स्कूली पाठ्यक्रम में ‘भगवत गीता’ को शामिल किया जाना अब तय हो गया है़ पाठ्यचर्चा समिति की हुई माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड में बैठक में इसे हरी झंडी दे दी गई है़ समिति की द्वारा मिली हरी झंडी के बाद अब शासन के पास इसे अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा़ शासन की अनुमति के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र में छात्र ‘भागवत गीता’ को भी पढ़Þेंगे़
‘गीता’ को पाठ्यक्रम में शामिल करने को लेकर लंबे समय से विवाद चलता रहा, वहीं शासन इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए पूरी तरह से सक्रिय रहा़ शासन को गुरुवार को उस वक्त सफलता मिल गई जब माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड में पाठ्यचर्चा समिति की बैठक में समिति के सदस्यों ने इस मामले में अपनी सहमति जताई और ‘गीता’ को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की हरी झंडी दे दी़ पाठ्यचर्चा समिति की सहमति के बाद अब यह मसला एक बार फिर सरकार के पाले में चला गया है़ सरकार के पास यह अनुमोदन के लिए भेजा जा रहा है़ शासन इन पर अपनी अंतिम सहमति देकर अगले शैक्षणिक सत्र याने वर्ष 2012-2013 से ‘गीता’ को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश देगा़ बताया जाता है कि पाठ्यक्रम में गीता को जीवन मूल्यों पर आधारित विषय को जोड़कर बनाया जाएगा़ कक्षा 1 से लेकर 12 वीं तक चित्रकथा, कहानी, आत्मकथा और निंबध के माध्यम से गीता का पाठ स्कूलों में पढ़Þाया जाएगा़
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इंदौर में करीब एक साल पहले एक समारोह में खुलकर इसकी घोषणा करते हुए यह भी कहा था कि अगर इसके लेकर विरोध हो भी तो उसकी उन्हें परवाह नहीं है, हम गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे़ उन्होंने कहा था कि अगर हम शिक्षा में बच्चों के लिए संस्कार हेतु सुधार की कोशिश करते है तो हम पर शिक्षा के भगवाकरण के आरोप तक लगाए जाते हैं़ उन्होंने कहा था कि गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़Þेगा और कर्म की शिक्षा देने के लिए यह जरुरी भी हैं़ इसके बाद कांग्रेस और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार इसे लेकर आरोप लगते रहे, लेकिन सरकार अपना काम करती रही़ यही वजह है कि अब इसे पाठ्यचर्चा समिति में भी अनुमति मिल गई और सिर्फ अब शासन की मंंजूरी का इसे इंतजार है़
‘गीता’ को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए करीब आधा दर्जन बैठकें हुई और राज्य शिक्षा केन्द्र की भी सहमति ली गई थी़ विभिन्न धर्मों के धर्माचार्यों और संगठनों एवं राजनीतिक दलों के विरोध को समिति ने यह कहकर नकार दिया कि पाठ्यक्रम में ‘भागवत गीता’ के शिक्षा दर्शन को ही कोर्स में शामिल किया जा रहा है, न कि ग्रंथ को़
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