बसपा को मायावती के फैसले का इंतजार, दो निर्दलियों पर तन्खा को भरोसा
राज्यसभा के लिए एक सीट पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री विनोद गोटिया द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में नामांकन भरने के बाद निर्मित हुई मतदान की स्थिति को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल मतों के गणित में उलझ गए हैं. दोनों ही दलों ने विधायकों को लेकर जमावट शुरु कर दी है.
विनोद गोटिया के नामांकन भरने के बाद कांग्रेस नेताओं की चिंता कुछ ज्यादा बढ़ी है. खुद प्रत्याशी विवेक तन्खा स्वयं अब विधायकों से संपर्क कर रहे हैं. वहीं कांग्रेस संगठन भी वरिष्ठ नेताओं के जरिए विधायकों को साध रहा है. कांग्रेस को वैसे तो जतारा के दिनेश अहिरवार को छोड़कर सभी विधायकों पर भरोसा है, मगर इसके बाद भी वह किसी तरह का कोई जोखिम नहीं उठाना चाह रही है. वहीं तन्खा को तीन निर्दलीय विधायकों में से एक को छोड़कर निर्दलीय विधायकों पर यह भरोसा है कि वे उनके पक्ष में जाएंगे. वहीं मंगलवार को बसपा ने जिस तरह से इस बात के संकेत दिए थे कि वह भाजपा को समर्थन दे सकती है, उसके सुर भी आज बदले नजर आए. बसपा के विधायकों को मंगलवार की शाम को ही मायावती का संदेश मिल गया है कि वे बहनजी के कहने के बाद ही कोई कदम उठाएं. जब तक मायावती का निर्देश नहीं मिले, तब तक किसी तरह से किसी दल के संपर्क में न रहें. इस निर्देश के बाद बसपा के चारों विधायकों ने एक तरह से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों से दूरी बना ली है.
भाजपा ने क्षेत्रवार सौंपी जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी ने गोटिया को मैदान में उतार कर खुद का संकट बढ़ा लिया है. भाजपा के प्रदेश संगठन पर अब मैदान फतह करने के लिए केन्द्रीय नेतृत्व का दबाव बढ़ता जा रहा है. भाजपा जिस तरह से मतदान कराकर जीत को आसान मान रही थी, वहीं उसके लिए अब मुसीबत भी बन रही है. बसपा के विधायक अगर भाजपा का साथ नहीं देंगे तो उसके लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. भाजपा को पहले यह उम्मीद थी कि मैहर उपचुनाव में जिस तरह से बसपा ने प्रत्याशी उतारकर भाजपा प्रत्याशी नारायण त्रिपाठी को मदद की थी, उसी तर्ज पर इस बार भी उसे मदद मिलेगी, मगर इस बार मायावती ने संदेश के बाद बसपा विधायक मौन हो गए हैं. इसे देखते हुए भाजपा ने अब क्षेत्रवार संगठन नेताओं को जिम्मेदारी देकर कहा है कि जीत के आंकड़े को छूने के लिए विधायकों को अपने पक्ष में करें. सूत्रों की माने तो बुंदेलखंड की जिम्मेदारी शैलेन्द्र बरुआ, ग्वालियर, चंबल की जिम्मेदारी चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, वेदप्रकाश शर्मा, को सौंपी है. इसके अलावा कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के लिए भी संगठन पदाधिकारी सक्रिय हो गए हैं. वहीं विंध्य में अजय प्रतापसिंह के अलावा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल और सतना सांसद गणेश सिंह को सक्रिय किया गया है. इसके अलावा मालवा अंचल में केन्द्रीय नेतृत्व कैलाश विजयवर्गीय को सक्रिय कर रहा है.
यह है वोटों का गणित
भाजपा के विधायक- 166
कांगे्रस के विधायक- 57
बसपा के विधायक- 04
निर्दलीय विधायक-03
कांग्रेस को बगावत की आशंक-01
भाजपा को चाहिए - 08 विधायक
कांग्रेस को चाहिए- 02
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नोट: कांग्रेस के एक विधायक दिनेश अहिरवार लोकसभा चुनाव से ही भाजपा के साथ हैं, उनके खिलाफ दल-बदल कानून का मामला विस में दिया, मगर फैसला बाकी है.
राज्यसभा के लिए एक सीट पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री विनोद गोटिया द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में नामांकन भरने के बाद निर्मित हुई मतदान की स्थिति को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल मतों के गणित में उलझ गए हैं. दोनों ही दलों ने विधायकों को लेकर जमावट शुरु कर दी है.
विनोद गोटिया के नामांकन भरने के बाद कांग्रेस नेताओं की चिंता कुछ ज्यादा बढ़ी है. खुद प्रत्याशी विवेक तन्खा स्वयं अब विधायकों से संपर्क कर रहे हैं. वहीं कांग्रेस संगठन भी वरिष्ठ नेताओं के जरिए विधायकों को साध रहा है. कांग्रेस को वैसे तो जतारा के दिनेश अहिरवार को छोड़कर सभी विधायकों पर भरोसा है, मगर इसके बाद भी वह किसी तरह का कोई जोखिम नहीं उठाना चाह रही है. वहीं तन्खा को तीन निर्दलीय विधायकों में से एक को छोड़कर निर्दलीय विधायकों पर यह भरोसा है कि वे उनके पक्ष में जाएंगे. वहीं मंगलवार को बसपा ने जिस तरह से इस बात के संकेत दिए थे कि वह भाजपा को समर्थन दे सकती है, उसके सुर भी आज बदले नजर आए. बसपा के विधायकों को मंगलवार की शाम को ही मायावती का संदेश मिल गया है कि वे बहनजी के कहने के बाद ही कोई कदम उठाएं. जब तक मायावती का निर्देश नहीं मिले, तब तक किसी तरह से किसी दल के संपर्क में न रहें. इस निर्देश के बाद बसपा के चारों विधायकों ने एक तरह से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों से दूरी बना ली है.
भाजपा ने क्षेत्रवार सौंपी जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी ने गोटिया को मैदान में उतार कर खुद का संकट बढ़ा लिया है. भाजपा के प्रदेश संगठन पर अब मैदान फतह करने के लिए केन्द्रीय नेतृत्व का दबाव बढ़ता जा रहा है. भाजपा जिस तरह से मतदान कराकर जीत को आसान मान रही थी, वहीं उसके लिए अब मुसीबत भी बन रही है. बसपा के विधायक अगर भाजपा का साथ नहीं देंगे तो उसके लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. भाजपा को पहले यह उम्मीद थी कि मैहर उपचुनाव में जिस तरह से बसपा ने प्रत्याशी उतारकर भाजपा प्रत्याशी नारायण त्रिपाठी को मदद की थी, उसी तर्ज पर इस बार भी उसे मदद मिलेगी, मगर इस बार मायावती ने संदेश के बाद बसपा विधायक मौन हो गए हैं. इसे देखते हुए भाजपा ने अब क्षेत्रवार संगठन नेताओं को जिम्मेदारी देकर कहा है कि जीत के आंकड़े को छूने के लिए विधायकों को अपने पक्ष में करें. सूत्रों की माने तो बुंदेलखंड की जिम्मेदारी शैलेन्द्र बरुआ, ग्वालियर, चंबल की जिम्मेदारी चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, वेदप्रकाश शर्मा, को सौंपी है. इसके अलावा कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के लिए भी संगठन पदाधिकारी सक्रिय हो गए हैं. वहीं विंध्य में अजय प्रतापसिंह के अलावा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल और सतना सांसद गणेश सिंह को सक्रिय किया गया है. इसके अलावा मालवा अंचल में केन्द्रीय नेतृत्व कैलाश विजयवर्गीय को सक्रिय कर रहा है.
यह है वोटों का गणित
भाजपा के विधायक- 166
कांगे्रस के विधायक- 57
बसपा के विधायक- 04
निर्दलीय विधायक-03
कांग्रेस को बगावत की आशंक-01
भाजपा को चाहिए - 08 विधायक
कांग्रेस को चाहिए- 02
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नोट: कांग्रेस के एक विधायक दिनेश अहिरवार लोकसभा चुनाव से ही भाजपा के साथ हैं, उनके खिलाफ दल-बदल कानून का मामला विस में दिया, मगर फैसला बाकी है.
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