शुक्रवार, 22 मार्च 2019

नितीश ने कहा रुपए लगाओ, चुनाव लड़ो

नितीश कुमार 
जनता दल यू मध्यप्रदेश में नहीं उतारेगा प्रत्याशी

जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीश कुमार ने मध्यप्रदेश इकाई को साफ कह दिया कि प्रदेश में अगर चुनाव लड़ना है तो खुद रुपए लगाएं, संगठन के भरोसे न रहें. इसके बाद प्रदेशइकाई ने मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारने का मन बना लिया है.
मध्यप्रदेश में शरद यादव से अलग होने के बाद से जनता दल यू का संगठन जो बिखरा, वह अब तक मजबूत नहीं हुआ है. यही कारण है कि विधानसभा चुनाव के बाद अब लोकसभा चुनाव में जनता दल यू अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतार रहा है. प्रदेश इकाई के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में जब यह मुद्दा उठाया और प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए तीन लोकसभा सीटों सीधी, रतलाम और बालाघाट से प्रत्याशी मैदान में उतारने को कहा, तो राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस बात को पहले तो गंभीरता से नहीं लिया और साफ कह दिया कि प्रदेश इकाई अगर प्रत्याशी उतारना चाहती है तो अपने दम पर चुनाव लड़े, फंड पार्टी नहीं देगी. 
राष्ट्रीय नेतृत्व के इस रुख को देख पहले तो प्रदेश के पदाधिकारी चिंतित हुए, मगर कार्यकारिणी की बैठक में अन्य पदाधिकारियों से भी चर्चा की तो एक तीन सदस्यीय समिति बना दी, वह समिति अब यह तय करेगी कि प्रदेश में चुनाव लड़ना है या फिर नहीं. हालांकि प्रदेश पदाधिकारिरयों को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीश कुमार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारें, बल्कि निचले स्तर पर संगठन को मजबूत करें. नितीश कुमार का संदेश साफ था कि नगरीय निकाय के चुनाव लड़ें और संगठन को मजबूत करें.
हमने प्रस्ताव दिया है: मालवीय
जनता दल यू के प्रदेश महासचिव विनोद मालवीय ने बताया कि प्रदेश में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए हमने प्रस्ताव दिया है, हमने तीन सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से कहा है, मगर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है वह हमारे प्रस्ताव पर फैसला लेगी. मालवीय ने कहा कि हमसे संगठन को मजबूत करने को कहा गया है, साथ चुनाव लड़ने के लिए फंड भी नहीं दिए जाने की बात भी सामने आई है. इस वजह से हम प्रदेश में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं.

गौर के बदले सुर, चुनाव लड़ने की संभावना से किया इंकार

पहली सूची जारी होती ही भाजपा में चिंता, ताई पर टिकी नजर
मध्यप्रदेश भाजपा के उम्रदराज नेताओं में भाजपा की पहली सूची जारी होती ही चिंता बढ़ गई है. अब तक टिकट की दौड़  शामिल रहे पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने आज किनारा कर लिया. गौर ने इस बात के संकेत दे दिए कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे. गौर के अलावा अन्य उम्रदराज नेता भी चिंतित हो गए हैं. अब भाजपा में इंदौर की सांसद सुमित्रा महाजन के अलावा खजुराहो से टिकट की मांग कर रही पूर्व मंत्री कुसुम महदेले पर नजरें टिक गई है. ये नेता क्या कदम उठाते हैं, इसका इंतजार पार्टी पदाधिकारियों को है.
भाजपा की पहली सूची में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित अन्य उम्रदराज नेताओं एवं वर्तमान सांसदों के टिकट कटने के बाद मध्यप्रदेश में उम्रदरार नेताओं और वर्तमान सांसदों की चिंता बढ़ने लगी है.  उम्रदराज नेता बाबूलाल गौर जो लगातार टिकट के लिए दबाव बना रहे थे और बगावजी सूर दिखा रहे थे, उनके सुर आज अचानक बदल गए. गौर ने साफ संकेत दिए कि वे अब चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. हालांकि गौर ने कारण बताने से इंकार किया. उन्होंने कहा कि अब वे किसी दौड़ में नहीं है. गौर ने आज साफ कर दिया कि उनकी चुनाव लड़ने की कोई तैयारी नहीं है. गौर लालकृष्ण आडवाणी के टिकट काटे जाने पर भी मौन रहे उन्होंने किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की. हमेशा बेबाक मीडिया में अपनी बात रखने वाले गौर आज मौन साधे रहे. उन्होंने इतना जरुर कहा कि देश में आज नरेन्द्र मोदी की लहर है, वे दमदार व्यक्ति है और उनके नेतृत्व में केन्द्र में भाजपा सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर पूरा विश्व आज भारत के साथ है.
ताई पर टिकी निगाह
गौर के चुनाव लड़ने से पीछे हटने की बात कहने के बाद अब उम्रदराज नेताओं में इंदौर की सांसद और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन क्या फैसला लेती हैं, इस पर भाजपा नेताओं की नजरें टिकी हुई है. हालांकि ताई ने इंदौर से चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर ली है और वे सक्रिय भी है. ताई के अलावा विधानसभा चुनाव में टिकट काटे जाने से नाराज चल ही पूर्व मंत्री कुसुुम महदेले भी क्या कदम उठाती है, उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैंं. इन नेताओं के अलावा सागर से सांसद लक्ष्मीनारायण यादव का भी टिकट कटना तय माना जा रहा है. वे भी उम्रदराज नेताओं में शामिल हैं.
सांसदों में भी गहराई चिंता
पहली सूची में भाजपा ने जिस तरह से वर्तमान सांसदों के टिकट काटे हैं, उसके बाद से राज्य के एक दर्जन से ज्यादा सांसदों की चिंंता बढ़ गई है.  शहडोल से ज्ञानसिंह, सागर से लक्ष्मीनारायण यादव, भिंड से भागीरथ प्रसाद, मुरैना से अनूप मिश्रा, भोपाल से आलोक संजर, सीधी से रीति पाठक, रीवा से जनार्दन मिश्र, बैतूल से ज्योति धुर्वे, बालाघाट से बोधसिंह भगत, खरगोन से सुभाष पटेल, मंदसौर से सुधीर गुप्ता, धार से सावित्री देवी, राजगढ़ से रोडमल नागर, होशंगाबाद से राव उदयप्रताप सिंह का टिकट कटना तय माना जा रहा है.
भाजपा ने आडवाणी को किया बेइज्जत
लालकृष्ण आडवाणी के टिकट कटने पर प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने कहा कि आडवाणी का टिकट काटकर भाजपा ने उनका अपमान किया है.  उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व वाली सरकार केवल वरिष्ठ नेताओं का अपमान ही तो कर रही है. उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा आडवाणी जैसे नेता का टिकट काटना उन्हें बेइज्जत करने जैसा है.  

बुधवार, 20 मार्च 2019

तीन फीट के धनेश को मिली अपने साईज की दुल्हनियां

 कहते है जोड़ियां स्वर्ग में बनती है लेकिन धरती पर उन्हें खोजने में कई बार बरसों लग जाते है। खण्डवा जिले के ग्राम पुनासा के 36 वर्षीय धनेश राजवैद्य पिछले 10 वर्षों से अपने लिए दुल्हनियां तलाश रहे थे। वे उच्च शिक्षित है ,उनके पास अच्छी सरकारी नौकरी है  और वह सब कुछ जिसकी किसी भी विवाह योग्य कन्या की हसरत होती है लेकिन सबसे बड़ी बाधा थी तो उनकी ऊंचाई जो थी सिर्फ तीन फिट यानि 36 इंच। जाहिर है अपनी ही ऊंचाई की कन्या ढूँढना ही उनके लिए बड़ी चुनौती थी। निमाड़ के ही पश्चिमी अंचल में जब उन्हें पता चला कि उन्ही की तरह 36 इंच की कन्या भी है तो फिर हो गया चट मंगनी और पट ब्याह।
अपने पांच भाई बहनो में धनेश उम्र में तो सबसे छोटे थे ही ,कद में भी छोटे रह गए। उनकी तीन बड़ी बहने और एक भाई सामान्य कद काठी के है। बचपन से ही अपने बौने कद के कारण उन्हें भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी लेकिन खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। पुनासा में रहकर ही स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन किया फिर हिन्दी में एमए इसके बाद बी एड और पीजीडीसीए भी किया। उनकी इच्छा शिक्षा विभाग में सेवाएं देने की थी लेकिन उन्हें पंचायत सचिव के पद पर नौकरी मिल गई। अच्छी शिक्षा ,अच्छी नौकरी के बाद उन्हें अपने ही कद की दुलहनिया की तलाश थी। पिछले दस वर्ष से इस तलाश में जब उन्हें योग्य साथी नहीं मिला तो उम्मीदे टूटने लगी। धनेश कहते है कि मुझे लगता था कि शायद उनकी तक़दीर में शादी नहीं लिखी है ,उन्हें अपने कद काठी का जीवन साथी नहीं मिल पायेगा।
इस बीच कहीं चर्चा चली तो किसी ने उन्हें बताया कि बड़वानी जिले के ग्राम मड़वाणा में उनकी तरह ही एक युवती है जो पढ़ी लिखी भी है और अच्छे परिवार से है। बिना समय गंवाए वे तत्काल मड़वाणा पहुँच गए ,वहां 36 इंच (3 फीट ) की चेतना शर्मा से पहली बार मिले तो लगा जैसे बरसो पुरानी मुराद पूरी हो गई। वे कहते है कि जब पहली नज़र में ही चेतना को देखा तो लगा कि अब उनकी तलाश ख़त्म हो गई है फिर भी उन्हें लगता था कि इस असामान्य कद काठी के कारण जीवन में कुछ समस्याएं आ सकती है इसलिए बैठकर चर्चा करना जरुरी है। उन्होंने आपस में हर विषय पर चर्चा की ,गहराई से विचार किया और फिर जीवन भर के लिए साथ रहने का निर्णय किया। चेतना उनसे 8 वर्ष छोटी है लेकिन वह भी इकोनॉमिक्स में एमए है। वैचारिक रूप से बहुत परिपक़्व है। चेतना ने  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत  समूह में प्रशिक्षण देने का कार्य किया। समूह बनाकर सेनेटरी नेपकिन बनाकर उसकी मार्केटिंग भी की। वे खुद कद में छोटी जरूर है लेकिन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ही कार्य करना चाहती है। .
इस शादी से दोनों बहुत खुश है ,उन्हें लगता है कि ईश्वर ने उन्हें एक दूजे के लिए ही बनाया है ,यह बात और है कि मिलाया देर से। धनेश अपने कार्य में दक्ष तो है ही ,बहुत व्यवहारकुशल भी है इसलिए वे गांव में तो लोकप्रिय है ही अपने सहकर्मियों में भी। इसीलिए उनकी शादी में इस क्षेत्र के 72 तो पंचायत सचिव इकठ्ठा हो गए ,पूरा गांव शादी में उमड़ पड़ा। धनेश खुद इतने खुश थे कि अपनी शादी में वे खुद भी जमकर नाचे ,जाहिर है साथियों ने तो झूमना ही था। धनेश कहते है कि उनका एक बड़ा सपना पूरा हुआ अब वे सिर्फ इतना चाहते है कि उनकी संतान सामान्य कद की हो जिससे उन्हें जो तकलीफ़ उठानी पड़ी वह बच्चों को नहीं उठानी पड़े।

चौंकाने वाले नाम देंगे नाथ-अमित शाह

अमित शाह 
 कमजोर नहीं जिताऊ प्रत्याशी पर ही भाजपा-कांग्रेस का जोर
मध्यप्रदेश में इस बार का लोकसभा चुनाव बीते लोकसभा चुनावों की भांति कुछ अलग तरह का रहेगा. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल किसी भी सीट पर कमजोर प्रत्याशी नहीं देना चाहते हैं. अमित शाह और कमलनाथ दोनों को अपने सर्वे पर भरोसा है, वे सर्वे के मुताबिक की प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को अंजाम देंगे. यही वजह है कि प्रदेश चुनाव समितियां और पदाधिकारियों के द्वारा दिए गए नामों को दिल्ली तो भेज दिया गया, मगर अंतिम निर्णय इन दोनों ही नेताओं की राय पर ही होगा. 
कमलनाथ 
भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस की गढ़ वाली छिंदवाड़ा, गुना और रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्रों पर कमजोर प्रत्याशी उतारने के मूड में नजर नहीं आ रही है. अमित शाह ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी को भी कमजोर प्रत्याशी नहीं मिलेगा. सभी 29 सीटों पर भाजपा जिताऊ प्रत्याशी ही मैदान में उतारेगी. यही वजह है कि लोकसभा चुनाव प्रभारी स्वतंत्रदेव सिंह छिंदवाड़ा और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय गुना संसदीय क्षेत्र में जमावट में जुटे हैं. इसके अलावा रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट पर अरुण जैन के अलावा खुद अमित शाह निगाह टिकाए हुए हैं. भाजपा की ओर से नामों का पैनल जरुर भेज दिया गया, मगर अंतिम फैसले में चौंकाने वाले नाम आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है. शाह ने अपनी टीम पर भी इस बार पूरा भरोसा जताया है. प्रत्याशी चयन में वे प्रदेश के नेताओं से चर्चा तो कर रहे हैं, मगर प्रत्याशी कौन होगा, इसका संकेत खुद नेताओं को भी नहीं दिया जा रहा है. शाह ने प्रदेश संगठन को साफ कह दिया है कि भाजपा के प्रभाव वाली सीटों पर कमजोरी न हो साथ ही कांग्रेस की गढ़ मानी जाने वाली सीटों पर पूरी ताकत लगाई जाए.  शाह द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर ही भाजपा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को अंजाम देगी. 
नाथ की नजरें महानगरों पर


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ पर इस बार प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया निर्भर है. वे ही प्रदेश में प्रत्याशी चयन को लेकर केन्द्रीय नेताओं को फीडबेक दे रहे हैं. नाथ शुरु से ही कह चुके हैं कि वे इस बार भाजपा की गढ़ मानी जाने वाली सीटों पर दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारेंगे. इसके चलते उन्होंने नामों का चयन भी अपने सर्वे के आधार पर किया है. नाथ सर्वे के आधार पर ही प्रदेश के सभी 29 संसदीय सीटों पर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को अंजाम देंगे. नाथ का पूरा जोर जबलपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे महानगर है. यहां पर वे इस बार चौंकाने वाले और जिताऊ चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी कर चुके हैं. 

कांग्रेस को झटका, हिमाद्री सिंह भाजपा में हुई शामिल

हिमाद्री सिंह 
मध्यप्रदेश के शहडोल लोकसभा के उपचुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी रही हिमाद्री सिंह ने आज भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. पूर्व केन्द्रीय मंत्री दलवीर सिंह की बेटी हिमाद्री आज अपने पति और भाजपा नेता नरेन्द्र मरावी के साथ भाजपा कार्यालय पहुंची और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह के समक्ष भाजपा की सदस्यता ली.
लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशी चयन के पहले जोड़-तोड़ की प्रक्रिया तेज हो गई है. भाजपा ने इसके तहत आज कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है. शहडोल में हुए उपचुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी रही हिमाद्री सिंह को भाजपा की सदस्यता दिला दी. हिमाद्री का नाम शहडोल संसदीय क्षेत्र से इस बार भी कांग्रेस के पैनल में था, मगर मंगलवार को जब भाजपा प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हो रही थी, तब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह के सुझाव पर प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने नरेन्द्र मरावी से फोन पर चर्चा की थी. हालांकि दोनों के बीच क्या बातचीत हुई इसका खुलासा नहीं हुआ था, मगर आज बुधवार को दोपहर हिमाद्री सिंह अपने पति और भाजपा नेता नरेन्द्र मरावी के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे और भाजपा की सदस्यता ली. उन्हें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने यह सदस्यता दिलाई.
उल्लेखनीय है हिमाद्री सिंह आदिवासी वर्ग का बड़ा चेहरा है. उनके पिता स्वर्गीय दलवीर सिंह केन्द्रीय मंत्री रहे और पति नरेन्द्र मरावी अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रहे हैं. इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पुष्पराजगढ़ से प्रत्याशी बनाया था, मगर वे चुनाव हार गए थे. 


ज्ञानसिंह का टिकट कटना तय
हिमाद्री सिंह के भाजपा में शामिल होने से अब यह तय हो गया कि शहडोल संसदीय क्षेत्र से वर्तमान सांसद ज्ञानसिंंह का टिकट कटेगा. हालांकि ज्ञानसिंह लगातार दावेदारी कर रहे हैं. वे भोपाल से दिल्ली तक दावेदारी कर चुके हैं और  नेताओं का ेयह भी बता चुके हैं कि उन्हें उपचुनाव के बाद कम समय मिला इस वजह से क्षेत्र का विकास वे नहीं कर पाए. उन्हें समय दिया जाना चाहिए. 

आदिवासियों को बताया जा रहा मतदान कैसे करें

दी जा रही ईव्हीएम और वीवीपीएट मशीन की जानकारी
मध्यप्रदेश में इन दिनों चल रहे प्रणय पर्व भगोरिया में आदिवासी अपनी परंपरा का निर्वहन करते हुए मतदान कैसे किया जाए, यह भी सीख रहे हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ेके निर्देश पर कर्मचारियों द्वारा झाबुआ जिलें में जिन ग्रामों में यह पर्व मनाया जा रहा है, वहां पर आदिवासियों को मतदान कैसे करें इसकी जानकारी दी जा रही है. साथ ही ईव्हीएम और वीवीपीएट मशीन के बारे में बताया जा रहा है.
आगामी लोकसभा निर्वाचन 2019 में शतप्रतिशत मतदान हो इसलिए स्वीप गतिविधि अतर्गत झाबुआ जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रो में लगने वाले भगोरिया हाट बाजारों में स्टाल लगाकर ईवीएम एवं वीवीपेट मशीन का प्रदर्शन कर मतदाताओं को वोट डालने की प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है. भगोरिया हाट में पारम्परिक परिधान में सज धज कर आये ग्रामीणों ने झुले चकरी एवं कुल्फी का आनंद लिया एवं भगोरिया में निर्वाचन कार्यालय द्वारा लगाये गये स्टाल पर जाकर ईवीएम मशीन का बटन दबाकर वोट डालने की प्रक्रिया समझी.
मध्यप्रदेश के झाबुआ  जिले में  पिटोल, खरडू, थांदला, तारखेड़ी, बरवेट, एवं अंधारवाड के भगोरिया में आये ग्रामीणों को बताया गया कि मतदान प्रकोष्ठ मे प्रवेश करते समय पीठासीन अधिकारी बैलेट यूनिट को वोट डालने के लिए तैयार करेंगे. बैलेट यूनिट मे अपने पसंद के प्रत्याशी के नाम और चुनाव चिन्ह के सामने वाले नीले बटन को दबाना होगा. जिस प्रत्याशी को वोट दिया है उसके नाम, चुनाव चिन्ह के सामने वाली लाइट लाल जलेगी. प्रिंटर एक बैलेट पर्ची प्रिंट करेगा जिसमें पसंद के प्रत्याशी के सरल क्रमांक, नाम और चुनाव चिन्ह अंकित होगा. बैलेट पर्ची सात सेकण्ड के लिए दिखेगी उसके बाद कट कर प्रिंटर के ड्राप बाक्स मे गिर जाएगी और एक बीप की आवाज सुनाई देगी. प्रिंट पर्ची को ग्लास मे से देखा जा सकता है. बैलेट पर्ची नही दिखने एवं बीप की आवाज नही आने पर पीठासीन अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है.
 वोटिंग मशीन पर ग्रामीणों ने ईव्हीएम मशीन में बटन दबाकर अपना वोट डाला एवं व्हीव्हीपीएटी मशीन से देखा कि उन्होने जिस प्रत्याशी को मत डाला है उसे ही उसका मत मिला है. भगोरिया हाट में नुक्कड नाटक दलो द्वारा पारंपरिक परिधान पहन कर नुक्कड नाटक के माध्यम से मतदान के महत्वपूर्ण को बताया गया. भगोरिया स्थल पर सेल्फी पांइट बनाया गया भगोरिया में आये ग्रामीणों ने सेल्फी खिचवाई और अपना फोटो देख कर आनंद की अनुभूति की. भगोरिया स्थल पर मतदाता जाकरूकता संबंधी होर्डिग लगाकर मतदान के लिये प्रेरित किया गया.

भोपाल में गर्माया स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल  संसदीय क्षेत्र में बाहरी प्रत्याशी का नाम पैनल में आने के बाद भाजपा के नेता फिर एकजुट हो गए और स्थानीय को टिकट देने की मांग करने लगे हैं. भाजपा के महामंत्री वी.डी.शर्मा का भोपाल से पैनल में नाम जुड़ने की खबर के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के नेतृत्व में फिर से भोपाल के नेताओं ने मोर्चा खोला है और साफ संकेत दिए हैं कि भोपाल में बाहरी को पसंद नहीं किया जाएगा.
राजधानी भोपाल में आज सुबह जैसे ही भाजपा नेताओं को इस बात की जानकारी मिली की दिल्ली भेजे गए पैनल में भोपाल संसदीय क्षेत्र से वी.डी.शर्मा का नाम है. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के नेतृत्व में भाजपा के टिकट के दावेदार एकत्रित हो गए. इन दावेदारों में पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, वर्तमान सांसद आलोक संजर, भोपाल नगर निगम महापौर आलोक शर्मा और विधायक एवं गौर की बहू कृष्णा गौर शामिल थे. ये सभी गौर के निवास पर पहुंचे और एकांत में चर्चा की. इन नेताओं की नाराजगी भोपाल सीट पर बाहरी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर थी. गौर ने साफ कहा कि हम तो नहीं जानते वी.डी.शर्मा को. उन्होंने कहा कि टिकट के लिए पहला अधिकार आलोक संजर का है, इसके बाद हममें से किसी एक को प्रत्याशी बनाया जाना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि भोपाल संसदीय क्षेत्र से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम भी आया था. इसके बाद गौर और गुप्ता ने इसका विरोध जताया था. हालांकि मंगलवार को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में बनाए पैनल में दोनों ही नेताओं का नाम भोपाल से नहीं है, मगर वी.डी.शर्मा का नाम पैनल में जुड़ा तो स्थानीय की मांग ने फिर जोर पकड़ा और अन्य दावेदारों ने एकजुट होकर फिर से इसका विरोध तेज कर दिया है.
शिवराज से भी की मुलाकात
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के निवास पर पहुंचने के पहले ये सभी नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर भी पहुंचे और साफ कहा कि भोपाल से बाहरी को टिकट न दिया जाए. चौहान ने सभी से चर्चा कर आश्वस्त किया कि वे यह प्रयास करेंगे. नेताओं की इस सक्रियता से संगठन की चिंता बढ़ गई है. भाजपा के प्रदेश  अध्यक्ष राकेश सिंह और प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत ने इसके बाद भाजपा कार्यालय में बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की है.