मध्यप्रदेश में सपा के नेतृत्व में बन रहे तीसरे मोर्चे में एक बार फिर विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है़ इस बार विवाद की वजह टिकट पर सहमति का न बन पाना है़ विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल अंचल में समाजवादी पार्टी जहां अपना प्रत्याशी खड़ा करना चाहती है, वहां पर माकपा और भाकपा के बीच सहमति नहीं बन पा रही है़ अब सहमति बनाने के लिए एक बार फिर 4 जून को बैठक होना तय किया गया है, जबकि इस तारीख को सपा ने 50 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करने की बात भी कही है़
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव के नेतृत्व में तीसरे मोर्चा के गठन को लेकर छोटे दल उत्साहित तो नजर आ रहे थे, मगर जैसे-जैसे इन दलों के बीच हुई बैठकें होती गई, मतभेद भी उभरते गए़ इन मतभेदों के चलते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने तो दूरी ही बना ली, इसके अलावा कुछ और भी दल दूर होते गए़ अब तीसरे मोर्चे में सपा के अलावा समानता दल, माकपा, भाजपा और लालू प्रसाद यादव का जनता दल शामिल है़ इन दलों के बीच सब कुछ तो ठीक-ठाक चल रहा था, मगर बीते तीन बैठकों से टिकट वितरण को लेकर विवाद भी उभरा़ माकपा जहां ग्वालियर-चंबल अंचल में विधानसभा क्षेत्र को लेकर सपा के तर्कों पर सहमत नहीं है, वहीं भाकपा विंध्य में सपा की बातों पर सहमत नजर नहीं आ रही है़ बताया जाता है कि ग्वालियर-चंबल अंचल और विंध्य में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में माकपा और भाकपा अपने उम्मीदवार खड़ा करना चाहते हैं, मगर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव इन सीटों पर सपा का प्रत्याशी खड़ा करना चाहते हैं. श्री यादव माकपा और भाकपा को यह तर्क देते हैं कि ये क्षेत्र उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं. इस कारण इन क्षेत्रों में सपा की स्थिति मजबूत हैं, वे भाकपा और माकपा से इन क्षेत्रों की करीब एक दर्जन सीटों पर समझौता नहीं करना चाहते हैं़ इस मुद्दे पर तीनों दलों में बीते तीन बैठकों से टकराव के चलते समझौता नहीं हो पा रहा है़
वहीं सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने 50 विधानसभा क्षेत्रों में 4 जून को प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करने की बात कहकर विवाद को और गहरा दिया है़ श्री यादव ने यहां तक कह दिया कि ये सभी प्रत्याशी विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल के उन विधानसभा क्षेत्रों से होंगे जो विधानसभा क्षेत्र उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं़ इस बात को लेकर माकपा के बादल सरोज कुछ खफा नजर आ रहे हैं. अब सपा ने बादल सरोज सहित भाकपा के पदाधिकारियों को मनाने के लिए 4 जून को प्रत्याशियों की घोषणा करने के पूर्व सुबह एक बैठक और करने की रणनीति तय की है़ इस बैठक में अगर गीले-शिकवे दूर होते हैं तो ठीक नहीं तो तीसरे मोर्चे में दरार पड़ सकती है़ बताया जाता है कि तीसरा मोर्चा बनने के पहले ही बिखर सकता है़
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव के नेतृत्व में तीसरे मोर्चा के गठन को लेकर छोटे दल उत्साहित तो नजर आ रहे थे, मगर जैसे-जैसे इन दलों के बीच हुई बैठकें होती गई, मतभेद भी उभरते गए़ इन मतभेदों के चलते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने तो दूरी ही बना ली, इसके अलावा कुछ और भी दल दूर होते गए़ अब तीसरे मोर्चे में सपा के अलावा समानता दल, माकपा, भाजपा और लालू प्रसाद यादव का जनता दल शामिल है़ इन दलों के बीच सब कुछ तो ठीक-ठाक चल रहा था, मगर बीते तीन बैठकों से टिकट वितरण को लेकर विवाद भी उभरा़ माकपा जहां ग्वालियर-चंबल अंचल में विधानसभा क्षेत्र को लेकर सपा के तर्कों पर सहमत नहीं है, वहीं भाकपा विंध्य में सपा की बातों पर सहमत नजर नहीं आ रही है़ बताया जाता है कि ग्वालियर-चंबल अंचल और विंध्य में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में माकपा और भाकपा अपने उम्मीदवार खड़ा करना चाहते हैं, मगर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव इन सीटों पर सपा का प्रत्याशी खड़ा करना चाहते हैं. श्री यादव माकपा और भाकपा को यह तर्क देते हैं कि ये क्षेत्र उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं. इस कारण इन क्षेत्रों में सपा की स्थिति मजबूत हैं, वे भाकपा और माकपा से इन क्षेत्रों की करीब एक दर्जन सीटों पर समझौता नहीं करना चाहते हैं़ इस मुद्दे पर तीनों दलों में बीते तीन बैठकों से टकराव के चलते समझौता नहीं हो पा रहा है़
वहीं सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने 50 विधानसभा क्षेत्रों में 4 जून को प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करने की बात कहकर विवाद को और गहरा दिया है़ श्री यादव ने यहां तक कह दिया कि ये सभी प्रत्याशी विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल के उन विधानसभा क्षेत्रों से होंगे जो विधानसभा क्षेत्र उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं़ इस बात को लेकर माकपा के बादल सरोज कुछ खफा नजर आ रहे हैं. अब सपा ने बादल सरोज सहित भाकपा के पदाधिकारियों को मनाने के लिए 4 जून को प्रत्याशियों की घोषणा करने के पूर्व सुबह एक बैठक और करने की रणनीति तय की है़ इस बैठक में अगर गीले-शिकवे दूर होते हैं तो ठीक नहीं तो तीसरे मोर्चे में दरार पड़ सकती है़ बताया जाता है कि तीसरा मोर्चा बनने के पहले ही बिखर सकता है़
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