रविवार, 24 दिसंबर 2023

बदलाव के पहले विभागों से मांगी पिछले पांच साल की रिपोर्ट


जीतू पटवारी ने बढ़ाई सक्रियता, 27 दिसंबर तक लेंगे विभागों की बैठक

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जीतू पटवारी ने संगठन में बदलाव के पहले विभागों से पिछले पांच साल में किए कामों की रिपोर्ट मांगी है। आज रविवार से उन्होंने चार दिनों तक विभागों की बैठकें लेने का सिलसिला शुरू कर दिया है। वे हर दिन दो विभागों की बैठक ले रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जीतू पटवारी ने अब संगठन में कसावट लाने के लिए पहले विभागों की बैठक लेनी शुरू की है। इन बैठकों के पहले उन्होंने विभागों से पिछले पांच साल में उनके द्वारा किए गए कामों की रिपोर्ट मांगी है। इन रिपोर्टों के आधार पर वे अब अगली जिम्मेदारी विभागों को सौंपने की तैयारी कर चुके है। माना यह भी जा रहा है कि पटवारी संगठन में कसावट लाने के लिए बदलाव करने के पहले यह जान लेना चाहते हैं कि कौन पदाधिकारी कितना उपयुक्त है। किसे हटाया जाए और किसे नहीं।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में मिली हार से उभरकर कांग्रेस लोकसभा पर ध्यान लगाना चाहती है। ऐसे में पटवारी ने इसकी शुरुआत संगठन में कसावट के साथ की है। संगठन बैठक के बाद पटवारी प्रदेश का दौरा करेंगे। लोकसभा चुनाव में पार्टी को अधिक से अधिक सीटें मिलें नए प्रदेश अध्यक्ष की प्राथमिकता में है। वर्तमान में कांग्रेस के पास प्रदेश में 29 में से सिर्फ एक ही सीट है। ऐसे में इन सीटों की संख्या बढ़ाना पटवारी के लिए बड़ी चुनौती है।
हताशा को उत्साह में बदले, लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटें
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने महिला कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक में कहा कि विधानसभा चुनाव में मिली हार से हताश ना हो, हताशा को उत्साह में बदलें और लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। महिलाओं की आप को आवाज बनना है, हर जिले में आपकी आवाज सुनाई देनी चाहिए। पटवारी ने कहा कि विभागों और विंग की बैठक के बाद वे प्रदेश े हर जिले का दौरा करेंगे। हमें जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना है। जिलों के दौरे के बाद राजधानी में एक बड़े आंदोलन का तैयारी भी कांग्रेस कर रही है। इस आंदोलन में प्रदेशभर से कांग्रेस कार्याकर्ताओं को बुलाने की तैयारी की जा रही है।

शनिवार, 23 दिसंबर 2023

गौरव दिवस पर अटल स्मारक का भूमिपूजन करेंगे मुख्यमंत्री

भोपाल। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में ग्वालियर की सिरोल पहाड़ी पर प्रस्तावित अटल स्मारक का भूमिपूजन अटलजी
के जन्मदिवस पर ही मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव करेंगे। 25 दिसंबर को सिरोल पहाड़ी पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

डॉ मोहन यादव ग्वालियर गौरव दिवस के अलावा तानसेन अलंकरण समारोह और ऐतिहासिक ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित होने जा रहे “ताल दरबार” कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। सिरोल पहाड़ी पर प्रस्तावित अटल स्मारक में अटलजी से जुड़ी सभी यादों को सहेजा जाएगा। यहां अटलजी की प्रतिमा के साथ संग्रहालय, पुस्तकालय सहित भव्य इमारत तैयार की जाएगी। यह प्रोजेक्ट लगभग 300 करोड़ से ज्यादा की लागत से तैयार किया जाएगा। इसको लेकर बजट की पहली किश्त जिला प्रशासन को जारी की जा चुकी है।
संस्कृति विभाग इस प्रोजेक्ट की मानीटरिंग कर रहा है, जिसको लेकर कुछ दिन पहले भोपाल से आकर टीम ने निरीक्षण भी किया था। वहीं जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर अटल सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन होगा। यह आयोजन नगर निगम द्वारा 24 दिसंबर को शाम 6 बजे अटल बिहारी वाजपेयी सभागार जीवाजी विश्वविद्यालय में होगा। ‘‘हमारे अटल प्यारे अटल’’ कवि सम्मेलन में देश के ख्यातिनाम कवि एवं गीतकार अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देगें।

मंत्रिमंडल गठन, दिल्ली में फंसा पेंच, फिर मुख्यमंत्री जाएंगे दिल्ली


भोपाल। मंत्रिमंडल का गठन कब होगा इसको लेकर लगातार सभी की निगाहें टिकी हुई है। मंत्री बनने की होड़ में विधायक भोपाल से दिल्ली तक सक्रियता बढ़ाए हुए हैं।  फिलहाल मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा यह अभी तय नहीं है, लेकिन मंत्रिमंडल को लेकर मुख्यमंत्री डा मोहन यादव की दिल्ली दौड़ जारी है। एक बार फिर मुख्यमंत्री डा मोहन यादव दिल्ली जाने वाले है। इसके चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमवार या फिर मंगलवार को वे मंत्रिमंडल का गठन कर सकते हैं।

दरसअल, मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल का पेंच भोपाल दिल्ली में फंसा हुआ है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डा मोहन यादव एक बार फिर दिल्ली जाने वाले है। वह दिल्ली में केंन्द्रीय नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे। बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार मुख्यंत्री मोहन यादव दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री गुरूवार को भी दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद थे। उनकी मुलाकात को मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन लगता है अभी सहमति नहीं बन पाई है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही थी, उसके लिए अब थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन अब मुख्यमंत्री एक बार फिर से दिल्ली के लिए रवाना होने वाले है। इसी बीच राज्यपाल मंगूभाई पटेल भी 23-24 दिसंबर को रीवा के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। राज्यपाल कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। उनके साथ उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद रहेंगे। मतलब, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर फिलहाल कोई जल्दबाजी वाली स्थिति को नहीं लगती।

लोकसभा चुनाव के चलते जुलाई में बजट पेश करेगी सरकार


भोपाल। लोकसभा चुनाव के चलते इस बार मध्यप्रदेश सरकार का बजट जुलाई माह में आएगा। इसके चलते सरकार बजट के पहले शुरुआती चार माह तक राज्य सरकार के खर्च के इंतजाम के लिए लेखानुदान लाया जाएगा। इसमें सभी विभागों को आवश्यक होने पर वित्त विभाग के अफसरों के साथ डिस्कशन करने के लिए कहा गया है।

लोकसभा चुनाव की फरवरी के अंतिम सप्ताह में या मार्च के पहले सप्ताह में लगने वाली आचार संहिता के मद्देनजर राज्य सरकार अगले वर्ष का वित्तीय बजट जुलाई में लाएगी। वित्त विभाग के निर्देश के मुताबिक 2023-24 के पुनरीक्षित अनुमान और वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान और लेखानुदान (अप्रैल 2024 से जुलाई 2024) के आंकड़े आईएफएमआईएस के बजट मॉड्यूल में देना है। इसमें प्राप्त होने वाले राजस्व और होने वाले खर्च दोनों के लिए पुनरीक्षित अनुमान और बजट अनुमान के आंकड़े बीसीओ स्तर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विभाग के अनुसार लेखानुदान पहले चार माह के लिए केवल आवश्यक खर्च के लिए ही लाया जा रहा है। इसमें यह भी कहा गया है कि विभाग के विभागाध्यक्ष, बजट नियंत्रण अधिकारी और वित्तीय सलाहकार बजट प्रस्तावों के लिए उत्तरदायी होंगे। विशेष तौर पर अनिवार्य और स्थापना संबंधी खर्च के सटीक आकलन का काम करना होगा।
आगामी वर्ष के वित्त बजट में प्रस्तावित योजनाओं में विभाग की ओर से किसी योजना या योजनाओं को समाप्त करने की आवश्यकता हो तो इसके लिए उप सचिव वित्त से चर्चा के बाद इसे लागू किया जा सकेगा। इस लेखानुदान में कोई नया खर्च या नई मद शामिल नहीं किया जाएगा।

सेल्फी के जरिए 21 हजार कर्मचारी दर्ज करा रहे उपस्थिति


भोपाल। सेल्फी के माध्यम से 21 हजार कर्मचारी कार्यालय पहुंचने पर ई-अटेंडेंस के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। ये कर्मचारी कार्यालय का समय समाप्त होने पर भी सेल्फी लेकर पूरे दिन की उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। 

मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेष प्रयासों से सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए दिन-प्रतिदिन नई तकनीकों को उपयोग में लाया जा रहा है जिससे मानव संसाधन गतिविधियों में पारदर्शिता के साथ ही उपभोक्ता सेवाओं में भी वृद्धि हुई है। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सूचना प्रौद्योगिकी अनुभाग द्वारा इन हाउस निर्मित की गई ई-अटेंडेंस पोर्टल को कंपनी मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रीय और मैदानी कार्यालयों में कार्यरत कार्मिकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू किया है। ई-अटेंडेंस पोर्टल के माध्यम से नियमित, संविदा कार्मिकों और बाह्य स्त्रोत कार्मिकों सहित कंपनी में कार्यरत लगभग 21 हजार से अधिक कार्मिक इस ई-अटेंडेंस पोर्टल के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। ई-अटेंडेंस पोर्टल के माध्यम से कार्मिक लॉग इन कर अपनी उपस्थिति देख सकेंगे और उपस्थिति में सुधार के साथ ही अवकाश आवेदन भी प्रस्तुत कर सकेंगे।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा लागू किये गये ई-अटेंडेंस पोर्टल के माध्यम से कार्मिक कार्यालय में प्रवेश कर अपने बैठने के निर्धारित स्थान से मोबाइल द्वारा सेल्फी लगाकर तथा कार्यालयीन समय के बाद कार्यालय छोड़ते समय भी सेल्फी लगाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करना शुरु कर दी है। कार्मिकों द्वारा सेल्फी लगाने पर इस पोर्टल पर कार्मिकों की उपस्थिति अक्षांश और देशांतर के आधार पर रियल टाईम दर्ज हो रही है।

गौरतलब है कि कंपनी द्वारा कार्यालयीन कार्यों के साथ ही उपभोक्ता सेवाओं के लिए एक दर्जन से भी अधिक आईटी के ऐसे अनुप्रयोग लागू किये हैं जो कि देश के पॉवर सेक्टर में एक मिसाल बन गये हैं। कंपनी द्वारा बनाए गए ई-अनुप्रयोगों में उच्चदाब से लेकर निम्नदाब, कृषि उपभोक्ता, गैर घरेलू उपभोक्ता और अन्य श्रेणी के सभी उपभोक्ताओं को आनलाइन आवेदन करने पर कनेक्शन उपलब्ध कराये जा रहे हैं।


अतिरिक्त मुख्य सचिव से कलेक्टर तक बदले जाएंगे

तेज हुई प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट


भोपाल। प्रदेश में मुख्यमंत्री के बदलते ही अब प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई है। हाल ही में कुछ अधिकारियों को बदला गया है, वहीं कई अधिकारियों के बदले जाने की चर्चा तेज हो गई है। इनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव से लेकर कलेक्टरों के तबादले किए जाने की बात सामने आ रही है। 

तीन साल से अधिक समय तक स्वास्थ्य विभाग में रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। अन्य अतिरिक्त मुख्य सचिवों जैसे राजेश राजोरा, जेएन कंसोटिया, अशोक बरनवाल, मनु श्रीवास्तव और केसी गुप्ता के कार्यभार में बदलाव किया जा सकता है। प्रमुख सचिवों में संजय दुबे, संजय शुक्ला, रश्मी अरुण शमी, दीपाली रस्तोगी, उमाकांत उमराव, सुखवीर सिंह और निकुंज श्रीवास्तव के पद बदले जा सकते हैं।

सचिवों में विवेक कुमार पोरवाल, संदीप यादव, पी नरहरि, ज्ञानेश्वर पाटिल, लोकेश जाटव, जीवी रश्मी, संजीव सिंह, धनंजय भदोरिया, बीएस जामोद, आरआर भोंसले, ओपी श्रीवास्तव और संजय गुप्ता को उनके वर्तमान विभागों से हटाया जा सकता है। अपर सचिवों में तरूण कुमार पिथोड़े, अभिषेक सिंह, अजय गुप्ता, अभिजीत अग्रवाल और अनय द्विवेदी की पोस्टिंग बदली जा सकती है। इंदौर, उज्जैन, खरगोन, पन्ना, हरदा, धार, रायसेन, बैतूल, विदिशा, सीहोर, छतरपुर और रीवा के कलेक्टरों का तबादला होने की संभावना है। सरकार इंदौर नगर निगम के आयुक्त को भी स्थानांतरित करने की तैयारी में है।

अनुराग जैन हो सकते हैं अगले मुख्य सचिव

प्रदेश में वर्तमान में प्रभारी मुख्य सचिव के रूप में वीरा राणा पदस्थ है। वे मार्च में सेवानिवृत्त होंगी इसके पहले नए मुख्य सचिव के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आईएएस अनुराग जैन की वापसी होना तय है। हाल ही में मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के दिल्ली प्रवास के दौरान जैन की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई है। इस मुलाकात के बाद इस बात के कयास तेजी से लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि जैन की केन्द्र से वापसी के साथ ही राणा की सेवानिवृत्ति के पहले उन्हें प्रदेश सरकार ओएसडी बना सकती है। 


तन्ना से बने तानसेन ने बढ़ाया संगीत का मान

मुकेश तिवारी
लेखक  स्वतंत्र पत्रकार हैं

शताब्दी की और अग्रसर संगीत कुंभ तानसेन समारोह विश्व का ऐसा अनोखा संगीत समागम है, जो सत्ता और समाज के दशक दर दशक बदलते प्रतिमानों के बाबजूद आज भी अपने गरिमापूर्ण आयोजन के साथ संगीत तीर्थ ग्वालियर को पूर्णतः प्रदान कर रहा है, 99सालों के इस सफर में इस प्रतिष्ठित समारोह ने तवायफों के घुंघरूओं की झंकार से लेकर धुरंधर गान मनीषियों के आलाप तक कितने ही रंग देखें है,

संगीत की आयु कितनी होती है? कोई नहीं जानता, मगर संगीत साधना के बल पर अजर-अमर बना जा सकता है। दुनिया भर के संगीत साधकों ने यह सब प्रमाणित भी किया है, कि कालजयी संगीत सम्राट तानसेन भी संगीत दुनिया के ऐसे दैदीप्यमान साधक रहे हैं। जिनका नाम पॉच शताब्दियों से अनवरत रूप से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के शिखर पर प्रकाशमान है। यह अलग बात है कि 15वीं शताब्दी के विख्यात संगीतज्ञ तानसेन के बारे में जितने तथ्य हैं उससे कहीं ज्यादा किंवदंतियां ध्रुपद शैली के गायक और दीपक राग के विशेषज्ञ तानसेन के बारे में प्रचलित है, कि तानसेन का जन्म ग्वालियर जनपद के ग्राम बेहट में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मकरंद पाण्डे और मां का नाम कमला था। तानसेन को बचपन में सब तन्ना, त्रिलोचन, तनसुख और रामतनु के नाम से पुकारते थे। जहां तक तानसेन के बचपन की घटनाओं का संबंध है, वह किंवदंतियों और जनश्रुतियों के जंजाल में काफी उलझी हुई है, उन्हें सुलझाना बड़े से बड़े इतिहासकारों के लिए भी कठिन हो रहा है,इस संबंध में असलियत सामने लाने के लिए अनुसंधान और शोध करने की आवश्यकता है। किंवदंती है कि, तानसेन जन्मजात गूंगे थे लेकिन बाल काल से ही संगीत के प्रति उनकी गहरी लगन थी। तन्ना पाण्डे अपने मवेशी को चराने के लिए प्रतिदिन झिलमिल नदी के किनारे ले जाते थे और फिर मवेशी को चरने के लिए छोड़कर वे पास के एक अति प्राचीन शिव मंदिर में शिव आराधना करने में मगन हो जाते थे।  
 इतिहास से जुडे़ जानकार बताते हैं कि तन्ना की भक्ति भाव से भगवान शिव इतने खुश हुए, कि उन्होंने तन्ना को साक्षात दर्शन देकर निर्देश दिया कि वह पूरी शक्ति से तान छेड़े शिव शंकर के आदेश पर तन्ना ने जैसे ही अपनी तान छेड़ी तो ताना की तान का आवेग इतना तीव्र था कि शंकर जी की छोटी सी मढिंया तक ढेड़ी हो गई। स्वयं तन्ना भी इस चमत्कार से भौचक्के रह गए। इतिहासकारों के अनुसार तन्ना जैसे ही किशोरावस्था में आए तो वे संगीत की तालीम पाने के लिए गुरु की शरण में चले गए। गुरु ने जो सिखाया, प्रतिभाशाली तन्ना ने सीखा। उन्होंने पीर बाबा, मोहम्मद गौस से लेकर मथुरा के स्वामी हरिदास से संगीत के तमाम सारे गुर सीखे। तन्ना ने स्वामी हरिदास जी से संगीत की तालीम लेने के साथ ही पिंगल शास्त्र भी सीखा। उन्हें गौस साहब से गायन की तालीम ली,
 बताया जाता है कि तन्ना तानसेन को भारतीय संगीत के साथ ईरानी संगीत विद्या में भी दक्षता हासिल थी । तानसेन के बारे में जन श्रुतियां और इतिहास से जो निष्कर्ष निकलता है। उसके अनुसार तानसेन को संगीत से जो शोहरत मिली, वह स्वामी हरिदास और सूफी फकीर गौस मोहम्मद की देन थी।
इतिहासकार गंगा सिंह भ्रमण, डॉ. हरिहर निवास द्विवेदी, डॉ. सरायू प्रसाद अग्रवाल एवं शिव सिंह सेंगर के शोध का भी यही निष्कर्ष है। हालांकि कुछ इतिहासकारों का मानना है कि संगीत की विधिवत तालीम के लिए तानसेन ने स्वामी हरिदास और गौस मोहम्मद से उच्च शिक्षा लेने के पश्चात राजा मानसिंह तोमर द्वारा संचालित संगीत विद्यालय में भी दाखिला लिया था। संगीत की साधना करते-करते तन्ना पाण्डे जब तन्ना, त्रिलोचन, तनसुख और रामतनु से तानसेन हो गए तो उन्हें ध्रुपद में सिद्धहस्त माना जाने लगा।
तानसेन ने सर्वप्रथम शेरशाह सूरी के बेटे दौलत खान के यहां राजश्रय पाया और फिर बान्धवगढ़( रीवा) के राजा रामचंद्र के दरबारी गायक बने। बान्धवगढ़( रीवा)के दरबारी गायक रहते हुए उन्होंने अकूत दौलत, मान-सम्मान और ख्याति प्राप्त की। दिलचस्प बात है कि तानसेन उनका नाम नहीं था। वह उनकी उपाधि थी, जो उन्हें बान्धवगढ़ के महाराज रामचंद्र से प्राप्त हुई थी। यह उपाधि इतनी प्रसिद्ध हुई कि उसने उनके मूल नाम को छिपा दिया। मुगल सम्राट अकबर के पास जैसे ही उनके चमत्कारिक गायन की खबर पहुंची, तो उन्होंने उनको अपने दरबार में बुला लिया। सम्राट अकबर तानसेन की संगीत में हासिल महारत से इस कदर खुश हुए कि उन्होंने अपने दरबार के नवरत्नों में उन्हें प्रथम स्थान तक दे दिया। इस तरह से 1619-20 में तानसेन का अकबरी दरबार में प्रवेश हुआ अकबर के आश्रय में रहने से तानसेन की प्रसिद्ध समस्त देश में व्याप्त हो गई थी, उन्हें मुगल सम्राट से अपूर्व आदर और विपुल वैभव प्राप्त हुआ था,
 उल्लेखनीय है कि तानसेन ने संगीत साधना के साथ ही संगीत शास्त्र पर आधारित तीन ग्रंथ संगीत सार, राग माला और गणेश स्त्रोत की रचना की थी,राग दरबारी कानडा, दरबारी आसावरी, मियां की 
तोड़ी मल्हार, दरबारी कल्याण, दरबारी तोड़ी, मियां की सारंग,का अविष्कार तानसेन द्वारा किया गया था,वहीं समय की मांग को देखते हुए उन्होंने ध्रुपद में चतुरंग और त्रिवट का गायन शुरू किया। उन्होंने अपनी संगीत की तपस्या को पूर्ण करने के लिए सितार से मिलती-जुलती वाद्य रबाव और रूद्रवीणा का भी आविष्कार किया। दरअसल में असलियत यह है कि तानसेन हकीकत में तानसेन थे। तानसेन यदि संगीत विद्या में पारंगत नहीं होते तो सम्राट अकबर उन्हें कंठाभरण,वाणी विलास उपाधि से अलंकृत नहीं करता।
  कड़वा सच तो यह है कि इस कालजयी संगीतकार तानसेन की समाधि पर पूर्व में रसिक जन स्वप्रेरणा से तानसेन संगीत समारोह में शिरकत करने आते थे ,20बी सदी की शुरुआत में ग्वालियर के सिंधिया राजघराने ने बाकायदा इस महान संगीतकार की स्मृति में तानसेन की समाधि पर सालाना तीन दिवसीय उर्स का आयोजन प्रारंभ कराया, यदि हम इस समारोह के पिछले 99बषों का सिंहावलोकन करें तो तो पायेंगे कि इसके स्वरूप में निरन्तर विकास हेतु परिवर्तन होते आए हैं 
‌ग्वालियर स्टेट की ओर से 1924 में पहला उर्स कराया गया, जो बेहद ही सफल रहा। गायक डॉ. प्रभाकर गोहदकर के मुताबिक समारोह के प्रारंभिक बषों में कार्यक्रम के दौरान मशहूर तवायफे यहां अपनी प्रस्तुति देती थीं। तब लोग चार आने में तांगे से आयोजन स्थल पर पहुंचते थे। उस दौरान बिजली की भी समस्या थी। इसलिए संगीत प्रेमी स्वयं लालटेन लेकर जाते थे। उस वक्त बाबा कपूर की दरगाह पर रेबड़ी बांटी जाती थी, तानसेन समारोह 1924से1932तक एक दिवसीय रहा ,केवल एक दिन ही कलाकार सुर सम्राट को अपनी श्रद्धांजलि और स्वरांजलि देने बिना किसी पारिश्रमिक लिए आते थे,जब कलाकार अधिक संख्या में प्रस्तुति देने के लिए समारोह में शामिल होने आने लगे तो समारोह दो दिवसीय कर दिया गया, कुछ समय बाद समारोह में दो दिन में तीन सभाएं आयोजित की जाने लगी,यह क्रम सन् 1956तक चला,1957से समारोह का स्वरूप बदला व समारोह तीन दिन ग्वालियर में व चौथे दिन उनके पैतृक गांव बेहट में समापन कार्यक्रम आयोजित किया जाने लगा था, ग्वालियर में प्रतिबर्ष आयोजित किए जाने वाले तानसेन संगीत समारोह का 99वां वर्ष है ,इन वर्षों में इस समारोह ने अनेक उतार चढ़ाव देखे हैं,अनेक दैवी और प्राकृतिक विपदाओं को पार किया है और आज यह समारोह अद्वितीय स्थान रखता है, वर्तमान रूप में मनाए जाने वाले इस समारोह में अनेक विशेषताएंहै, संगीत सम्राट तानसेन की समाधि के करीब बना विशाल पंडाल संगीतकारोंकेलिए विशेष प्रेरणा स्रोत बन जाता है और दिन और रात को प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना हजारों की संख्या में संगीत प्रेमी श्रोतागण निर्बाध रूप से यहां आते हैं और अपनी शान्ति पूर्ण उपस्थिति तथा रसास्वादन से समारोह को विशिष्टता प्रदान करते हैं, मूर्धन्य संगीत कार इस समारोह में विशुद्ध रुप से संगीत श्रद्धांजलि अर्पित करने यहां उपस्थित होते हैं,2011मेंभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के भोपाल मंडल द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग को तानसेन समाधि, मोहम्मद गौस मकबरा परिसर हजीरा ग्वालियर में तानसेन संगीत समारोह आयोजित करने की अनुमति नहीं दी ,ऐसी स्थिति में तानसेन समारोह को सुर सम्राट तानसेन की समाधि से पांच किलोमीटर दूर मोतीमहल परिसर स्थित बैजाताल के खुले रंगमंच पर इस समारोह के तहत होने वाली संगीत सभाओं का आयोजन करना पड़ा, हालांकि उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत एवं कला अकादमी के उपनिदेशक राहुल रस्तोगी के प्रयासों से 2012में एएसआई ने तानसेन समारोह तानसेन की समाधि के निकट करने की अनुमति दे दी, संगीत सम्राट के सम्मान में तानसेन संगीत समारोह की यात्रा अनवरत रूप से जारी है। 2015में इसमें एक-के-बाद-एक कई नवाचार इसमें किए गए,मसलन इसे चार दिवसीय के स्थान पर पांच दिवसीय किया गया,1916में तानसेन समारोह में नया आयाम जुड़ा दुनिया के अलग अलग देशों के संगीतज्ञों को आमंत्रित कर उनकी प्रस्तुतियां कराई गई यह सिलसिला साल-दर-साल जारी है,राजा मानसिंह के दरबारी गायक तानसेन और बैजू बाबरा जिस किले के गुजरी महल में बैठकर अपनी लयकारी से सबका मन मोहते थे ,उसी गूजरी महल में तानसेन के बाद उनकी स्मृति में तकरीबन साढ़े पांच सौ साल बाद तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया की पहल पर संगीत के स्वर गूंजे
सेन के नाम पर रखे गए इस सम्मान ््ना बर्ष 1980में की गई थी, वर्ष 1985तक सम्मान की राशि 5हजार रुपये थी, वर्ष 1986 तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा ने उक्त राशि बढ़ाकर 50हजार रुपये कर दी , वर्ष 1990मेंइसे एक लाख रुपए कर दिया गया था,बर्ष 2015 में इसे बढ़कर दो लाख रुपए कर दिया गया , 2021में तानसेन संगीत समारोह का औपचारिक शुभारंभ करने आए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तानसेन सम्मान राशि को बढ़ाकर पांच लाख रुपए कर दिया, हालांकि इस बर्ष चयन समिति की बैठक न होने की वजह से किसी भी कलाकार के नाम का चयन न हो पाने की वजह से किसी भी कलाकार को तानसेन अलंकरण प्रदान नहीं किया गया, अभी तक तानसेन सम्मान से पंडित कृष्ण राव शंकर पंडित, श्रीमती हीराबाई बडोदकर , उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, पंडित रामचतुर, पंडित नारायण राव व्यास पंडित दिलीप चन्द्र बेदी , उस्ताद निसार हुसैन खां,ठाकुर जयदेव सिंह,बी आर देवधर, सुश्री गंगूबाई हंगल उस्ताद खादिम हुसैन खां,पंडित गजानन राव जोशी,सुश्री अंसगरी बाई, पंडित निवृत्ति बुआ सरनाईक, उस्ताद मुस्ताक़ अली, फिरोज दस्तूर, सुश्री मोगूबाई कुडीकर, उस्ताद नासिर अमीन उदीन डागर , पंडित भीमसेन जोशी, पंडित रामराव नायर, पंडित शरतचन्द्र आरोलकर, उस्ताद जियाफरीदुन डागर , पंडित एस सी आर भट्ट, उस्ताद असद अली खां,राजा छत्रपति सिंह, डॉ ज्ञान प्रकाश घोष , सुश्री गिरिजा देवी, पंडित हनुमान प्रसाद मिश्र,बाला साहेब पूछवाले, पंडित सियाराम तिवारी, पंडित सी आर व्यास, उस्ताद अब्दुल हलीम जाफर खां, उस्ताद अमजद अली खां,नियाज़ अहमद खां, पंडित दिनकर कायकिणी पंडित शिवकुमार शर्मा, सुश्री मालिनी राजुरकर
सुश्री सुलोचना बृहस्पति, आचार्य पंडित गोस्वामी गोकुल़ोत्सव जी महाराज, उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान, पंडित अजय पोहनकर, विदुषी सविता देवी, पंडित राजन-साजन मिश्र, पंडित प्रभाकर कारेकर, पंडित विश्व मोहन भट्ट, पंडित अजय चक्रवर्ती,एल के पंडित , पंडित डालचंद शर्मा, पंडित कशालकर,पंडित विधाधर व्यास ,मंजू मेहता, सतीश व्यास, और पंडित नित्यानंद हल्दीपुर, को इस ख्याति प्राप्त तानसेन संगीत सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है। इस बर्ष राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण से किराना एवं ग्वालियर घराने के प्रख्यात गायक पंडित गणपति भट्ट धारवाड़ को विभूषित किया जायेगा, कालजयी संगीतकार तानसेन को समर्पित तानसेन समारोह देश की सांगीतिक दुनिया का सुप्रतिष्ठित आयोजन हैं, वहीं पिछले 99वर्षो से यह समारोह अपनी निरंतरता और गरिमा दोनों को बरकरार रखे हुए हैं, ग्वालियर में निरंतर आयोजित हो रहे इस संगीत समारोह में संभवत देश का ऐसा कोई शीर्षस्थ, अग्रणी, श्रेष्ठ और प्रतिभाशाली संगीतकार न होगा जिसने तानसेन समारोह में शिरकत न की हो, और शिरकत करना न चाही हो, 
 गौरतलब है कि तानसेन अलंकरण सम्मान की शुरुआत वर्ष 1980 प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने की थी। वर्तमान में सम्मान पाने वाले कलाकार को पांच लाख रुपए और प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है। तानसेन सम्मान संगीत के क्षेत्र में मध्य प्रदेश शासन की भावना और आकांक्षा के अनुरूप उत्कृष्ट प्रतिमानों की स्थापना में सहायक हुआ है,