उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी ने आमिर अली खान के सौ साला समारोह के लिए एक लेखक और चित्रकार से काम तो लिया, मगर दाम देने के बजाय उन्हें समारोह में बुलाना तक उचित नहीं समझा़ इन कलाकारों ने सरकार पर कलाकारों के साथ उपेक्षित व्यवहार करने का अरोप लगाया है़ समारोह में आमिर अली पर मोनोग्राफ और उनके पोर्टेट बनाने वाले लेखक और कलाकर दोनों ही अपने को उपेक्षित मान रहे हैं़ इन दोनों से लंबे समय तक मेहनत कराकर काम तो करा लिया, मगर उसके बाद अकादमी ने दोनों को भुला दिया़
उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा इंदौर में कल 20 जनवरी से तीन दिनों तक मनाया जाने वाला आमिर अली खां का शताब्दी समारोह की प्रशंसा हो, उसके पहले ही यह समारोह विवादों में आ गया है़ विवाद इस बात को लेकर हुआ है कि समरोह के लिए अकादमी ने इंदौर के लेखक प्रभु जोशी से आमिर अली के जीवन पर केन्द्रित एक मोनोग्राफ तैयार कराया़ जोशी से इसके लिए विभाग ने बकायदा आग्रह किया था, इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत कर इस काम को पूरा कर विभाग को दे दिया़ उन्हें यह आश्वासन दिया था कि इसका बाकायदा किताब के रुप में प्रकाशन कराकर लोगों तक उस किताब को पहुंचाया जाएगा़ इसी तरह पोट्रेट बनाने वाले इंदौर निवासी कलाकार जो वर्तमान में मुुंबई में रहे रहे हैं सफदर शामी से उस्ताद अलाउद्दीन अकादमी की ओर से कहा था कि वे आमिर साहब पर केन्द्रित चित्र बना दें़ अकादमी की ओर से जब उन्हें यह कहा गया तो उन्होंने आमिर साहब के पड़ौसी रहने एवं संगीतकार की दृष्टि से उन्हें याद करने का मौका मिलता, हां कह दिया़ इसके बाद उन्होंने आमिर अली के 13 पोर्ट्रेट बनाकर भेज दिया़
अकादमी ने मोनोग्राफ और चित्र बनवाने के बाद दोनों ही कलाकारों को भुला दिया़ इसके बाद न तो उनसे संपर्क किया और न ही कल से शुरु हो रहे कार्यक्रम में उन्हें बुलाया ही़ यहां तक की जो आमंत्रण पत्र छपवाया है उसमें सफदर शामी के बनाए चित्र को तो प्रकाशित किया है, मगर उनका नाम तक नहीं दिया है़ इसके अलावा शामी को कल के कार्यक्रम में पहुंचने के लिए निमंत्रण तक नहीं दिया है़ दोनों ही कलाकार इसे अपनी उपेक्षा मान रहे हैं और विभाग की इस कार्यशैली को लेकर आहत भी हैं़ विभाग द्वारा कोलकाता से बुलाए गए फोटोग्राफर प्रशांत अरोरा को लेकर भी दोनों कलाकार आहत हैं़ उनका कहना है कि फोटोग्राफर को वायुमार्ग से बुलवाया गया है, जबकि उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया गया है़
यह तो श्राद्धकर्म करने जैसा हुआ: जोशी
प्रख्यात लेखक प्रभु जोशी का कहना है कि प्रदेश का संस्कृति विभाग और सरकार दोनों ही एक पद्मभूषण से नवाजे कलाकार आमिर अली खान का शताब्दी समारोह मनाने के बात कहकर खुश हो रहे हैं, मगर कला से जुड़े लोग इसे शास्त्रीय गायन के ख्यात गायक का श्राद्धकर्म करना मान रहे हैं़ सरकार खुले में मंच बनवाकर लाखों रुपए खर्च कर यह आयोजन कर रही है, मगर उनके लिए किताब प्रकाशित करने का कहकर भी किताब का प्रकाशन नहंी कर रही है़ श्री जोशी का कहना है कि उन्हें दिए आश्वासन के अनुसार अगर किताब प्रकाशित होती तो नई पीढ़Þी भी आमिर अली साहब को अच्छे से जान सकती थी़ वे इस बात को लेकर दुखी हैं कि उनसे मोनोग्राफ तैयार करा लिया गया, मगर उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है़ श्री जोशी ने बताया कि उन्होंने खूब मेहनत कर आमिर अली साहब पर मोनोग्राफ तैयार किया था, अब दुख होता है कि हमारी सरकार हमारे प्रदेश के अल्पसंख्यक वर्ग के कलाकारों के साथ किस तरह का व्यवहार करती है़
चित्र बनवा कर भुला दिया
आमिर अली खां के पोर्ट्रेट बनाने वाले मुुंबई निवासी कलाकार सफदर शामी का कहना है कि उन्हें अकादमी ने जब यह कहा कि आमिर अली खां पर पोर्ट्रेट उन्हें बनाने हैं, तो काफी खुशी हुई थी़ आमिर साहब का पड़ौसी होने पर फर्क हुआ़ मैंने खूब मेहनत कर 13 पोर्ट्रेट बनाकर भिजवा दिए़ अब मुझे पता चला कि जो आमंत्रण छपवाए गए हैं उसमें उनका नाम तक नहीं है़ इतना ही नहीं उनके चित्र का उपयोग किया गया है, मगर उनका नाम कहीं भी नहीं है़ उन्होंने कहा कि मेरे चित्रों का वे क्या कर रहे हैं इसकी जानकारी तो मुझे नहीं है, मगर इस बात का दुख जरुर है कि आमिर अली खां साहब के साथ प्रदेश सरकार मजाक कर रही है़
अब जरुर छपेगा मोनोग्राफ
उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत अकादमी के कार्यकारी निदेशक गणेश भालचंद्र वाकदरे का कहना है कि यह सच है कि कुछ तकनीकी कारणों से पूर्व में हम मोनोग्राफ का प्रकाशन नहीं कर रहे थे़ हमारा विचार था कि हम तीन दिनों के पूरे कार्यक्रम को मोनोग्राफ प्रकाशित करेंगे़ मगर अब हमने यह तय किया है कि उसे कल तक प्रकाशित करा दिया जाएगा़ सफदर शामि को आमंत्रित करने की बात मुझे नहीं मालूम है, मैं पता करता हूं़ वागदरे ने कहा कि मुझे 12 जनवरी को ही यहां का कार्यभार मिला है इस कारण भी मुझे पूरी जानकारी नहीं है, मगर अब मैं सबकुछ ठीक ढंग से करुंगा़ हम एक बड़े कलाकार का शताब्दी समारोह मना रहे हैं उन्हें उपेक्षित करने की सोच हमारी नहीं है़
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