सोमवार, 8 अगस्त 2011

कम नहीं हो रही बिसेन की मुसीबत

सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन के पक्ष में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पहल कर पटवारियों को मना लिया हो, मगर आदिवासियों का आक्रोश अब भी कम नहीं हुआ है. आदिवासी समाज इस मामले में बिसेन के अलावा अब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा और विधानसभा उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस के विधायक हरवंशसिंह से भी खफा हो गए हैं. वहीं कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सरकार से खफा है और आदिवासियों के सम्मान की लडाई लडने की तैयारी कर रही है.
पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मुद्दे पर सरकार ने पटवारियों की चल रही हडताल को तो जैसे-तैसे खत्म करा दिया. सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन को भी हडताल समाप्त होने के बाद राहत महसूस जरूर हुई, मगर उनके खिलाफ आदिवासी समाज और कांग्रेस दोनों की विरोध कम नहीं हो रहा है. आदिवासी समाज तो इस मुद्दे पर बिसेन से नाराज हैं, साथ ही अब उनकी नाराजगी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा और विधानसभा उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस विधायक हरवंशसिंह दिखाई दे रही है. आदिवासी समाज के लोगों का तर्क है कि सरकार ने पटवारी संघ से मंत्री द्वारा माफी मंगवाकर पटवारियों का विरोध तो खत्म करा दिया, मगर आदिवासी समाज का जो अपमान हुआ है उसके लिए बिसेन ने समाज से माफी नहीं मांगी है. इस मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा सिवनी जिले के केवलारी में कल मंगलवार को बिसेन और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा. गोंगपा की सिवनी जिला ईकाई के प्रवक्ता विवेक डेहरिया ने बताया कि मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान पार्टी और आदिवासी समाज के लोग बिसेन का पुतला फूंकेंगे. इसके अलावा इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री, भाजपा अध्यक्ष और विधानसभा में उपाध्यक्ष एवं केवलारी से कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह के खिलाफ भी प्रदर्शन किया जाएगा. श्री डेहरिया ने बताया कि इस मामले को लेकर आदिवासी समाज तब तक बिसेन और सरकार का विरोध करता रहेगा, जब तक की मंत्री द्वारा आदिवासी समाज के बीच पहुंचकर माफी नहीं मांगी जाएगी.
यहां उल्लेखनीय है कि आदिवासी समाज के अलावा इस मुद्दे पर कांग्रेस भी सक्रिय है और सरकार के खिलाफ आदिवासियों के बीच पहुंचकर उनके अपमान किए जाने की बात कहेगी. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस द्वारा आदिवासी सम्मेलन किये जाना तय किया गया है. ये सम्मेलन बालाघाट, सिवनी, छिंदवाडा, होशंगाबाद और सीहोर जिले में होना है. फिलहाल कांग्रेस के अलावा आदिवासी समाज इस मुद्दे पर बिसेन, भाजपा संगठन और सरकार दोनों से कुछ ज्यादा ही खफा हैं.

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