राज्य के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन और विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंशसिंह के खिलाफ आदिवासी समाज ने मुहिम तेज कर दी है आदिवासी अपनी बात ङङ्गबिसेन समाज से माफी मांगे' पर अडा हुआ है आदिवासियों के सम्मान की लडाई की मुहिम गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने छेडी है इसे लेकर गोंगपा की सिवनी इकाई की सक्रियता तेज है
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन को पटवारी से मंच पर उठक-बैठक लगवाना महंगा पढता जा रहा है प्रशासनिक स्तर पर तो उन्होंने पटवारी से माफी मांग कर राजस्व कर्मचारियों की हडताल समाप्त करवा दी, मगर आदिवासी समाज की नाराजगी अब भी दूर नहीं हुई है आदिवासियों ने इस मामले में समाज से माफी मांगने की बात कही, जिस पर बिसेन मौन है इस मुद्दे को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने बिसेन के खिलाफ पहले दिन से ही विरोध शुरु कर दिया था गोंगपा का यह विरोध अब भी जारी है गोंगपा ने अब बिसेन के साथ-साथ मंच पर बैठे विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंशसिंह को भी आडे हाथ लेना शुरु कर दिया है गोंगपा द्वारा बीते दिनों केवलारी और कांजीबाडा में किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों ही नेताओं के पुतले जलाए गए गोंगपा की सिवनी जिला इकाई इस मामले को लेकर विधानसभा और सैक्टर स्तर पर विरोध प्रदर्शन की रणनीति बना चुकी है कांजीबाडा में हुए प्रदर्शन के बाद अब गोंगपा द्वारा सिवनी जिले के कलारी और धनौरा गप्रामों में बिसेन और हरवंशसिंह के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर उनके पुतले जलाने की बात कही जा रही है
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सिवनी जिला इकाई के पप्रवक्ता विवेक डेहरिया का कहना है कि आदिवासी समाज का जो अपमान मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने सार्वजनिक तौर पर किया है इसके लिए उन्हें समाज से माफी मांगना पडेगी श्री डेहरिया ने बताया कि कलारी और धनौरा में जो कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं, वहां पर पार्टी पदाधिकारी यह तय करेंगे की इसके बाद भी अगर बिसेन माफी नहीं मांगते हैं तो अगला कदम मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का विरोध करना होगा उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर धनौरा में सितम्बर माह में आयोजित कार्यक्रम के बाद पप्रदेश पदाधिकारी तय करेंगे कि मुख्यमंत्री को लेकर किस तरह का विरोध किया जाए फिलहाल हमारा महाकौशल के जिलों में गौरीशंकर बिसेन और हरवंशसिंह के विरोध में धरना, पप्रदर्शन कर दोनों ही नेताओं के पुतले जलाने का कार्यक्रम चल रहे हैं यह कार्यक्रम बिसेन द्वारा आदिवासी समाज से माफी न मांगने तक जारी रहेगा
रविवार, 28 अगस्त 2011
संगठन मजबूत करने में जुटी गोंगपा और बसपा
बहुजन समाज पार्टी और गोंणवाना गणतंत्र पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करना शुरु कर दिया है दोनों ही दलों ने अपनी सक्रियता विधानसभा क्षेत्रवार बढा दी है गोंगपा ने तो मध्यपप्रदेश का अध्यक्ष ही बदल दिया है नये अध्यक्ष की कमान कमल मरावी को सौंपी गई है
भाजपा और कांगस दोनों दलों द्वारा अजा और अजजा वर्ग की आरक्षित सीटों के लिए बढाई सक्रियता को देखते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ने ही अपनी सक्रियता बढा दी है विशेषकर आदिवासियों का नेतृत्व करने वाले दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कुछ ज्यादा ही सक्रियता बढाई है गोंगपा ने अपना पप्रदेश अध्यक्ष बदल नये अध्यक्ष के रुप में मण्डला जिले के कमल मरावी को पप्रदेश की कमान सौंपी है मरावी को कमान सौंपने के बाद गोंगपा के संगठन में और भी बदलाव की बात कही जा रही है गोंगपा इस बार ० के विधानसभा चुनाव के पूर्व जिला इकाई तक में बदलाव कर देगी गोंगपा द्वारा इन दिनों महाकौशल अंचल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है बताया जाता है कि मरावी को पप्रदेश की कमान सौंपकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उन्हें सक्रिय होने की बात कही है सूत्रों की माने तो मरावी को कमान सौंपने के पीछे गोंगपा का मकसद महाकौशल अंचल की आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों पर अपना दबदबा एक बार फिर बनाना है
गोंगपा की तर्ज पर राज्य में बहुजन समाज पार्टी भी अपनी ताकत बढाना चाहती है बसपा ने फिलहाल तो राज्य में विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर उन्हें बूथ स्तर तक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही है साथ ही पार्टी की सदस्यता बढाने की भी बात कही गई है बसपा द्वारा अब अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ आदिवासी और अन्य जाति के लोगों को जोडने के लिए भी सक्रियता बढाई जाएगी बताया जाता है कि जल्द ही बसपा द्वारा पप्रदेश स्तर पर अन्य वर्ग के लोगों से अलग-अलग स्तर पर चर्चा की जाएगी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा इस दिशा में जल्द ही कदम उठाए जाएंगे बसपा ने पप्रदेश में एक बार फिर सर्वसमाज का नारा बुलंद करने की मंशा जताई है
भाजपा और कांगस दोनों दलों द्वारा अजा और अजजा वर्ग की आरक्षित सीटों के लिए बढाई सक्रियता को देखते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ने ही अपनी सक्रियता बढा दी है विशेषकर आदिवासियों का नेतृत्व करने वाले दल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कुछ ज्यादा ही सक्रियता बढाई है गोंगपा ने अपना पप्रदेश अध्यक्ष बदल नये अध्यक्ष के रुप में मण्डला जिले के कमल मरावी को पप्रदेश की कमान सौंपी है मरावी को कमान सौंपने के बाद गोंगपा के संगठन में और भी बदलाव की बात कही जा रही है गोंगपा इस बार ० के विधानसभा चुनाव के पूर्व जिला इकाई तक में बदलाव कर देगी गोंगपा द्वारा इन दिनों महाकौशल अंचल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है बताया जाता है कि मरावी को पप्रदेश की कमान सौंपकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उन्हें सक्रिय होने की बात कही है सूत्रों की माने तो मरावी को कमान सौंपने के पीछे गोंगपा का मकसद महाकौशल अंचल की आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों पर अपना दबदबा एक बार फिर बनाना है
गोंगपा की तर्ज पर राज्य में बहुजन समाज पार्टी भी अपनी ताकत बढाना चाहती है बसपा ने फिलहाल तो राज्य में विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर उन्हें बूथ स्तर तक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही है साथ ही पार्टी की सदस्यता बढाने की भी बात कही गई है बसपा द्वारा अब अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ आदिवासी और अन्य जाति के लोगों को जोडने के लिए भी सक्रियता बढाई जाएगी बताया जाता है कि जल्द ही बसपा द्वारा पप्रदेश स्तर पर अन्य वर्ग के लोगों से अलग-अलग स्तर पर चर्चा की जाएगी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा इस दिशा में जल्द ही कदम उठाए जाएंगे बसपा ने पप्रदेश में एक बार फिर सर्वसमाज का नारा बुलंद करने की मंशा जताई है
गुरुवार, 18 अगस्त 2011
पृथक गोंडवाना को लेकर मतभेद
मध्यप्रदेश को विभाजित कर छत्तीसगढ अलग राज्य बनाने के बाद शुरु हुई महाकौशल को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर महाकौशल के नेताओं में ही मतभेद उभरता नजर आ रहा है गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से महाकौशल के जिलों को लेकर पृथक गोंडवाना राज्य बनाने के लिए सक्रिय हैं वहीं अब इंडियन जस्टिस पार्टी के पप्रदेश अध्यक्ष और उसी अंचल के नेता ने पृथक महाकौशल राज्य बनाने की बात कहकर जनजागरण अभियान चलाने की बात कही है यह अभियान छिंदवाडा जिले से सितम्बर माह की २० तारीख के बाद शुरु होगा
राज्य में महाकौशल को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर उसी अंचल के राजनेता अब अलग-अलग बात कहते नजर आ रहे हैं महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड के २४ जिलों को शामिल कर पृथक गोंडवाना राज्य की मांग को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूर्व से ही सक्रिय है इस पार्टी से जुडे नेता इस मुद्दे को लेकर आंदोलन और पप्रदर्शन तक कर चुके हैं, उनकी सक्रियता अब भी जारी है वहीं कुछ माह पूर्व इसी अंचल के एक नेता सतीश नाग, जिन्हें इंडियन जस्टिस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है
वे इस मामले में पृथक महाकौशल की मांग करना चाहते हैं श्री नाग का कहना है कि वे जबलपुर, शहडोल और नर्मदापुरम संभाग के ११ जिलों को मिलाकर पृथक महाकौशल बनाना चाहते हैं, जिसकी राजधानी जबलपुर होगी इसके लिए उन्होंने सितम्बर माह से छिंदवाडा से पदयात्रा शुरु करने की बात कही यह पदयात्रा २० सितम्बर के बाद शुरु होगी और समापन जबलपुर में होगा नाग के अनुसार वे छिंदवाडा, सिवनी, बालाघाट, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, डिण्डोरी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर और नर्मदापुरम संभाग के बैतूल जिले को शामिल कर महाकौशल राज्य बनाना चाहते हैं इसके लिए वे जनजागरण अभियान चलाएंगे इस अभियान के तहत पर्चे वितरित कर पृथक महाकौशल बनने से लोगों को क्या फायदा होगा, इसकी जानकारी देंगे वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जबलपुर, शहडोल, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के २४ जिलों को मिलाकर पृथक गोंडवाना राज्य बनाना चाहती है गोंगपा भी इस राज्य की राजधानी जबलपुर ही बनाना चाहती है
मध्यपप्रदेश का एक और विभाजन होगा या नही ,यह तो बात का मुद्दा है, मगर फिलहाल इस मुद्दे को लेकर महाकौशल के आदिवासी और अनुसूचित जाति जनाजति के नेता एक नजर नहीं आ रहे हैं दोनों ही दल अपने-अपने तरीके से अपनी मांग को लेकर सक्रिय हैं और दोनों के विचारों में मतभेद भी साफ दिखाई दे रहे हैं दोनों ही दलों के नेता जिलों के मुद्दे पर एक नजर नहीं आ रहे हैं
राज्य में महाकौशल को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर उसी अंचल के राजनेता अब अलग-अलग बात कहते नजर आ रहे हैं महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड के २४ जिलों को शामिल कर पृथक गोंडवाना राज्य की मांग को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूर्व से ही सक्रिय है इस पार्टी से जुडे नेता इस मुद्दे को लेकर आंदोलन और पप्रदर्शन तक कर चुके हैं, उनकी सक्रियता अब भी जारी है वहीं कुछ माह पूर्व इसी अंचल के एक नेता सतीश नाग, जिन्हें इंडियन जस्टिस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है
वे इस मामले में पृथक महाकौशल की मांग करना चाहते हैं श्री नाग का कहना है कि वे जबलपुर, शहडोल और नर्मदापुरम संभाग के ११ जिलों को मिलाकर पृथक महाकौशल बनाना चाहते हैं, जिसकी राजधानी जबलपुर होगी इसके लिए उन्होंने सितम्बर माह से छिंदवाडा से पदयात्रा शुरु करने की बात कही यह पदयात्रा २० सितम्बर के बाद शुरु होगी और समापन जबलपुर में होगा नाग के अनुसार वे छिंदवाडा, सिवनी, बालाघाट, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, डिण्डोरी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर और नर्मदापुरम संभाग के बैतूल जिले को शामिल कर महाकौशल राज्य बनाना चाहते हैं इसके लिए वे जनजागरण अभियान चलाएंगे इस अभियान के तहत पर्चे वितरित कर पृथक महाकौशल बनने से लोगों को क्या फायदा होगा, इसकी जानकारी देंगे वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जबलपुर, शहडोल, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के २४ जिलों को मिलाकर पृथक गोंडवाना राज्य बनाना चाहती है गोंगपा भी इस राज्य की राजधानी जबलपुर ही बनाना चाहती है
मध्यपप्रदेश का एक और विभाजन होगा या नही ,यह तो बात का मुद्दा है, मगर फिलहाल इस मुद्दे को लेकर महाकौशल के आदिवासी और अनुसूचित जाति जनाजति के नेता एक नजर नहीं आ रहे हैं दोनों ही दल अपने-अपने तरीके से अपनी मांग को लेकर सक्रिय हैं और दोनों के विचारों में मतभेद भी साफ दिखाई दे रहे हैं दोनों ही दलों के नेता जिलों के मुद्दे पर एक नजर नहीं आ रहे हैं
जारी है जिलाध्यक्षों पर टकराव
प्रदेश काग्रेस के शेष २९ जिलों के जिला अध्यक्षों पर टकराव जारी है. टकराव और वरिष्ठ नेताओं के बीच सहमति न बन पाने की वजह से अब मामला एक माह के लिए टलता नजर आने लगा है. कहीं पर पूर्व पप्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी के तो कहीं पर वर्तमान पप्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया के समर्थकों के बीच किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है. कहीं कमलनाथ और कहीं पर ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक भूरिया द्वारा तय किए नाम पर सहमत नजर नहीं आ रहे हैं.
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में शेष रहे जिला अध्यक्षों के नाम पर टकराव जारी है. इस टकराव के चलते अब एक बार फिर शेष अध्यक्षों की घोषणा को लेकर एक माह का विलंब होने की बात सामने आ रही है. मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेन्द्र बुढानिया भी आपस में उलझ चुके हैं. बताया जाता है कि बुढानिया इस बात पर अड गए हैं कि उनके द्वारा तैयार की गई सूची के अनुसार ही जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की जाए, मगर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष इस मामले में उनकी बात से सहमत नहीं हैं. वे अब अपने हिसाब से जिला अध्यक्षों की घोषणा करना चाहते हैं. बताया जाता है कि श्री बुढानिया इस बात से खफा हैं कि पूर्व में घोषित किए गए जिला अध्यक्षों में उनके द्वारा तय किए गए कई नाम काट दिए गए थे. इस बात से बुढानिया के अलावा पूर्व पप्रदेश कांगप्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी भी खफा थे, मगर वे कुछ कह नहीं पाए. अब जबकि मामले को लेकर कई स्थानों पर विवाद की स्थिति बनती जा रही है, तो बुढानिया ने फिर से पप्रदेश कांगप्रेस अध्यक्ष श्री भूरिया को शेष जिला अध्यक्षों के लिए पूर्व में तय नामों की घोषणा करने को कहा, मगर भूरिया इस पर तैयार नहीं हैं. विवाद की स्थिति अब चार महानगरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के अलावा उज्जैन, कटनी, रीवा सहित अन्य आधा दर्जन जिलों में भी बनती दिख रही है. यहां पर कहीं कमलनाथ समर्थक, तो कहीं पर सिंधिया समर्थक और कहीं पर भूरिया समर्थक अपना जिला अध्यक्ष चाहते हैं. इस कारण मामला कुछ ज्यादा ही उलझ गया है. अब माना यह जा रहा है कि कांगप्रेस शेष जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा एक माह के लिए लटक सकती है. कहा यह भी जा रहा है कि कांगप्रेस की कांगप्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के अमेरिका से वापस लौटने के बाद ही इस मामले पर पप्रदेश कांगप्रेस सक्रियता दिखाएगी.
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में शेष रहे जिला अध्यक्षों के नाम पर टकराव जारी है. इस टकराव के चलते अब एक बार फिर शेष अध्यक्षों की घोषणा को लेकर एक माह का विलंब होने की बात सामने आ रही है. मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेन्द्र बुढानिया भी आपस में उलझ चुके हैं. बताया जाता है कि बुढानिया इस बात पर अड गए हैं कि उनके द्वारा तैयार की गई सूची के अनुसार ही जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की जाए, मगर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष इस मामले में उनकी बात से सहमत नहीं हैं. वे अब अपने हिसाब से जिला अध्यक्षों की घोषणा करना चाहते हैं. बताया जाता है कि श्री बुढानिया इस बात से खफा हैं कि पूर्व में घोषित किए गए जिला अध्यक्षों में उनके द्वारा तय किए गए कई नाम काट दिए गए थे. इस बात से बुढानिया के अलावा पूर्व पप्रदेश कांगप्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी भी खफा थे, मगर वे कुछ कह नहीं पाए. अब जबकि मामले को लेकर कई स्थानों पर विवाद की स्थिति बनती जा रही है, तो बुढानिया ने फिर से पप्रदेश कांगप्रेस अध्यक्ष श्री भूरिया को शेष जिला अध्यक्षों के लिए पूर्व में तय नामों की घोषणा करने को कहा, मगर भूरिया इस पर तैयार नहीं हैं. विवाद की स्थिति अब चार महानगरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के अलावा उज्जैन, कटनी, रीवा सहित अन्य आधा दर्जन जिलों में भी बनती दिख रही है. यहां पर कहीं कमलनाथ समर्थक, तो कहीं पर सिंधिया समर्थक और कहीं पर भूरिया समर्थक अपना जिला अध्यक्ष चाहते हैं. इस कारण मामला कुछ ज्यादा ही उलझ गया है. अब माना यह जा रहा है कि कांगप्रेस शेष जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा एक माह के लिए लटक सकती है. कहा यह भी जा रहा है कि कांगप्रेस की कांगप्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के अमेरिका से वापस लौटने के बाद ही इस मामले पर पप्रदेश कांगप्रेस सक्रियता दिखाएगी.
शुक्रवार, 12 अगस्त 2011
गवाहों पर कांग्रेस की आपत्ति
बैतूल-हरदा की सांसद ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र के मामले में सांसद द्वारा अदालत को सौंपी गई गवाहों की सूची पर कांग्रेस ने आपत्ति लगा दी है. इस मामले में अब अगली सुनवाई २८ अगस्त को होनी है. कांग्रेस की ओर से चार और सांसद की ओर से २१ गवाहों की सूची अदालत को दी गई है.
बैतूल-हरदा की सांसद ज्योति धुर्वे के निर्वाचित होने के बाद ही बैतूल के कांग्रेस नेताओं ने उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए मामला अदालत तक पहुंचा दिया था. इस मामले में अब गवाहों की सुनवाई होनी है. गवाहों की सुनवाई के लिए न्यायालय द्वारा कांग्रेस और भाजपा दोनों से गवाहों की सूची मांगी गई थी. कांग्रेस की ओर से चार गवाहों की सूची दी गई है, वहीं सांसद ज्योति धुर्वे द्वारा इस मामले में अपने पक्ष के २१ गवाहों की सूची अदालत को सौंपी गई है. सांसद द्वारा अदालत को सौंपी गई सूची में जो नाम दिए गए हैं उस पर कांग्रेस द्वारा यह कहकर आपत्ती लगाई गई है कि सांसद ने लंबी सूची इसलिए सौंपी है ताकि वे पांच साल का समय पूरा कर लें और मामला लंबा खीच जाए, मगर कांग्रेस इस मामले में जल्द फैसला चाहती है. बताया जाता है कि कांग्रेस ने अदालत को जो सूची सौंपी है उसमें जो चार नाम दिए हैं उनकी गवाही के बाद इस मामलो को जल्द खत्म किया जाए. बैतूल के कांग्रेस नेता तरूण मंडल ने बताया कि इस मामले में कांग्रेस अब जल्द ही फैसला चाहती है, ताकि मामला पर अदालत का फैसला जल्द आ सके. उन्होंने बताया कि इस मामले में अगली सुनवाई २८ अगस्त को होनी है, इस सुनवाई में संभवतः न्यायालय द्वारा गवाहों की गवाही पर फैसला हो जाएगा. संभावना यह है कि अगर गवाह कम हुए तो इस वर्ष के अंत तक या फिर अगले वर्ष के प्रारंभ में इस मामले का फैसला हो सकता है.
यहां उल्लेखनीय है कि बैतूल-हरदा की सांसद ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र पर उनके भाजपा के उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही बैतूल जिले के कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में शिकायत दर्ज की थी. कांग्रेस का कहना है कि ज्योति धुर्वे के पिता महादेव आत्मज दशरथ जो की रेलवे में पदस्थ थे, पिछडे वर्ग से आते हैं. कांग्रेस ने ज्योति धुर्वे के शैक्षणिक दस्तावेज भी छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल महाविालय से निकाले हैं जो अदालत में बतौर साक्ष्य के पेश किए हैं.कांग्रेस का कहना है कि ज्योति धुर्वे के पिता महादेव बालाघाट जिले की कटंगी तहसील के पुरानी तिरोडी गांव के निवासी हैं. कांग्रेस का आरोप है कि ज्योति धुर्वे की शादी भले ही आदिवासी वर्ग के युवक से हुई हो, लेकिन वे जन्मी पिछडे वर्ग के महादेव के यहां है. इस पूरी शिकायत पर जांच के बाद मामला न्यायालय पहुंचा था. जिसमें अब गवाही की स्थिति बनने पर मामले में एक बार फिर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्योति धुर्वे को घेरने का काम किया है. कांग्रेस द्वारा लगाई गई आपत्ति के बाद भाजपा खेमा विशेषकर सांसद के निकट के लोगों को चिंता होने लगी है.
बैतूल-हरदा की सांसद ज्योति धुर्वे के निर्वाचित होने के बाद ही बैतूल के कांग्रेस नेताओं ने उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए मामला अदालत तक पहुंचा दिया था. इस मामले में अब गवाहों की सुनवाई होनी है. गवाहों की सुनवाई के लिए न्यायालय द्वारा कांग्रेस और भाजपा दोनों से गवाहों की सूची मांगी गई थी. कांग्रेस की ओर से चार गवाहों की सूची दी गई है, वहीं सांसद ज्योति धुर्वे द्वारा इस मामले में अपने पक्ष के २१ गवाहों की सूची अदालत को सौंपी गई है. सांसद द्वारा अदालत को सौंपी गई सूची में जो नाम दिए गए हैं उस पर कांग्रेस द्वारा यह कहकर आपत्ती लगाई गई है कि सांसद ने लंबी सूची इसलिए सौंपी है ताकि वे पांच साल का समय पूरा कर लें और मामला लंबा खीच जाए, मगर कांग्रेस इस मामले में जल्द फैसला चाहती है. बताया जाता है कि कांग्रेस ने अदालत को जो सूची सौंपी है उसमें जो चार नाम दिए हैं उनकी गवाही के बाद इस मामलो को जल्द खत्म किया जाए. बैतूल के कांग्रेस नेता तरूण मंडल ने बताया कि इस मामले में कांग्रेस अब जल्द ही फैसला चाहती है, ताकि मामला पर अदालत का फैसला जल्द आ सके. उन्होंने बताया कि इस मामले में अगली सुनवाई २८ अगस्त को होनी है, इस सुनवाई में संभवतः न्यायालय द्वारा गवाहों की गवाही पर फैसला हो जाएगा. संभावना यह है कि अगर गवाह कम हुए तो इस वर्ष के अंत तक या फिर अगले वर्ष के प्रारंभ में इस मामले का फैसला हो सकता है.
यहां उल्लेखनीय है कि बैतूल-हरदा की सांसद ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र पर उनके भाजपा के उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही बैतूल जिले के कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में शिकायत दर्ज की थी. कांग्रेस का कहना है कि ज्योति धुर्वे के पिता महादेव आत्मज दशरथ जो की रेलवे में पदस्थ थे, पिछडे वर्ग से आते हैं. कांग्रेस ने ज्योति धुर्वे के शैक्षणिक दस्तावेज भी छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल महाविालय से निकाले हैं जो अदालत में बतौर साक्ष्य के पेश किए हैं.कांग्रेस का कहना है कि ज्योति धुर्वे के पिता महादेव बालाघाट जिले की कटंगी तहसील के पुरानी तिरोडी गांव के निवासी हैं. कांग्रेस का आरोप है कि ज्योति धुर्वे की शादी भले ही आदिवासी वर्ग के युवक से हुई हो, लेकिन वे जन्मी पिछडे वर्ग के महादेव के यहां है. इस पूरी शिकायत पर जांच के बाद मामला न्यायालय पहुंचा था. जिसमें अब गवाही की स्थिति बनने पर मामले में एक बार फिर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्योति धुर्वे को घेरने का काम किया है. कांग्रेस द्वारा लगाई गई आपत्ति के बाद भाजपा खेमा विशेषकर सांसद के निकट के लोगों को चिंता होने लगी है.
गुरुवार, 11 अगस्त 2011
आदिवासियों पर टिकी निगाहें
राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की नजरें आदिवासी वर्ग के मतदाता पर टिक गई हैं. कांग्रेस जहां आदिवासी मतदाता को फिर अपने पक्ष में लाने फिराक में है, वहीं भाजपा की इस वर्ग को अपने पाले में रखने की कोशिश पर मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने पानी फेरने का काम कर दिया है. भाजपा, कांग्रेस के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. वह इन दोनों दलों को आदिवासी विरोध बताकर आदिवासियों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है.
राज्य में वर्ष २०१३ में होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है. भारतीय जनता पार्टी जहां राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा दिए गए दस फीसदी मतदान बढाने के लक्ष्य को पाने के लिए आदिवासियों पर निगाह टिकाए हुए है, वहीं कांग्रेस भी इस वर्ग के मतदाता को एक बार फिर अपने पाले में लाने का पूरा प्रयास कर रही है. कांग्रेस के लिए राज्य के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन संजीवनी बन गए हैं. बिसेन द्वारा हाल ही में की गई टिप्पणी कांग्रेस के लिए मैदानी लडाई बन गई है. वह आदिवासी समाज के बीच इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गई है और इसे आदिवासियों का अपमान बताकर खुद को आदिवासियों का समर्थक बता रही है. दूसरी ओर भाजपा के लिए मंत्री की टिप्पणी और पटवारी के साथ किए गया व्यवहार मुसीबत बन पडा है. कांग्रेस के आरोप तो भाजपा को सहने ही पड रहे हैं, वहीं आदिवासी वर्ग के विधायक और नेता भी संगठन से खफा नजर आने लगे हैं.
भाजपा के लिए आदिवासी वर्ग की राज्य में विधानसभा की ४७ सीटें परेशानी का कारण बन सकती है. वर्ष २००३ में भाजपा ने अजजा की ४१ सीटों में से ३६ पर कब्जा जमाकर सत्ता का रास्ता चुना था. इसके बाद वर्ष २००८ में भाजपा के हाथ से कुछ सीटें कम जरूर हुई, मगर इस वर्ग का समर्थन पूरा मिला. २००८ के विधानसभा चुनाव में परिसीमन के बाद अजजा की ४७ सीटें हुई जिसमें से भाजपा को ३० सीटों पर विजय हासिल हुई थी. इसके बाद अब उसे इस वर्ग की सीटों को लेकर चिंता सताने लगी है.
भाजपा और कांग्रेस के अलावा आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. वर्ष २००३ में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जीते तीन विधायकों के बाद २००८ के विधानसभा चुनाव में उसका एक भी विधायक नहीं बन सका था. गोंगपा को अब फिर भाजपा और कांग्रेस की सक्रियता से चिंता होने लगी है. यही वजह है कि गोंगपा ने मंत्री बिसेन के मामले को गंभीरता से लिया है और वह दोनों ही दलों को इस मुद्दे पर घेरने का प्रयास कर रही है. यह अलग बात है कि उसे इस मुद्दे पर कितनी सफलता हासिल होती है, लेकिन फिलहाल गोंगपा की सक्रियता महाकौशल में साफ दिखाई दे रही है. गोंगपा इस बार आदिवासी वर्ग को रिझाने का पूरा प्रयास कर रही है.
राज्य में वर्ष २०१३ में होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है. भारतीय जनता पार्टी जहां राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा दिए गए दस फीसदी मतदान बढाने के लक्ष्य को पाने के लिए आदिवासियों पर निगाह टिकाए हुए है, वहीं कांग्रेस भी इस वर्ग के मतदाता को एक बार फिर अपने पाले में लाने का पूरा प्रयास कर रही है. कांग्रेस के लिए राज्य के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन संजीवनी बन गए हैं. बिसेन द्वारा हाल ही में की गई टिप्पणी कांग्रेस के लिए मैदानी लडाई बन गई है. वह आदिवासी समाज के बीच इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गई है और इसे आदिवासियों का अपमान बताकर खुद को आदिवासियों का समर्थक बता रही है. दूसरी ओर भाजपा के लिए मंत्री की टिप्पणी और पटवारी के साथ किए गया व्यवहार मुसीबत बन पडा है. कांग्रेस के आरोप तो भाजपा को सहने ही पड रहे हैं, वहीं आदिवासी वर्ग के विधायक और नेता भी संगठन से खफा नजर आने लगे हैं.
भाजपा के लिए आदिवासी वर्ग की राज्य में विधानसभा की ४७ सीटें परेशानी का कारण बन सकती है. वर्ष २००३ में भाजपा ने अजजा की ४१ सीटों में से ३६ पर कब्जा जमाकर सत्ता का रास्ता चुना था. इसके बाद वर्ष २००८ में भाजपा के हाथ से कुछ सीटें कम जरूर हुई, मगर इस वर्ग का समर्थन पूरा मिला. २००८ के विधानसभा चुनाव में परिसीमन के बाद अजजा की ४७ सीटें हुई जिसमें से भाजपा को ३० सीटों पर विजय हासिल हुई थी. इसके बाद अब उसे इस वर्ग की सीटों को लेकर चिंता सताने लगी है.
भाजपा और कांग्रेस के अलावा आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. वर्ष २००३ में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जीते तीन विधायकों के बाद २००८ के विधानसभा चुनाव में उसका एक भी विधायक नहीं बन सका था. गोंगपा को अब फिर भाजपा और कांग्रेस की सक्रियता से चिंता होने लगी है. यही वजह है कि गोंगपा ने मंत्री बिसेन के मामले को गंभीरता से लिया है और वह दोनों ही दलों को इस मुद्दे पर घेरने का प्रयास कर रही है. यह अलग बात है कि उसे इस मुद्दे पर कितनी सफलता हासिल होती है, लेकिन फिलहाल गोंगपा की सक्रियता महाकौशल में साफ दिखाई दे रही है. गोंगपा इस बार आदिवासी वर्ग को रिझाने का पूरा प्रयास कर रही है.
सोमवार, 8 अगस्त 2011
कम नहीं हो रही बिसेन की मुसीबत
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन के पक्ष में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पहल कर पटवारियों को मना लिया हो, मगर आदिवासियों का आक्रोश अब भी कम नहीं हुआ है. आदिवासी समाज इस मामले में बिसेन के अलावा अब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा और विधानसभा उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस के विधायक हरवंशसिंह से भी खफा हो गए हैं. वहीं कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सरकार से खफा है और आदिवासियों के सम्मान की लडाई लडने की तैयारी कर रही है.
पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मुद्दे पर सरकार ने पटवारियों की चल रही हडताल को तो जैसे-तैसे खत्म करा दिया. सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन को भी हडताल समाप्त होने के बाद राहत महसूस जरूर हुई, मगर उनके खिलाफ आदिवासी समाज और कांग्रेस दोनों की विरोध कम नहीं हो रहा है. आदिवासी समाज तो इस मुद्दे पर बिसेन से नाराज हैं, साथ ही अब उनकी नाराजगी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा और विधानसभा उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस विधायक हरवंशसिंह दिखाई दे रही है. आदिवासी समाज के लोगों का तर्क है कि सरकार ने पटवारी संघ से मंत्री द्वारा माफी मंगवाकर पटवारियों का विरोध तो खत्म करा दिया, मगर आदिवासी समाज का जो अपमान हुआ है उसके लिए बिसेन ने समाज से माफी नहीं मांगी है. इस मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा सिवनी जिले के केवलारी में कल मंगलवार को बिसेन और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा. गोंगपा की सिवनी जिला ईकाई के प्रवक्ता विवेक डेहरिया ने बताया कि मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान पार्टी और आदिवासी समाज के लोग बिसेन का पुतला फूंकेंगे. इसके अलावा इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री, भाजपा अध्यक्ष और विधानसभा में उपाध्यक्ष एवं केवलारी से कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह के खिलाफ भी प्रदर्शन किया जाएगा. श्री डेहरिया ने बताया कि इस मामले को लेकर आदिवासी समाज तब तक बिसेन और सरकार का विरोध करता रहेगा, जब तक की मंत्री द्वारा आदिवासी समाज के बीच पहुंचकर माफी नहीं मांगी जाएगी.
यहां उल्लेखनीय है कि आदिवासी समाज के अलावा इस मुद्दे पर कांग्रेस भी सक्रिय है और सरकार के खिलाफ आदिवासियों के बीच पहुंचकर उनके अपमान किए जाने की बात कहेगी. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस द्वारा आदिवासी सम्मेलन किये जाना तय किया गया है. ये सम्मेलन बालाघाट, सिवनी, छिंदवाडा, होशंगाबाद और सीहोर जिले में होना है. फिलहाल कांग्रेस के अलावा आदिवासी समाज इस मुद्दे पर बिसेन, भाजपा संगठन और सरकार दोनों से कुछ ज्यादा ही खफा हैं.
पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मुद्दे पर सरकार ने पटवारियों की चल रही हडताल को तो जैसे-तैसे खत्म करा दिया. सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन को भी हडताल समाप्त होने के बाद राहत महसूस जरूर हुई, मगर उनके खिलाफ आदिवासी समाज और कांग्रेस दोनों की विरोध कम नहीं हो रहा है. आदिवासी समाज तो इस मुद्दे पर बिसेन से नाराज हैं, साथ ही अब उनकी नाराजगी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा और विधानसभा उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस विधायक हरवंशसिंह दिखाई दे रही है. आदिवासी समाज के लोगों का तर्क है कि सरकार ने पटवारी संघ से मंत्री द्वारा माफी मंगवाकर पटवारियों का विरोध तो खत्म करा दिया, मगर आदिवासी समाज का जो अपमान हुआ है उसके लिए बिसेन ने समाज से माफी नहीं मांगी है. इस मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा सिवनी जिले के केवलारी में कल मंगलवार को बिसेन और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा. गोंगपा की सिवनी जिला ईकाई के प्रवक्ता विवेक डेहरिया ने बताया कि मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान पार्टी और आदिवासी समाज के लोग बिसेन का पुतला फूंकेंगे. इसके अलावा इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री, भाजपा अध्यक्ष और विधानसभा में उपाध्यक्ष एवं केवलारी से कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह के खिलाफ भी प्रदर्शन किया जाएगा. श्री डेहरिया ने बताया कि इस मामले को लेकर आदिवासी समाज तब तक बिसेन और सरकार का विरोध करता रहेगा, जब तक की मंत्री द्वारा आदिवासी समाज के बीच पहुंचकर माफी नहीं मांगी जाएगी.
यहां उल्लेखनीय है कि आदिवासी समाज के अलावा इस मुद्दे पर कांग्रेस भी सक्रिय है और सरकार के खिलाफ आदिवासियों के बीच पहुंचकर उनके अपमान किए जाने की बात कहेगी. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस द्वारा आदिवासी सम्मेलन किये जाना तय किया गया है. ये सम्मेलन बालाघाट, सिवनी, छिंदवाडा, होशंगाबाद और सीहोर जिले में होना है. फिलहाल कांग्रेस के अलावा आदिवासी समाज इस मुद्दे पर बिसेन, भाजपा संगठन और सरकार दोनों से कुछ ज्यादा ही खफा हैं.
रविवार, 7 अगस्त 2011
आहत हैं भाजपा के आदिवासी नेता और विधायक
भारतीय जनता पार्टी के आदिवासी नेता सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा आदिवासियों को लेकर की गई टिप्पणी और इसी समुदाय के पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मामले को लेकर आहत हैं. ये नेता अब इस मामले को पार्टी फोरम पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं. कुछ नेताओं ने तो इस मामले को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा तक पहुंचाकर अपनी बात भी कह दी है.
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा छिंदवाडा में आदिवासी समाज को इंगित करती हुई की टिप्पणी और सिवनी जिले के छिंदाचौकी गांव में पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मामले में अब भाजपा के आदिवासी नेता और विधायक सामने आने लगे हैं. उनकी नाराजगी बढती जा रही है. इसी सप्ताह ये नेता और विधायक इस मुद्दे को लेकर पार्टी फोरम पर उठाने का प्रयास कर रहे हैं. विधायकों ने इस मामले में इसी सप्ताह भोपाल में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने मिलकर आदिवासियों का पक्ष रखने का मन बना लिया है. एक विधायक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इस प्रकार अगर मंत्री किसी समाज को आहत करते हैं तो वे संविधान का उल्लघंन कर रहे हैं. हम जब आदिवासी क्षेत्र से चुनाव जीतकर पार्टी की सीट बढाते हैं तो हमें इन्हीं आदिवासियों की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि वे इस मामले को पहले प्रदेश पार्टी फोरम और बाद में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के सामने भी ले जाएंगे.
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष फग्गनसिंह कुलस्ते ने तो इस मामले को लेकर सिंगरौली में हुई प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में भी उठाया और कहा कि मंत्री को अगर विशेष सुविधा मिली है तो वह किसी को अपमानित करने के लिए नहीं मिली है. उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से भी इस मामले में बिसेन के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की बात कही. श्री कुलस्ते ने इस मामले में लोकमत समाचार से चर्चा करते हुए कहा कि मंत्री द्वारा आदिवासियों के साथ जो व्यवहार किया गया वह उचित नहीं है. इस मामले में उन्होंने प्रदेश के नेताओं को यह बता दिया है कि हमें किसी समाज के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम किसी समाज का पहले अपमान करें और फिर उसी समाज से वोट की अपेक्षा करें तो यह कैसे हो सकता है. उन्होंने कहा कि हमारे मंत्री हमारी समाज के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे तो हम समाज के बीच किस मुंह से जाएंगे. समाज तो हमें बाहर का रास्ता दिखाएगा. उन्होंने कहा कि मंत्री भी पहले नागरिक है, उसके बाद उन्हें विशेष दर्जा मिला है इसका मतलब यह नहीं की मंत्री अपने इस दर्जें का दुरपयोग करे.
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा छिंदवाडा में आदिवासी समाज को इंगित करती हुई की टिप्पणी और सिवनी जिले के छिंदाचौकी गांव में पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मामले में अब भाजपा के आदिवासी नेता और विधायक सामने आने लगे हैं. उनकी नाराजगी बढती जा रही है. इसी सप्ताह ये नेता और विधायक इस मुद्दे को लेकर पार्टी फोरम पर उठाने का प्रयास कर रहे हैं. विधायकों ने इस मामले में इसी सप्ताह भोपाल में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने मिलकर आदिवासियों का पक्ष रखने का मन बना लिया है. एक विधायक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इस प्रकार अगर मंत्री किसी समाज को आहत करते हैं तो वे संविधान का उल्लघंन कर रहे हैं. हम जब आदिवासी क्षेत्र से चुनाव जीतकर पार्टी की सीट बढाते हैं तो हमें इन्हीं आदिवासियों की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि वे इस मामले को पहले प्रदेश पार्टी फोरम और बाद में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के सामने भी ले जाएंगे.
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष फग्गनसिंह कुलस्ते ने तो इस मामले को लेकर सिंगरौली में हुई प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में भी उठाया और कहा कि मंत्री को अगर विशेष सुविधा मिली है तो वह किसी को अपमानित करने के लिए नहीं मिली है. उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से भी इस मामले में बिसेन के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की बात कही. श्री कुलस्ते ने इस मामले में लोकमत समाचार से चर्चा करते हुए कहा कि मंत्री द्वारा आदिवासियों के साथ जो व्यवहार किया गया वह उचित नहीं है. इस मामले में उन्होंने प्रदेश के नेताओं को यह बता दिया है कि हमें किसी समाज के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम किसी समाज का पहले अपमान करें और फिर उसी समाज से वोट की अपेक्षा करें तो यह कैसे हो सकता है. उन्होंने कहा कि हमारे मंत्री हमारी समाज के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे तो हम समाज के बीच किस मुंह से जाएंगे. समाज तो हमें बाहर का रास्ता दिखाएगा. उन्होंने कहा कि मंत्री भी पहले नागरिक है, उसके बाद उन्हें विशेष दर्जा मिला है इसका मतलब यह नहीं की मंत्री अपने इस दर्जें का दुरपयोग करे.
ईसाई अल्पसंख्यक संचालित संस्थाओं में न हो हस्तक्षेप
मध्यप्रदेश कैथोलिक काउंसिल की राजधानी में हुई दो दिवसीय बैठक में आज ईसाई अल्पसंख्यक समाज द्वारा संचालित संस्थाओं में शासन के हो रहे हस्तक्षेप को रोकने की मांग की. इस बैठक में कई और प्रस्ताव पारित करते हुए अल्पसंख्यक आयोग में ईसाई समाज के सदस्य की नियुक्ति की मांग भी उठी.
मध्यप्रदेश कैथालिक काउंसिल की दो दिवासीय बैठक आज संपन्न हो गई. बैठक में मध्यप्रदेश काउंसिल के आर्चबिशप डॉ. लियो कार्नेलियो के नेतृत्व में प्रदेश के नौ बिशप, धार्मिक संस्थाओं के अध्यक्ष और पुरोहित उपस्थित थे. बैठक में इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से ईसाई समाज द्वारा प्रदेश में चल रही संस्थाओं में शासन के बढते हस्तक्षेप पर चिंता जताई और इस पर रोक लगाने के लिए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया. काउंसिल के प्रवक्ता फादर आनंद मुटूंगल ने बताया कि इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सामान्य लोगों को बांटने का जो कार्य किया जा रहा है उसका विरोध किया गया. उन्होंने बताया कि पहले विभाग द्वारा सूर्य नमस्कार, भोजन मंत्र, राष्ट्र ऋृषि, गीता सार और अब टाई बांधना या नहीं बांधना जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच असमंजस फैलाया जा रहा है. श्री मुटूंगल ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से एक प्रस्ताव यह भी पारित किया गया कि केन्द्र और मध्यप्रदेश शासन द्वारा अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए जो योजनाएं लागू हैं, उनमें ईसाई समाज के गरीब लोगों को भी शामिल किया जाए. शासन द्वारा छात्रवृत्ति, ऋृण योजनाएं स्वरोजगार योजनाओं जो चलाई जा रही है उकना फायदा ईसाई समाज को नहीं मिल रहा है. उन्होंने बताया कि बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा अल्पसंख्यक आयोग में ईसाई समाज के व्यक्ति को सदस्य मनोनित किया जाए. इस संबंध में शासन द्वारा अब तक केवल आश्वासन ही दिया गया है, लेकिन नियुक्ति नहीं की गई है. यहां उल्लेखनीय है कि काउंसिल की यह बैठक दो साल में एक बार होती है, इस बैठक में लिए प्रस्तावों के आधार पर अब काउंसिल के सदस्य ईसाई समाज में बैठक में लिए निर्णयों की जानकारी दी जाएगी.
मध्यप्रदेश कैथालिक काउंसिल की दो दिवासीय बैठक आज संपन्न हो गई. बैठक में मध्यप्रदेश काउंसिल के आर्चबिशप डॉ. लियो कार्नेलियो के नेतृत्व में प्रदेश के नौ बिशप, धार्मिक संस्थाओं के अध्यक्ष और पुरोहित उपस्थित थे. बैठक में इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से ईसाई समाज द्वारा प्रदेश में चल रही संस्थाओं में शासन के बढते हस्तक्षेप पर चिंता जताई और इस पर रोक लगाने के लिए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया. काउंसिल के प्रवक्ता फादर आनंद मुटूंगल ने बताया कि इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सामान्य लोगों को बांटने का जो कार्य किया जा रहा है उसका विरोध किया गया. उन्होंने बताया कि पहले विभाग द्वारा सूर्य नमस्कार, भोजन मंत्र, राष्ट्र ऋृषि, गीता सार और अब टाई बांधना या नहीं बांधना जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच असमंजस फैलाया जा रहा है. श्री मुटूंगल ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से एक प्रस्ताव यह भी पारित किया गया कि केन्द्र और मध्यप्रदेश शासन द्वारा अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए जो योजनाएं लागू हैं, उनमें ईसाई समाज के गरीब लोगों को भी शामिल किया जाए. शासन द्वारा छात्रवृत्ति, ऋृण योजनाएं स्वरोजगार योजनाओं जो चलाई जा रही है उकना फायदा ईसाई समाज को नहीं मिल रहा है. उन्होंने बताया कि बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा अल्पसंख्यक आयोग में ईसाई समाज के व्यक्ति को सदस्य मनोनित किया जाए. इस संबंध में शासन द्वारा अब तक केवल आश्वासन ही दिया गया है, लेकिन नियुक्ति नहीं की गई है. यहां उल्लेखनीय है कि काउंसिल की यह बैठक दो साल में एक बार होती है, इस बैठक में लिए प्रस्तावों के आधार पर अब काउंसिल के सदस्य ईसाई समाज में बैठक में लिए निर्णयों की जानकारी दी जाएगी.
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)