मंगलवार, 31 मई 2016

तीसरी सीट पर कांग्रेस को चुनौती

भाजपा ने खेला दाव, विवेक तन्खा के मुकाबले मैदान में उतारा विनोद गोटिया को

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीनों सीटों पर भाजपा अपना कब्जा जमाने के लिए तीसरी सीट पर कांग्रेस को चुनौती दे डाली है. भाजपा ने कांग्रेस प्रत्याशी विवेक तन्खा के खिलाफ मैदान में भाजपा के प्रदेश महामंत्री विनोद गोटिया को उतारा है. गोटिया ने संगठन के हरी झंडी मिलने के बाद दोपहर को भाजपा के उपाध्यक्ष विजेश लुनावत के साथ विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन भर दिया.
राज्यसभा की प्रदेश में रिक्त हो रही तीन सीटों में से एक सीट पर मतदान की स्थिति भाजपा ने निर्मित कर दी है. कांग्रेस के खाते वाली इस सीट पर कांग्रेस ने विवेक तन्खा को मैदान में उतारा था. तन्खा के मैदान में उतरने के साथ ही भाजपा में यह तैयारी शुरु हो गई थी कि तीसरी सीट पर भी चुनाव लड़ा जाए. वैसे तो तीसरी सीट के लिए भाजपा संगठन ने प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में ही यह फैसला कर लिया था कि प्रत्याशी मैदान में उतारा जाए. इसके चलते राष्ट्रीय नेतृत्व को जानकारी भी दे दी थी. इसके बाद सोमवार शाम से भाजपा संगठन ने इस मामले पर सक्रियता दिखाई और पार्टी के प्रदेश महामंत्री विनोद गोटिया को मैदान में उतारने का फैसला कर लिया था, मगर आज सुबह पूर्व सांसद फूलचंद वर्मा द्वारा चुनाव लड़ने की बात कहते हुए दावेदारी करने पर संगठन के सामने संकट खड़ा हुआ. वर्मा ने दलित कार्ड खेलते हुए अपना दावा पेश किया, इसके बाद वर्मा के दावे करने की बात को राष्ट्रीय नेतृत्व को बताया. करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद यह तय हुआ कि वर्मा नहीं, बल्कि गोटिया ही नामांकन भरेंगे.राष्ट्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद गोटिया ने प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लुनावत के साथ विधानसभा पहुंचकर दोपहर 2 बजे अपना नामांकन तीसरी सीट के लिए भर दिया. गोटिया के नामांकन फार्म पर दीपक जोशी, सुरेन्द्र नाथ सिंह, विष्णु खत्री, दिव्यराजसिंह, शंकरलाल तिवारी, पुष्पेन्द्र पाठक, केदारनाथ शुक्ला, कैलाश यादव, दिलीपसिंह परिहार  प्रस्तावक बने हैं. 
गोटिया ने नामांकन भरने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि नामांकन भरना और चुनाव लड़ने का उनका खुद का फैसला है. यह पूछे जाने पर की क्या राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें इस मामले में अनुमति दी है. इस पर उन्होंने कहा कि इस मामले में बाद में बात करेंगे. 
बसपा ने बिगड़ा वर्मा का समीकरण
देवास से सांसद रहे फूलचंद वर्मा ने आज सुबह जब संगठन द्वारा तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला तय होता देखा तो प्रदेश कार्यालय पहुंचकर दलित कार्ड खेलते हुए अपना दावा इस सीट के लिए ठोक दिया. वर्मा के दावे ने संगठन को उलझा दिया. संगठन ने इस मामले में पहले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से परामर्श किया, फिर बसपा विधायकों से इस मामले में परामर्श किया गया. इस पर बसपा ने वर्मा के नाम पर असहमति जताई. इसके बाद संगठन ने गोटिया के नाम पर मोहर लगाई और उन्हें तीसरी सीट के लिए प्रत्याशी घोषित कर उनका नामांकन भरा दिया.
दवे, अकबर ने सुबह भरा नामांकन
भाजपा के राज्यसभा के लिए घोषित उम्मीदवार अनिल माधव दवे और एम.जे.अकबर ने आज सुबह मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन भरा. आज सुबह दोनों उम्मीदवार पहले प्रदेश भाजपा कार्यालय पहंचे और वहां पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सीधे विधानसभा पहुंचे. यहां पर दोनों उम्मीदवारों ने निर्वाचन अधिकारी भगवानदेव इसरानी के कक्ष में जाकर अपना नामांकन भरा. भाजपा के दोनों प्रत्याशी रैली के रुप में विधानसभा पहुंचे थे. अनिल दवे को भाजपा ने मध्यप्रदेश से ही तीसरी बार राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है. वहीं अकबर वरिष्ठ पत्रकार होने केअलावा भाजपा के प्रवक्ता भी हैं. उनके नाम की घोषणा भाजपा ने सोमवार की शाम को की थी. हालांकि उनके नाम की घोषणा पर प्रदेश संगठन खुद चकित रह गया था. पहले यह माना जा रहा था कि संघ की पसंद से दूसरी सीट के लिए प्रत्याशी बनाया जाएगा. अकबर आज सुबह ही विमान से भोपला पहुंचे, जहां उनका कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया.
राजनीतिक अनुभव का मिलेगा फायदा
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने विधानसभा परिसर में दोनों प्रत्याशियों के नामांकन भरे जाने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा के दोनों अधिकृत प्रत्याशी अनिल दवे और एम.जे.अकबर अच्छे व्यक्ति है. दोनों ही ने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया है. उनके राजनीतिक अनुभव का पार्टी और प्रदेश की जनता को लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि दवे पर्यावरण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं. जबकि अकबर लेखक, चिंतक और पत्रिकारिता से जुड़े हैं. दोनों को प्रत्याशी बनाए जाने पर मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय नेतृत्व का आभार माना.
भाजपा की रणनीति से चिंतित हुए कांग्रेसी
भाजपा द्वारा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने के बाद कांग्रेस नेताओं में चिंता होने लगी. सोमवार को ही कांगे्रस के दिग्गज नेताओं के साथ विवेक तन्खा ने अपना नामांकन भरा था. कांग्रेस इस बात से निश्ंिचत थी कि भाजपा पूर्व की भांति उसके लिए मैदान साफ रखेगी, मगर ऐसा नहीं हुआ. आज जब विनोद गोटिया ने तीसरी सीट के लिए   अपना नामांकन भरा तो कांग्रेस नेता सक्रिय हो गए. वैसे कांग्रेस ने अपने विधायकों को लेकर तन्खा के नाम की घोषणा होने के साथ ही जमावट शुरु कर दी थी. विधायकों ने फार्म भरवा लिए थे. कांग्रेस के लिए अब तीसरी सीट चुनौति बन गई है. अब कांग्रेस दिग्गज नेताओं को एकजुट होकर इस चुनाव को लड़ने की रणनीति पर काम करेगी. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के सहारे ही तन्खा की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा द्वारा तीसरी सीट के लिए चुनाव लड़ने का जो फैसला लिया गया, वह उचित नहीं है. चुनाव लड़ना प्रजातंत्र का हिस्सा है, मगर भाजपा जिस नियत के तहत यह कर रही है, उससे साफ है कि वह विधायकों की जोड़-तोड़ करेगी. अगर ऐसा होता है तो गलत है.

गुरुवार, 26 मई 2016

भाजपा ने तय किए 12 नाम

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश चुनाव समिति की बैठक आज सुबह प्रदेश भाजपा कार्यालय में संपन्न हुई. बैठक में राज्यसभा की दो सीटों के लिए भाजपा की ओर से 12 नामों को हरी झंडी दी गई. इनमें केन्द्रीय मंत्री वैंकैया नायडू और सांसद अनिल माधव दवे काम नाम सबसे ऊपर है. चुनाव समिति द्वारा एक सीट पर छह नामों के तैयार किए गए पैनल में से नाम की घोषणा दिल्ली से की जाएगी.
राज्यसभा की प्रदेश से रिक्त हुई तीन सीटों में से दो सीटों पर भाजपा का दावा मजबूत है, जबकि एक सीट कांगे्रस के खाते में जा रही है. भाजपा ने अपने खाते की दो सीटों के लिए आज चुनाव समिति के पदाधिकारियों से चर्चा कर एक सीट पर छह नामों का पैनल तैयार कर दिल्ली राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजा है. इन नामों में से दो नामों की घोषणा अब दिल्ली में की जाएगी. भाजपा चुनाव समिति में आज तय किए नामों में केन्द्रीय मंत्री वैंकैया नायडू और सांसद अनिल माधव दवे का नाम सबसे ऊपर है. इन नामों के अलावा राममाधव, माखनसिंह, ओम माथुर, अरविंद मेनन, रघुनंदन शर्मा, कृष्णमुरारी मोघे, विक्रम वर्मा, विनोद गोटिया के नाम भी पैनल में होना बताया जा रहा है.
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, भाजपा के प्रदेश प्रभारी डा. विनय सहस्त्रबुद्धे, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा के अलावा चुनाव समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे.
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक रीवा में
प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक इस बार रीवा में होगी. यह बैठक 16 एवं 17 जून को होगी. चुनाव समिति की बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने यह जानकारी दी. चौहान ने बताया कि आज चुनाव समिति की बैठक में सिंहस्थ 2016 के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को बधाई दी गई. बैठक में जनसंघ के संस्थापक बलराज मधोक, पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यख डा. लक्ष्मीनारायण पांडे, कमला आडवानी, वरिष्ठ नेता मोहम्मद गनी अंसारी, गुलशन बाई उंटवाल के अलावा सिंहस्थ के दौरान हुए हादसे में मृत हुए श्रद्धालुओं सहित पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के परिजनों के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.
  तीनों सीटों पर लड़ें चुनाव
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में यह पदाधिकारियों ने एकमत होकर यह फैसला भी लिया कि तीनों सीटों पर चुनाव लड़ा जाए. हालांकि इस फैसले का विरोध तो किसी सदस्य ने नहीं किया, मगर विधायकों की सदस्य संख्या को लेकर सवाल खड़े किए, इस पर तर्क यह दिया गया कि बसपा, निर्दलीय के अलावा कांग्रेस के नाराज विधायकों को हम अपने पक्ष में लाकर यह चुनाव लड़ सकते हैं. इस पर यह फैसला भी केन्द्र पर सौंप दिया. यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पक्ष में उसे 57 विधायक है, जबकि चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को 59 विधायकों का समर्थन चाहिए. वहीं भाजपा को पूरे 59 विधायकों को उसे पक्ष में लाना होगा, जो उसके लिए कठिन है.

अग्रवाल भाईयों के मिले शव

जमीन विवाद को लेकर तीन दिन पहले वकील नवीन अग्रवाल और उनके भाई सुधीर अग्रवाल के अपहरण के बाद उनकी हत्या कर शव जंगल में फेंक दिए. शवों की शिनाख्ती न हो इसके लिए उनके चेहरों को बुरी तरह जला दिया. शव आज सिवनी मालवा के निकट जंगल में पुलिस को मिले हैं.
राजधानी के वरिष्ठ वकील नवीन अग्रवाल और उनके हरदा निवासी भाई सुधीर अग्रवाल के शव आज पुलिस ने होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा के निकट बांदरखोह के जंगल में नहर के किनारे बरामद किए हैं. दोनों की शिनाख्त न हो इस वजह से अपहरण कर हत्या करने वालों ने उनके चेहरों को जला दिया था. इसके बाद उनके पैर बांधकर वहां झाड़ियों में फेंक दिया था. आरोपियों की निशानदेही पर शवों को बरामद किया है.
उल्लेखनीय है कि हरदा के निकट सिराली में अग्रवाल भाईयों ने मोहनपुर गांव में जमीन खरीदी थी. 7 एकड़ जमीन पर जगदीश राजपूत का कब्जा था, विवाद को निपटाने के लिए दोनों भाई अपने साथियों के साथ वहां गए थे, इसके बाद जगदीश और उसके साथियों ने जमकर मारपीट की और दोनों भाईयों का अपहरण कर लिय था. इसके बाद से पुलिस लगातार उन्हें तलाश रही थी. पुलिस ने मामले में सबसे पहले आरोपी जगदीश को हिरासत में लिया. इसके बाद उसके लड़के को हिरासत में लिया. उनसे पूछताछ के बाद बुधवार की शाम को निखिल तिवारी को इंदौर से पकड़ा. तब जाकर कहीं मामले का खुलासा हुआ. इस मामले में एक आरोपी लालू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस मामले की जानकारी मिलती रही. वह सुराग बताता रहा, इसके बाद इंदौर से जब निखिल की गिरफ्तारी हुई तो इसका खुलासा हुआ कि उसी की गाड़ी से शवों को ले जाकर वहां फेंका गया था.
राजधानी में किया प्रदर्शन
राजधानी भोपाल में आज सुबह जैसे ही अग्रवाल भाईयों की हत्या होने की खबर मिली, इसके बाद अग्रवाल समाज खफा हो गया. वहीं कांग्रेस ने भी इस मामले में विरोध जताया. कांग्रेस कार्यकर्ता और अग्रवाल समाज के लोग गृह मंत्री बाबूलाल गौर के निवास पर पहुंचे और प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस का कड़ा पहरा रहा. इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता गोविंद गोयल और उनके साथियों को गिरफ्तार भी किया.

बुधवार, 25 मई 2016

अब दिग्गज बढ़ाएंगे सक्रियता

राज्य के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी में हो रहे विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली है. चौहान के मोर्चा संभालने के बाद अब कांग्रेस नेता भी सक्रियता दिखाने की तैयारी कर चुके हैं. कांग्रेस की ओर से कमलनाथ सबसे पहले बैतूल पहुंचेंगे. उसके बाद दिग्विजयसिंह और फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी वहां पहुंचकर चुनाव प्रचार करेंगे.
बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी में हो रहे विधानसभा उपचुनाव को लेकर सिंहस्थ के समापन के बाद अब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मोर्चा संभाल लिया है. वे आज वहां पहुंचे और चुनाव प्रचार अभियान तेज किया. चौहान के अलावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी वहां पर सक्रिय हैं. संगठन यहां पर पूरी ताकत के साथ जुटा हुआ है. इसके  अलावा प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत की घोड़ाडोंगरी पहुंचकर वहां पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से की चर्चा भी इन दिनों भाजपा संगठन में चर्चा का विषय बनी है. भगत ने गुपचुप तरीके से वहां पहुंचकर चुनावी रणनीति को समझाया और कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया. भगत वैसे अपनी नियुक्ति के बाद से अभी तक माहौल और मिजाज देख रहे थे, मगर अब उन्होंने मैदानी मोर्चा भी संभाला है. भगत ने मैदान में उतरकर घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से सीधी बात की और संगठित होकर चुनाव मैदान में दिखाई देने को कहा. वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी वहां पर सक्रियता दिखाते हुए पूरे समय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संगठित होकर चुनाव मैदान में दिखाई देने की बात कह रहे हैं. जबकि आज से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने चुनाव प्रचार को गति देते हुए फिर से विकास के मुद्दे को गर्माने का प्रयास किया है.
भाजपा के अलावा कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता आज से वहां बढ़ेगी. कमलनाथ कल सोमवार को वहां पहुंचकर सभाएं लेंगे. इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापसिंह उइके को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजयसिंह को समर्थक माना जाता है, इसलिए उनके समर्थन में सिंह भी वहां पहुंचकर चुनाव प्रचार करेंगे. सिंह को घोड़ाडोंगरी पहुंचकर दो दिनों तक चुनाव प्रचार करने की बात कही जा रही है. वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया भी 25 मई को घोड़ाडोंगरी पहुंचेंगे. इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव वहां पर खुद मोर्चा संभाले हुए है. 
भोपाल, 22  मई 

रास के लिए तेज हुई राजनीति



मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए रिक्त हो रही तीन सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस के दावेदारों की संख्या की ही तरह भाजपा में भी अब दावेदारों की संख्या अधिक हो गई है, जिससे उसकी चिंता बढ़ गई है. भाजपा के पक्ष में दो सीटें है, जबकि कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है. दोनों ही दलों के दावेदार इन सीटों पर अपना गुणा-भाग लगाकर दावेदारी को मजबूत कर रहे हैं.
जून माह में होने वाले राज्यसभा के चुनाव हेतु भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में सक्रियता बढ़ गई है. मध्यप्रदेश से रिक्त हो रही तीन सीटों में से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय माना जा रहा है. पहले भाजपा में यह माना जा रहा था कि यहां पर दावेदारों की संख्या कम होगी, मगर जैसे-जैसे निर्वाचन की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे भाजपा में दावेदार अपनी रणनीति के तहत काम करते हुए दावेदारी कर भाजपा संगठन के लिए संकट खड़ा कर रहे हैं. पूर्व में यह माना जा रहा था कि भाजपा के पक्ष में जाने वाली एक सीट पर राज्यसभा सदस्य अनिल माधव दवे का नाम तय है, मगर अब उनके नाम का विरोध करने वाले भी सक्रिय होते नजर आ रहे हैं. दवे को तीसरा मौका मिलना दूसरे दावेदारों को  नहीं भा रहा है. दवे के नाम पर  भाजपा के वरिष्ठ नेता संकट बन सकते हैं. इन नेताओं में विक्रम वर्मा, रघुनंदन शर्मा, कृष्णमुरारी मोघे के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का नाम भी शामिल है. जोशी इस बात से आहत है कि उन्हें पूर्व में लोकसभा का टिकट यह आश्वासन देकर काटा गया कि उन्हें राज्यपाल बनाया जाएगा. मगर ऐसा अब तक नहीं हुआ. इस वजह से खुद जोशी अब राज्यसभा जाने की इच्छा रखते हैं. वे 26 मई को भाजपा की चुनाव समिति की होने वाली बैठक में इस बात का विरोध कर सकते हैं. जोशी के अलावा एक नया नाम दावेदारों में भाजपा की ओर से और उभरा है. यह नाम प्रदेश के पूर्व संगठन मंत्री अरविंद मेनन का है. मेनन खुद मध्यप्रदेश से राज्यसभा जाने के प्रयास कर रहे हैं. 
भाजपा की दूसरी सीट पर केन्द्रीय नेतृत्व नाम तय करेगा. मगर इस सीट पर भी दावेदारों की संख्या बढ़ रही है. पहले संघ के राम माधव और प्रदेश भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे का नाम लिया जाता रहा, मगर अब तीसरा नाम वैंकैया नायडू के रुप में उभरा है. सूत्रों की माने तो नायडू या फिर राम माधव में से किसी एक नाम पर केन्द्रीय नेतृत्व भरोसा जताएगा.
कांग्रेस में भी उलझन
कांग्रेस में पूर्व से ही एक   सीट के लिए दावेदारों की संख्या ज्यादा थी. इसके अलावा अब और भी दावेदार बढ़ रहे हैं. कांग्रेस में पूर्व में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा, पूर्व सांसद मिनाक्षी नटराजन, वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा दावेदारी कर रहे थे.  इसके अलावा खुद डा. विजय लक्ष्मी साधौ अपनी दावेदारी करते हुए दोबारा राज्यसभा जाने की तैयारी कर रही थीं. मगर अब कांग्रेस में कपिल सिब्बल का नाम भी तेजी से आगे आया है. हालांकि फिलहाल यह माना जा रहा है कि तन्खा को कांग्रेस इस बार मौका दे सकती है. माना जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार का चयन बहुत कुछ घोंडाडोंगरी के उपचुनाव के परिणाम पर निर्भर करेगा. परिणाम अगर कांग्रेस के पक्ष में जाता है तो कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजयसिंह अपने समर्थक को राज्यसभा पहुंचाने में सफल होंगे. वे विवेक तन्खा को टिकट दिलाने में सफल हो सकते हैं. अगर परिणाम विपरित जाता है तो फिर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ सक्रितयता दिखाकर अपने समर्थक के लिए प्रयास करेंगे. वहीं अन्य दावेदारी दिल्ली दरबार में अपने नाम पर मोहर लगवाने का पूरा प्रयास करेंगे. 

शुक्ला हो सकते हैं नये डीजीपी!

राजेन्द्र पाराशर। भोपाल,  24 मई 
राज्य के नये पुलिस महानिदेशक के पद पर पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष ऋषि कुमार शुक्ला के नाम पर मोहर लग सकती है. शुक्ला का नाम करीब-करीब तय माना जा रहा है. वैसे उनके अलावा सरबजीत सिंह का भी नाम लिया जा रहा था, मगर शुक्ला के लिए संघ से जुड़े पदाधिकारियों की सक्रियता ज्यादा नजर आ रही है. 
राज्य के पुलिस महानिदेशक सुरेन्द्र सिंह को 30 जून को सेवानिवृत्त होना है. उनके उत्तराधिकारी के लिए आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी सक्रिय हैं, मगर पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष  ऋषि कुमार शुक्ला के नाम पर मोहर लगना तय माना जा रहा है. शुक्ला के नाम के लिए संघ ने भी सक्रियता दिखाई है. बताया जाता है कि संघ ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन को इस बात का संकेत दे दिया है कि प्रदेश में संघ की पसंद शुक्ला होंगे. इसके बाद शुक्ला के नाम को नये पुलिस महानिदेशक के रुप में तय माना जा रहा है. 1983 बैच के आईपीएस अधिकारी शुक्ला के हाथ अगर कमान मिलती है तो उनका कार्यकाल वर्ष 1920 तक होगा. इस बीच प्रदेश में विधानसभा के अलावा लोकसभा के चुनाव भी होने हैं.  वैसे पूर्व में शुक्ला के स्थान पर पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस सरबजीत सिंह के नाम पर मोहर लगने की बात कही जा रही थी, मगर शुक्ला की कार्यशैली को देखते हुए वे पिछड़ते नजर आ रहे हैं. हालांकि सरबजीतसिंह को अगर पुलिस महानिदेशक की कमान मिलती तो उनका कार्यकाल 2017 में ही समाप्त हो जाता. सरबजीतसिंह के अलावा इस पद के लिए पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण रिना मित्रा और उनके पति डी.एम.मित्रा जो की केन्द्र में प्रति नियुक्ति पर हैं का नाम भी सामने आया, मगर डी.एम.मित्रा प्रदेश आना नहीं चाहते हैं. वहीं 1983 बैच की रीना मित्रा इस पद की होड़ में पिछड़ती नजर आई. कुल मिलाकर इस पद के लिए शुरु से ही सरबजीतसिंह और ऋषिकुमार शुक्ला का नाम लिया जा रहा था, मगर अब सत्ता और संगठन दोनों ही शुक्ला के नाम पर सहमत नजर आ रहे हैं. सूत्रों की माने तो शुक्ला के नाम पर सहमति बनी है, जल्द ही उन्हें ओएसडी बनाने के आदेश भी सरकार द्वारा कर दिए जाएंगे.
सूत्रों के अनुसार दो साल पहले शुक्ला जब केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे थे, तब उन्हें सरकार की ओर से पुलिस महानिदेशक पद की कमान संभालने का आश्वासन देकर रोका गया था. शुक्ला को तेज-तर्रार और ईमानदार अधिकारी के रुप में महकमें में पहचान मिली है, यही वजह है कि उनकी यह छवि संघ और सरकार को भी पसंद आई है.
 भोपाल,  24 मई