बुधवार, 29 मई 2013

छग में नक्सली वारदातों से घटाई आदिवासी जनसंख्या

गोंगपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा आदिवासियों को सरकार, नक्सली और नक्सली मानते हैं मुखबिर


छत्तीसगढ़ में बीते एक दशक में नकस्ली वारदातों के कारण आदिवासियों की संख्या कम हो गई है़यह संख्या करीब डेढ़ फीसदी कम हुई है़ यहां से आदिवासी दूसरे राज्यों में पलायन कर गए हैं यहां तक की आंध्रप्रदेश में तो छत्तीसगढ़ के नाम से ही एक कालोनी बनाकर छग के आदिवासी रह रहे हैं, मगर वे वहां भी सुविधाविहीन जीवन, जी रहे हैं छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों को नक्सली बताती है, तो नक्सली आदिवासियों को सरकार का मुखबिर बता कर मार देते हैं़ यह आरोप गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने लोकमत समाचार से चर्चा करते हुए लगाए़ उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में विशेषकर बस्तर संभाग में आदिवासियों की स्थिति ठीक नहीं है़ इस संभाग के करीब 75 गांवों में आदिवासी पुरुष रह ही नहीं रहे हैं़ उन्हें कभी सरकार की ओर से नक्सली मानकर परेशान किया जाता है तो कभी नक्सली रात के अंधेर में उन्हें उठाकर ले जाया जाता है और सरकार का मुखबिर बताकर मारा जाता है़ श्री मरकाम ने बताया कि राज्य में नक्सलियों की गतिविधियां जब से बढ़ी है तब से छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की परेशानी भी बढ़Þी है़ उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आदिवासियों के नाम पर योजनाएं चलाने का दावा करती है, मगर यहां के आदिवासी आज भी सुविधाओं के अभाव में जीवन जी रहे हैं उन्होंने बताया कि सरकार का सहयोग न मिलने और नक्सलियों के द्वारा लगातार आदिवासियों को परेशान किए जाने के कारण यहां से लगातार आदिवासियों का पलायन होता जा रहा है़ आज यह स्थिति निर्मित हो गई है कि बीते एक दशक में राज्य में आदिवासियों की संख्या करीब डेढ़ फीसदी कम हो गई है़ श्री मरकाम ने बताया कि छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में पलायन हुआ है़ यह पलायन महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश में हुआ है़ उन्होंने बताया कि आंध्रप्रदेश के खम्माम जिले में तो छत्तीसगढ़Þ के आदिवासियों ने एक कालोनी बनाकर रहना शुरु कर दिया है,मगर वे वहां पर आज भी सुविधाओं से जूझ रहे हैं वहां की सरकार उनकी सुध तक नहीं ले रही है़ उन्होंने इन सब परेशानियों ने आदिवासी समाज को आज उसकी संस्कृति से दूर कर दिया है़ हटाएं राज्यपाल को, लगाएं राष्ट्रपति शासन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने हाल ही में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस नेताओं की मौत को लेकर छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को दोषी बताया है़ साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के राज्यपाल शेखर दत्त का भी आदिवासियों के प्रति उपेक्षित व्यवहार रहा है, इस कारण यहां पर आदिवासियों की सुनवाई ही नहीं होती है़ उन्होंने कहा कि केन्द्र को छत्तीसगढ़ राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाकर तुरंत ही यहां के राज्यपाल शेखर दत्त को हटा देना चाहिए़ श्री मरकाम ने कहा कि छग की सरकार आदिवासियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है इस कारण यहां का आदवासी परेशान हैं

वारदात में मप्र के नक्सली भी शामिल

छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में मध्यप्रदेश के नक्सलियों के भी शामिल होने की आशंका प्रदेश की पुलिस और खुफिया विभाग को है़ सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों में काफी समय से नक्सलियों की गतिविधियां शांत देखी जा रही हैं खुफिया विभाग का मानना है कि नक्सली जब किसी बड़ी वारदात को अंजाम देते हैं तो समीपवर्ती राज्यों में बसे उनके साथियों का सहयोग भी लेते हैं़ इसके चलते यह आशंका है कि मध्यप्रदेश के नक्सली लंबे समय से छत्तीसगढ़Þ में रहकर इस वारदात को अंजाम देने में वहां के नक्सलियों का सहयोग कर रहे होंगे़ राज्य के पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने भी इस बात को मंगलवार को स्वीकार किया कि राजय में नक्सल प्रभावित जिलों में नक्सली गतिविधियां लंबे समय से शांत हैं उन्होंने इस बात की आशंका जताई थी कि राज्य के नक्सली भी छत्तीसगढ़ में हुई इस वारदात में शामिल हुए होंगे़ वैसे राज्य में इस वारदात के बाद से सुरक्षा के इंतजाम बढ़Þा दिए हैं नक्सल प्रभावित जिलों में चौकसी भी बढ़Þा दी है़ इसके अलावा 31 मई को पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का एक दल भी नक्सल प्रभावित जिलों का दौरा करने की तैयारी कर चुका है़

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें