भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बार फिर अपने गढ़ छिंदवाड़ा में सक्रिय हुए हैं। इस बार वे जन्मदिन के बहाने अपने बेजान गढ़ छिंदवाड़ा में जान फूंकने का काम कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में मिली कांग्रेस को करारी हार के बाद वे फिर से अपने गढ़ छिंदवाड़ा को अजेय गढ़ बनाने में जुट गए हैं। अब देखना है कि कमलनाथ इस बार छिंदवाड़ा में अपनी उपस्थिति को कितना मजबूत कर पाते हैं?
लोकसभा चुनाव के बाद हाल ही में हुए बुधनी और विजयपुर के उपचुनाव में भी कमलनाथ उतने सक्रिय नजर नहीं आए, जितना की लोकसभा चुनाव के पहले रहे थे। लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा जो कि उनका अपना किला था, उसे हारने के बाद करीब-करीब सक्रिय राजनीति से उन्होंने दूरी बना ली थी। इसके बाद माना जा रहा था कि कमलनाथ उपचुनाव में सक्रिय होंगे। उनका कार्यक्रम भी तय था, मगर बाद में स्वास्थ्यगत कारणों के चलते उन्होंने दूरी बना ली थी। अब जबकि प्रदेश में उपचुनाव हो गया इसके बाद वे अब फिर से अपने जन्मदिन के बहाने छिंदवाड़ा पहुंचे हैं। 18 नवंबर को वे अपने बेजान गढ़ में एक बार फिर जान फूंकने की कवायद करने जा रहे हैं। उनके समर्थकों ने राजधानी पहुंचने के बाद ही इस बात का संकेत दिया था कि कमलनाथ फिर प्रदेश में सक्रिय नजर आएंगे। हालांकि फिलहाल यह माना जा रहा है कि कमलनाथ खुद अपनी कमजोर हुई छिंदवाड़ा की जमीन को मजबूत बनाना चाह रहे हैं। इसके चलते उन्होंने छिंदवाड़ा में सक्रियता दिखाई है और जन्मदिन के बहाने कार्यक्रम आयोजित कर कांग्रेस को मजबूत बनाने का प्रयास करना शुरू कर दिया हैं।
कई साथी साथ छोड़कर बन गए भाजपाई
कमलनाथ और छिंदवाड़ा को एक दूसरे का पर्याय बने 4 दशक से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन छिंदवाड़ा में पिछला एक साल कांग्रेस और कमलनाथ दोनों के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। कमलनाथ के कई करीबी हाथ छुड़ाकर भाजपा में गए, तो छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ को करारी हार झेलनी पड़ी। भाजपा के तंज से इधर कांग्रेस कमलनाथ के जन्मदिन को सियासत से अलग करके देख रही है। कांग्रेस का मानना है कि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। उनका छिंदवाड़ा से रिश्ता भाजपा नहीं समझ सकती। वे एक बार फिर अपने गढ़ में ताकत दिखाने जा रहे हैं।
पहले महाकौशल, फिर प्रदेश
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छिंदवाड़ा में बढ़ी सक्रियता को लेकर कांग्रेस में उनके समर्थकों का कहना है कि कमलनाथ के लिए हमेशा ही पहले छिंदवाड़ा और महाकौशल रहा है। इसके बाद वे प्रदेश में कांग्रेस के मजबूत करने की कवायद करते हैं। इस बार भी वे पहले छिंदवाड़ा और महाकौशल में कमजोर हुई कांग्रेस को पहले मजबूत करेंगे, इसके बाद प्रदेश स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कमलनाथ समर्थकों का मानना है कि बिना कमलनाथ प्रदेश में कांग्रेस मजबूत नहीं हो सकेगी।

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