रविवार, 4 नवंबर 2018

शिवराज किसान पुत्र को किसानों पर क्यों चली गोलियां: संजय सिंह

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान पर आज उनके साले संजय सिंह ने जमकर हमला बोला. संजय ने कहा कि जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने आपको किसान पुत्र कहते हैं तो राज्य में किसान आंदोलन क्यों हुआ, किसानों पर गोलियां क्यों चली.
संजय सिंह दिल्ली में शनिवार को कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद आज राजधानी पहुंच और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जाकर वरिष्ठ नेताओं से उन्होंने मुलाकात की. संजय सिंह जब कांग्रेस कार्यालय पहुंचे तो वहां उनका नेताओं ने स्वागत किया. इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए संजय सिंह ने अपने जीजा और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब शिवराज सिंह खुद किसान पुत्र है, तो राज्य में किसानों पर गोलियां क्यों चली. उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन की जररुत किसानों को क्यों पड़ी. संजय सरकार द्वारा चलाई जा रही भावांतर योजना और मंदसौर गोलीकांड के अलावा संबल योजना पर भी हमला सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन योजनाओं की ात कहती है, मगर अब तो लोग भी जान गए हैं कि ये योजनाएं केवल वोट के लिए बनाई गई हैं. 
संजय ने बताई चुनाव की तैयारियां
महाराष्ट्र के गोदिया के रहने वाले संजय सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी चकित किया. उन्होंने मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि वे अपने क्षेत्र में चुनावी तैयारी को लेकर पहले से ही सक्रिय हैं. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए वे कार्य कर रहे हैं. जब उन्होंने अपने क्षेत्र वारासिवनी विधानसभा के 150 गांवों के नाम बोलाना शुरु किए तो सभी लोग हतप्रभ रह गए. उन्होंने बिना कागज का सहारा लिए गांवों का नाम लिया और बताया कि इन गांवों में वे लंबे समय से सक्रिय हैं. 
वारासिवनी से मैदान में उतार सकती है कांग्रेस
संजय को कांग्रेस बालाघाट जिले के वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतार सकती है. महाराष्ट्र के गोदिंया के रहने वाले संजय सिंह जब अपने जीजा शिवराज सिंंह चौहान मुख्यमंत्री बने थे तब बालाघाट जिले के इस अंचल में तेजी के साथ सक्रिय हुए थे. यह क्षेत्र उनके प्रभाव वाला माना जाता है. 

मनाने वाले ही नाराज, तो रुठों को कौन मनाए

 जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी वे रहे असफल, अब संघ करेगा नाराजगी दूर
भारतीय जनता पार्टी टिकट वितरण के बाद प्रदेश में नाराज टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों की नाराजगी को दूर करने वालों का टोटा पड़ गया है. भाजपा के वरिष्ठ नेता जिनके भरोसे रुठों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही वे खुद नाराज चल रहे हैं. वहीं जिन्हें टिकट वितरण के पूर्व माहौल को शांत करने की जिम्मेदारी दी गई थी, वे अब तक नाराज लोगों को शांत नहीं कर पा रहे हैं. इसके चलते संगठन की चिंंता बढ़ गई है. मामले को भांपते हुए अब संघ नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की रणनीति कर रहा है. 
मध्यप्रदेश भाजपा में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के वक्त नाराज कार्यकर्ताओं और दावेदारों की नाराजगी को दूर करने के लिए कभी कुशाभाऊ ठाकरे जिम्मेदारी संभाला करते थे, उसके बाद सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी इस काम को अंजाम दिया करते थे. ठाकरे और पटवा के निधन के बाद पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी जाने लगी, मगर वर्तमान में टिकट वितरण के बाद पार्टी के अधिकांश वरिष्ठ नेता या तो खुद दावेदार थे और टिकट से वंचित होने के चलते नाराज है या फिर अपने समर्थकों को टिकट न दिलाने के कारण मौन हैं. इस वजह से संगठन के सामने संकट बना हुआ है कि नाराज दावेदारों और कार्यकर्ताओं को कौन मनाएगा. संगठन को यह भरोसा था कि इस बार कैलाश जोशी को कमान सौंपकर संगठन इस जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगा, मगर जोशी खुद नाराज हैं. जोशी ने हाल ही में एट्रोसिटी एक्ट को लेकर बयान दिया था कि इस एक्ट के विरोध के चलते पार्टी पर इस बार चुनाव में असर पड़ेगा. साथ ही उन्होंने टिकट को लेकर नाराज लोगों को लेकर कहा कि यह पार्टी जाने, पार्टी तय करती है, मेरे कहने से कुछ थोड़ी होगा. जोशी के इस बयान में उनकी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है. जोशी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से निवाड़ी को नया जिला बनाए जाने के बाद से नाराज चल रहे हैं, जोशी को शिवराज सिंह ने वचन दिया था कि प्रदेश में जब भी नया जिला बनाया जाएगा, बागली को जिला बनाने की घोषणा पहले होगी. मगर ऐसा नहीं हुआ. जोशी के अलावा वरिष्ठ नेता हिम्मत कोठारी, बाबूलाल गौर, सरताज सिंह और रघुनंदन शर्मा का नंबर आता है, मगर ये नेता भी इन दिनों नाराज चल रहे हैं. रघुनंद शर्मा की नाराजगी जरुर कुछ कम नजर आती है, मगर उनकी सक्रियता नाराज लोगों को मनाने में फिलहाल कम ही दिखाई दे रही है.
जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी वे रहे असफल
टिकट वितरण के दावेदारों की दावेदारी और वर्तमान विधायकों के खिलाफ उठ रहे विरोध के स्वर को भांपते हुए भाजपा संगठन ने अलग-अलग अंचलों में भाजपा नेताओं को रुठों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, मगर ये नेता खुद टिकट के लिए उलझे रहे और समय रहते नाराज लोगों की नाराजगी को दूर नहीं कर पाए, इसके चलते हालात आज ऐसे निर्मित हो गए हैं कि भाजपा के लिए रुठों को मनाने में परेशानी हो रही है. पूर्व में संगठन ने बुंदेलखंड में मंत्री भूपेन्द्र सिंह, महाकौशल में प्रहलाद पटेल, मालवा में कैलाश विजयवर्गीय और मध्य क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपकर रुठों को मनाने को कहा था, मगर ये सभी नेता प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में उलझे रहे  और नाराज लोगों को नहीं मना पाए.
अब तोमर पर भरोसा
भाजपा को एक बार फिर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर पर भरोसा है कि वे रुठों को मना लेंगे, मगर फिलहाल उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है. इस बीच संघ ने सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है. संघ ने मंडल और बूथ स्तर पर नाराज चल रहे कार्यकर्ताओं की नाराजगी को देख मैदान में उतरने का मन बनाया है. बताया जाता है कि संघ प्रचारक अब नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने जाएंगे. अलग-अलग अंचल में पहुंचने वाले संघ प्रचारक टोलियों में सौ-डेढ़ सौ कार्यकर्ताओं की बैठकें लेंगे और उनकी बातों को सुनेंगे. इसके बाद उन्हें भाजपा के पक्ष में चुनाव के लिए प्रेरित करेंगे. संघ का यह कदम कितना सफल होता है, यह तो कहा नहीं जा सकता.

भाजपा में थम नहीं रहे टिकट को लेकर दावेदारों के बगावती तेवर

सरताज हुए खफा, निर्दलीय चुनाव लड़ने के दिए संकेत, गौर, महदेले भी नाराज
मध्यप्रदेश भाजपा में पहली सूची आने के बाद उठे विरोध के स्वर और मुखर होते जा रहे हैं. टिकट को लेकर वंचित रहे विधायकों के अलावा जिन्हें टिकट कटने की आशंका है, वे लगातार बगावती तेवर दिखा रहे हैं. इन नेताओं में पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर, पूर्व मंत्री सरताज सिंह शामिल हैं. सरताज सिंह ने आज टिकट कटने की आशंका के चलते निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ने के संकेत भी दे डाले. सरताज की नाराजगी को देख संगठन ने उन्हें मनाने की कवायद भी शुरु कर दी है. वहीं बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतारने की बात कही है.
होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा विधानसभा सीट से विधायक सरताज सिंह के टिकट काटने का इशारा संगठन पहले दे चुका है. हालांकि अभी भाजपा ने यहां पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, मगर सरताज सिंह को इस बात का अंदेशा है कि उन्हें जिस तरह उम्र का हवाला देकर पार्टी से बाहर किया गया, उसी तरह इस बार टिकट से वंचित किया जाएगा. भाजपा की पहली सूची में विधायकों के टिकट कटता देख अब सरताज सिंह ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला है. आज उन्होंने कहा कि जनता और कार्यकर्ता चाहता है कि वे चुनाव लड़ें, मैं दोनों का सम्मान करुंगा, टिकट न मिलने पर जनता के बीच जाऊंगा और चर्चा के बाद फैसला करुंगा. सरताज ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं. रविवार को जब उनका बयान आया तो भाजपा में हड़कंप मच गया और खनिज निगम के अध्यक्ष शिव चौबे उनके निवास पहुंचे और बंद कमरे में काफी देर चर्चा की. शिव चौबे होशंगाबाद से ही हैं और सरताज सिंह से उनकी घनिष्ठता भी है, मगर इस मामले में सरताज सिंह चौबे की कितनी बात मानते हैं, यह कहना अभी संभव नहीं है.
कृष्णा गौर ने कहा वे लड़ेंगी चुनाव
राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक बन कर इतिहास रचने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी टिकट कटने की आशंका के चलते नाराज चल रहे हैं. उन्होंने शनिवार को अपने निवास पर अपने समर्थकों के साथ बैठक की. गौर ने फिलहाल तो दो दिन का मौन साध रखा है, मगर साफ संकेत दिए हैं कि अगर उनका टिकट कटा और उनकी पुत्रवधू कृष्णा गौर को टिकट नही दिया तो वे भी कोई कदम उठाएंगे. हालांकि गौर ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, मगर कृष्णा गौर ने साफ तौर पर कहा कि वे किसी भी हालात में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरेंगी. कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ टिकट कटने के बाद गौर को कांंग्रेस में लाने का प्रयास कर रहे है. कमलनाथ और गौर की चर्चा भी हुई है, मगर दोनों नेता इस चर्चा को नकार रहे हैं.
कांग्रेस ने कहा सरताज, गौर का है स्वागत
मध्यप्रदेश कांग्रेस की मीडिया सेल की प्रभारी शोभा ओझा ने कहा कि सरताज सिंह और कृष्णा गौर का कांग्रेस में स्वागत हे. टिकट मिलना ना मिलना तो शीर्ष नेतृत्व तय करेगा, मगर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ कह चुके हैं कि साफ छवि और कांग्रेस की विचारधारा रखने वाले नेताओं का कांग्रेस में स्वागत है.
व्यक्ति ना तो सीट बनाता है और ना ही बिगाड़ता है
 कृष्णा गौर के गोविंदपुरा सीट  को बाबूलाल गौर द्वारा भाजपा की सीट बनाने के बयान  पर पर्यटन निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि व्यक्ति कोई सीट ना तो बनाता है और ना ही बिगाड़ता है. भाजपा की साखा भाजपा के कार्य और भाजपा की सीट है गोविंदपुरा. उन्होंने कहा कि भाजपा गोविंदपुरा से जिसको भी टिकट देगी, वह प्रत्याशी प्रचंड मतों से जीतेगा. कृष्णा गौर के निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कहने पर उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी के पदाधिकारी ही तय करेंगे और वे निर्णय लेंगे.
 सिर झुकाकर मानते हैं पार्टी का फैसला
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने बगावत को लेकर कहा कि पार्टी से कोई बड़ा नहीं होगा, पार्टी बड़ी होती है. कृष्णा गौर के बयान पर उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्याशी का फैसला नही होता तब तक सभी अपनी बात कह सकते हैं, लेकिन पार्टी के फैसले के बाद सभी को पार्टी का निर्णय सिर झुकाकर मानना पढ़ता है.
कुसुम महदेले मिली सुहास भगत से
मंत्री कुसुम महदेले को भी उम्र का हवाला देकर टिकट काटने की बात कही जा रही है. बाबूलाल गौर और सरताज सिंह के साथ वे भी निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं. वैसे उन्होंने अभी मीडिया में या फिर सार्वजनिक रुप से ऐसा कहा नहीं है, मगर उनकी नाराजगी साफ इस बात का संकेत दे रही है. शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा. इसके बाद उन्होंने संगठन मंत्री सुहास भगत से भी मुलाकात कर अपनी बात रखी है और चुनाव लड़ने की बात कही है. पन्ना विधानसभा क्षेत्र जहां से वे चुनाव लड़ी थी, इस सीट पर भाजपा ने अभी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है.
अनूप मिश्रा भी हैं खफा
सांसद अनूप मिश्रा भी ग्वालियर पूर्व से टिकट की मांग कर रहे थे, मगर भाजपा की पहली सूची में उनका नाम नदारत हैं. मिश्रा ने अपनी दूसरी पसंद भीतरवार विधानसभा क्षेत्र भी भाजपा संगठन को बताया था. मिश्रा को भाजपा की दूसरी सूची का इंतजार है. अगर इस सूची में उनका नाम नहीं आया तो वे भी कोई कदम उठा सकते हैं.

मध्यप्रदेश में दो घंटे कर सकेंगे आतिशबाजी

मध्यप्रदेश मे दीपावली के दिन सिर्फ दो घंटे आतिशबाजी की जा सकेगी. गृह विभाग ने रात 8 से 10 बजे के बीच आतिशबाजी करने का समय तय कर सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का पालन कराया जाए.
गृह विभाग ने प्रदेश के समस्त जिला कलेक्टरों एवं जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं कि दीपावली के दिन आतिशबाजी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अंतर्गत नियत समय सीमा रात 8 से 10 बजे तक का विशेष रुप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें. गृह विभाग द्वारा दिए निर्देशों में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना, उल्लंघन की दशा में संबंधित थाना प्रभारी को व्यक्तिश: जिम्मेदार माना जाएगा. जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी थाना प्रभारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करें, ताकि आदेश का पालन हो सके और किसी भी दशा में अवमानना की स्थिति निर्मित नहीं हो. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस बारे में जारी किए गए आदेश,निर्देश न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं.

विधायक ने कहा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने रुपए लेकर दिया टिकट

 रतलाम ग्रामीण के विधायक के बाद टीकमगढ़ विधायक ने लगाया टिकट बेचने का आरोप
भाजपा के टीकमगढ़ से विधायक के.के.श्रीवास्तव ने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा पर आरोप लगाया है कि झा ने करोड़ों रुपए लेकर टिकट की पैरवी की है.
भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद टिकट कटने से नाराज विधायकों द्वारा अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर सीधे तौर पर टिकट बेचने का आरोप लगाया जा रहा है. टीकमगढ़ के विधायक के.के.श्रीवास्तव ने टिकट कटने के बाद नाराज होकर खुलकर यह आरोप लगाया कि टीकमगढ़ में टिकट को लेकर करोड़ों का सौदा हुआ है. उन्होंने कहा कि झा ने रुपए लेकर अपने प्रत्याशी की पैरवी की है. श्रीवास्तव के साथ झा का विरोध करने वालों में पूर्व सहकारी बैंक अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी,मनीराम तिवारी मोरखा, सीमा श्रीवास्तव भी मौजूूद थे. गौरतलब है कि श्रीवास्तव का टिकट उनके खराब परफारमेंस की बात कहकर संगठन ने काटा दिया है. जिसके चलते वे नाराज हैं.
वहीं इस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने ेकहा कि श्रीवास्तव का टिकट कट गया है, जिसके चलते वे नाराज है, इस वजह से वे इस तरह की बात कह रहे हैं.
डामर ने भी लगाए आरोप
श्रीवास्तव के पहले रतलाम ग्रामीण के वर्तमान विधायक मथुरालाल डामर ने भी टिकट कटने के बाद डेढ़ करोड़ में टिकट बिकने का आरोप लगाया था. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है. डामर ने कहा कि भाजपा ने डेढ़ करोड़ रुपए लेकर दिलीप मकवाना को टिकट बेचा है. डामर और श्रीवास्तव के बयान के बाद भाजपा मेंं खलबली मच गई है. श्रीवास्तव के वीडियो के वायरल होने के बाद भाजप के वरिष्ठ नेता इस मामले में मौन साधे हुए हैं.

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

मंत्री ने जताई चुनाव न लड़ने की इच्छा, मुख्यमंत्री को लिखा खत

राज्य के खाद्य एवं उद्यान की प्रसंस्करण राज्यमंत्री सूर्य प्रकाश मीणा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक खत लिखकर इस बार विधानसभा चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई है.  
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुधवार की देर रात लिखे गए खत में उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा ने कहा है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने  पिछले दो चुनावों में प्रत्याशी बनाया था, इसके साथ ही उन्हें भारतीय जनता पार्टी जिला का अध्यक्ष और उसके बाद राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया था, लेकिन अब संगठन   की आवश्यकता को देखते हुए इस बार विधानसभा चुनाव  न लड़कर जिले की सभी सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को  सफलता दिलाने के लिए काम करना चाह रहे हैं
भाजपा की अंदरूनी सूत्रों के अनुसार प्रदेश में इस बार हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने खिलाफ  तगड़ी  सत्ता विरोधी लहर महसूस कर रही है इसके चलते ही राज्य में भाजपा के लगभग 60-70 विधायकों के टिकट काटे जाने की संभावना  है. दिल्ली में चल रही भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय चुनाव समिति की बैठक में जब यह संकेत मिलने लगे कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी भी स्थिति उन लोगों को टिकट देने के पक्ष में नहीं है जिनकी हारने की आशंका है, इससे उन विधायकों और मंत्रियों में खलबली मच गई, जिन्हें टिकट कटने का अंदेशा.  उसके तहत बुधवार की देर रात जब  विदिशा जिले के शमशाबाद से विधायक सूर्यप्रकाश मीणा को यह खबर लग गई तो उनका टिकट कटने वाला है तो उन्होंने आनन-फानन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस बार चुनाव लड़ने के स्थान पर संगठन के लिए काम करने की इच्छा जताई है. बताया जा रहा है कि एक-दो दिन के अंदर भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशियों की पहली सूची आ जाएगी. इस सूची में ज्यादातर वह नाम होंगे जिन पर कोई विवाद नहीं है और जिनके जीतने को लेकर भाजपा प्रदेश नेतृत्व,संघ और संगठन एक मत है.

सरताज को नाम न भेजने का मलाल, सीताशरण को विक्रम वर्मा का मिला सहारा

मध्यप्रदेश भाजपा में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के दौरान प्रदेश चुनाव समिति के सामने राज्य के कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं को सूची में नाम भेजने के लिए मशक्कत करनी पड़ी. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा को वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा का समर्थन मिला और उनका नाम होशंगाबाद से जोड़ दिया गया, मगर सिवनी मालवा से पूर्व केन्द्रीय मंत्री सरताज सिंह अपना नाम दिल्ली नहीं भेज पाए. वहीं रतलाम शहर के भाजपा के पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी भी एक बार फिर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के दौरान आहत नजर आए.
मध्यप्रदेश भाजपा में 70 पार के नेताओं के अलावा अन्य वरिष्ठ  नेताओं को इस बार चयन प्रक्रिया में टिकट के लिए जूझता देखा गया. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर अपने गढ़ गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरने के लिए आतुर रहे, मगर प्रदेश चुनाव समिति के सदस्यों ने उनकी कई बार अनदेखी की. गौर फिर भी अड़े रहे, उन्होंने अंत तक अपना दावा नहीं छोड़ा, आखिरकार समिति को गौर एवं उनकी पुत्र वधू कृष्णा गौर का पैनल बनाकर गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से भेजना पड़ा. इसके अलावा उम्र का हवाला देकर मंत्री पद से हटाए सरताज सिंह की भी इस बार भाजपा संगठन में अनदेखी हुई. सरताज सिंह भाजपा प्रदेश कार्यालय भी पहुंचे और अपना दावा सिवनी मालवा से चुनाव लड़ने के लिए किया, मगर उनकी भी अनदेखी ही हुई. सरताज को इस बात का मलाल है कि वे केन्द्र में मंत्री रहे, मगर कभी इस तरह की अनदेखी नहीं की गई. सिवनी मालवा से पूर्व विधायक प्रेमशंकर वर्मा और खुद सरताज सिंह का विरोध करने वाले योगेन्द्र मंडलोई का नाम प्रदेश चुनाव समिति ने दिल्ली भेजा है.
सरताज के अलावा इस बार विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा को भी टिकट के लिए जूझना पड़ा है. डा. शर्मा को मुख्यमंत्री का आश्वासन ही मिला, मगर प्रदेश चुनाव समिति की ओर से उन्हें किसी तरह का सहयोग नहीं मिला. बाद में डा. शर्मा ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, तब कहीं जाकर विक्रम वर्मा के कहने पर विधानसभा अध्यक्ष का नाम होशंगाबाद से सूची में शामिल किया गया. बताया जाता है कि डा. शर्मा को लेकर इस बार संघ की नाराजगी का सामना करना पड़ा. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी उनका विरोध काफी था, जिसके चलते उनकी अनदेखी होती रही. 
कोठारी को भी नहीं मिला सहारा
प्रदेश के पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी को भी इस बार प्रदेश चुनाव समिति ने मौका नहीं दिया. बताया जाता है कि कोठारी खुद प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे, मगर वहां पर रतलाम  शहर के वर्तमान विधायक चेतन्य कश्यप से उनकी मुलाकात हुई और फिर चर्चा के दौरान उन्होंने कोठारी को मनाने का प्रयास भी किया. इसके बाद भी कोठारी वरिष्ठ नेताओं से मिले और रतलाम शहर से टिकट की दावेदारी की, मगर उन्हें भी इस बार वरिष्ठता को कोई फायदा नहीं मिला. चयन समिति के सदस्यों ने उम्रदराज नेताओं की इस बार खूब अनदेखी भी की.

भाजपा के सेवानिवृत्त भ्रष्टाचारियों की ऐशगाह है कांग्रेस

 आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने भाजपा-कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कांग्रेस को भाजपा के सेवानिवृत्त भ्रष्टाचारियों की ऐशगाह बताया.  
आम आदमी पार्टी कार्यालय में आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि  अब मतदान तक मध्य प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जाकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने के लिए अपना योगदान देंगे. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के जो हालात हैं, वह यहां की जनता से छुपे नहीं हैं. पिछले 15 सालों में भाजपा और शिवराज सिंह की सरकार ने मध्य प्रदेश को घोटाला प्रदेश के रूप में पहचान दिलाई है. कुपोषण प्रदेश के रूप में पहचान दिलाई है. शिवराज सरकार भ्रष्टाचार में सिर से लेकर पांव तक डूबी हुई है. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की आजादी के बाद का अब तक सबसे बड़ा खूनी घोटाला व्यापमं घोटाला है. इस घोटाले में भाजपा सरकार के शीर्ष नेताओं का नाम प्रमुखता से आया है. बहुत से साक्ष्य सामने आए, लेकिन सीबीआई इनकी थी तो किसी तरह बचाए रखा गया. उन्होंने केहा कि इसमें पत्रकार की मौत हुई, कई नेताओं की मौत हुई, राज्यपाल के बेटे तक की मौत हुई, लेकिन व्यापमं का सच अभी तक सामने नहीं आया है। इसके खिलाफ जो पार्टी संघर्ष कर रही है, वह आम आदमी पार्टी है. 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव मैदान में बहरूपिया बनकर निकली है। वह भाजपा के सेवानिवृत्त भ्रष्टाचारियों को नौकरी दे रही है. उन्होंने हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए संजय शर्मा और गुलाब सिंह किरार का जिक्र करते हुए कहा कि खनन घोटाले और व्यापमं में शािमल रहे लोगों को कांग्रेस अब अपने यहां जगह दे रही है, इसलिए कांग्रेस भाजपा के भ्रष्टाचार से नहीं लड़ सकती है. चाहे वह व्यापमं का घोटाला हो, या डंपर घोटाला हो, या फिर ईटेंडरिंग का घोटाला इनसे कांग्रेस नहीं लड़ सकती है. न ही वह प्रदेश के शिक्षा, स्वास्थ्य सड़क को बेहतर बना सकती है, जिस सड़कों को शिवराज सिंह अमरीका से अच्छा बताते हैं। उन्हें कांग्रेस ठीक नहीं कर सकती है, क्योंकि इन दोनों के बीच मिला जुला खेल चल रहा है. कमलनाथ के खिलाफ मोदी जी प्रचार के लिए नहीं जाते हैं, तो शिवराज के खिलाफ कांग्रेस मजबूत प्रत्याशी नहीं देती है. कमलनाथ का नाम जिन कंपनियों से जुड़ा है, उन्हें बड़े बड़े बडे ठेके मध्य प्रदेश में मिले हैं. इन कंपनियों में कमलनाथ और उनके परिवार की कंपनियां शामिल हैं.इसलिए कांग्रेस इस भ्रष्ट घोटालेबाज भाजपा सरकार का कोई विकल्प नहीं है. वह भाजपा से नहीं लड़ सकती है. 

भाजपा से आए नेताओं का कांग्रेस में विरोध

सामूहिक इस्तीफे तक के दे रहे चेतावनी
मध्यप्रदेश में भाजपा के बाद अब कांगे्रस में विरोध तेज हो गया है. कांग्रेस नेताओं को भाजपा से आए नेता रास नहीं आ रहे हैं. इन नेताओं द्वारा कांग्रेस की सदस्यता लेते ही कांग्रेस नेताओं ने मोर्चा खोल दिया, मामले ने तूल इतना पकड़ा कि विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा के भाई और भाजपा के पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा द्वारा कांग्रेस से की दावेदारी के विरोध में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को पत्र लिखकर सामूहिक इस्तीफे तक की चेतावनी दे डाली. 
प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में भाजपा के बाद अब कांग्रेस में विरोध तेज हो गया है. विरोध के स्वर भाजपा से कांग्रेस में शामिल होकर टिकट की मांग करने वाले नेताओं के खिलाफ है. हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के मालवा प्रवास के दौरान भाजपा के विधायक संजय शर्मा द्वारा कांग्रेस की सदस्यता लेना कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रास नहीं आई.  तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को पत्र लिखकर शर्मा को टिकट न देने की मांग करते हुए कांग्रेस ेसे इस्तीफे तक देने की बात कही है.
संजय शर्मा के अलावा होशंगाबाद जिले में विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा के भाई और भाजपा के पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा का विरोध होशंगाबाद में हो गया है. गिरजाशंकर शर्मा पहले सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग कर रहे थे, बाद में उन्होंने होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग कांग्रेस से कर डाली. यह जानकरी जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश मीडिया प्रभारी माणक अग्रवाल को लगी तो उन्होंने होशंगाबाद के नेताओं के साथ शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. शर्मा का विरोध इतना बड़ा कि होशंगाबाद के कांग्रेस नेताओं ने भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पार्टी आलाकमान राहुल गांधी को पत्र लिखकर सामूहिक इस्तीफा देने की मांग कर डाली. 
वहीं कटनी जिले में भाजपा की पूर्व मंत्री पद्मा शुक्ला को लेकर विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता भी खफा है. कांग्रेस नेताओं ने यहां से पद्मा शुक्ला को टिकट न दिए जाने की मांग की है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर पद्मा शुक्ला को टिकट दिया गया तो कार्यकर्ता घर बैठ जाएंगे. विरोध के स्वर दतिया जिले के पूर्व विधायक कमलापत आर्य के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर भी उठ रहे हैं.
पेराशुट से उतरने वालों को टिकट न देने की याद दिला रहे कार्यकर्ता
 राहुल गांधी जब भोपाल प्रवास पर आए थे, तब उन्होंने पेराशुट से उतरने वाले नेताओं को टिकट न देने की बात कही थी. विरोध करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष यह संदेश दे चुके थे तो प्रदेश संगठन भाजपा और अन्य दलों से आए नेताओं को टिकट देने की सिफारिश क्यों कर रहा है. उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के इस बयान के बाद जब पद्मा शुक्ला ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी, तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा था कि पार्टी जीतने वाले उम्मीदवार को टिकट देगी.
कांग्रेस ने कहा गुलाब सिंह किरार को नहीं दी सदस्यता
व्यापमं मामले में आरोपी गुलाब सिंह किरार को राहुल गांधी के सामने कांग्रेस की सदस्यता दिलाने वाले कांग्रेस नेता अब किरार से दूरी बना रहे हैं. इन नेताओं ने अब मौन साध लिया है. वहीं कांग्रेस की प्रदेश मीडिया प्रभारी शोभा ओझा ने इस मामले में बयान दिया है कि गुलाब सिंह किरार सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिलने आए थे, उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है. उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने गुलाब सिंह किरार को कांग्रेस में लिए जाने का विरोध किया था. मजे की बात यह है कि गुलाब सिंह किरार को पार्टी सदस्यता देने के बाद भी राहुल गांधी व्यापम के मुद्दे पर शिवराज को घेरते नजर आए. मामला मीडिया में आने के बाद कांग्रेस नेताओं को यह अहसास हुआ कि गुलाब सिंह किरार को लेकर उन्होंने गलती कर दी है. इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है. खासतौर पर इससे राहुल गांधी की छवि को धक्का लगा है. उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है. इसके बाद उन्होंने गुलाब किरार को लेकर मौन साध लिया.

गौर ने कहा मोदी लहर नहीं, प्रत्याशी अच्छे दिए तो जीतेगी भाजपा

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर  आज फिर बयान देकर सुर्खियों में आ गए. उन्होंने कहा कि अगर भाजपा अच्छे लोगों को टिकट देगी तो चौथी बार सरकार बनाएगी.
भाजपा के उम्रदराज नेता बाबूलाल गौर का यह बयान टिकट कटने की आशंका के तहत देखा जा रहा है. गौर ने कहा कि अगर उन्हें पार्टी टिकट नहीं देगी तो भी वे पार्टी के लिए ही काम करते रहेंगे. वैसे गौर से पहले केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने भी राजधानी में भाजपा के आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में यह कहा था कि इस बार का चुनाव कठिन है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था कि 2003 में उमा लहर थी, 2013 में मोदी लहर थी, मगर अब इस चुनाव में कोई लहर नहीं है, इसलिए कार्यकर्ता को खूब मेहनत करनी होगी.
यहां उल्लेखनीय है कि गौर को गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से टिकट नहीं मिलने की बात संगठन द्वारा कही गई है, मगर उन्हें इस बात का आश्वासन है कि अगर उनका टिकट कटा तो उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट मिलेगी. हालांकि गौर फिर भी प्रयासरत हैं.

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का शंखनाद आज से

मध्यप्रदेश की 15वीं विधानसभा के चुनाव के लिए 2  से 9 नवंबर  तक नाम निर्देशन पत्र प्रात: 11 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय में प्रस्तुत किए जा सकेंगे. रविवार 4  एवं 7 नवंबर को दीपावली का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण नाम निर्देशन पत्र जमा नहीं किए जाएंगे. अभ्यर्थी द्वारा अधिकतम 4 सेट नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे. नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करते समय रिटर्निग आफिसर के कार्यालय की  100 मीटर की परिधि में अभ्यर्थी के साथ अधिकतम 3 वाहन और अधिकतम पांच व्यक्तियों (1 + 4) को लाने की अनुमति रहेगी.
विधानसभा निर्वाचन  में प्रत्याशियों के लिए रुपए 10 हजरी (दस हजार) और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए रुपए 5 हजार (पांच हजार) जमानत राशि जमा कराना होगी. फार्म ए. फार्म बी. नाम निर्देशन पत्र जमा किए जाने के अंतिम दिनांक को 3 बजे तक रिटर्निंग आफिसर को दिया जाना चाहिए.  सुप्रीम कोर्ट के 25 सितंबर  के आदेशानुसार शपथ पत्र  देना होगा, जिसमें अभ्यर्थियों को स्वयं पर चल रहे आपराधिक प्रकरण एवं दोषसिद्धि के प्रकरणों की घोषणा एवं प्रकाशन कराए जाने के  संबंध में प्रारूप सी 1, सी 2 एवं सी3 प्रदाय किया जाएगा.
चुनाव खर्च के लिए अलग से खुलावाया जाएगा खाता
निर्वाचन व्यय के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा पृथक से बैंक खाता खुलवाया जाएगा. बैंक खाता निर्वाचन अभिकर्ता के  साथ संयुक्त रूप से भी खुलवाया जा सकता है. नामांकन पत्र प्रस्तुत करने के तुरंत बाद रिटर्निंग आफिसर के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेना आवश्यक हैं. रिटर्निंग आफिसर द्वारा तैयार किए जाने वाले चेकलिस्ट के प्रारूप और दिशा-निर्देशों की पुस्तिका प्रदाय की जाएगी. रिटर्निग अधिकारी द्वारा नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा के समय, अभ्यर्थी, उनके निर्वाचन अभिकर्ता, प्रत्येक अभ्यर्थी का एक प्रस्तावक और प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा लिखित में सम्यक रूप से प्राधिकृत एक और व्यक्ति उपस्थित रह सकता है. रिटर्निंग अधिकारी के द्वारा एक-एक करके नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी तथा पारदर्शिता हेतु संवीक्षा की वीडियाग्राफी भी की जाएगी.
इन कारणों से निरस्त होगा नामांकन
नामांकन पत्रों की अस्वीकृति की जा सकती है, यदि अभ्यर्थी संबंधित विधायिका का सदस्य बनने के लिए विधि में स्पष्ट रूप से अर्हित नहीं है या अभ्यर्थी ऐसा सदस्य बनने के लिए विधि में स्पष्ट रूप से अनर्हित है. अनर्हित की सूची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा रिटर्निग आफिसर को दी जाएगी. अभ्यर्थी द्वारा विहित शपथ पत्र दाखिल नहीं किए जाने पर, नामांकन पत्र पर अभ्यर्थी या अपेक्षित संख्या के प्रस्तावक द्वारा हस्ताक्षर नही किए जाने पर, समुचित निक्षेप राशि जमा न किए जाने पर, अभ्यर्थी द्वारा शपथ, प्रतिज्ञान नही लिए जाने पर, यदि अभ्यर्थी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति का नहीं है और उसके द्वारा आरक्षित सीट पर लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया गया है, अभ्यर्थी उस निर्वाचन क्षेत्र का निर्वाचक नहीं है, जिसके लिए उसने नामांकन पत्र दाखिल किया है तथा उसने जिस निर्वाचन क्षेत्र में वह रजिस्टर्ड है, उस निर्वाचक नामावली या उसके सुसंगत भाग की सत्यापित प्रति नामांकन पत्र के साथ दाखिल नहीं की है और फार्म 26 शपथ पत्र के बिंदुओं को खाली छोड़ दिए जाने पर नामांकन पत्र अस्वीकृत किया जा सकता हैं.