प्रदेश के आदिवासी नेताओं को अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम का प्रदेश के आदिवासियों के बीच राजनीतिक दखल करना अब रास नहीं आ रहा है़ गोंगपा से अलग हुए आदिवासी नेताओं ने अब हीरासिंह मरकाम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, उन्हें साफ तौर पर यह कहा गया है कि वे छत्तीसगढ़Þ राज्य में आदिवासियों की राजनीति करें, मध्यप्रदेश में दखल न दें़ हीरासिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले और कोंई नहीं बल्कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के ही पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी हैं़
बार-बार विभाजन का दंश झेलने के बाद अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम के खिलाफ प्रदेश के गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से अलग होकर भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनाने वाले पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी ने मोर्चा खोल दिया है़ हाल ही में वे अपने दल को निर्वाचन आयोग से मान्यता दिलाकर लाए हैं और अब संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय हो गए हैं़ श्री शाह ने अब तक चौदह जिलों में भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की जिला इकाईयों का गठन कर दिया है़ इसके बाद अब उनका लक्ष्य सिर्फ यह है कि आदिवासी वर्ग मध्यप्रदेश के नेता ही आदिवासियों के दल का नेतृत्व करें़ वे दूसरे राज्य में रहकर प्रदेश के आदिवासियों की राजनीति करने वाले नेताओं के खिलाफ मुहिम छेड़ रहे हैं़ उनकी इस मुहिम में गोंडवाना मुक्ति सेना के पदाधिकारी एवं पूर्व विधायक दरबूसिंह उइके के अलावा मुक्ति सेना छोड़कर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में शामिल हुए गुलजारसिंह मकराम के भी शामिल होने की बात कही जा रही है़ वैसे दरबूसिंह उइके ने तो बट्टी को इस बात के लिए आश्वस्त कर दिया है कि वे हीरासिंह के खिलाफ जो मुहिम छेड़ी जाएगी उसके समर्थन में हैं, लेकिन गुलजार ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं़
पूर्व विधायक और भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहनशाह बट्टी ने बताया कि उन्होेंने एक सूत्री कार्यक्रम तय किया है कि वे आदिवासियों के बीच जाकर यह बात कहेंगे की हीरासिंह मरकाम का विरोध किया जाए और उन्हें मध्यप्रदेश छोड़कर छत्तीसगढ़ में राजनीति करने को कहा जाए़ श्री बट्टी ने बताया कि हम उन्हें यह आश्वासन देंगे की छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश के आदिवासी नेता उनके दल के खिलाफ कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे़ भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सुखराम बौद्ध ने बताया कि हीरासिंह मरकाम का मध्यप्रदेश के आदिवासियों के बीच जाकर राजनीति करने का हम विरोध करेंगे़
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें