गुरुवार, 1 नवंबर 2018

सरताज को नाम न भेजने का मलाल, सीताशरण को विक्रम वर्मा का मिला सहारा

मध्यप्रदेश भाजपा में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के दौरान प्रदेश चुनाव समिति के सामने राज्य के कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं को सूची में नाम भेजने के लिए मशक्कत करनी पड़ी. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा को वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा का समर्थन मिला और उनका नाम होशंगाबाद से जोड़ दिया गया, मगर सिवनी मालवा से पूर्व केन्द्रीय मंत्री सरताज सिंह अपना नाम दिल्ली नहीं भेज पाए. वहीं रतलाम शहर के भाजपा के पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी भी एक बार फिर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के दौरान आहत नजर आए.
मध्यप्रदेश भाजपा में 70 पार के नेताओं के अलावा अन्य वरिष्ठ  नेताओं को इस बार चयन प्रक्रिया में टिकट के लिए जूझता देखा गया. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर अपने गढ़ गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरने के लिए आतुर रहे, मगर प्रदेश चुनाव समिति के सदस्यों ने उनकी कई बार अनदेखी की. गौर फिर भी अड़े रहे, उन्होंने अंत तक अपना दावा नहीं छोड़ा, आखिरकार समिति को गौर एवं उनकी पुत्र वधू कृष्णा गौर का पैनल बनाकर गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से भेजना पड़ा. इसके अलावा उम्र का हवाला देकर मंत्री पद से हटाए सरताज सिंह की भी इस बार भाजपा संगठन में अनदेखी हुई. सरताज सिंह भाजपा प्रदेश कार्यालय भी पहुंचे और अपना दावा सिवनी मालवा से चुनाव लड़ने के लिए किया, मगर उनकी भी अनदेखी ही हुई. सरताज को इस बात का मलाल है कि वे केन्द्र में मंत्री रहे, मगर कभी इस तरह की अनदेखी नहीं की गई. सिवनी मालवा से पूर्व विधायक प्रेमशंकर वर्मा और खुद सरताज सिंह का विरोध करने वाले योगेन्द्र मंडलोई का नाम प्रदेश चुनाव समिति ने दिल्ली भेजा है.
सरताज के अलावा इस बार विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा को भी टिकट के लिए जूझना पड़ा है. डा. शर्मा को मुख्यमंत्री का आश्वासन ही मिला, मगर प्रदेश चुनाव समिति की ओर से उन्हें किसी तरह का सहयोग नहीं मिला. बाद में डा. शर्मा ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, तब कहीं जाकर विक्रम वर्मा के कहने पर विधानसभा अध्यक्ष का नाम होशंगाबाद से सूची में शामिल किया गया. बताया जाता है कि डा. शर्मा को लेकर इस बार संघ की नाराजगी का सामना करना पड़ा. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी उनका विरोध काफी था, जिसके चलते उनकी अनदेखी होती रही. 
कोठारी को भी नहीं मिला सहारा
प्रदेश के पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी को भी इस बार प्रदेश चुनाव समिति ने मौका नहीं दिया. बताया जाता है कि कोठारी खुद प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे, मगर वहां पर रतलाम  शहर के वर्तमान विधायक चेतन्य कश्यप से उनकी मुलाकात हुई और फिर चर्चा के दौरान उन्होंने कोठारी को मनाने का प्रयास भी किया. इसके बाद भी कोठारी वरिष्ठ नेताओं से मिले और रतलाम शहर से टिकट की दावेदारी की, मगर उन्हें भी इस बार वरिष्ठता को कोई फायदा नहीं मिला. चयन समिति के सदस्यों ने उम्रदराज नेताओं की इस बार खूब अनदेखी भी की.

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