गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

पचमढ़ी ने देखा नाना का अभिनय, भोपाल ने उनकी ‘राजनीति’

तीन फिल्मों की शूटिंग ने मध्यप्रदेश को जोड़ा अभिनेता के यादगार सिनेमाई सफर से

राजेन्द्र पाराशर 

भोपाल। कुछ कलाकार सिर्फ पर्दे पर नहीं होते, वे उन जगहों की स्मृतियों में भी बस जाते हैं, जहां उन्होंने अपने किरदारों को जिया होता है। नाना पाटेकर भी ऐसे ही अभिनेता थे। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और किरदार को भीतर तक पकड़ लेने वाली शैली हिंदी सिनेमा की पहचान बनी। 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर के साथ देशभर में उनकी फिल्मों की यादें ताजा हैं। मध्यप्रदेश के पास भी नाना को याद करने की अपनी कहानी है पचमढ़ी की वादियों से लेकर भोपाल के राजनीतिक मंच तक, तीन फिल्मों की शूटिंग ने उनके सिनेमाई सफर को इस प्रदेश से जोड़ा।

नाना पाटेकर का मध्यप्रदेश से शुरुआती फिल्मी जुड़ाव 1990 की ‘थोड़ा सा रूमानी हो जाएं’ से माना जाता है। अमोल पालेकर निर्देशित इस फिल्म में नाना पाटेकर, अनीता कंवर और विक्रम गोखले प्रमुख भूमिकाओं में थे। फिल्म की शूटिंग मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में हुई थी।  फिल्म में नाना का किरदार नटवरलाल का था। यह उनके करियर के उस दौर की फिल्म थी, जब वे मुख्यधारा की चमक-दमक से अलग अपनी अभिनय क्षमता के कारण पहचान बना रहे थे। पचमढ़ी की प्राकृतिक पृष्ठभूमि में शूट हुई इस फिल्म ने नाना के मध्यप्रदेश कनेक्शन की पहली तस्वीर तैयार की।

‘तर्कीब’ में फिर लौटे पचमढ़ी, पहुंचे भोपाल

‘थोड़ा सा रूमानी हो जाएँ’ की  शूटिंग के करीब एक दशक बाद नाना पाटेकर फिर मध्यप्रदेश आए। इस बार फिल्म थी ‘तर्कीब’। फिल्म में उन्होंने सीबीआई इंस्पेक्टर जसराज़ पटेल की भूमिका निभाई थी और उनके साथ तब्बू, शिल्पा शेट्टी, आदित्य पंचोली, मिलिंद सोमन जैसे कलाकार थे। इस फिल्म की शूटिंग का एक अहम हिस्सा ’भोपाल और पचमढ़ी’में हुआ। नाना का पचमढ़ी से बना रिश्ता एक फिल्म तक सीमित नहीं रहा। कुछ वर्षों के अंतराल के बाद नाना फिर उसी पहाड़ी शहर की लोकेशन पर लौटे और इस बार भोपाल भी उनकी शूटिंग यात्रा का हिस्सा बना।

भोपाल में ‘राजनीति’ और हजारों की भीड़

नाना पाटेकर की मध्यप्रदेश से जुड़ी सबसे चर्चित फिल्म रही प्रकाश झा की ‘राजनीति’। 2009 में भोपाल में फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर के साथ अजय देवगन, रणबीर कपूर, नसीरुद्दीन शाह, अर्जुन रामपाल, मनोज बाजपेयी, कैटरीना कैफ और विवेक ओबेरॉय जैसे कलाकार शहर में मौजूद थे। अपर लेक के किनारे भी फिल्म की शूटिंग हुई थी। ‘राजनीति’ की शूटिंग के दौरान भोपाल सचमुच फिल्मी शहर बन गया था। फिल्म के राजनीतिक दृश्यों के लिए मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों से करीब पांच हजार रंगमंच कलाकारों को जुटाया गया था। जबरदस्त भीड़ के बीच राजनीतिक रैलियों के दृश्य फिल्माए गए और नाना पाटेकर समेत फिल्म के प्रमुख कलाकार इन दृश्यों का हिस्सा बने। 

तीन फिल्में, दो शहर और नाना की याद

नाना पाटेकर के मध्यप्रदेश से जुड़े इस फिल्मी सफर को देखें तो तीन अलग-अलग तस्वीरें सामने आती हैं 1990 में पचमढ़ी, 1999 में भोपाल-पचमढ़ी और 2009 में भोपाल। एक फिल्म में पचमढ़ी की वादियां थीं, दूसरी में अपराध की कहानी के बीच भोपाल और पचमढ़ी की लोकेशन और तीसरी में भोपाल की सियासी जमीन। किरदार बदलते रहे, कहानियां बदलती रहीं, लेकिन मध्यप्रदेश उनके अभिनय सफर की पृष्ठभूमि बनता रहा। इसके अलावा नाना की मालवा अंचल और ग्वालियर चंबल अंचल में कुछ फिल्मों की शूूटिंग हुई है। 


बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

समग्र विकास से सिद्धी

-अखिलेश जैन, सीए
मोदी जी के 25 वर्षों के शासनकाल की भारत
की यात्रा वास्तव में समग्र विकास से 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रयासों की यात्रा है। 

अपरिवर्तनशील वास्तविकता है कि सूर्य पूर्व में ही उगता है उसी तरह शाश्वत सत्य है कि मोदी जी के नेतृत्व में भारत निराशा, भाई भतीजावाद, जातिवाद, परिवारवाद, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, कालेधन, जमाखोरी, आयात पर निर्भरता, तुष्टीकरण, संस्कृति का अपमान, गुलामी के प्रतीकों जैसी तमाम बेड़ियों को तोड़कर सुन्दर, सुखद, भविष्य के निर्माण हेतु रात-दिन एक करके, बिना रुके-बिना थके, बिना दाँये-बिना बाँये देखे कठिन से कठिन अग्नि परीक्षा जैसी चुनौतियों को पार करके भविष्य निर्माण में जुटा हुआ है। आज भारत का लक्ष्य, ध्येय, सपना, नारा, वचन तथा एक ही दशरथ नन्दन प्रभु श्री रामचन्द्र जी के श्री चरणों में प्रार्थना है- ''विकसित भारत@2047"।

 ''विकसित भारत@2047" लक्ष्य की गहराई को जानने वाले ही, लक्ष्य की गंभीरता को जान सकते हैं। नारा आसान है, लक्ष्य गंभीर है, ''विकसित भारत@2047" के लक्ष्य सिद्धी के लिए उससे भी बड़ा तप करना पड़ेगा जितना तप महाराज भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर उतारने के लिए किया था। महाराज भगीरथ के कठोर तप से प्रसन्न होकर ब्रम्हा जी ने गंगा को पृथ्वी पर उतरने का वरदान दिया था, महाराज भगीरथ का तप तो केवल एक सिद्धी गंगा को पृथ्वी पर उतारने के लिए था पर मोदी जी के नेतृत्व में भारत का तप तो ''विकसित भारत@2047" के लिए है, इस सिद्धि को पाने के पहले तमाम सिद्धियां पार करना पड़ेंगी, तमाम बाधाओं को पार पाना पड़ेगा जो मुख्य सिद्धि के मार्ग में बाधा हैं, बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ बाधाओं को दूर करने की गति को भी गति देना पड़ेगी।

मोदी जी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ चुका है,12वीं अर्थव्यवस्था से विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था के कदम बढ़ा रहा है। महिलाएं नीति निर्णय में भागीदार बन रही हैं, अर्थव्यवस्था की मजबूती व स्थायित्व में महिलाओं का योगदान लाने में भारत सफल हो रहा है, 2014 से भ्रष्टाचार की खबरों को मसाला न मिलने के कारण जनता में उत्साह का संचार करने में सरकार को बहुत बड़ी सफलता मिली है, इसके सकारात्मक परिणाम बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में हैं, देश की सीमाएँ सुरक्षित हैं, परिन्दा भी पर नहीं मार पाता क्योंकि सरकार व सेना की कार्यवाहियों का लेखा जोखा नेत्रहीन भी तुरन्त पढ़ लेता है। सरकार का आतंकवाद विरोधी निर्णय देश में स्थिरता, शांति व प्रगति लाने में सहायक हुआ है।

आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों की खोज व विकास, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सनातन संस्कृति की रक्षा व संरक्षण, शिक्षण, प्रशिक्षण व रोजगार की संभावनाएं, करों का सरलीकरण, हर व्यक्ति का बैंक में खाता, गरीब को चिकित्सा सुविधा, आवास, पेयजल, स्वच्छता, स्वच्छ ईंधन, शौचालय, दिल्ली से चली राशि बिना किसी कट के सीधे हितग्राहियों के खाते में बराबर व तुरन्त पहुंचना, 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों ने आर्थिक प्रगति में जो योगदान दिया है उसी कारण विदेशी निवेश भारत के दरवाजे पर लाईन लगा कर खड़ा है, जीडीपी, जीएसटी व आयकर शिखर पर, 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर, अगर सफलता की गति बरकरार रहती है तो 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था व '' विकसित भारत @ 2047" की सिद्धी पाने में भारत शीघ्र सफलता पाएगा।

(लेखक भाजपा मप्र के कोषाध्यक्ष हैं)