बुधवार, 25 मई 2016

रास के लिए तेज हुई राजनीति



मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए रिक्त हो रही तीन सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस के दावेदारों की संख्या की ही तरह भाजपा में भी अब दावेदारों की संख्या अधिक हो गई है, जिससे उसकी चिंता बढ़ गई है. भाजपा के पक्ष में दो सीटें है, जबकि कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है. दोनों ही दलों के दावेदार इन सीटों पर अपना गुणा-भाग लगाकर दावेदारी को मजबूत कर रहे हैं.
जून माह में होने वाले राज्यसभा के चुनाव हेतु भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में सक्रियता बढ़ गई है. मध्यप्रदेश से रिक्त हो रही तीन सीटों में से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय माना जा रहा है. पहले भाजपा में यह माना जा रहा था कि यहां पर दावेदारों की संख्या कम होगी, मगर जैसे-जैसे निर्वाचन की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे भाजपा में दावेदार अपनी रणनीति के तहत काम करते हुए दावेदारी कर भाजपा संगठन के लिए संकट खड़ा कर रहे हैं. पूर्व में यह माना जा रहा था कि भाजपा के पक्ष में जाने वाली एक सीट पर राज्यसभा सदस्य अनिल माधव दवे का नाम तय है, मगर अब उनके नाम का विरोध करने वाले भी सक्रिय होते नजर आ रहे हैं. दवे को तीसरा मौका मिलना दूसरे दावेदारों को  नहीं भा रहा है. दवे के नाम पर  भाजपा के वरिष्ठ नेता संकट बन सकते हैं. इन नेताओं में विक्रम वर्मा, रघुनंदन शर्मा, कृष्णमुरारी मोघे के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का नाम भी शामिल है. जोशी इस बात से आहत है कि उन्हें पूर्व में लोकसभा का टिकट यह आश्वासन देकर काटा गया कि उन्हें राज्यपाल बनाया जाएगा. मगर ऐसा अब तक नहीं हुआ. इस वजह से खुद जोशी अब राज्यसभा जाने की इच्छा रखते हैं. वे 26 मई को भाजपा की चुनाव समिति की होने वाली बैठक में इस बात का विरोध कर सकते हैं. जोशी के अलावा एक नया नाम दावेदारों में भाजपा की ओर से और उभरा है. यह नाम प्रदेश के पूर्व संगठन मंत्री अरविंद मेनन का है. मेनन खुद मध्यप्रदेश से राज्यसभा जाने के प्रयास कर रहे हैं. 
भाजपा की दूसरी सीट पर केन्द्रीय नेतृत्व नाम तय करेगा. मगर इस सीट पर भी दावेदारों की संख्या बढ़ रही है. पहले संघ के राम माधव और प्रदेश भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे का नाम लिया जाता रहा, मगर अब तीसरा नाम वैंकैया नायडू के रुप में उभरा है. सूत्रों की माने तो नायडू या फिर राम माधव में से किसी एक नाम पर केन्द्रीय नेतृत्व भरोसा जताएगा.
कांग्रेस में भी उलझन
कांग्रेस में पूर्व से ही एक   सीट के लिए दावेदारों की संख्या ज्यादा थी. इसके अलावा अब और भी दावेदार बढ़ रहे हैं. कांग्रेस में पूर्व में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा, पूर्व सांसद मिनाक्षी नटराजन, वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा दावेदारी कर रहे थे.  इसके अलावा खुद डा. विजय लक्ष्मी साधौ अपनी दावेदारी करते हुए दोबारा राज्यसभा जाने की तैयारी कर रही थीं. मगर अब कांग्रेस में कपिल सिब्बल का नाम भी तेजी से आगे आया है. हालांकि फिलहाल यह माना जा रहा है कि तन्खा को कांग्रेस इस बार मौका दे सकती है. माना जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार का चयन बहुत कुछ घोंडाडोंगरी के उपचुनाव के परिणाम पर निर्भर करेगा. परिणाम अगर कांग्रेस के पक्ष में जाता है तो कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजयसिंह अपने समर्थक को राज्यसभा पहुंचाने में सफल होंगे. वे विवेक तन्खा को टिकट दिलाने में सफल हो सकते हैं. अगर परिणाम विपरित जाता है तो फिर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ सक्रितयता दिखाकर अपने समर्थक के लिए प्रयास करेंगे. वहीं अन्य दावेदारी दिल्ली दरबार में अपने नाम पर मोहर लगवाने का पूरा प्रयास करेंगे. 

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