गुरुवार, 11 अगस्त 2011

आदिवासियों पर टिकी निगाहें

राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की नजरें आदिवासी वर्ग के मतदाता पर टिक गई हैं. कांग्रेस जहां आदिवासी मतदाता को फिर अपने पक्ष में लाने फिराक में है, वहीं भाजपा की इस वर्ग को अपने पाले में रखने की कोशिश पर मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने पानी फेरने का काम कर दिया है. भाजपा, कांग्रेस के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. वह इन दोनों दलों को आदिवासी विरोध बताकर आदिवासियों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है.
राज्य में वर्ष २०१३ में होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है. भारतीय जनता पार्टी जहां राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा दिए गए दस फीसदी मतदान बढाने के लक्ष्य को पाने के लिए आदिवासियों पर निगाह टिकाए हुए है, वहीं कांग्रेस भी इस वर्ग के मतदाता को एक बार फिर अपने पाले में लाने का पूरा प्रयास कर रही है. कांग्रेस के लिए राज्य के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन संजीवनी बन गए हैं. बिसेन द्वारा हाल ही में की गई टिप्पणी कांग्रेस के लिए मैदानी लडाई बन गई है. वह आदिवासी समाज के बीच इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गई है और इसे आदिवासियों का अपमान बताकर खुद को आदिवासियों का समर्थक बता रही है. दूसरी ओर भाजपा के लिए मंत्री की टिप्पणी और पटवारी के साथ किए गया व्यवहार मुसीबत बन पडा है. कांग्रेस के आरोप तो भाजपा को सहने ही पड रहे हैं, वहीं आदिवासी वर्ग के विधायक और नेता भी संगठन से खफा नजर आने लगे हैं.
भाजपा के लिए आदिवासी वर्ग की राज्य में विधानसभा की ४७ सीटें परेशानी का कारण बन सकती है. वर्ष २००३ में भाजपा ने अजजा की ४१ सीटों में से ३६ पर कब्जा जमाकर सत्ता का रास्ता चुना था. इसके बाद वर्ष २००८ में भाजपा के हाथ से कुछ सीटें कम जरूर हुई, मगर इस वर्ग का समर्थन पूरा मिला. २००८ के विधानसभा चुनाव में परिसीमन के बाद अजजा की ४७ सीटें हुई जिसमें से भाजपा को ३० सीटों पर विजय हासिल हुई थी. इसके बाद अब उसे इस वर्ग की सीटों को लेकर चिंता सताने लगी है.
भाजपा और कांग्रेस के अलावा आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. वर्ष २००३ में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जीते तीन विधायकों के बाद २००८ के विधानसभा चुनाव में उसका एक भी विधायक नहीं बन सका था. गोंगपा को अब फिर भाजपा और कांग्रेस की सक्रियता से चिंता होने लगी है. यही वजह है कि गोंगपा ने मंत्री बिसेन के मामले को गंभीरता से लिया है और वह दोनों ही दलों को इस मुद्दे पर घेरने का प्रयास कर रही है. यह अलग बात है कि उसे इस मुद्दे पर कितनी सफलता हासिल होती है, लेकिन फिलहाल गोंगपा की सक्रियता महाकौशल में साफ दिखाई दे रही है. गोंगपा इस बार आदिवासी वर्ग को रिझाने का पूरा प्रयास कर रही है.

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