
मध्यप्रदेश में वर्ष 1990 से 1992 तक सुंदरलाल पटवा की सरकार का शासन रहा. इस दौरान बाबूलाल गौर को नया नाम बुलडोजर मंत्री का मिला था. गौर इस शासनकाल में नगरीय प्रशासन मंत्री रहे. पुराने भोपाल की सड़कों पर बहुत ज्यादा अतिक्रमण था, जो विकास की राह में रोड़ा बन रहा था.
उन्होंने नगर को अतिक्रमण मुक्त करने का बीड़ा उठाया और सख्ती के साथ कार्रवाई भी की. इस दौर के कई किस्से आज भी शहर में याद किए जाते हैं. जैसे एक बार गौतम नगर में अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए गौर ने सिर्फ बुलडोजर खड़ा करके इंजन चालू करा दिया था. इस दौरान बुल्डोजर के डर से अतिक्रमणकारी अपने अतिक्रमण के साथ खुद ब खुद गायब हो गए थे. इसके अलावा, वीआईपी रोड बनने से पहले उस स्थान पर तालाब के किनारे झुग्गियां थीं, जो रोड निर्माण में बाधा बन रहीं थी. इसे लेकर भी लंबे समय विवाद चलता रहा. इस विवाद का निपटारा करने के लिए बाबूलाल गौर एक बार सुबह से ही बुलडोजर लेकर खुद अतिक्रमण स्थल पर पहुंच गए और सामने खड़े होकर बुल्डोजर चलवा दिया था. इस घटना ने बाबूलाल गौर को शहर ही नहीं दिल्ली तक बुलडोजर मंत्री के रूप में पहचान मिली थी.,
भोपाल को पेरिस बनाना चाहते थे
अपने जीवन का बड़ा हिस्सा भोपाल में गुजारने के कारण बाबूलाल गौर का राजधानी भोपाल से खास लगाव था. मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने राजधानी को पेरिस बनाने का सपना देखा था. इतना ही नहीं वे अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में कई बार सार्वजनिक रुप से यह बात कह भी चुके थे. गौर को अपनी बेबाक छवि के लिए भी जाना जाता है, जब भी अपनी ही सरकार की कोई चीज उन्हें ठीक नहीं लगती थी तो खुलकर इस पर बात करते थे. भाजपा ही नहीं विपक्षी दल कांग्रेस के नेता बाबूलाल गौर के इस अंदाज के कायल रहे. उनका हर हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों सहित सभी के लिए खुला रहता था. बाबूलाल गौर को अपनी सख्त छवि के लिए भी जाना जाता है.

2003 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ जब उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई थी, उसके बाद एक समय ऐसा भी आया जब उमा भारती ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने से पहले अपने उत्तराधिकारी के रुप में बाबूलाल गौर के हाथ में गंगाजल देकर बाबूलाल गौर से वचन लिया था कि वे जब कहेंगी गौर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देंगे.
दरअसल उमा भारती के मुख्यमंत्री बनने के साल भर बाद ही कर्नाटक में हुबली की एक अदालत ने दंगा भड़काने के 10 साल पुराने एक मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया था. इसके बाद भाजपा नेतृत्व ने उमा भारती पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने को कहा और उन्होंने पद छोड़ दिया. मगर कुर्सी छोड़ने से पहले राज्य के गृहमंत्री बाबूलाल गौर का नाम उन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए बढ़ाया. उमा भारती का बाबूलाल पर इतना भरोसा था कि जब भी वे कहेंगी तो उनके लिए बाद में कुर्सी खाली कर देंगे. क्लीन चिट मिलने पर जब उमा ने उनसे इस्तीफा मांगा तो गौर ने साफ मना कर दिया था. उमा भारती बागी हो गई. इसके बाद भाजपा ने बीच का रास्ता निकालते हुए दोबारा उमा भारती को मौका देने की जगह शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया, तब शिवराज सिंह चौहान पार्टी के महासचिव थे. आखिरकार 2005 में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने.
बचपन से ही भोपाल में रहे
बाबूलाल गौर बचपन से ही भोपाल में रहे. इनके पिता का नाम रामप्रसाद था. बाबूलाल गौर ने अपनी शैक्षणिक योग्यताओं में बी.ए. और एल.एल.बी. की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं. गौर पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जनता समर्थित उम्मीदवार के रूप में निर्दलीय विधायक चुने गए थे. वे 7 मार्च, 1990 से 15 दिसम्बर, 1992 तक मध्य प्रदेश के स्थानीय शासन, विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, जनसम्पर्क, नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री रहे. वे 4 सितंबर, 2002 से 7 दिसम्बर, 2003 तक मध्य प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे. सामाजिक तथा सार्वजनिक जीवन में किये गये विभिन्न महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए गौर को कई सम्मान तथा पुरस्कार प्राप्त होते रहे हैं. ग्यारहवीं विधान सभा 1999-2003 में बाबूलाल गौर नेता प्रतिपक्ष बनने के पूर्व भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे. गौर को 8 दिसम्बर, 2003 को नगरीय प्रशासन एवं विकास, विधि एवं विधायी कार्य, आवास एवं पर्यावरण, श्रम एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री बनाया गया. उन्हें 2 जून, 2004 को गृह, विधि एवं विधायी कार्य तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री बनाया गया था. बाबूलाल गौर 23 अगस्त, 2004 से 29 नवंबर, 2005 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. उन्हें 4 दिसम्बर, 2005 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में वाणिज्य, उद्योग, वाणिज्यिक कर रोजगार, सार्वजनिक उपक्रम तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के मंत्री के रूप में शामिल किया गया था और 20 दिसंबर, 2008 को उन्हें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में फिर से सम्मिलित किया गया.
कपड़ा मिल में मजदूरी कर चलाई थी आजीविका
राजनीति में आने से पहले बाबूलाल गौर ने भोपाल की कपड़ा मिल में मजदूरी की थी और श्रमिकों के हित में अनेक आंदोलनों में भाग लिया था. वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य थे. उत्तरप्रदेश से मध्यप्रदेश आकर बसने का सफर भी उनका बड़ा रोचक रहा है. इसका खुलासा उन्होंने एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में किया था. गौर ने बताया था कि अंग्रेजों के समय में उनके ग्राम नागौरी में दंगल हुआ था. इस दंगल में उनके पिता रामप्रसाद गौर जीते थे. इससे प्रभावित होकर उन्हें शराब कंपनी ने भोपाल में नौकरी दे दी थी. इसके बाद उनका परिवार यहां आकर बस गया था. उस वक्त उनकी उम्र करीब 8 वर्ष थी. इसके बाद यहां पर शराब कंपनी ने उनके पिता को शराब की एक दुकान भी दी. इस दुकान से उस वक्त 35 रुपए की आमदनी हुआ करती थी. जब गौर ने संघ की शाखाओं में जाना शुरु किया तो संघ पदाधिकारियों ने कुछ समय बाद उन्हें शराब दुकान बंद करने और शराब का विक्रय करना बंद करने को कहा. इस पर गौर ने शराब दुकान बंद कर दी और वापस अपने गांव चले गए थे. बाद में वहां भी वे ठीक से खेती नहीं कर पाए तो वापस भोपाल आए और कपड़ा मिल में मजदूरी की.
गौर युग का हुआ अंत, जनहित के मुद्दों पर नहीं किया समझौता
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निधन के साथ प्रदेश की राजनीति के एक युग का भी अवसान हो गया. उन्होंने राजनीति के अजेय योद्धा के रुप में अंतिम सांस ली. बुल्डोजर मंत्री के रुप में पहचान बनाने वाले गौर ने मजदूर से मुख्यमंत्री तक के सफर में भाजपा ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं के साथ भी उनके अच्छे संबंध रहे. जनता से जीवंत संपर्क रखने वाले इस नेता ने कभी भी जनहित के मुद्दों पर समझौता नहीं किया. कई अवसरों पर वे पार्टी गाईड लाइन से हटकर अपनी बात रखते थे.
मध्यप्रदेश की सियासत में आज गौर युग का अंत हो गया. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निधन के साथ ही आज प्रदेश ने कुशल प्रशासक और कुशल राजनीतिज्ञ को खो दिया. 1974 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा बाबूलाल गौर को गोआ मुक्ति आंदोलन में शामिल होने के कारण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सम्मान प्रदान किया गया था. सक्रिय राजनीति में आने से पहले बाबूलाल गौर ने भोपाल की कपड़ा मिल में मजदूरी की थी और श्रमिकों के हित में अनेक आंदोलनों में भाग लिया था. वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य थे . वे 7 मार्च 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक मध्यप्रदेश के स्थानीय शासन, विधि एवं विधायी कार्य, संसदीय कार्य, जनसंपर्क, नगरीय कल्याण, शहरी आवास तथा पुनर्वास एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री रहे. गौर 4 सितंबर 2002 से 7 दिसंबर 2003 तक मध्य प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे. बाबूलाल गौर सन 1946 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे. उन्होंने दिल्ली तथा पंजाब आदि राज्यों में आयोजित सत्याग्रहों में भी भाग लिया था. गौर आपातकाल के दौरान 19 माह की जेल भी काटी .
विधायक से मुख्यमंत्री तक का सफर
उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ग्राम नौगीर में 2 जून 1930 को जन्मे बाबूलाल गौर का भाजपा के नेता के रूप में मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रमुख स्थान रहा. 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. बीए और एलएलबी डिग्रीधारी गौर पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय विधायक चुने गए थे. उन्होंने 1977 में गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और वर्ष 2013 तक वहां से लगातार 10 बार विधानसभा चुनाव जीते. 1993 के विधानसभा चुनाव में 59 हजार 666 मतों के अंतर से विजय प्राप्त कर बाबूलाल गौर ने कीर्तिमान रचा था और 2003 के विधानसभा चुनाव में 64 हजार 212 मतों के अंतर से विजय पाकर अपने ही कीर्तिमान को तोड़ा. जून 2016 में भाजपा आलाकमान ने उम्र का हवाला देकर गौर को मंत्री पद छोड़ने के लिए कहा था. पार्टी के इस निर्णय से वे स्तब्ध और दुखी थे. 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा न तो उन्हें टिकट देना चाहती थी न उनकी पुत्रबधू कृष्णा को. गौर ने बगाबती तेवर अपना लिए और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी. आखिरकार भाजपा ने कृष्णा गौर को टिकट दिया और कृष्णा को इस सीट पर जीत मिली.
शोभा ओझा ने कहा कि उनके अंदर से गांधीजी का हत्यारा गोडसे बोल रहा है
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद अब भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को अपराधी की संज्ञा दी है. शिवराज के नेहरू को अपराधी कहे जाने वाले बयान पर भोपाल में प्रतिक्रिया देते हुए सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि 'हमारे भारत को जो भी पीड़ा पहुंचाएगा, हमारे भारत को जो भी खंडित करने का प्रयास करेगा, वह निश्चित रूप से अपराधी होगा, इसमें कोई शक नहीं'. प्रज्ञा के बयान पर कांग्रेस मीडिया सेल की प्रभारी शोभा ओझा ने कहा कि उनके अंदर से गांधीजी का हत्यारा गोडसे बोलता है.
सांसद प्रज्ञा सिंह ने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का हिस्सा है. कांग्रेस सरकारों द्वारा किए गए तमाम समझौते धारा 370 के खत्म होते ही खत्म हो गए. इसलिए अब पाक अधिकृत कश्मीर भारत का है और अब आगे उस पर ही बात होगी और उसे वापस लिया जाएगा. प्रज्ञा ने कहा कि धारा 370 खत्म होने के बाद देशभक्त जश्न मना रहे हैं, जो देशभक्त नहीं है वे रो रहे हैं. ऐसे लोग देश भक्त तो हो ही नहीं सकते. धारा 370 और 5 ए हटने पर जो लोग खुश हैं, हमारे देश पर गर्व कर रहे हैं, जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर गर्व कर रहे हैं वह देशभक्त हैं. उन्होंने कहा कि यह परिभाषा इस बार सिद्ध हो गई है कि कौन देश के साथ है और कौन देश के विरुद्ध है. उन्होंने कहा हमारे अखंड भारत को जो भी पीड़ा पहुंचाएगा, भारत को जो भी खंडित करने का प्रयास करेगा वह निश्चित रूप से अपराधी होगा इसमें कोई शक नहीं है.
प्रज्ञा के इस बयान का कांग्रेस की मीडिया सेल की प्रभारी शोभा ओझा ने विरोध किया है. उन्होंने कहा कि प्रज्ञा ने जो बयान दिया है वह यह साबित करता है कि आज भी उनके अंदर गोडसे बोलता है.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने ओडिशा में सदस्यता अभियान के दौरान देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कश्मीर में धारा 370 लगवाने पर अपराधी कहा था, जिसके बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था. हालांकि बाद में भोपाल आकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि जवाहरलाल नेहरू को लेकर उन्होंने जो कुछ भी ओडिशा में कहा, वह तथ्यों के आधार पर कहा. हालांकि प्रज्ञा ने कांग्रेस द्वारा धारा 370 का विरोध करने को लेकर कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर गर्व कर रहे हैं वह देश भक्त हैं, जो नहीं वह देश के विरुद्ध है.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती पर आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि रतुल से मेरा कोई व्यावसायिक संबंध नहीं है. लेकिन यह मुझे विशुद्ध रूप से एक माला कार्रवाई प्रतीत होता है.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुझे विश्वास है कि अदालत इस बारे में सही रुख अपनाएगी. उनकी जो गिरफ्तारी की गई है मैं इसे मानता हूं कि यह मेलाफाइड है. उन्होंने कहा कि सब संस्थाओं का जिस तरह से राजनैतिक दुरुपयोग किया जा रहा है, यह दुख की बात है. उन्होंने कहा कि यह सब कुछ सामने हे कि क्या किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी चिदंबरम, कभी अहमद पटेल, कभी शिवसेना के नेताओं के, कभी उद्योगपतियों पर इन संस्थाओं द्वारा दबाव बनाया जा रहा है. यह सब ठीक नहीं है. यह देश कहा घसीटा जा रहा है मैं किसी चीज से परेशान नहीं हूं.
स्कूल से निकाले बहनों को फिर से दें प्रवेश
मध्यप्रदेश के धार मे मांडव रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली नेपाली मूल की दो बहनों अनुष्का और अवनिशा को स्कूल से निकालने की घटना को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय ना हो, उन्हें पढ़ाई से वंचित ना होने दिया जाए. उन्होंने कहा कि एक तरफ तो हम नारा देते हैं ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, दूसरी तरफ बेटियों को स्कूल से निकाले जाने की घटना,बेहद आपत्तिजनक है. मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए कि पूरे मामले की तत्काल जांच की जाए. बेटियां वापस स्कूल में पढ़ाई करें. यह सुनिश्चित किया जाए और इसमें अभिभावकों की कोई गलती भी जांच में सामने आती है तो उसके आधार पर बच्चियों को स्कूल से निकालने का निर्णय पूरी तरह से गलत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि भले इन बच्चियों ने देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते, प्रदेश की जनता के प्रति प्रथम दायित्व मेरा है. उन्होंने कहा कि बहन-बेटियों साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं हो, उनके सम्मान को ठेस ना पहुंचे, यह मेरा दायित्व व कर्तव्य है. इसको लेकर मेरी सरकार सदैव वचनबद्ध है.
मुख्यमंत्री कमल नाथ का युवाओं से संवाद में की घोषणा
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हम प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध के बाद नशीले पदार्थों के विरूद्ध बड़ा अभियान चलाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरी सभी युवाओं से अपेक्षा है कि वह हमारे इस अभियान से जुड़े ताकि हम प्रदेश में मिलावटमुक्त प्रदेश बनाएं और युवाओं को नशीले पदार्थों से मुक्त करें.
युवा संकल्प वर्ष 2019-20 समारोह में युवाओं से संवाद के दौरान रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के छात्र आशुतोष मेहरा के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि हम प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध के बाद नशीले पदार्थों के विरूद्ध बड़ा अभियान चलाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरी सभी युवाओं से अपेक्षा है कि वह हमारे इस अभियान से जुड़े ताकि हम प्रदेश में मिलावटमुक्त प्रदेश बनाएं और युवाओं को नशीले पदार्थों से मुक्त करें। उन्होंने कहा कि यह अभियान तभी सफल होगा जब युवा वर्ग इससे जुड़ेगा. एमवीएम के छात्र चंद्रशेखर प्रजापति द्वारा मुख्यमंत्री की युवाओं से अपेक्षा पर पूछे प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने यह कहा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में दो बाते प्रमुखता से होती हैं अचीवमेंट और दूसरा फुलफिलमेंट नाथ ने कहा कि हम शिक्षा प्राप्त करके, रोजगार प्राप्त करके उपलब्धि हासिल कर लेते हैं लेकिन हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हम अपनी उपलब्धि को संतुष्टि में परिवर्तित करें. हमें अपने देश, समाज और परिवार के विकास के लिए भी योगदान देना चाहिए.
एक्सीलेंस कालेज के छात्र अक्षय तिवारी द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रदेश में निवेश के लिए विश्वास का वातावरण तैयार कर रहे हैं ताकि प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार दिए जा सकें. हम अपनी नई निवेश नीति को उद्योगों के जरूरत के मुताबिक सेक्टर वाईस बना रहे हैं. बेहतर निवेश के बगैर हम अपने प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल नहीं कर सकते.
मानसी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मिशन है कि अपने प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएं ताकि वे रोजगार और अन्य प्रदेश के छात्र-छात्राओं के साथ पूरी सक्षमता के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें. इसके लिए हम मध्यप्रदेश में कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं.
सरोजनी नायडु कन्या महाविद्यालय की छात्रा कुमारी ईशा सक्सेना के प्रश्नों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बराबरी से प्रयास कर रहे हैं. अधिक से अधिक स्टेडियम बनाने के साथ ही प्रतिभावान खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय ट्रेनिंग दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलकूद हमारे जीवन के लिए जरूरी है क्योंकि यह में मानसिक अनुशासन के साथ ही हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ भी बनाता है.
एक छात्र द्वारा छिंदवाड़ा मॉडल की तरह मध्यप्रदेश के अन्य क्षेत्रों को भी विकसित करने संबंधी प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में हमने आज से दस-बारह वर्ष पहले ही छिंदवाड़ा में काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा मेरे लिए सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र ही नहीं है बल्कि एक परिवार है जिसकी मैं चिंता करता हूं. मुख्यमंत्री ने कहा कि छिंदवाड़ा मॉडल में मैंने शिक्षा के हर स्तर के अनुसार युवाओं को रोजगार देने की व्यवस्था की है. उन्होंने कहा कि आज सबसे ज्यादा स्किल सेंटर छिंदवाड़ा में है.

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार से नाराज चल रहे संत देव मुरारी बापू ने सरकार से मिले आश्वासन के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास के सामने आत्मदाह करने की घोषणा वापस ले ली. उन्होंने राजधानी के टीटी नगर एसडीएम और टीटी नगर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी घोषणा वापस ली है.
कथा वाचक संत देव मुरारी बापू ने टीटी नगर एसडीएम राजेश गुप्ता और थाना प्रभारी टीटी नगर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने कहा कि मैं अपने आत्मदाह की घोषणा को वापस लेता हूं और अब किसी प्रकार का आंदोलन नहीं होगा. संत देवमुरारी ने सरकार से सुरक्षा देने और पद की मांग की थी. वे अपनी इस मांग को लेकर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी मिले थे, मगर उनकी मांग पूरी नहीं हो पाई थी. इसके चलते उन्होंने रविवार को मीडिया से चर्चा करते हुए आज सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी. इस चेतावनी के बाद देवमुरारी बापू को सरकार की ओर से सुरक्षा और शासकीय पद दिए जाने का आश्वासन मिला है.
उल्लेखनीय है कि रविवार को देव मुरारी बापू ने मीडिया से चर्चा करते हुए कमलनाथ सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में कार्य किया था. चुनाव पूर्व कांग्रेस ने उनसे कुछ वादे किए थे जो अब तक पूरे नहीं हुए हैं. उनकी मेहनत और कार्य को देखकर शंकराचार्य के शिष्य सुबोधानंद व कम्प्यूटर बाबा की तरह सम्मान दिया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके अलावा देव मुरारी बापू ने खुद की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी.
मैं सरकार के साथ हूं और रहूंगा
संत देव मुरारी बापू को सरकार द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने पर उन्होंने कहा कि मैंने अपनी मांग सरकार के सामने रखी थी, जिसे सरकार ने पूरी कर ली है. जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने देव मुरारी बापू को आश्वस्त किया कि निश्चित ही आपको शासकीय पद दिया जाएगा. सरकार से आश्वासन मिलने के बाद देव मुरारी बापू ने जो आत्मदाह की घोषणा की थी उसे निरस्त कर दिया. मीडिया से बातचीत में देव मुरारी बापू ने कहा कि मैं सरकार के साथ हूं और हमेशा सरकार के साथ रहूंगा. सरकार के लिए कार्य करूंगा.