रविवार, 7 अगस्त 2011

आहत हैं भाजपा के आदिवासी नेता और विधायक

भारतीय जनता पार्टी के आदिवासी नेता सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा आदिवासियों को लेकर की गई टिप्पणी और इसी समुदाय के पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मामले को लेकर आहत हैं. ये नेता अब इस मामले को पार्टी फोरम पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं. कुछ नेताओं ने तो इस मामले को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा तक पहुंचाकर अपनी बात भी कह दी है.
सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन द्वारा छिंदवाडा में आदिवासी समाज को इंगित करती हुई की टिप्पणी और सिवनी जिले के छिंदाचौकी गांव में पटवारी से उठक-बैठक लगवाने के मामले में अब भाजपा के आदिवासी नेता और विधायक सामने आने लगे हैं. उनकी नाराजगी बढती जा रही है. इसी सप्ताह ये नेता और विधायक इस मुद्दे को लेकर पार्टी फोरम पर उठाने का प्रयास कर रहे हैं. विधायकों ने इस मामले में इसी सप्ताह भोपाल में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने मिलकर आदिवासियों का पक्ष रखने का मन बना लिया है. एक विधायक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इस प्रकार अगर मंत्री किसी समाज को आहत करते हैं तो वे संविधान का उल्लघंन कर रहे हैं. हम जब आदिवासी क्षेत्र से चुनाव जीतकर पार्टी की सीट बढाते हैं तो हमें इन्हीं आदिवासियों की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि वे इस मामले को पहले प्रदेश पार्टी फोरम और बाद में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के सामने भी ले जाएंगे.
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष फग्गनसिंह कुलस्ते ने तो इस मामले को लेकर सिंगरौली में हुई प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में भी उठाया और कहा कि मंत्री को अगर विशेष सुविधा मिली है तो वह किसी को अपमानित करने के लिए नहीं मिली है. उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से भी इस मामले में बिसेन के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की बात कही. श्री कुलस्ते ने इस मामले में लोकमत समाचार से चर्चा करते हुए कहा कि मंत्री द्वारा आदिवासियों के साथ जो व्यवहार किया गया वह उचित नहीं है. इस मामले में उन्होंने प्रदेश के नेताओं को यह बता दिया है कि हमें किसी समाज के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम किसी समाज का पहले अपमान करें और फिर उसी समाज से वोट की अपेक्षा करें तो यह कैसे हो सकता है. उन्होंने कहा कि हमारे मंत्री हमारी समाज के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे तो हम समाज के बीच किस मुंह से जाएंगे. समाज तो हमें बाहर का रास्ता दिखाएगा. उन्होंने कहा कि मंत्री भी पहले नागरिक है, उसके बाद उन्हें विशेष दर्जा मिला है इसका मतलब यह नहीं की मंत्री अपने इस दर्जें का दुरपयोग करे.

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