मंगलवार, 3 जनवरी 2012

प्रशिक्षित को ही काम

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपनी पुरानी गलतियों को दूर करने के लिए संगठन स्तर पर फेरबदल के बाद अब कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बनाना शुरु कर दिया है़ गोंगपा ने साफ संकेत दिया है कि जो कार्यकर्ता उसके प्रशिक्षण वर्ग में शामिल होकर प्रशिक्षण लेगा उसे ही पार्टी काम देगी़ गोंगपा का प्रशिक्षण वर्ग मण्डला जिले के नामनगर में हो चुका है़
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को 2008 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद उसने अब मिशन 2013 के लिए अपनी तैयारी कुछ इस तर शुरु की है कि पिछली गलतियों जैसा कोई कदम इस बार न उठे़ पूर्व में गोंगपा द्वारा अपने से दूर हुए लोगों को वापस अपने दल में लाने का काम किया गया, उसमें उसे पूरी सफलता तो हासिल नहीं हुई,मगर कुछ लोगों को वह वापस लाने में सफल हो गई है़ इसके बाद संगठन में फेरबदल कर अब कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का काम शुरु कर दिया है़ गोंगपा ने इस बार कार्यकर्ताओं को साफ कह दिया है कि जो संगठन की सुनेगा उसे ही काम मिलेगा़ गोंगपा ने पहले तो अपना प्रदेश अध्यक्ष बदलकर कमल मरावी को जिम्मेदारी सौंपी और उसके बाद कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरु किया़ हाल ही में मण्डला जिले में पार्टी ने एक प्रशिक्षण वर्ग लगाकर कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करना शुरु कर दिया़ इस प्रशिक्षण वर्ग में जोन स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया और उन्हें चुनाव के दौरान किस तरह के कार्य करने हैं इसके गुर सिखाए गए़ इन कार्यकर्ताओं को मतदान केन्द्र से लेकर विधानसभा क्षेत्र तक में उन्हें क्या करना है इसकी जिम्मेदारी किस तरह निभानी है उसके बारे में बताया गया़
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा इस तरह के अभ्यास वर्ग फिलहाल महाकौशल में ही लगेंगे इसके बाद अन्य अंचलों में अभ्यास वर्ग की शुरुआत होगी़ गोंगपा का लक्ष्य है कि इस तरह के अभ्यास वर्ग में हर विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ता शामिल हों और उन्हें उनके विधानसभा क्षेत्र के बारे में पूरी जानकारी देकर यह बताया जाए कि उन्हें चुनाव के दौरान किस तरह से काम करना है़ पार्टी का यह कदम भविष्य की रणनीति के तहत है़ गोंगपा के पदाधिकारियों का कहना है कि चुनाव के वक्त कार्यकर्ता को प्रशिक्षित करने के बजाय अगर अभी से उन्हें प्रशिक्षण देकर जिम्मेदारी तय कर दी जाए तो पार्टी के हित में होगा़ पार्टी को चुनाव के वक्त अपने प्रत्याशी और चुनाव प्रचार के बारे में ही सोचना पड़ेगा़ इस प्रकार के प्रशिक्षण को पार्टी पदाधिकारी यह मानते हैं कि चुनाव के वक्त ऐसे अवसर भी आते हैं जब मतदान केन्द्र पर बैठने के लिए उन्हें कार्यकर्ता ही नहीं मिलते हैं, इस कारण हमें जहां पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ना है वहां के लिए कार्यकर्ताओं को अभी से तैयार कर जिम्मेदारी सौंपनी होगी़

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