मंगलवार, 20 मई 2025

भाजपा की सरकार में दर्जन भर मंत्री दे चुके हैं इस्तीफा

किसी को बयानबाजी, किसी को 75 साल की उम्र के कारण देना पड़ा था इस्तीफा


भोपाल। भाजपा सरकार के अब तक के कार्यकाल में करीब दर्जन भर  मंत्रियों को अलग-अलग कारणों से मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी शामिल हैं, जिन्होंने करीब आठ माह तक मुख्यमंत्री रहने के बाद पद से इस्तीफा देकर तिरंगा यात्रा निकाली थी। जबकि मंत्रियों में किसी को बयानबाजी तो किसी को उम्र की अधिकता के कारण इस्तीफा देना पड़ा था।
भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक अलग-अलग कारणों से कई मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा था। कोई बयानबाजी को लेकर इस्तीफा देने को विवश हुआ था तो कोई आयकर और लोकायुक्त छापों के चलते इस्तीफा देने को मजबूर हुआ था। मंत्रियों के अधिकांश इस्तीफे शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते हुए हुए थे। प्रदेश में उमाभारती के नेतृत्व में भाजपा ने 2003 में सरकार बनाई थी। उमा भारती 8 दिसंबर 2003 को मुख्यमंत्री बनी। इसके बाद 23 अगस्त 2004 तक वे मुख्यमंत्री रहीं। तिरंगा मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस्तीफा दे दिया। उमा भारती के बाद उनके मंत्री मंडल में मंत्री रहे सुनील नायक से तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने इस्तीफा ले लिया था। नायक से इस्तीफा लेने की वजह उनके बयान बने थे। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रिमंडल के एक मंत्री जुगल किशोर बागड़ी से इस्तीफा मांगा था, क्योंकि लोकायुक्त ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। चौहान के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कई मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा था। इसी तरह 2008 में अजय विश्नाई ने अपने रिश्तेदारों के आवासीय परिसरों पर आयकर के छापे पड़ने की कार्रवाई के चलते इस्तीफा दिया था। इन छापों ने विश्नोई पर भी सवालिया निशान लगा दिया था। नतीजतन, चौहान और पार्टी संगठन ने उनसे इस्तीफा मांगने का फैसला किया। साल  2010 में बेलागांव में हुई गोलीबारी की घटना में अपने परिवार के सदस्यों का नाम आने के कारण तत्कालीन मंत्री अनूप मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ा था। फिर भी मिश्रा और उनके परिवार के सदस्यों को इस घटना में क्लीन चिट मिल गई थी। इसके बाद वे फिर से मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। 2013 में राज्य के तत्कालीन वित्त मंत्री राघवजी भाई को एक सेक्स स्कैंडल के वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि अब राघवजी को इस मामले में क्लीनचिट मिल गई है।
75 की उम्र के चलते दिया था इस्तीफा
वर्ष 2016 में शिवराज सरकार के दो कद्दावर मंत्रियों को केवल इस कारण इस्तीफा देना पड़ा था कि वे 75 साल की उम्र को पार कर चुके थे। इनमें तत्कालीन मंत्री बाबूलाल गौर और सरताज सिंह के नाम ष्शामिल है। दोनां ही मंत्रियों इस्तीफा मांगे जाने पर नाराज थे, मगर केन्द्रीय नेतृत्व के आगे दोनों की नहीं चली और दोनों को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में दोनों ही मंत्रियों के टिकट भी भाजपा ने काट दिए थे।
चुनाव हारे तो इन्होंने दिया इस्तीफा
शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते हुए इमरती देवी, गिर्राज दंडोतिया और ऐदल सिंह कंसाना को चुनाव हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। डा मोहन यादव के नेतृत्व वाली कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले एकमात्र मंत्री रामनिवास रावत थे। उन्होंने चुनाव हारने के कारण इस्तीफा दिया था।
बयानबाजी के चलते फिर घिरे हैं विजय शाह
राज्य के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह से इन दिनों एक बार फिर बदजुबानी के चलते इस्तीफे की मांग उठ रही है। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए बयान के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर विजय शाह से इस्तीफे मांग की जा रही है। इतना ही नहीं भाजपा के कई नेताओं ने भी शाह से इस्तीफे की मांग की है। फिलहाल संगठन और सरकार दोनों ने मौन साध रखा है। मगर उनके मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी जांच के बाद संभावना जताई जा रही है कि संगठन को कोई कदम उठाना पड़ेगा।

बुधवार, 11 दिसंबर 2024

कांग्रेस विधायकों के भोज से मिलेगा नया संदेश ?

कमलनाथ, उमंग सिंघार ने अलग-अलग दिन विधायकों को किया आमंत्रित

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर भोज की राजनीति शुरू होने जा रही है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा अलग-अलग दिन कांग्रेस विधायकों को दिए जाने वाले भोज की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के भोज से कांग्रेस विधायकों को कोई नया संदेश मिल सकता है। यह संदेश क्या होगा, इसका जानकारी तो विधायकों को कमलनाथ के यहां होने वाले भोज के बाद ही मिलेगी।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते एक दिन पहले अपने विधायकों को भोज पर बुलाने की परंपरा वैसे तो कांग्रेस की रही है। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के एक दिन पहले कांग्रेस विधायकों को भोज पर आमंत्रित किया है। इसी दिन वे विधायक दल की बैठक भी करने वाले हैं। नेता प्रतिपक्ष ने विधायकों को अपने बंगले के बजाय राजधानी के एक होटल में भोज पर बुलाया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि विधायक दल की बैठक में सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी। विधायकों के भोज को लेकर उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते वे पार्टी की परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी 16 दिसंबर को अपने बंगले पर कांग्रेस विधायकों को भोज पर आमंत्रित किया है। इस दौरान वे खुद राजधानी में रहेंगे। कमलनाथ के यहां होने वाले विधायकों के भोज को लेकर तरह-तरह  के कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कमलनाथ भोज के बहाने एक बार फिर सक्रियता दिखाएंगे। संभावना है कि इस बहाने विधायकों से उनकी बनी दूरी को करीबी में बदलें। वैसे कमलनाथ पूर्व में भी एक बार ऐसा कर चुके हैं। तब उन्होंने कहा था कि वरिष्ठ होने के नाते और विधायकों के कहने पर उन्होंने भोज दिया है। मगर वर्तमान में कांग्रेस में चल रही उठापटक के चलते कांग्रेस नेताओं को ही यह भोज चिंता में डाल रहा है। माना जा रहा है कि कमलनाथ के यहां होने वाले विधायकों के भोज से विधायकों को कोई संदेश भी मिल सकता है। वह एकता का होगा या फिर कोई और। यह तो भोज के बाद ही पता चलेगा।
उमंग के भोज में शामिल होंगे कमलनाथ !
कमलनाथ खुद छिंदवाड़ा से विधायक हैं और कांग्रेस विधायक दल में सबसे वरिश्ठ विधायक भी है। इस नाते नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उन्हें भी भोज में आमंत्रित किया है, मगर सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि क्या कमलनाथ उमंग द्वारा आयोजित किए जाने वाले भोज में ष्शामिल होंगे। फिलहाल उनके राजधानी पहुंचने का समय और दिन तय नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि 15 की शाम को या फिर 16 दिसंबर की सुबह भोपाल पहुंचेंगे।  

सोमवार, 9 दिसंबर 2024

जीतू ने किया अपमान, किन्नर समाज का लगेगा श्राप



पूर्व  विधायक शबनम मौसी ने पूछा कांग्रेस इनकी बपौती है क्या ?

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में पहली किन्नर विधायक रही शबनम मौसी ने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि मैं जीतू पटवारी से मिलने गई, मगर उनके सहयोगियों ने मिलने नहीं दिया। उन्होंने किन्नर का अपमान किया है। किन्नर समाज का उन्हें श्राप लगेगा। शबनम ने कहा कि कोई मिल नहीं रहा था तो जीतू को अध्यक्ष बनाया दिया, क्या कांग्रेस इनकी बपौती है।
पूर्व विधायक शबनम मौसी आज राजधानी भोपाल पहुंची थी। वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से मिलने पहुंची, मगर उनकी मुलाकात नहीं हुई। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी वे कांग्रेस में शामिल होने के लिए पहुंची थी, मगर उस वक्त भी नेताओं ने उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया। आज वे प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से मिलना चाहती थी, मगर उनके सहयोगियों ने मुलाकात नहीं कराई। उन्होंने कहा कि यह किन्नर का अपमान है। किन्नर समाज का श्राप लगेगा, इन्हें। कांग्रेस की आज जो प्रदेश में स्थिति है, वह इन्हीं जैसे नेताओं के कारण है। कांग्रेस इनकी बपौती है क्या, जिनसे चाहे मिलेंगे और जिन्हें चाहे ठुकरा देंगे? उन्होंने कहा पटवारी में लोगों को जोड़ने की क्षमता नहीं है। कोई अध्यक्ष मिल नहीं रहा था इसलिए जीतू को अध्यक्ष बना दिया। शबनम मौसी ने कहा कि जीतू को अध्यक्ष बनाने के बाद कांग्रेस और खराब हो रही है। जीतू के आचरण ऐसा है, तभी लोग छोड़ के जा रहे हैं। पहले भी सदस्यता लेने आई थी तो अपमानित किया था, मैं बहुत दुखी हूं।
उल्लेखनीय है कि देश की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी ने साल 2000 में शहडोल जिले की सोहागपुर सीट से उपचुनाव जीता था। उन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को 17,800 से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। हालांकि, साल 2003 के विधानसभा चुनावों में वह केवल 1400 वोट पाने में सफल रहीं और हार गईं थीं।

खोया जनाधार पाने बसपा प्रदेश में करेगी सामाजिक सम्मेलन


भोपाल। प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रदेश में फिर अपना वोट बैंक मजबूत करने की तैयारी कर रही है। खोए जनाधार को पाने के लिए बसपा द्वारा अब प्रदेश में अलग-अलग जातियों को जोड़ने के लिए सामाजिक सम्मेलन कराने का फैसला लिया है। सर्वसमाज के नारे पर बसपा फिर से प्रदेश में अपने को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।

ब्हुजन समाज पार्टी को प्रदेश में 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। दोनों ही चुनाव में उसने प्रत्याशी तो मैदान में उतारे मगर एक भी स्थान पर उसे जीत नहीं मिली। इसके बाद से बसपा का संगठन और भी कमजोर हुआ। अब बसपा प्रदेश में एक बार फिर संगठन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।  बसपा ने तय किया है कि पार्टी में जिस समाज के जो पदाधिकारी हैं एवं पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और हारे हुए प्रत्याशी अपनी-अपनी समाज के सामाजिक सम्मेलन कराएंगे। हालांकि ये सम्मेलन समाजों में जन्मे महापुरुषों संतों के नाम पर कराए जाएंगे। रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, देवी अहिल्या बाई होल्कर, संत गाडगे जी महाराज, नामदेव महाराज, संत रविदास, ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों के नाम पर यह आयोजन होंगे।
जनाधार वाली विधानसभा सीटों पर फोकस
बसपा अब उन सीटों पर फोकस कर रही है जहां उसका वोट बैंक निर्णायक रहा है। सुपर-30 के फॉर्मूला पर बसपा जनवरी से मजबूत जनाधार वाली 30 विधानसभाओं में संगठन को मजबूत करेगी। इन 30 विधानसभाओं में बूथ वार कमेटियों के गठन के साथ ही कमजोर बूथों पर वोट बैंक बढ़ाने के लिए प्रदेश, सेक्टर, जोन के इंचार्ज बैठकें करेंगे। करीब 3 महीने बाद अगले फेज में सुपर-30 के तहत 30 अन्य विधानसभाओं में काम शुरू किया जाएगा।

रविवार, 17 नवंबर 2024

पटवारी से नाराज मुस्लिम नेता राहुल से मिलने जाएंगे दिल्ली

हामीद काजी को उपाध्यक्ष, अनीस को महामंत्री बनाने से खफा है नेता

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी गठित होने के बाद नाराज लोगां की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। अब कार्यकारिणी में उम्रदराज और आधारहीन मुस्लिम नेताओं को स्थान दिए जाने के खिलाफ कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। साथ ही इन नेताओं ने बुधनी और विजयपुर उपचुनाव के परिणाम आने के बाद दिल्ली जाकर राहुल गांधी से मुलाकात कर कांग्रेस के हालात बताने की तैयारी की है।
कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ करीब-करीब हर वर्ग के नेताओं ने मोर्चा खोल रखा है। कांग्रेस की कार्यकारिणी गठन के बाद से तो बड़े नेताओं के साथ अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं की नाराजगी भी खुलकर दिखाई दे रही है। इन नेताओं ने स्थानीय स्तर पर विरोध जताने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी के वरिश्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश कांग्रेस की स्थिति से अवगत कराने का फैसला लिया है। सूत्रों की माने तो जिस अंचल से पटवारी आते हैं यानी मालवाअंचल से ही मुस्लिम वर्ग के नेता अब उनके खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं। ये नेता निमाड़ अंचल के बुरहानपुर विधानसभा सीट से राकपा के विधायक रहे हमीद काजी को उपाध्यक्ष बनाए जाने से खफा हैं। हमीद काजी के अलावा अनीस मामू को महामंत्री बनाने से भी इनकी नाराजगी दिखाई दे रही है। इसके अलावा शेख अलीम प्रदेश अध्यक्ष के निजी मित्र हैं, इस कारण उन्हें अनुशासन समिति में मौका दिया गया। वहीं  सोहराब पटेल राऊ विधानसभा क्षेत्र के समीकरण को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं, इस कारण उन्हें पटवारी ने एडजस्ट किया।
उपचुनाव परिणाम के बाद उठाएंगे मामला
मुस्लिम नेताओं का कहना है कि पटवारी ने अपनी कार्यकारिणी में आधारहीन मुस्लिम नेताओं को स्थान दिया है। सूत्रों की माने तो नाराज मुस्लिम नेताओं को कांग्रेस के बड़े नेताओं का भी समर्थन मिला हुआ है। बताया जा रहा है कि नाराज चल रहे नेताओं ने दिल्ली जाकर राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के को सारी बातें बताने और आधारहीन मुस्लिम नेताओं को पद देने की शिकायत करने की तैयारी की थी, मगर जिन बड़े नेताओं का उन्हें समर्थन मिल रहा है, उन नेताओं ने इन्हें फिलहाल उपचुनाव के परिणाम आने तक रोक लिया है। इन नेताओं से कहा है कि बुधनी और विजयपुर उपचुनाव के परिणाम आने के बाद ही वे दिल्ली जाएं तो उनकी बातों को कांग्रेस हाईकमान भी गंभीरता से लेगा।

बेजान गढ़ में जान फूंक पाएंगे कमलनाथ ?

जन्मदिन के बहाने एक बार फिर गढ़ में कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद

भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बार फिर अपने गढ़ छिंदवाड़ा में सक्रिय हुए हैं। इस बार वे जन्मदिन के बहाने अपने बेजान गढ़ छिंदवाड़ा में जान फूंकने का काम कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में मिली कांग्रेस को करारी हार के बाद वे फिर से अपने गढ़ छिंदवाड़ा को अजेय गढ़ बनाने में जुट गए हैं। अब देखना है कि कमलनाथ इस बार छिंदवाड़ा में अपनी उपस्थिति को कितना मजबूत कर पाते हैं?
लोकसभा चुनाव के बाद हाल ही में हुए बुधनी और विजयपुर के उपचुनाव में भी कमलनाथ उतने सक्रिय नजर नहीं आए, जितना की लोकसभा चुनाव के पहले रहे थे। लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा जो कि उनका अपना किला था, उसे हारने के बाद करीब-करीब सक्रिय राजनीति से उन्होंने दूरी बना ली थी। इसके बाद माना जा रहा था कि कमलनाथ उपचुनाव में सक्रिय होंगे। उनका कार्यक्रम भी तय था, मगर बाद में स्वास्थ्यगत कारणों के चलते उन्होंने दूरी बना ली थी। अब जबकि प्रदेश में उपचुनाव हो गया इसके बाद वे अब फिर से अपने जन्मदिन के बहाने छिंदवाड़ा पहुंचे हैं। 18 नवंबर को वे अपने बेजान गढ़ में एक बार फिर जान फूंकने की कवायद करने जा रहे हैं। उनके समर्थकों ने राजधानी पहुंचने के बाद ही इस बात का संकेत दिया था कि कमलनाथ फिर प्रदेश में सक्रिय नजर आएंगे। हालांकि फिलहाल यह माना जा रहा है कि कमलनाथ खुद अपनी कमजोर हुई छिंदवाड़ा की जमीन को मजबूत बनाना चाह रहे हैं। इसके चलते उन्होंने छिंदवाड़ा में सक्रियता दिखाई है और जन्मदिन के बहाने कार्यक्रम आयोजित कर कांग्रेस को मजबूत बनाने का प्रयास करना शुरू कर दिया हैं।
 
कई साथी साथ छोड़कर बन गए भाजपाई
कमलनाथ और छिंदवाड़ा को एक दूसरे का पर्याय बने 4 दशक से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन छिंदवाड़ा में पिछला एक साल कांग्रेस और कमलनाथ दोनों के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। कमलनाथ के कई करीबी हाथ छुड़ाकर भाजपा में गए, तो छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ को करारी हार झेलनी पड़ी। भाजपा के तंज से इधर कांग्रेस कमलनाथ के जन्मदिन को सियासत से अलग करके देख रही है। कांग्रेस का मानना है कि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। उनका छिंदवाड़ा से रिश्ता भाजपा नहीं समझ सकती। वे एक बार फिर अपने गढ़ में ताकत दिखाने जा रहे हैं।
 
पहले महाकौशल, फिर प्रदेश
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छिंदवाड़ा में बढ़ी सक्रियता को लेकर कांग्रेस में उनके समर्थकों का कहना है कि कमलनाथ के लिए हमेशा ही पहले छिंदवाड़ा और महाकौशल रहा है। इसके बाद वे प्रदेश में कांग्रेस के मजबूत करने की कवायद करते हैं। इस बार भी वे पहले छिंदवाड़ा और महाकौशल में कमजोर हुई कांग्रेस को पहले मजबूत करेंगे, इसके बाद प्रदेश स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कमलनाथ समर्थकों का मानना है कि बिना कमलनाथ प्रदेश में कांग्रेस मजबूत नहीं हो सकेगी। 

गुरुवार, 5 सितंबर 2024

आदिम जाति विभाग में आवेदन करें, 65 साल तक शिक्षक बने रहें

आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह ने की घोषणा

भोपाल। शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को प्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह ने तोहफा दिया है। उन्होंने कहा कि 62 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक आदिम जाति कल्याण विभाग में आवेदन करें, उन्हें विभाग के स्कूलों में 65 साल की आयु तक सेवा करने का अवसर दिया जाएगा।
आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह आज खंडवा में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुए थे। शाह ने कहा कि शिक्षकों का जितना सम्मान किया जाए वह काम है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी ,विज्ञान, खेल और गणित के विषयों के शिक्षकों की बड़ी कमी है। इस विषय के जो शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए हैं और अपनी सेवा देना चाहते हैं, वह 65 साल की उम्र तक पे माइनस पेंशन योजना के तहत अपने सेवा दे सकेंगे। जल्दी ही इस तरह का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि  आदिम जाति विभाग में आवेदन करें।  हम उन्हें 11-11 महीनों तक विस्तार देते हुए 65 साल तक उनकी सेवा लेंगे। मंत्री ने कहा कि सेवा विस्तार के लिए पांच साल की परफारेंस चेक की जाएगी। बेहतर परिणाम वाले शिक्षकों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।