मध्यप्रदेश को विभाजित कर छत्तीसगढ अलग राज्य बनाने के बाद शुरु हुई महाकौशल को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर महाकौशल के नेताओं में ही मतभेद उभरता नजर आ रहा है गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से महाकौशल के जिलों को लेकर पृथक गोंडवाना राज्य बनाने के लिए सक्रिय हैं वहीं अब इंडियन जस्टिस पार्टी के पप्रदेश अध्यक्ष और उसी अंचल के नेता ने पृथक महाकौशल राज्य बनाने की बात कहकर जनजागरण अभियान चलाने की बात कही है यह अभियान छिंदवाडा जिले से सितम्बर माह की २० तारीख के बाद शुरु होगा
राज्य में महाकौशल को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर उसी अंचल के राजनेता अब अलग-अलग बात कहते नजर आ रहे हैं महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड के २४ जिलों को शामिल कर पृथक गोंडवाना राज्य की मांग को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी पूर्व से ही सक्रिय है इस पार्टी से जुडे नेता इस मुद्दे को लेकर आंदोलन और पप्रदर्शन तक कर चुके हैं, उनकी सक्रियता अब भी जारी है वहीं कुछ माह पूर्व इसी अंचल के एक नेता सतीश नाग, जिन्हें इंडियन जस्टिस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है
वे इस मामले में पृथक महाकौशल की मांग करना चाहते हैं श्री नाग का कहना है कि वे जबलपुर, शहडोल और नर्मदापुरम संभाग के ११ जिलों को मिलाकर पृथक महाकौशल बनाना चाहते हैं, जिसकी राजधानी जबलपुर होगी इसके लिए उन्होंने सितम्बर माह से छिंदवाडा से पदयात्रा शुरु करने की बात कही यह पदयात्रा २० सितम्बर के बाद शुरु होगी और समापन जबलपुर में होगा नाग के अनुसार वे छिंदवाडा, सिवनी, बालाघाट, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, डिण्डोरी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर और नर्मदापुरम संभाग के बैतूल जिले को शामिल कर महाकौशल राज्य बनाना चाहते हैं इसके लिए वे जनजागरण अभियान चलाएंगे इस अभियान के तहत पर्चे वितरित कर पृथक महाकौशल बनने से लोगों को क्या फायदा होगा, इसकी जानकारी देंगे वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जबलपुर, शहडोल, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के २४ जिलों को मिलाकर पृथक गोंडवाना राज्य बनाना चाहती है गोंगपा भी इस राज्य की राजधानी जबलपुर ही बनाना चाहती है
मध्यपप्रदेश का एक और विभाजन होगा या नही ,यह तो बात का मुद्दा है, मगर फिलहाल इस मुद्दे को लेकर महाकौशल के आदिवासी और अनुसूचित जाति जनाजति के नेता एक नजर नहीं आ रहे हैं दोनों ही दल अपने-अपने तरीके से अपनी मांग को लेकर सक्रिय हैं और दोनों के विचारों में मतभेद भी साफ दिखाई दे रहे हैं दोनों ही दलों के नेता जिलों के मुद्दे पर एक नजर नहीं आ रहे हैं
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