बुधवार, 30 नवंबर 2011

‘हेमा’ से चार गुना महंगी ‘आशा’

रुपहले पर्दे पर भले ही फिल्म अभिनेत्री हेमामालिनी का क्रेज हो, मगर गीतों की दुनिया में आशा भोसले उनसे आगे हैं़ यही वजह है कि राजधानी भोपाल में स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में आई दोनों कलाकारों में हेमामालिनी से चार गुना ज्यादा मानदेय का भुगतान आशा भोसले को राज्य सरकार ने किया है़ राज्य सरकार द्वारा आयोजित इस समारोह पर दो करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए हैं़
राज्य विधानसभा में आज कांग्रेस विधायक आरिफ अकील ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को आड़े हाथ लिया़ उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने लोगों याने भाजपा से जुड़े लोगों को उपकृत करने के लिए यह समारोह किया और अनाब-सनाब रुपए खर्च किए़ उन्होंने लाल परेड मैदान पर आयोजित समारोह पर खर्च की गई राशि का ब्यौरा मांगा़ इस पर संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि इस समारोह पर 2,67,28,015 करोड़ रुपए का खर्च आया है़ इसमें कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कालाकारों का भुगतान भी शामल है़ श्री अकील ने आरोप लगाया कि इस समारोह में हेमामालिनी का नृत्य नाटक इसलिए रखा गया क्योंकि वे भाजपा से जुड़ी हुई हैं और उन्हें निर्धारित राशि बारह लाख के एवज में 16 लाख 70 हजार रुपए का भुगतान किया गया है़ इसी तरह आशा भोसले को 35 लाख का भुगतान किया जाना चाहिए था, परंतु सरकार ने उन्हें 64 लाख रुपए का भुगतान किया है़ इस पर श्री शर्मा ने कहा कि यह गलत आरोप है़ इस समारोह में हेमामालिनी को इसलिए बुलवाया गया था कि वे प्रसिद्ध नर्तकी हैं, जबकि आशा भोसले अच्छी गायिका हैं़ उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में कोई आपत्ति है तो वे उन्हें दिए गए भुगतान की जांच करा लेंगे़
स्थापना दिवस पर आयोजित इस समारोह में भाग लेने आई दोनों कलाकारों को शासन द्वारा चेक के माध्यम से भुगतान किया गया है़ आशा भोसले को जो भुगतान किया गया है वह एक्सीलेंसी टाइम इंटरटेनमेंट को किया गया है़ यह भुगतान 21 अक्टूबर एवं 22 अक्टूबर को चार चेकों के द्वारा किया गया है़ जबकि हेमामालिनी को जो भुगतान किया गया है वह तीन चेकों के द्वारा दिनांक 19 अक्टूबर, 25 अक्टूबर एवं 1 नवंबर को किया गया है़ आशा भोसले को 64,06,260 रुपए और हेमामालिनी को 16,70,000 रुपए का भुगतान सरकार ने किया है़

रविवार, 6 नवंबर 2011

खफा हो सकते हैं ब्राह्मण

भारतीय जनता पार्टी में सत्ता और संगठन के बीच उभरे आक्रोश के शिकार ब्राह्मण नेता होते जा रहे हैं़ पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा के बाद पन्ना जिला सहकारी बैंक के जिला अध्यक्ष संजय नगाइच, एनएचडीसी के सदस्य राजेश डोंगरे के बाद अब पार्टी के उपाध्यक्ष रघुनंदन शर्मा को पार्टी उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है़ ब्राह्मण नेताओं पर लगातार हो रही कार्यवाही से अब पार्टी के कुछ नेता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं ब्राह्मण खफा न हो जाएं़ कुछ ब्राह्मण मंत्री भी दबी जुबान से शर्मा पर हुई कार्यवाही के खिलाफ नजर आ रहे हैं़
भारतीय जनता पार्टी में सत्ता और संगठन के बीच उभरे असंतोष को शांत करने के लिए पार्टी पदाधिकारियों द्वारा जो कार्यवाही की जा रही है, उनमें अधिकतर ब्राह्मण नेता शिकार हो रहे हैं़ लगातार इस तरह की कार्यवाही से पार्टी के ब्राह्मण नेताओं में नाराजगी भी दिखाई देने लगी है़ सरकार में मंत्री पद पर बैठे ब्राह्मण वर्ग के मंत्री से लेकर छोटे स्तर के कार्यकर्ता में अब पार्टी पदाधिकारियों को लेकर नाराजगी दिखाई देने लगी है़ पार्टी द्वारा अब तक किसी भी मुद्दे पर उभरे विवाद के बाद जो कार्यवाही की गई उसमें ब्राह्मण वर्ग के नेता ही शिकार हुए हैं, बाकी मामलों को पार्टी ठंडे बस्ते में डाल देती रही है़ पार्टी पदाधिकारियों द्वारा की गई इस तरह की कार्यवाही से पार्टी के ब्राह्मण नेता और सरकार में इस वर्ग के मंत्री खफा नजर आ रहे हैं़ खुलकर तो कोई सामने नहीं आ रहा है, लेकिन दबी जुबान से सब यही कहते नजर आ रहे हैं कि रघुनंदन शर्मा ने क्या गलत कहा था, जो उन्हें अनुशासन का डंडा दिखाया गया़ शर्मा के बहाने पार्टी अन्य नेताओं को दबाना चाहती है़
भाजपा ने अब तक पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा को सिर्फ आरोप लगते ही मंत्री पद से हटा दिया था़ उनसे पार्टी ने इस्तीफा ले लिया था़ इसके बाद राज्य के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा लगातार ब्राह्मण वर्ग के पार्टी नेतााओं विशेषकर जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष पद पर निर्वाचित नेताओं की उपेक्षा की जाती रही, लेकिन कई शिकायतों के बाद भी उन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई़ इतना ही नहीं उन्हें हर मामले में संगठन और सरकार दोनों को ही अवगत करा दिया था़ इसके बाद भी हाल ही में पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच और बिसेन के बीच नया विवाद उठा, जिसमें बिसेन ने उन्हें चोर तक कह डाला, मगर पार्टी ने जांच के बाद कोई कार्रवाई नहीं की़ इस मामले के बाद उमा भारती के समर्थक माने जाने वाले एनएचडीसी के सदस्य राजेश डोंगरे को पार्टी द्वारा सदस्य पद से हटा दिया गया़ डोंगरे को पार्टी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी नंदकुमार सिंह चौहान की राजनीति का भी शिकार होना पड़ा़ श्री डोंगरे उमा भारती के अलावा स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस के समर्थक माने जाते हैं, और नंदकुमारसिंह चौहान एवं अर्चना चिटनिस के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं, इस कारण चौहान ने अपने कद का फायदा उठाते हुए राजेश डोंगरे को तो पद से हटवाया ही साथ ही उनके भाई आशीष डोंगरे जो तकनीकी शिक्षा में डायरेक्टर थे उन्हें भी हटवा कर पॉलीटेक्निक भोपाल का प्राचार्य बनवा दिया़ इसके बाद अब पार्टी पदाधिकारियों को रघुनंदन शर्मा द्वारा उठाए मुद्दे पर उन्हें सीख देते हुए उपाध्यक्ष पद से तो हटाया साथ ही दस दिन में जवाब देने की बात कहकर एक नोटिस भी थमा दिया है़ पार्टी द्वारा की गई इस कार्यवाही से ब्राह्मण नेताओं में खासी नाराजगी दिखाई देने लगी है़
ये भी हैं उपेक्षित
स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस, पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव, पूर्व सांसद डॉ़ राजेन्द्र पांडे, भोपाल के सांसद कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी, रीवा के पूर्व सांसद चंद्रमणि त्रिपाठी, होशंगाबाद के विधायक गिरजाशंकर शर्मा, पूर्व सांसद स्वर्गीय लक्ष्मीनारायण शर्मा के पुत्र शैलेन्द्र शर्मा, लघु उद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष बिपिन दीक्षित,रीवा जिले की देवतालाब विधासभा क्षेत्र के विधायक गिरीश गौतम, सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ल, सतना जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष कमलाकर चतुर्वेदी, पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच, हाल में में संगठन मंत्री पद से हटाए गए अजय पांडे, चंद्रमोहन मिश्रा, कांग्रेस से भाजपा में आए बालेन्दु शुक्ल, कांग्रेस से भाजपा में आए नर्मदा प्रसाद शर्मा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से भाजपा में आए सतेंदु तिवारी, गोंगपा से भाजपा में आए विष्णु शर्मा है़ इन नेताओं को इस बात का मलाल है कि पार्टी जब जातिगत वोट की जरुरत पड़ती है तो उनका उपयोग करती है, बाद में इन नेताओं की उपेक्षा शुरु हो जाती है़

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

खफा हो सकते हैं ब्राह्मण

भारतीय जनता पार्टी में सत्ता और संगठन के बीच उभरे आक्रोश के शिकार ब्राह्मण नेता होते जा रहे हैं़ पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा के बाद पन्ना जिला सहकारी बैंक के जिला अध्यक्ष संजय नगाइच, एनएचडीसी के सदस्य राजेश डोंगरे के बाद अब पार्टी के उपाध्यक्ष रघुनंदन शर्मा को पार्टी उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है़ ब्राह्मण नेताओं पर लगातार हो रही कार्यवाही से अब पार्टी के कुछ नेता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं ब्राह्मण खफा न हो जाएं़ कुछ ब्राह्मण मंत्री भी दबी जुबान से शर्मा पर हुई कार्यवाही के खिलाफ नजर आ रहे हैं़
भारतीय जनता पार्टी में सत्ता और संगठन के बीच उभरे असंतोष को शांत करने के लिए पार्टी पदाधिकारियों द्वारा जो कार्यवाही की जा रही है, उनमें अधिकतर ब्राह्मण नेता शिकार हो रहे हैं़ लगातार इस तरह की कार्यवाही से पार्टी के ब्राह्मण नेताओं में नाराजगी भी दिखाई देने लगी है़ सरकार में मंत्री पद पर बैठे ब्राह्मण वर्ग के मंत्री से लेकर छोटे स्तर के कार्यकर्ता में अब पार्टी पदाधिकारियों को लेकर नाराजगी दिखाई देने लगी है़ पार्टी द्वारा अब तक किसी भी मुद्दे पर उभरे विवाद के बाद जो कार्यवाही की गई उसमें ब्राह्मण वर्ग के नेता ही शिकार हुए हैं, बाकी मामलों को पार्टी ठंडे बस्ते में डाल देती रही है़ पार्टी पदाधिकारियों द्वारा की गई इस तरह की कार्यवाही से पार्टी के ब्राह्मण नेता और सरकार में इस वर्ग के मंत्री खफा नजर आ रहे हैं़ खुलकर तो कोई सामने नहीं आ रहा है, लेकिन दबी जुबान से सब यही कहते नजर आ रहे हैं कि रघुनंदन शर्मा ने क्या गलत कहा था, जो उन्हें अनुशासन का डंडा दिखाया गया़ शर्मा के बहाने पार्टी अन्य नेताओं को दबाना चाहती है़
भाजपा ने अब तक पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा को सिर्फ आरोप लगते ही मंत्री पद से हटा दिया था़ उनसे पार्टी ने इस्तीफा ले लिया था़ इसके बाद राज्य के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा लगातार ब्राह्मण वर्ग के पार्टी नेतााओं विशेषकर जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष पद पर निर्वाचित नेताओं की उपेक्षा की जाती रही, लेकिन कई शिकायतों के बाद भी उन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई़ इतना ही नहीं उन्हें हर मामले में संगठन और सरकार दोनों को ही अवगत करा दिया था़ इसके बाद भी हाल ही में पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच और बिसेन के बीच नया विवाद उठा, जिसमें बिसेन ने उन्हें चोर तक कह डाला, मगर पार्टी ने जांच के बाद कोई कार्रवाई नहीं की़ इस मामले के बाद उमा भारती के समर्थक माने जाने वाले एनएचडीसी के सदस्य राजेश डोंगरे को पार्टी द्वारा सदस्य पद से हटा दिया गया़ डोंगरे को पार्टी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी नंदकुमार सिंह चौहान की राजनीति का भी शिकार होना पड़ा़ श्री डोंगरे उमा भारती के अलावा स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस के समर्थक माने जाते हैं, और नंदकुमारसिंह चौहान एवं अर्चना चिटनिस के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं, इस कारण चौहान ने अपने कद का फायदा उठाते हुए राजेश डोंगरे को तो पद से हटवाया ही साथ ही उनके भाई आशीष डोंगरे जो तकनीकी शिक्षा में डायरेक्टर थे उन्हें भी हटवा कर पॉलीटेक्निक भोपाल का प्राचार्य बनवा दिया़ इसके बाद अब पार्टी पदाधिकारियों को रघुनंदन शर्मा द्वारा उठाए मुद्दे पर उन्हें सीख देते हुए उपाध्यक्ष पद से तो हटाया साथ ही दस दिन में जवाब देने की बात कहकर एक नोटिस भी थमा दिया है़ पार्टी द्वारा की गई इस कार्यवाही से ब्राह्मण नेताओं में खासी नाराजगी दिखाई देने लगी है़
ये भी हैं उपेक्षित
स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस, पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव, पूर्व सांसद डॉ़ राजेन्द्र पांडे, भोपाल के सांसद कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी, रीवा के पूर्व सांसद चंद्रमणि त्रिपाठी, होशंगाबाद के विधायक गिरजाशंकर शर्मा, पूर्व सांसद स्वर्गीय लक्ष्मीनारायण शर्मा के पुत्र शैलेन्द्र शर्मा, लघु उद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष बिपिन दीक्षित,रीवा जिले की देवतालाब विधासभा क्षेत्र के विधायक गिरीश गौतम, सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ल, सतना जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष कमलाकर चतुर्वेदी, पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजय नगाइच, हाल में में संगठन मंत्री पद से हटाए गए अजय पांडे, चंद्रमोहन मिश्रा, कांग्रेस से भाजपा में आए बालेन्दु शुक्ल, कांग्रेस से भाजपा में आए नर्मदा प्रसाद शर्मा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से भाजपा में आए सतेंदु तिवारी, गोंगपा से भाजपा में आए विष्णु शर्मा है़ इन नेताओं को इस बात का मलाल है कि पार्टी जब जातिगत वोट की जरुरत पड़ती है तो उनका उपयोग करती है, बाद में इन नेताओं की उपेक्षा शुरु हो जाती है़

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

भाजपा में उभरे असंतोष के स्वर

भारतीय जनता पार्टी में अब सत्ता और संगठन के बीच असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं़ मंत्री बाबूलाल गौर द्वारा अफसरों को आड़े हाथ लेने के बाद अब पार्टी के उपाध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने सरकार के मुखिया पर ही सवाल खड़ा कर दिया है़ पार्टी के कुछ विधायक पहले से ही सरकार द्वारा उनकी बात न सुने जाने को लेकर खफा हैं तो कुछ लाल बत्ती की चाहत वाले मुराद पूरी न होने से नाराज हैं़
अनुशासन की दुहाई देने वाली भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है़ सत्ता और संगठन के बीच तकरार साफ दिखाई देने लगी है़ मंत्रियों द्वारा लगातार विवादित बयानों के बाद अब संगठन के पदाधिकारी ही सरकार पर सवाल खड़ा कर रहे हैं़ हाल ही में नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर द्वारा एक सेमिनार में यह कहकर सरकार और संगठन के सामने चिंता खड़ी कर दी थी कि अफसर किसी की सुनते ही नहीं हैं़ श्री गौर ने सेमिनार में सरकारी व्यवस्था को खूब कोसा़ गौर द्वारा यह कोई पहला अवसर नहीं था जब सरकार को कोसा गया हो़ गौर पहले भी सरकार को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं़ गौर के इस बयान पर सेमिनार में उपस्थित मणिपुर और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल ओ़एऩश्रीवास्तव ने सटीक टिप्पणी कर दी कि अगर अफसर नहीं सुनते तो सत्ताधारी दल क्या कर रहा है़ गौर द्वारा मंगलवार को दिए इस बयान के बाद बुधवार को संगठन चिंतित नजर आया, मगर कोई भी पदाधिकारी इस मामले में कुछ कहने को तैयार नहीं था़ गौर का मामला शांत हुआ ही था कि बुधवार को राज्य के उज्जैन शहर में भाजपा के रघुनंदन शर्मा ने प्रदेश के मुखिया सहित मंत्रियों को यह कहकर आड़े हाथ लिया कि मुखिया सहित मंत्री केवल घोषणा करते हैं, काम नहीं़ शर्मा द्वारा की गई इस टिप्पणी के बाद संगठन की चिंता बढ़Þ गई है़ शर्मा सिंहस्थ के लिए सरकार द्वारा नगर निगम को देने घोषित की गई राशि न देने को लेकर नाराज थे़ शासन ने सिंहस्थ के लिए 2011-12 के बजट में 56 करोड़ रुपए देने का प्रावधान किया है, लेकिन यह राशि विभागों को मिली नहीं है़ उन्होंने अफसरों को भी आड़े हाथ लिया़ शर्मा के इस बयान की जानकारी जब राजधानी भोपाल तक पहुंची तो सरकार और संगठन की चिंता बढ़Þ गई़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा के साथ संगठन महामंत्री अरविंद मेनन और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की बैठक हुई़ इसके बाद विवादित बयान देने वालों की जानकारी दिल्ली तक भेज दी गई़ बताया जाता है कि शर्मा ने जिस कार्यक्रम में यह मुद्दा उठाया उसकी सीडी बुलावकर दिल्ली भेजी है़ वहीं भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल भी आज भोपाल में पदाधिकारियों से चर्चा करते रहे, जबकि रघुनंदन शर्मा दिल्ली पहुंच गए़
भाजपा सरकार को घेरने के लिए पार्टी के ही लोगों द्वारा उठाए गए सवालों का यह कोई पहला अवसर नहीं है़ इसके पूर्व गौर के अलावा मंत्रियों में परिवहन एवं जेल राज्यमंत्री नारायण सिंह कुशवाह उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन,कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता के अलावा विवादों में रहे लोक निर्माण मंत्री नागेन्द्र सिंह, आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह, पर्यटन मंत्री तुकोजीराव पवार, खाद्य मंत्री पारस जैन के कारण सरकार घिरते नजर आई है़ मंत्रियों के अलावा समय-समय पर विधायकों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं़ सरकार के खिलाफ सवाल उठाने वाले विधायकों में सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक जुगलकिशोर बागरी, करेरा विधानसभा क्षेत्र के रमेश चंद्र खटीक, बिजावर की विधायक आशारानी सिंह, कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोती कश्यप, मुड़वारा के विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार, जबलपुर पश्चिम के विधायक हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू, पूर्व मंत्री एवं हरदा के विधायक कमल पटेल,होशंगाबाद के विधायक गिरजाशंकर शर्मा, धार की विधायक नीना वर्मा हैं़ इनमें कमल पटेल, नीना वर्मा और होशंगाबाद के विधायक गिरजाशंकर शर्मा तो कई मर्तबा विधानसभा में सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुके हैं़ सरकार के खिलाफ कई मामले में वे ऐसे सवाल कर चुके हैं जिनके कारण मंत्री सदन में जवाब देने की स्थिति में नहीं रहे हैं़

हीरासिंह का राजनीतिक दखल नहीं आ रहा रास

प्रदेश के आदिवासी नेताओं को अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम का प्रदेश के आदिवासियों के बीच राजनीतिक दखल करना अब रास नहीं आ रहा है़ गोंगपा से अलग हुए आदिवासी नेताओं ने अब हीरासिंह मरकाम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, उन्हें साफ तौर पर यह कहा गया है कि वे छत्तीसगढ़Þ राज्य में आदिवासियों की राजनीति करें, मध्यप्रदेश में दखल न दें़ हीरासिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले और कोंई नहीं बल्कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के ही पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी हैं़
बार-बार विभाजन का दंश झेलने के बाद अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम के खिलाफ प्रदेश के गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से अलग होकर भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनाने वाले पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी ने मोर्चा खोल दिया है़ हाल ही में वे अपने दल को निर्वाचन आयोग से मान्यता दिलाकर लाए हैं और अब संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय हो गए हैं़ श्री शाह ने अब तक चौदह जिलों में भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की जिला इकाईयों का गठन कर दिया है़ इसके बाद अब उनका लक्ष्य सिर्फ यह है कि आदिवासी वर्ग मध्यप्रदेश के नेता ही आदिवासियों के दल का नेतृत्व करें़ वे दूसरे राज्य में रहकर प्रदेश के आदिवासियों की राजनीति करने वाले नेताओं के खिलाफ मुहिम छेड़ रहे हैं़ उनकी इस मुहिम में गोंडवाना मुक्ति सेना के पदाधिकारी एवं पूर्व विधायक दरबूसिंह उइके के अलावा मुक्ति सेना छोड़कर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में शामिल हुए गुलजारसिंह मकराम के भी शामिल होने की बात कही जा रही है़ वैसे दरबूसिंह उइके ने तो बट्टी को इस बात के लिए आश्वस्त कर दिया है कि वे हीरासिंह के खिलाफ जो मुहिम छेड़ी जाएगी उसके समर्थन में हैं, लेकिन गुलजार ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं़
पूर्व विधायक और भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहनशाह बट्टी ने बताया कि उन्होेंने एक सूत्री कार्यक्रम तय किया है कि वे आदिवासियों के बीच जाकर यह बात कहेंगे की हीरासिंह मरकाम का विरोध किया जाए और उन्हें मध्यप्रदेश छोड़कर छत्तीसगढ़ में राजनीति करने को कहा जाए़ श्री बट्टी ने बताया कि हम उन्हें यह आश्वासन देंगे की छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश के आदिवासी नेता उनके दल के खिलाफ कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे़ भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सुखराम बौद्ध ने बताया कि हीरासिंह मरकाम का मध्यप्रदेश के आदिवासियों के बीच जाकर राजनीति करने का हम विरोध करेंगे़