रविवार, 25 अक्टूबर 2026

कांग्रेस के घर वापसी अभियान में अपनों की ही अड़चन

पटवारी के सामने वापसी और संगठन में संतुलन साधने की कसौटी 

प्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस का घर वापसी अभियान अब पार्टी के भीतर ही असहमति का कारण बनता दिखाई दे रहा है। पार्टी छोड़कर जा चुके नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोबारा जोड़ने की पहल के बीच जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं की आपत्तियों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। 

एक ओर पार्टी को मजबूत करने के लिए पुराने चेहरों को वापस लाने की कोशिश है, तो दूसरी ओर उन कार्यकर्ताओं के सम्मान और मनोबल को बनाए रखने का सवाल है, जिन्होंने मुश्किल दौर में भी कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा। ऐसे में घर वापसी की मुहिम को आगे बढ़ाने के साथ संगठन में संतुलन साधना पटवारी के लिए अहम कसौटी बन गया है। पार्टी में वापसी के लिए करीब 600 आवेदन आने के दावे के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि किन नेताओं को दोबारा संगठन में जगह मिलेगी और इसके मानक क्या होंगे। क्या पार्टी छोड़कर जा चुके सभी नेताओं के लिए दरवाजे खोल दिए जाएंगे या उनके पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड, क्षेत्र में जनाधार और संगठन के प्रति योगदान के आधार पर फैसला होगा? जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं की आपत्तियों के बीच यह मुद्दा अब केवल वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन की कार्यप्रणाली और भविष्य की रणनीति से भी जुड़ गया है।

पुराने कार्यकर्ताओं की चिंता, नए समीकरणों की चुनौती

कांग्रेस के भीतर एक वर्ग की चिंता है कि विपरीत परिस्थितियों में पार्टी के साथ खड़े रहने वाले कार्यकर्ताओं की तुलना में लौटने वाले नेताओं को अधिक महत्व मिला, तो संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता प्रभावित हो सकती है। टिकट वितरण, संगठनात्मक पदों और स्थानीय नेतृत्व में हिस्सेदारी को लेकर भी असंतोष उभरने की आशंका है। दूसरी ओर, कुछ पूर्व नेताओं के पास स्थानीय जनाधार, राजनीतिक अनुभव और क्षेत्रीय प्रभाव है, जिसका लाभ पार्टी को मिल सकता है। ऐसे में सभी नेताओं की वापसी को एक ही नजरिए से देखना भी आसान नहीं होगा। 

वापसी के साथ भरोसा कायम रखना जरूरी

कांग्रेस के सामने चुनौती केवल पार्टी छोड़कर गए नेताओं को वापस लाने की नहीं, बल्कि संगठन में पहले से सक्रिय कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखने की भी है। जीतू पटवारी के लिए घर वापसी और संगठन सृजन के बीच ऐसा संतुलन बनाना जरूरी होगा, जिसमें अनुभवी चेहरों की वापसी के साथ नए नेतृत्व के अवसर भी प्रभावित न हों। कुल मिलाकर, कांग्रेस का घर वापसी अभियान अब संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा बन गया है। 


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