बुधवार, 27 सितंबर 2017

सिंधिया के नाम पर कमलनाथ को नहीं आपत्ति

भाजपा ने कहा हार को महसूस करते नाथ ने लिया स्मार्ट फैसला

कांग्रेस में आगामी विधानसभा चुनाव की कमान किसके हाथ होगी, यह तो कहा नहीं जा सकता, मगर आज वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के बयान के बाद सिंधिया समर्थकों में उत्साह नजर आया. नाथ ने साफ कहा कि उन्हें सिंधिया के नाम पर आपत्ति नहीं है, मगर वे यह भी कह गए कि फैसला तो राहुल गांधी को लेना है.

कांग्रेस में लंबे समय से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर यह चर्चा है कि किसे कमान सौंपी जाएगी. सिंधिया और कमलनाथ को लेकर चर्चा का दौर भी जारी रहा है. समय-समय पर सिंधिया खुद भी इस बात को लेकर मुद्दा उठाते रहे हैं और यह कहते रहे कि हाईकमान को समय रहते चुनाव के लिए चेहरे की घोषणा कर देनी चाहिए. आज इसी मुद्दे को फिर वरिष्ठ नेता कमलनाथ के इस बयान ने गर्मा दिया, जब उन्होंने यह साफ कहा कि सिंधिया के नाम पर उन्हें आपत्ति नहीं है. उन्होंने साफ कर दिया कि अगर सिंधिया को चुनाव की कमान सौंपी जाती है तो उन्हें कैसी आपत्ति. उनके सिंधिया से पारिवारिक संबंध हैं. नाथ ने यह बयान वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद आज उनकी श्रद्धांजलि सभा में जाने के पूर्व गुना में दिए. नाथ के इस बयान के बाद प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति फिर गर्माती नजर आई. खासकर सिंधिया समर्थकों में इसे उत्साह के रुप में देखा गया. हालांकि अभी नाथ ने केवल बयान दिया है, फैसला दिल्ली को लेना है.
यह कहा कमलनाथ ने
कमलनाथ ने कहा कि वैसे तो मध्यप्रदेश के तमाम नेता अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं, एक पद की घोषणा से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आखिरी फैसला राहुल को लेना है. मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर कमलनाथ ने कहा कि मेरा कोई ऐसा लक्ष्य नहीं है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर उन्हें कोई एतराज नहीं है. साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि अभी कुछ दिन पहले मैं कह चुका हूं कि सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाता है, तो मुझे कोई एतराज नहीं है.
कमलनाथ ने लिया स्मार्ट फैसला: वाजपेयी
कमलनाथ के बयान आने के बाद भाजपा में भी हलचल दिखाई दिया. भाजपा के पूर्व प्रदेश मीडिया प्रभारी और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष डा. हितेष वाजपेयी ने कहा कि दिग्विजय सिंह के बाद कमलनाथ ने एक स्मार्ट निर्णय लिया है. कमलनाथ एक परखे हुए वरिष्ठ और पुराने कांग्रेस नेता हैं उन्होंने एक दूरदर्शी दृष्टिकोण से आने वाली कांग्रेस की हार को महसूस कर लिया है और अपने आप को कांग्रेस की इस आने वाली हार से पृथक कर लिया. उन्होंने कहा कि जैसे की दिग्विजय सिंह ने गुजरात चुनाव से ठीक पहले ६ महीने की छुट्टी लेकर अपने आप को गुजरात चुनाव में होने वाली कांग्रेस की हार से स्वयं को प्रथक किया है. वाजपेयी ने कहा कि एक प्रकार से कांग्रेस के ये वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से अपने आप को अप्रत्यक्ष रूप से अपनी छवि बचाकर अलग करने का प्रयास कर रहें हैं. वाजपेयी ने कहा कि मैं इस प्रक्रिया को अप्रत्यक्ष-पलायन के रूप में परिभाषित कर सकता हूं. कई कांग्रेस के नेता चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर प्रत्यक्ष-पलायन भी करते हैं जो शायद ज्यादा ईमानदार राजनीति है .

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