शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

‘चक्रव्यू’ के ‘चक्रव्यूह’ में फंसे आदिवासी

फिल्म निदेशक प्रकाश झा द्वारा राजधानी में बनाई जा रही फिल्म ‘चक्रव्यू’ के ‘चक्रव्यूह’ में प्रदेश के आदिवासी फंस गए़ बैगा जाति के कलाकारों के गु्रप को झा ने नृत्य के लिए बुलाकर एनवक्त पर काम नहीं दिया़ जनजातीय कलाकारों को काम के साथ खाना भी नहीं मिला़ यहां तक की उन्हें वापस घर लौटने के लिए किराए हेतु भी मशक्कत करनी पड़ी़
राजधानी भोपाल में इन दिनों फिल्म निदेशक प्रकाश झा अपनी नई फिल्म ‘चक्रव्यू’ की शूटिंग कर रहे हैं़ फिल्म ‘राजनीति’ की सफलता के बाद उन्हें शूटिंग के लिए मध्यप्रदेश भा गया़ यही वजह है कि उन्होंने ‘चक्रव्यू’ भी यहां बनाने का फैसला किया़ इस फिल्म की शूटिंक में एक दृश्य में लोक परंपरा पर केन्द्रित आदिवासी नृत्य को फिल्माने के लिए उन्होंने डिंडोरी जिले के बैगाचक गांव में बैगा और चक जाति के बैगाकर्मा ग्रुप के मुख्य डॉ़विजय चौरसिया से संपर्क किया़ डॉ़ चौरसिया के समीप झा को समाजसेवी संजय यादव ने पहुंचाया था़ यादव आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक गतिविधियां चलाते हैं़ झा के कहने पर बैगा और चक जाति के 22 कलाकारों को संजय यादव बुधवार को भोपाल लाए़ इन कलाकारों को जब वे प्रकाश झा के पास ले गए तो उन्होंने काम न देते हुए यह कहकर वापस लौटा दिया कि उनका काम हो गया़ बुधवार को दिनभर ये अपने काम के लिए मशक्कत करते रहे़ झा ने न तो अनुंबध के आधार पर उन्हें पैसा दिया और न ही काम़ बुधवार को भूखे रहे कलाकार घर लौटने के लिए किराए तक के मोहताज हो गए थे़ बताया जाता है कि प्रकाश झा ने इन कलाकारों को पंद्रह हजार रुपए देने का करार किया था, मगर बुधवार को वे पलट गए और नृत्य भी इन कलाकारों से उन्होंने नहीं कराया़
समाजसेवी संजय यादव का कहना है कि मुझे प्रकाश झा ने आदिवासी कलाकारों को लाने का कहा था़ इस पर संस्कृति विभाग के संचालक श्रीराम तिवारी से उन्होंने बैगा जाति के इन कलाकारों का पता लिया और उन्हें भोपाल लेकर आया़ इसके बाद झा ने उन्हें न तो पैसे दिए और काम देने से भी मना कर दिया़ उन्होंने कहा कि अगर काम नहीं लिया गया तो कलाकारों को एडवांस के रुप में कुछ देना चाहिए था़ यहां तक की झा ने इन कलाकारों को खाने तक का नहीं पूछा़ श्री यादव ने कहा कि सरकार को प्रदेश में फिल्म नीति बनाकर कोई नियम बनाना चाहिए जिससे प्रदेश के कलाकारों के साथ कोई अभद्रता न कर सके़ संजय यादव का कहना है कि इन कलाकारों को संस्कृति विभाग तीस हजार रुपए मानदेय देता है, जबकि झा उन्हें मात्र पंद्रह हजार रुपए देकर ही काम कराना चाहते थे़
पचमढ़Þी में नहीं होने देंगे शूटिंग
‘चक्रव्यू’ में नृत्य प्रस्तुत करने आए कलाकारों की उपेक्षा के बाद अब फिल्म निदेशक प्रकाश झा को पचमढ़Þी में अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान परेशानी आ सकती है़ दुखी होकर भोपाल से गए ये कलाकार आदिवासी समाज के बीच अपनी बात कहेंगे़ इस पर आदिवासी खफा होकर पचमढ़Þी में फिल्म ‘चक्रव्यू’ की शूटिंग के दौरान मुसीबत बन सकते हैं़ बताया जाता है कि आदिवासी समाज इस बात से खफा हो गया है़ समाज के कुछ लोगों ने आज ही झा द्वारा लज्जित किए कलाकारों से चर्चा कर पचमढ़Þी में शूटिंग के दौरान प्रदर्शन करने और शूटिंग न करने देने की बात कही है़
आमिर भी कर चुके हैं वादाखिलाफी
आमिर प्रोडेक्शन के बैनर तले मध्यप्रदेश में पीपली लाइव फिल्म की भी शूटिंग हुई़ इस शूटिंग के दौरान रायसेन जिले का बड़वई गांव देश में चर्चा में रहा़ इस गांव के एक शिक्षक गयाप्रसाद की मंडली ने आमिर की इस फिल्म में ‘सखी सैंया तो खूबई़़़’ गाना गया़ इस गाने के लिए आमिर खान ने उन्हें वादा किया था कि वे इसके लिए मंडली को मात्र 1100 रुपए दिए और शेष राशि नहीं दी़ गांव के भोल-भाले लोग शूटिंग तक राशि मिल जाने को लेकर निश्ंिचत रहे, मगर शूटिंग पूरी होने के बाद भी उन्हें राशि नहीं मिली और शूटिंग के लिए आई टीम वापस मुंबई चली गई़ जब फिल्म का यह गाना खूब छाया और फिल्म प्रदर्शन की बात आई तब शिक्षक गयाप्रसाद ने अपनी पीड़ा मीडिया के सामने बताई़ इसके बाद आमिर खान ने पूरी मंडली को मुंबई बुलाकर छह लाख रुपए का चेक दिया़ बात यहीं समाप्त नहीं होती है, आमिर की इस फिल्म की शूटिंग का दंश आज भी बड़वाई गांव के लोग भोग रहे हैं़ इस फिल्म के दौरान जो बिजली का उपयोग किया उसका बिल करीब पौने पांच लाख रुपए आया जो अब तक नहीं भरा गया है़ इस कारण अब विद्युत विभाग ने पूरे गांव की बिजली ही बंद कर दी है़ गांव के लोग अंधेरे में रह कर अब आमिर की फिल्म ‘पीपली लाइव’ को कोस रहे हैं़

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