रविवार, 17 नवंबर 2024
पटवारी से नाराज मुस्लिम नेता राहुल से मिलने जाएंगे दिल्ली
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी गठित होने के बाद नाराज लोगां की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। अब कार्यकारिणी में उम्रदराज और आधारहीन मुस्लिम नेताओं को स्थान दिए जाने के खिलाफ कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। साथ ही इन नेताओं ने बुधनी और विजयपुर उपचुनाव के परिणाम आने के बाद दिल्ली जाकर राहुल गांधी से मुलाकात कर कांग्रेस के हालात बताने की तैयारी की है।
कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ करीब-करीब हर वर्ग के नेताओं ने मोर्चा खोल रखा है। कांग्रेस की कार्यकारिणी गठन के बाद से तो बड़े नेताओं के साथ अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं की नाराजगी भी खुलकर दिखाई दे रही है। इन नेताओं ने स्थानीय स्तर पर विरोध जताने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी के वरिश्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश कांग्रेस की स्थिति से अवगत कराने का फैसला लिया है। सूत्रों की माने तो जिस अंचल से पटवारी आते हैं यानी मालवाअंचल से ही मुस्लिम वर्ग के नेता अब उनके खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं। ये नेता निमाड़ अंचल के बुरहानपुर विधानसभा सीट से राकपा के विधायक रहे हमीद काजी को उपाध्यक्ष बनाए जाने से खफा हैं। हमीद काजी के अलावा अनीस मामू को महामंत्री बनाने से भी इनकी नाराजगी दिखाई दे रही है। इसके अलावा शेख अलीम प्रदेश अध्यक्ष के निजी मित्र हैं, इस कारण उन्हें अनुशासन समिति में मौका दिया गया। वहीं सोहराब पटेल राऊ विधानसभा क्षेत्र के समीकरण को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं, इस कारण उन्हें पटवारी ने एडजस्ट किया।
उपचुनाव परिणाम के बाद उठाएंगे मामला
मुस्लिम नेताओं का कहना है कि पटवारी ने अपनी कार्यकारिणी में आधारहीन मुस्लिम नेताओं को स्थान दिया है। सूत्रों की माने तो नाराज मुस्लिम नेताओं को कांग्रेस के बड़े नेताओं का भी समर्थन मिला हुआ है। बताया जा रहा है कि नाराज चल रहे नेताओं ने दिल्ली जाकर राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के को सारी बातें बताने और आधारहीन मुस्लिम नेताओं को पद देने की शिकायत करने की तैयारी की थी, मगर जिन बड़े नेताओं का उन्हें समर्थन मिल रहा है, उन नेताओं ने इन्हें फिलहाल उपचुनाव के परिणाम आने तक रोक लिया है। इन नेताओं से कहा है कि बुधनी और विजयपुर उपचुनाव के परिणाम आने के बाद ही वे दिल्ली जाएं तो उनकी बातों को कांग्रेस हाईकमान भी गंभीरता से लेगा।
बेजान गढ़ में जान फूंक पाएंगे कमलनाथ ?
भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बार फिर अपने गढ़ छिंदवाड़ा में सक्रिय हुए हैं। इस बार वे जन्मदिन के बहाने अपने बेजान गढ़ छिंदवाड़ा में जान फूंकने का काम कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में मिली कांग्रेस को करारी हार के बाद वे फिर से अपने गढ़ छिंदवाड़ा को अजेय गढ़ बनाने में जुट गए हैं। अब देखना है कि कमलनाथ इस बार छिंदवाड़ा में अपनी उपस्थिति को कितना मजबूत कर पाते हैं?
लोकसभा चुनाव के बाद हाल ही में हुए बुधनी और विजयपुर के उपचुनाव में भी कमलनाथ उतने सक्रिय नजर नहीं आए, जितना की लोकसभा चुनाव के पहले रहे थे। लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा जो कि उनका अपना किला था, उसे हारने के बाद करीब-करीब सक्रिय राजनीति से उन्होंने दूरी बना ली थी। इसके बाद माना जा रहा था कि कमलनाथ उपचुनाव में सक्रिय होंगे। उनका कार्यक्रम भी तय था, मगर बाद में स्वास्थ्यगत कारणों के चलते उन्होंने दूरी बना ली थी। अब जबकि प्रदेश में उपचुनाव हो गया इसके बाद वे अब फिर से अपने जन्मदिन के बहाने छिंदवाड़ा पहुंचे हैं। 18 नवंबर को वे अपने बेजान गढ़ में एक बार फिर जान फूंकने की कवायद करने जा रहे हैं। उनके समर्थकों ने राजधानी पहुंचने के बाद ही इस बात का संकेत दिया था कि कमलनाथ फिर प्रदेश में सक्रिय नजर आएंगे। हालांकि फिलहाल यह माना जा रहा है कि कमलनाथ खुद अपनी कमजोर हुई छिंदवाड़ा की जमीन को मजबूत बनाना चाह रहे हैं। इसके चलते उन्होंने छिंदवाड़ा में सक्रियता दिखाई है और जन्मदिन के बहाने कार्यक्रम आयोजित कर कांग्रेस को मजबूत बनाने का प्रयास करना शुरू कर दिया हैं।
कई साथी साथ छोड़कर बन गए भाजपाई
कमलनाथ और छिंदवाड़ा को एक दूसरे का पर्याय बने 4 दशक से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन छिंदवाड़ा में पिछला एक साल कांग्रेस और कमलनाथ दोनों के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। कमलनाथ के कई करीबी हाथ छुड़ाकर भाजपा में गए, तो छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ को करारी हार झेलनी पड़ी। भाजपा के तंज से इधर कांग्रेस कमलनाथ के जन्मदिन को सियासत से अलग करके देख रही है। कांग्रेस का मानना है कि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। उनका छिंदवाड़ा से रिश्ता भाजपा नहीं समझ सकती। वे एक बार फिर अपने गढ़ में ताकत दिखाने जा रहे हैं।
पहले महाकौशल, फिर प्रदेश
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छिंदवाड़ा में बढ़ी सक्रियता को लेकर कांग्रेस में उनके समर्थकों का कहना है कि कमलनाथ के लिए हमेशा ही पहले छिंदवाड़ा और महाकौशल रहा है। इसके बाद वे प्रदेश में कांग्रेस के मजबूत करने की कवायद करते हैं। इस बार भी वे पहले छिंदवाड़ा और महाकौशल में कमजोर हुई कांग्रेस को पहले मजबूत करेंगे, इसके बाद प्रदेश स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कमलनाथ समर्थकों का मानना है कि बिना कमलनाथ प्रदेश में कांग्रेस मजबूत नहीं हो सकेगी।
गुरुवार, 5 सितंबर 2024
आदिम जाति विभाग में आवेदन करें, 65 साल तक शिक्षक बने रहें
भोपाल। शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को प्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह ने तोहफा दिया है। उन्होंने कहा कि 62 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक आदिम जाति कल्याण विभाग में आवेदन करें, उन्हें विभाग के स्कूलों में 65 साल की आयु तक सेवा करने का अवसर दिया जाएगा।
आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह आज खंडवा में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल हुए थे। शाह ने कहा कि शिक्षकों का जितना सम्मान किया जाए वह काम है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी ,विज्ञान, खेल और गणित के विषयों के शिक्षकों की बड़ी कमी है। इस विषय के जो शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए हैं और अपनी सेवा देना चाहते हैं, वह 65 साल की उम्र तक पे माइनस पेंशन योजना के तहत अपने सेवा दे सकेंगे। जल्दी ही इस तरह का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि आदिम जाति विभाग में आवेदन करें। हम उन्हें 11-11 महीनों तक विस्तार देते हुए 65 साल तक उनकी सेवा लेंगे। मंत्री ने कहा कि सेवा विस्तार के लिए पांच साल की परफारेंस चेक की जाएगी। बेहतर परिणाम वाले शिक्षकों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
बुधवार, 4 सितंबर 2024
सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों वाला जनजातीय गांव
भोपाल। मालवा अंचल का एक गांव है पड़ियाल, जिसकी जनसंख्या 5 हजार 500 है। इस गांव से 100 से अधिक अधिकारी है, जो देश-प्रदेश सहित आसपास के राज्यों में सेवारत है। इस गांव के हर घर में औसत एक शासकीय कर्मचारी भी हैं, जिनकी संख्या 300 है। यहां के युवकों में प्रतियोगी परीक्षाओं में आने की होड़ आजादी के समय से ही शुरू हो गई थी। इतना ही नहीं आजादी के बाद हुए विधानसभा चुनाव में यहां के बापू सिंह अलावा कुक्षी विधानसभा के पहले विधायक रहे।
यह गाँव धार जिले के डही विकासखंड के अंतर्गत आता है। जहां साक्षरता दर 90 प्रतिशत है। अधिकारियों के गांव के नाम से मशहूर पड़ियाल में लोग सिर्फ अफसर बनने का सपना देखते हैं। साथ ही यहाँ के युवा अमेरिका और मलेशिया जैसे देशों में कोई इंजीनियर है तो कोई बिजनेस कर रहा है। गाँव में हायर सेकेंडरी स्कूल है, जिसमें 23 शिक्षकों द्वारा 702 विद्यार्थियों को पढ़ाया-लिखाया जाता है।
गांव का सामाजिक ताना-बाना शिक्षा पर है केंद्रित
इस क्षेत्र में लंबे समय से बीआरसी के पद पर कार्य कर रहे मनोज दुबे ने शिक्षा की बेहतरी के लिए कई कार्य किए हैं। नतीजतन यहां शिक्षा की दर काफी ऊंची है। उन्होंने बताया कि गांव के 12 अधिकारी सेवानिवृत्त होकर जन-सेवा के कार्य कर रहे है। वर्तमान में अध्ययन कर रहे युवा बड़ों से प्रेरणा पाकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे है। गांव का सामाजिक ताना-बुना शिक्षा पर केन्द्रित रहता है। बीआरसी दुबे के मुताबिक पड़ियाल में कक्षा 6 से 12 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल में स्मार्ट क्लासेस शुरु की गई है। इस साल नीट में यहां के 4 विद्यार्थी जबकि जेईई मेंस में 3 विद्यार्थी चयनित होकर डॉक्टर और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे है।
इनसे जाना जाता है गांव
एसपी सिंह (डीआईजी), लक्ष्मण सिंह सोलंकी (एडिशनल एसपी), नरेंद्र पाल सिंह (कार्यपालन यंत्री), एमपी सिंह (एसी पीडब्ल्यूडी), डीएस रणदा (अपर संचालक ग्रामीण विकास), नवल सिंह डोडवा (एसडीओ पीडब्ल्यूडी), बीएस चौहान (डीपीओ गृह विभाग), अर्जुन सिंह जमरा (एसडीओ पीडब्ल्यूडी), महेंद्र सिंह अलावा (महाप्रबंधक एयरपोर्ट नई दिल्ली), पर्वत सिंह अलावा (आईईएस रेलवे), महेंद्र पाल अलावा (आईईएस वायरलेस एंड लोकल लूप, मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर सुमेर सिंह अलावा, डॉक्टर के.सी. राणे, डॉक्टर केवल सिंह जमरा, लोकेन्द्र अलावा (एसडीओ आरईएस), करण रणदा (एसीएफ), सुखलाल अलावा (परियोजना अधिकारी जिला पंचायत), सुरेंद्र अलावा (प्रबंधक हेल्थ विभाग), मनीष अलावा (प्रबंधक उद्योग), मुकेश नंदा (एईओ आबकारी), विजेंद्र सिंह मुझाल्दा (प्लाटून कमांडर) सहित अन्य उच्च पदों पर अधिकारी बन देश-प्रदेश में सेवाएं दे रहे है।
गांव की बेटियों ने भी किया नाम रोशन
इस गाँव की बेटियाँ भी किसी से कम नहीं है। यहाँ से पढ़-लिख कर अनेक बेटियों ने गाँव का नाम रोशन किया है। इसमें बबीता बामनिया (डीएसपी), कौशल्या चौहान (टीआई), शकुंतला बामनिया (टीआई), प्रियंका अलावा (थानेदार), रिंकी बामनिया (वाणिज्यिकर अधिकारी), शीतल अलावा (एई एमपीईबी), प्रिया रणदा (एईओ आबकारी), सुनयना डामोर (सिविल जज), गरिमा अलावा (उप निरीक्षक आबकारी), किरण जमरा (नायब तहसीलदार), सुचित्रा रणदा (कराधान अधिकारी), मीना अलावा (सहायक आयुक्त), डॉ. निधि सिंह (एमएस), डॉ. वस्ती रणदा (एमडी), डॉ. निलमणी अलावा (एमएस), डॉ. रिंकू रणदा (एमडी), डॉ. रश्मि रणदा (एमडी), डॉ. अंजना अलावा (प्रोफेसर), डॉ. अनुभूति अलावा (बीडीएस), डॉ. नेहा अलावा (एमएस), डॉ. शर्मिला जमरा (एमडी), संतोषी अलावा (प्रोफेसर), बसंती अलावा (प्रोफेसर) सहित अन्य बेटियाँ उच्च पदों पर पदस्थ है।
रविवार, 1 सितंबर 2024
मुस्लिम महिलाएं मस्जिदों में पढ़ सकेंगी नमाज
ईदगाह की मस्जिद से हुई इसकी शुरूआत
मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में जाकर नमाज अदा करने के लिए राजधानी की ईदगाह की नजमुल मस्जिद में तमाम खास इंतजाम किए गए। बीते शुक्रवार 30 अगस्त को महिलाओं ने मस्जिद में नमाज अदा की। इसे लेकर ऑल इंडिया वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाहिस्ता अंबर ने कहा है, भोपाल में महिलाओं की नमाज अदायगी पूरे हिंदुस्तान के लिए पैगाम है। इसके बाद आम नमाजों में भी इसकी शुरुआत की जाएगी। आने वाले शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज शहर की महिलाओं के लिए खास होगी। मस्जिद की प्रबंधन कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां नमाज पढ़ने आने वाली महिलाओं के लिए पर्दे के साथ अलग फ्लोर पर इंतजाम किए गए हैं। महिलाओं के वुजू और वॉशरूम का भी अलग से इंतजाम किया गया है। मस्जिद नजमुल में जुमे की नमाज का खुतबा दोपहर एक बजे शुरू होता है। यहां आने वाली महिलाएं एक अलग फ्लोर पर खुतबा भी सुन पाएंगी। साथ ही इमाम द्वारा पढ़ाई जाने वाली नमाज में जमात के साथ शामिल हो सकेंगी।
नवाबों के शासन में महिलाएं मस्जिद में पढ़ती थी नमाज
भोपाल की रियासत अक्सर बेगमों के हाथ में रही है। उस जमाने में महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की पूरी इजाजत थी। बकायदा मस्जिद में नमाज के लिए उनको अलग से सुविधाएं मुहैया कराई जाती थी। भोपाल की कुलसुम बिया, मस्जिद मांजी साहिबा, मस्जिद नन्हीं बिया जैसी कई मस्जिदें महिलाओं के ही नाम पर हैं। जब तक बेगमों का शासन रहा तब तक महिलाओं का मर्दों की तरह मस्जिदों में नमाज अदा करना आम बात थी। हालांकि, भोपाल में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में महिलाओं के नमाज पढ़ने की अलग से व्यवस्था है।
बेगमों का दौर खत्म हुआ तो महिलाओं सीमित कर दिए दायरे
भोपाल में साल 1930 में नवाब सुल्तान जहां बेगम का जब निधन हुआ, उसके बाद ही समाज में कायम रिवाजों में बदलाव आने शुरू हुए। साल 1950 आते-आते महिलाओं ने मस्जिदों में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। हालांकि, यह किसी फतवे या मर्दों के द्वारा चलाई गई मुहिम के कारण नहीं हुआ था, बल्कि बेगमों का दौर खत्म होते ही महिलाओं ने अपने दायरे सीमित कर लिए थे।
सनातन संस्कृति को निरंतर कायम रखा हमारे संतों ने
- मुख्यमंत्री ने जैन आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज से लिया आशीर्वाद
मुख्यमंत्री डा मोहन यादव आज राजस्थान के झालरापाटन में जैन मुनि श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के 52 वें जन्म दिवस और 36 वें चातुर्मास कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों का आर्शीवाद पूंजी की तरह है। हमारे देश में संतों और धर्माचार्यों का स्थान सर्वोच्च है। सम्पूर्ण समाज संतों से मार्गदर्शन प्राप्त करता है। हमारे संतों ने सनातन संस्कृति को निरंतर कायम रखा है। किसी मनुष्य ने स्वर्ग नहीं देखा लेकिन संतों का सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना जीवन को धन्य करने और स्वर्गिक आनंद की अनुभूति प्राप्त करने जैसा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि काल के प्रवाह में यूनान,रोम और कई देशों का अस्तित्व और सभ्यता खत्म हो गई क्योंकि उन देशों में संत परंपरा नहीं थी।
मेरी जन्म वर्षगांठ पर निरंतर तीन वर्ष आकर हैट्रिक बनाई
जैन मुनि प्रज्ञा सागर जी महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश की उन्नति के लिए समर्पित और ऊर्जावान मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. यादव ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद भी दिया। आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेरे 50 वें और 51 वें जन्मदिवस पर उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में पधारे थे। आज वे मुख्यमंत्री के रूप में आए हैं। निश्चित ही उनका यह भाव प्रभावित करता है। उन्होंने मेरी जन्म वर्षगांठ के अवसर पर निरंतर तीन वर्ष आकर हैट्रिक बनाई है। इस चातुर्मास कार्यक्रम और महोत्सव को उन्होंने बहुमुखी बना दिया है।
अच्छे काम मनुष्य को बना देता है देव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रोटरी क्लब उज्जैन द्वारा संचालित इंटरसिटी साक्षरता कार्यक्रम के प्रतिनिधियों को आज वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कई जन्मों के पुण्य के बाद मनुष्य का जन्म प्राप्त होता है। इसके साथ ही सेवा का अवसर भी मिलता है। अपने सद्कर्मों से मानव बना जा सकता है। अच्छे कार्य मनुष्य को देव बना देते हैं। देव या देवता वही होता है जो देने का भाव रखे। मुख्यमंत्री ने रोटरी क्लब के सदस्यों को उज्जैन में रक्तदान जैसे पुण्य कार्य के लिए अधोसंरचना तैयार करने और रतलाम में रोगियों के लिए डायलेसिस की सुविधा प्रारंभ करने की प्रशंसा की।
सोमवार, 12 अगस्त 2024
होम-स्टे करना है, तो पर्यटन ग्राम सावरवानी जरूर आइये
म.प्र. टूरिज्म बोर्ड ने इस गाँव के होम-स्टे को मॉडल के रूप में विकसित किया है। होम-स्टे करने वाले पर्यटक यहाँ दी जा रही बेहतरीन सुविधाओं की तारीफ करते नहीं थकते। हाल ही में तेलंगाना और छत्तीसगढ़ राज्य के “होम-स्टे सुविधा प्रदाता” सावरवानी में दी जा रही सुविधाओं की केस स्टडी करने आये थे। बीते दिनों छिन्दवाड़ा जिले के धूसावानी के होम-स्टे संचालक तीन दिन के प्रशिक्षण पर सावरवानी आये। सहयोगी संस्था सतपुड़ा सेल्फ रिलायंट फॉर्मर के साथ रिस्पांसिबल ग्राम अंचल पर्यटन जागरूकता समिति धूसावानी के सदस्यों ने सावरवानी की होम-स्टे एक्टिविटी देखी और यहां रुके पर्यटकों से रीयल टाईम फीडबैक लिया। खरगौन, छतरपुर, बालाघाट, बैतूल, नर्मदापुरम व अन्य जिलों से कई एक्सपोज़र ग्रुप्स भी सावरवानी का विजिट करके जा चुके हैं। वे यहाँ होम स्टेयर्स (पर्यटकों) को दिए जा रहे घरेलू भोजन, सुविधाओं और अन्य मनोरंजन गतिविधियों को देखकर आश्चर्य चकित हो गये। इन एक्सपोजर ग्रुप्स ने तय किया कि वे अपने गांव के होम-स्टे को भी सावरवानी मॉडल जैसा ही बनाएंगे, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और पर्यटक खुद को सुरक्षित भी महसूस करें।
होम-स्टे आकांक्षियों को सावरवानी मॉडल दिखाने में मध्यप्रदेश टूरिज्म डेवलपमेन्ट बोर्ड की 'रिस्पांसिबल टूरिज्म' अवधारणा सफल रही। जनजातीय बहुल इस पर्यटन ग्राम में इन दिनों विकास के कई काम चल रहे हैं। इन होम-स्टे में शुचिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटकों को यहाँ तक पहुँचने और रहने में कोई असुविधा न हो, इस पर खासी मेहनत की जा रही है। पर्यटकों को विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है ताकि वे ज्यादा दिन स्टे करें। आज कल सावरवानी के सारे होम-स्टे पर्यटकों से भरे रहते हैं।
यहाँ पर्यटकों के लिये नया क्या ?
यहां प्रकृति की सुरम्य वादियों के बीच होम-स्टे के लिये मिट्टी के घर (मड हाउस) बने हैं। पर्यटक मात्र तीन हजार रूपये रोजाना की दर से (2 वयस्क और एक अवयस्क बच्चे के साथ) यहाँ रह सकते हैं। दोनों वक्त का भोजन एवं चाय नि:शुल्क मुहैया कराई जाती है। रात में गांव के लोकल ट्राईबल ग्रुप द्वारा शैला लोकनृत्य से पर्यटकों का मनोरंजन किया जाता है। गांव में सतधारा झरना भी है। पास के अनहोनी गांव में गर्म पानी के कुण्ड का विजिट भी पर्यटकों के लिये प्रमुख आकर्षण का विषय है। मान्यता है कि यहां के पानी को त्वचा में लगाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। गांव के निकट ही एक मौनी बाबा की पहाड़ी है। पर्यटकों को इस पर ट्रेंकिंग भी कराई जाती है। जनजातीय बालिकाएं पर्यटकों को गाईड करती हैं। सावरवानी में कुल 67 होम-स्टे बनने हैं। अब तक 7 प्रारंभ हो चुके हैं। मप्र टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड की 'महिलाओं के लिये सुरक्षित पर्यटन योजना' के तहत संचालित इन होम-स्टे को पर्यटकों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। सैकड़ों पर्यटकों से मिल रही सराहना से यहाँ के होम-स्टे संचालक बेहद उत्साहित हैं।






