के साथ मिलकर प्रदेश सरकार और कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंकेंगे. इसके लिए वे जल्द ही रणनीति तय करने जा रहे हैं.
बैठक में यह तो तय हो गया कि अब वर्ष2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से रणनीति बनाकर काम किया जाए. इसके लिए तय यह किया गया कि हर जिले में एक मंच पर ये दल एक साथ बैठकर संघर्षकरेंगे. हर जिले में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ बिगुल फूंकेंगे. जनता के बीच जाकर उन्हें यह बताने का प्रयास करेंगे. कि भाजपा और कांग्रेस ने अब तक प्रदेश हित में कितना और कैसे काम किया. इसके अलावा निम्न और मध्यमवर्गीय तबके लिए ये दल कितने काम करने में सफल रहे हैं. 
राष्ट्रीय स्तर पर भले ही ये दल बिखरे नजर आ रहे हों, मगर मध्यप्रदेश में इन दलों ने एकजुटता दिखाने का जो प्रयास किया है वह भविष्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को चिंता में डालने का काम करेंगे. इन दलों ने जनता के बीच जाकर दलित व पिछड.ों पर हो रहे अत्याचारों के मामले पर मुहिम छेड.ने की रणनीति बनाई है और अब जल, जंगल और जमीन की लड.ाईको ये जनता के बीच ले जाकर तेज करेंगे. विशेष कर इन दलों की रणनीति आदिवासी और पिछडे. वर्ग बाहुल्य वाले जिलों में संघर्ष तेज करने की है. 
जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव का कहना है कि हमने सबसे पहले गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर पिछला विधानसभा चुनाव लड.ा. हालांकि परिणाम हमारे पक्ष में नहीं रहा, लेकिन हम मजबूत होकर उभरे. जहां भी हमारे प्रत्याशी मैदान में थे, हमें पूर्व की अपेक्षा ज्यादा मत मिले. यादव ने कहा कि अब हम प्रदेश में गठबंधन कर अपना प्रभाव प्रदेश में दिखाएंगे. जिस दल का जिस क्षेत्र में प्रभाव है, हम उस क्षेत्र में उस दल की ताकत हो और बढ.ाएंगे. इसके लिए एक एजेंडा जल्द ही तैयार किया जाएगा.
 माकपा के प्रदेश सचिव बादल सरोज का कहना है कि प्रदेश की जनता में भाजपा और कांग्रेस को लेकर लगातार नाराजगी बढ. रही है. प्रदेश का मतदाता अब मजबूत विकल्प की तलाश कर रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में हम अब संगठित होकर चुनाव लड.ने की तैयारी कर चुके हैं. रतलाम-झाबुआ में हमने पहला चुनाव लड.ा. अब मैहर में होने वाले उपचुनाव में हम मजबूती के साथजनता के बीच पहुंचेंगे. हमे विश्‍वास है यहां पर नतीजा चौंकाने वाला होगा. इसके साथ ही प्रदेश भर में हम एक साथ संघर्ष करेंगे.

मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

पैदा होते ही बीमारियां जकड़ रही बच्चों को

विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना भोपाल गैस त्रासदी को भले ही 31 साल बीत रहे हैं, मगर इस त्रासदी का असर अब भी भोपाल में जन्म ले रहे बच्चों में दिखाई दे रहा है. बच्चों को हृदयघात,शरीर के अंगों में टेड़ापन आना, तुतलाना के अलावा अन्य कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी किसी को कल्पना तक नहीं थी. आज भी राजधानी के बड़ी संख्या में गैस  पीड़ितों के बच्चे इन बीमारियों को भोग रहे हैं.
1984 में घटी गैस त्रासदी आज भी भोपाल के लोगों को रुला देती है. आज भी कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपनों को खोने के बाद त्रासदी के बाद जन्म लेने वाले बच्चों में हो रही तरह-तरह की बीमारियों को लेकर चिंतित और भयभीत हैं. विशेषकर पुराने शहर की उन बस्तियों में आज भी बड़ी संख्या  में ऐसे बच्चें हैं, जो जन्म लेते ही बीमारियों के आगोश में आ जाते हैं. बच्चों में हो रही इन बीमारियों को लेकर राजधानी में संभावना ट्रस्ट द्वारा एक शोध  कराया जा रहा है. इस शोध कार्य में लगे को-आर्डिनेटर रीतेश पाल ने बताया कि शोध के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है. प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आई है कि अपीड़ित आबादी के मुकाबले जहरीली गैस या प्रदूषित जल का असर प्रभावित आबादी के बच्चों पर खास दिखाई देता है. उन्होंने बताया कि शोध में इस आबादी के 2500 से ज्यादा ऐसे बच्चों को शामिल किया और इस बात की पुष्टि हुई कि इन बच्चों को जन्म लेते ही बीमारियों ने घेर लिया. शोध कार्य में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 30 चिकित्सकों ने अब तक 1700 से ज्यादा बच्चों में इस तरह की बीमारियों के लक्ष्ण देखे. पाल की सहयोगी आफरीन का कहना है कि वे सिर्फ बच्चों की विकृति के बारे में ही जानकारी नहीं जुटा रहे, बल्कि उनके इलाज क लिए भी किस तरह मदद की जाए इस बारे में भी कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब तक मंदबुद्धि, सेरेब्रल पाल्सी (अण्डकोष), सिन्डेक्टिली-पालिटेक्टिली (ऊंगलियों की विकृति) तथा जन्मजात विकृतियों वाले 164 बच्चों का इलाज सरकारी और गैर सरकारी चिकित्सा केन्द्रों में कराया जा रहा है. इनका इलाज संभावना ट्रस्ट द्वारा कराया जा रहा है. अब तक 43 बच्चों का इलाज पूरा हो चुका है और वे स्वास्थ हैं.
स्वस्थ होने के बाद खुश है परिजन
गैस प्रभावित बस्ती द्वारका नगर निवासी शांती बाई ने बताया कि उनके ५६ साल के लड़के अभिषेक को हृदय रोग की बीमारी हो गई. इसके बाद परिवार की स्थिति उसका इलाज कराने की नहीं थी. मगर ट्रस्ट द्वारा भोपाल मेमोरियल में उसका आपरेशन कराया आज वह स्वस्थ है. इसी तरह न्यू आरिफ नगर निवासी आयशा ने बताया कि उनके 8 वर्षीय बेटे अमन अण्डकोश की विकृति से पीड़ित था. ट्रस्ट के शोध से जब जानकारी मिली तब उसके बाद ट्रस्ट द्वारा ही हमीदिया चिकित्सालय में उपचार कराया आज वह खुश है. वल्लभ नगर निवासी जीतेन्द्र वैश्य ने बताया कि हमीदिया चिकित्सालय में उनकी लड़की वैष्णवी का भी एक छोटा आपरेशन हुआ, पहले वह तुतलाती थी, अब साफ बोलती है. जिन 43 बच्चों का इलाज हुआ है उनके परिजन आज खुश हैं.
30  हजार से ज्यादा हैं पंजीकृत
संभावना ट्रस्ट के क्लिनिक में गैस पीड़ित एवं कारखाने के समीप की बस्तियों के प्रदूषित भूजल से पीड़ितों की संख्या हजारों में हैं. ट्रस्ट की रचना ढींकरा ने बताया कि क्लीनिक में 30 हजार से ज्यादा की संख्या में लोग पंजीकृत हैं. इनका अंग्रेजी, आयुर्वेद और योग तीनों ही विधियों से उपचार किया जा रहा है.क्लीनिक को चलाने के लिए भारत और ब्रिटेन के 15 हजार से अधिक दानदाता है. उन्होंने बताया कि अंतराष्ट्रीय लेखक डामिनिक लेपियर खुद संभावना ट्रस्ट द्वारा संचालित स्त्री रोग क्लीनिक एवं अनौपचारिक विद्यालय के लिए पैसे जुटाते हैं.

साल दर साल बढ़ रहे एड्स के मरीज

प्रदेश में एड्स के मरीजों की संख्या में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है. बीते 10 सालों में प्रदेश में 2120 एड्स के मरीज मिले हैं. वर्ष 2005 में इनकी संख्या प्रदेश में 1759 मिले थे, वहीं वर्ष 2015 में मरीजों की संख्या 3870 हो गई. प्रदेश में वर्तमान में एड्स के मरीजों की संख्या 43,359 हैं.
मध्यप्रदेश में एड्स के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बाद भी इस बीमारी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2005 में इस बीमारी के नये मरीजों की संख्या 1759 थी, वहीं वर्ष 2015 के अक्तूबर माह तक इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़कर 3870 हो गई थी. वर्ष 2005 में  15,357 मरीजों के टेस्ट लिए थे,जिनमें 1759 मरीज इस बीमारी से ग्रसित मिले थे. वहीं वर्ष 2015 के अक्तूबर माह तक मध्यप्रदेश एड्स कंट्रोल सोसायटी और स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस बीमारी के जांच के लिए 7,85,488 मरीजों के सैम्पल लिए जिनमें से 3870 मरीज इस बीमारी से पीड़ित पाए थे. प्रदेश में लगातार एड्स की मरीजों की संख्या में हो रही वृद्धि देख स्वास्थ्य विभाग और एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा लगातार लोगों को सजग करने अभियान चलाए गए, मगर उसके बाद भी इस तरह के अभियानों में सफलता हासिल नहीं हुई. राज्य में सबसे ज्यादा भयावह स्थिति औद्योगिक नगरी इंदौर जिले की है, जहां पर एड्स के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा 9695 है. इसके बाद जबलपुर जिले में 4327, राजधानी भोपाल जिले में 4268, उज्जैन में 2544 और ग्वालियर जिले में 2489 एड्स के मरीज हैं. 

किस जिले में कितने मरीज

जिला मरीज
इंदौर        9695
जबलपुर 4327
भोपाल 4268
उज्जैन 2544
ग्वालियर        2489
रीवा        2267
मंदसौर 1727
बुरहानपुर         1184
बड़वानी 1023
सिवनी 975
नीमच 922
बालाघाट        841
छिंदवाड़ा        824
रतलाम 823
धार         790
सागर 755
खरगोन 579
देवास 557
खंडवा 553
बैतूल        490
होशंगाबाद        481
सतना 469
मुरैना 449
शिवपुरी 428
झाबुआ 404
भिंड        384
मंडला 362
गुना         321
शाजापुर 286
सीहोर 279
हरदा        228
शहडोल 225
सीधी        211
रायसेन 181
विदिशा 162
छतरपुर 160
कटनी 156
राजगढ़Þ 137
दमोह 133
नरसिंहपुर        132
सिंगरौली        128
अनूपपुर 105
अशोक नगर 91
डिंडोरी 89
दतिया 81
टीकमगढ़Þ 72
पन्ना 55
अलीराजपुर 43
श्योपुरकलां 42
उमरिया 32
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कुल 43,959