शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा की निगरानी करेगी भाजपा

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह एक बार फिर यात्राओं को लेकर घिर गए हैं. शिवराजसिंह की विकास यात्रा पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं, वहीं दिग्विजयसिंह की नर्मदा यात्रा को लेकर भाजपा उन्हें घेर रही है. यहां तक की भाजपा ने रणनीति के तहत उनकी इस यात्रा पर निगरानी रखने के लिए टीम बनाई है. वहीं प्रदेश के पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर ने शिवराज की नर्मदा यात्रा को शाही यात्रा बताया है.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह की नर्मदा यात्रा कल शनिवार 30 सितंबर से शुरु हो रही है. उनकी इस यात्रा को लेकर भाजपा कुछ ज्यादा चिंतित नजर आ रही है. भाजपा का प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व खुद इस यात्रा पर नजर रखे हुए हैं. भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रत्रबुद्धे ने प्रदेश संगठन को निर्देश दिए हैं कि सिंह की इस यात्रा की प्रतिदिन की जानकारी उन्हें दी जाए. इसके अलावा उन्होंने पूरी परिक्रमा यात्रा की जानकारी उन्हें देने को कहा है.भाजपा के प्रदेश संगठन ने जहां-जहां से सिंह नर्मदा यात्रा के लिए गुजरेंगे वहां पर पदाधिकारियों के अलावा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करते हुए जानकारी जुटाने और संगठन को देने को कहा है. पार्टी पदाधिकारियों की माने तो दिग्विजयसिंह कहते कुछ और करते कुछ हैं, इस वजह से भाजपा उनकी इस यात्रा पर पूरी तरह नजर रखेगी. भाजपा नेता यह मानते हैं कि सिंह की यह यात्रा राजनीतिक है, जबकि सिंह इसे धार्मिक यात्रा बता रहे हैं.
शिवराज की शाही यात्रा, दिग्विजय सब छोड़े, चलें नंगे पैर
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने दिग्विजयसिंह की नर्मदा यात्रा पर तो सवाल खड़े किए ही हैं, साथ ही उन्होंने शिवराज की नर्मदा सेवा यात्रा पर भी तंज कसा है. उन्होंने कहा कि शिवराज की नर्मदा यात्रा तो शाही यात्रा थी. दिग्विजयसिंह को यह बताना चाहिए कि वे राजनीतिक यात्रा कर रहे हैं या फिर धार्मिक यात्रा. अगर राजनीतिक यात्रा कर रहे हैं तो उन्हें हेलीकाप्टर, बस या फिर अन्य साधनों से यात्रा करनी चाहिए. इसके लिए उन्हें छह माह नहीं लगाना चाहिए. अगर वे धार्मिक यात्रा कर रहे हैं तो उन्हें नंगे पैर चलकर पूरी यात्रा करनी चाहिए.उन्हें सारी सुविधाओं को त्याग देना चाहिए. यात्रा के दौरान किसी तरह की राजनीति नहीं करनी चाहिए.
प्रायश्चित यात्रा निकाले शिवराज
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा प्रदेश के स्थापना दिवस से प्रदेश में विकास यात्रा निकालने की घोषणा पर तंज कसा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री की इस यात्रा पर कहा कि 14 वर्ष शासन करने के बाद सरकार अब चुनावी वर्ष में विकास का रोडमेप बनाने और विकास यात्राएं निकालने की बात कह रही है, यह हास्यास्पद है. मुख्यमंत्री को किसानों की हुई हत्याएं और किसानों के अलावा आम नागरिक का महंगाई के चलते हो रहे दमन को लेकर प्रायश्चित यात्रा निकालनी चाहिए. सरकार ने विकास के रोडमेप के लिए विभिन्न कमेटिया गठित कर विकास की बात करने को कहा है, मगर ये सब चुनावी वर्ष में केवल शिलान्यास और भूमिपूजन तक ही सीमित रहेगा.
जनता के साथ मजाक कर रही सरकार
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने शिवराज सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि 14 साल की भाजपा सरकार को तेरहवें साल में प्रदेश के चहुंमुखी विकास का रोडमैप बनाने की सुध आई. सिंह ने कहा कि इससे शिवराज सिंह चौहान की विकास के उपलब्धियों के दावे झूठे हैं, इसकी पुष्टि खुद सरकार कर रही है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान की इस बात पर कि मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेश के चहुंमुखी विकास का रोडमैप जनता को सौंपा जाएगा. इससे बड़ा मजाक इस प्रदेश की जनता के साथ हो नहीं सकता. उन्होंने कहा कि विकास यात्राएं करके अब जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं मुख्यमंत्री.

बुधवार, 27 सितंबर 2017

सिंधिया के नाम पर कमलनाथ को नहीं आपत्ति

भाजपा ने कहा हार को महसूस करते नाथ ने लिया स्मार्ट फैसला

कांग्रेस में आगामी विधानसभा चुनाव की कमान किसके हाथ होगी, यह तो कहा नहीं जा सकता, मगर आज वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के बयान के बाद सिंधिया समर्थकों में उत्साह नजर आया. नाथ ने साफ कहा कि उन्हें सिंधिया के नाम पर आपत्ति नहीं है, मगर वे यह भी कह गए कि फैसला तो राहुल गांधी को लेना है.

कांग्रेस में लंबे समय से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर यह चर्चा है कि किसे कमान सौंपी जाएगी. सिंधिया और कमलनाथ को लेकर चर्चा का दौर भी जारी रहा है. समय-समय पर सिंधिया खुद भी इस बात को लेकर मुद्दा उठाते रहे हैं और यह कहते रहे कि हाईकमान को समय रहते चुनाव के लिए चेहरे की घोषणा कर देनी चाहिए. आज इसी मुद्दे को फिर वरिष्ठ नेता कमलनाथ के इस बयान ने गर्मा दिया, जब उन्होंने यह साफ कहा कि सिंधिया के नाम पर उन्हें आपत्ति नहीं है. उन्होंने साफ कर दिया कि अगर सिंधिया को चुनाव की कमान सौंपी जाती है तो उन्हें कैसी आपत्ति. उनके सिंधिया से पारिवारिक संबंध हैं. नाथ ने यह बयान वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद आज उनकी श्रद्धांजलि सभा में जाने के पूर्व गुना में दिए. नाथ के इस बयान के बाद प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति फिर गर्माती नजर आई. खासकर सिंधिया समर्थकों में इसे उत्साह के रुप में देखा गया. हालांकि अभी नाथ ने केवल बयान दिया है, फैसला दिल्ली को लेना है.
यह कहा कमलनाथ ने
कमलनाथ ने कहा कि वैसे तो मध्यप्रदेश के तमाम नेता अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं, एक पद की घोषणा से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आखिरी फैसला राहुल को लेना है. मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर कमलनाथ ने कहा कि मेरा कोई ऐसा लक्ष्य नहीं है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर उन्हें कोई एतराज नहीं है. साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि अभी कुछ दिन पहले मैं कह चुका हूं कि सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाता है, तो मुझे कोई एतराज नहीं है.
कमलनाथ ने लिया स्मार्ट फैसला: वाजपेयी
कमलनाथ के बयान आने के बाद भाजपा में भी हलचल दिखाई दिया. भाजपा के पूर्व प्रदेश मीडिया प्रभारी और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष डा. हितेष वाजपेयी ने कहा कि दिग्विजय सिंह के बाद कमलनाथ ने एक स्मार्ट निर्णय लिया है. कमलनाथ एक परखे हुए वरिष्ठ और पुराने कांग्रेस नेता हैं उन्होंने एक दूरदर्शी दृष्टिकोण से आने वाली कांग्रेस की हार को महसूस कर लिया है और अपने आप को कांग्रेस की इस आने वाली हार से पृथक कर लिया. उन्होंने कहा कि जैसे की दिग्विजय सिंह ने गुजरात चुनाव से ठीक पहले ६ महीने की छुट्टी लेकर अपने आप को गुजरात चुनाव में होने वाली कांग्रेस की हार से स्वयं को प्रथक किया है. वाजपेयी ने कहा कि एक प्रकार से कांग्रेस के ये वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से अपने आप को अप्रत्यक्ष रूप से अपनी छवि बचाकर अलग करने का प्रयास कर रहें हैं. वाजपेयी ने कहा कि मैं इस प्रक्रिया को अप्रत्यक्ष-पलायन के रूप में परिभाषित कर सकता हूं. कई कांग्रेस के नेता चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर प्रत्यक्ष-पलायन भी करते हैं जो शायद ज्यादा ईमानदार राजनीति है .

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

6 माह राजनीति से दूर रहेंगे दिग्विजय सिंह

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजयसिंंह 6 माह तक राजनीति से दूर रहेंगे. सिंह इस दौरान नर्मदा परिक्रमा पर रहेंगे. उनकी इस परिक्रमा को लेकर एक बार फिर राजनीति गर्मा गई है, हालांकि वे अपनी इस परिक्रमा को आध्यात्मिक परिक्रमा बता रहे हैं, मगर प्रदेश में भाजपा की चिंंता बढ़ती नजर आने लगी है.
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंंह 30 सितंबर से नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत करेंगे. इसके लिए वे पूर्व में कांग्रेस हाईकमान सोनिया गांधी से अनुमति ले चुके हैं. आज उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस के कोसाध्यक्ष मोतीलाल बोरा को पार्टी का काम भी सौंप दिया. वे फिलहाल 6 माह के लिए राजनीति से दूर रहेंगे. इस दौरान वे किसी भी राज्य का प्रभार नहीं देखेंगे. सिंह ने आज बोरा के अलावा दिल्ली में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने नर्मदा परिक्रमा की जानकारी भी दी. पूर्व मुख्यमंत्री सिंह द्वारा अपनी इस परिक्रमा को आध्यात्मिक परिक्रमा बताया जा रहा है, मगर इसे लेकर प्रदेश में राजनीतिक सुगबुगाहट भी तेज हो गई है. खासकर भाजपा में सिंह की इस परिक्रमा ने चिंता को बढ़ाया है. सिंह इस परिक्रमा के दौरान 3300 किलोमीटर की यात्रा में प्रदेश के 110 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेंगे, जबकि गुजरात विधानसभा के 20 क्षेत्रों में भी उनकी परिक्रमा होनी है. इन क्षेत्रों में भाजपा को कमजोर भी माना जा रहा है. इनमें से अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस का कब्जा है.

सरकार करेगी सुरक्षा व्यवस्था

दिग्विजय सिंह के नर्मदा परिक्रमा के दौरान राज्य सरकार उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगी. सिंह की यात्रा के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर डीएसपी स्तर का एक अधिकारी उनके साथ होगा. साथ ही यात्रा के दौरान पूरे समय एक एंबुलेंस भी उनके साथ में रहेगी. हालांकि, सरकार ने उन्हें मोबाइल टायलेट देने से इंकार कर दिया है. वहीं दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज को दोबारा पत्र लिखकर कहा है कि वो स्वच्छ भारत अभियान में विश्वास रखते है और नर्मदा परिक्रमा के दौरान नर्मदा के तट पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए चलित शौचालय मुहैया करावाया जाए. इसके पूर्व सुरक्षा की मांग को लेकर भी पुलिस मुख्यालय को पत्र लिख चुके थे. इस बारे में पुलिस मुख्यालय ने उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया था. सुरक्षा को लेकर मकरंद देउस्कर आई जी कानून व्यवस्था ने कहा था कि दिग्विजय सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही दी जाती रही है.

तीन दिन तक राष्ट्रीय मुद्दों पर होगा चिंतन

राजधानी में संघ और अनुषांगिक संगठनों की अक्तूबर में होगी बैठक

राजधानी में संघ और अनुषांगिक संगठनों की बैठक अगले माह अक्तूबर में होगी. तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक में राष्ट्रीय मुद्दों पर चिंतन होगा. साथ ही राजनीतिक और सामाजिक हालातों पर भी मंथन किया जाएगा.
संघ और अनुषांगिक संगठनों की बैठक, जिसे दीपावली बैठक कहा जा रहा है, यह बैठक राजधानी में 12 अक्तूबर से शुरु होगी. 14 अक्तूबर तक चलने वाली इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रांत प्रचारकों के अलावा संघ के अलग-अलग अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे. बैठक में भाजपा से जुड़े नेता भी शामिल होंगे. इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के उपस्थित रहने की भी संभावना जताई जा रही है. शाह के अलावा बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल और राममाधव भी उपस्थित रहेंगे. संघ और अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी बैठक में संघ और अनुषांगिक संगठनों के कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे, इसके अलावा आने वाले साल के लिए कार्यक्रमों की रणनीति तय करेंगे. बैठक को देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार और कई राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बैठक में राजनीतिक और सामाजिक हालातों पर भी मंथन किया जाएगा. बैठक के भोपाल में होने को लेकर यह माना जा रहा है कि प्रदेश में 2018 में विधानसभा चुनाव होना है, इस लिहाज बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बैठक में प्रदेश सरकार के कामकाजों को लेकर सरकार और संगठन को सक्रिय करना एवं स्थिति से अवगत कराते हुए चुनावी रणनीति भी बनाई जाएगी. इसके अलावा बैठक में आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक मसलों पर भी चिंतन होने की बात कही जा रही है. इसके अलावा राष्ट्रीय परिदृश्य के अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होना है. वहीं कुछ अनुषांगिक संगठनों की केन्द्र एवं राज्य सरकारों से नाराजगी को दूर करने पर भी चर्चा की जाना है. सूत्रों की माने तो भारतीय किसान संघ, मजदूर संघ केन्द्र सरकार की कार्यप्रणाली से लंबे समय से नाराज है, जिसे लेकर संघ प्रमुख संगठनों के पदाधिकारियों से चर्चा कर उनकी नाराजगी को दूर करेंगे. बताया जा रहा है कि किसानों को लेकर केन्द्र के अलावा राज्य सरकारों के खिलाफ भी जो नाराजगी है, उसे लेकर संघ प्रमुख अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे और कोई रास्ता निकालने का काम करेंगे जिससे उनकी नाराजगी दूर हो सके.

बर्खास्त आईएएस शशि कर्णावत मिलेंगी भागवत से

बर्खास्त आईएएस शशि कर्णावत ने कहा कि वे संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलकर प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोलेंगी. कर्णावत ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वे हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिल चुकी हैं. इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे उनके खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाया था. उनका कहना है कि अगले माह वे संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी मिलेंगी. उन्होंने कहा कि उनके पास प्रदेश के तमाम भ्रष्टाचारी अधिकारियों का ब्योरा है. इसे वो अगले महीने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह डा. मोहन भागवत से मुलाकात के दौरान उजागर करेंगी. उन्होंने कहा कि वे सरकार के मंत्रियों एवं अधिकारियों की बेनामी संपत्तियों का खुलासा भी करेंगी.

बुधवार, 13 सितंबर 2017

यस सर, यस मैडम नहीं जय हिन्द बोलकर हाजिरी लगवाएंगे विद्यार्थी


शिक्षा मंत्री विजय शाह का फरमान, सतना जिले के बाद जल्द ही पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा

राज्य के शिक्षा मंत्री विजय शाह ने यह फरमान जारी किए हैं. शाह ने फिलहाल सतना जिले के स्कूलों में इसकी शुुरुआत करने को कहा है. इसके बाद वे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से चर्चा कर पूरे प्रदेश के स्कूलों में इसे जरुरी करने जा रहे हैं.
बयानों को लेकर सदैव विवादों से घिरे रहने वाले स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह इस बार फिर विवाद से घिर गए हैं. उन्होंने  सतना जिले में विभागीय समीक्षा के दौरान सतना जिले में यह फरमान दे डाला कि अब जिले के सभी शैक्षणिक संस्थाओं में 1 अक्तूबर से विद्यार्थी अपनी हाजिरी के दौरान यस सर, यस मैडम नहीं कहेंगे. विद्यार्थियों को जय हिन्द बोलना होगा. शाह ने कहा कि यह निर्णय फिलहाल सतना जिले के लिए है, वे जल्द ही इसे पूरे प्रदेश में लागू कराएंगे. इतना ही नहीं उन्होंने कहा अधिकारियों को निर्देशित किया कि नौजवान पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का जज्बा बढ़ाने के लिए सभी शासकीय स्कूलों में प्रारंभ में ही प्रतिदिन ध्वजारोहण, झंडावन एवं राष्ट्रगान किए जाएं. मंत्री ने ध्वजारोहण, झंडावंदन की परंपरा को प्रतिदिन सभी प्राइवेट स्कूलों में भी लागू करने के निर्देश दिए.  माना जा रहा है कि मंत्री शाह का यह फरमान देशभक्ति का भावना जगाने को लेकर है. हालांकि, कुछ लोग इसे मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं. 
शहीद सैनिकों के नाम पर नामकरण
विजय शाह ने कहा कि देश की खातिर बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम पर हम स्कूलों के नामकरण करने की योजना भी बना रहे हैं. शाह ने कहा कि शहीद सैनिकों  के ग्राम की प्राथमिक या माध्यमिक शाला का नामकरण किए जाने के प्रस्ताव को प्राथमिकता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से शिक्षकों में एकरुपता लाने के लिए ड्रेस कोड यूनिफार्म एप्रिन या नेमप्लेट लगाने पर भी विभाग विचार कर रहा है. 
जनशिक्षक मंत्री को भी दें निरीक्षण रिपोर्ट
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा कि जनशिक्षक प्रत्येक माह की निरीक्षण प्रतिवेदन रिपोर्ट केवल बीआरसी को ही नहीं, बल्कि उन्हें (मंत्री को) भी भेजेंगे. हर माह की रिपोर्ट के आधार पर सेम्पल बतौर कुुछ रिपोर्ट के आधार पर दूरभाष पर चर्चा कर वे आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे. शाह ने कहाा कि उनके दूरभाष पर प्रत्येक सोमवार और मंगलवार को सुबह 9 बजे से 11 बजे तक कोई भी जनशिक्षक सपंर्क कर सकता है.