केंद्रीय मंत्री और मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के मध्यप्रदेश की सड़कों के अमेरिका से बेहतर बताए जाने के बयान का बचाव करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की कई सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं. हमें इस हीनता भाव से मुक्ति पाना चाहिए कि अमेरिका या फिर कहें अंग्रेजी, अंग्रेजों और अंग्रेजियत में ही सब कुछ बेहतर है. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने आज लंबे समय बाद राजधानी में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री के रूप में मेरी जवाबदारी में कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ है. आज भी मेरे नए मंत्रालय में गंगा-यमुना और नर्मदा से जुड़े हुए विषय हैं. पहले की ही तरह केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी गंगा के पुनरुत्थान में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं. पहले भले ही गंगा से जुड़ा मंत्रालय औपचारिक रूप से उनके पास नहीं था लेकिन वे बड़ी भूमिका में थे. गंगा से जुड़ी परियोजनाओं का वित्तीय पक्ष वे ही देखा करते थे. मैं तो बहुत ही पहले कह चुकी थी की गंगा के किनारे यात्रा कर जनजागरण करना चाहती हूं. गंगा और मेरा रिश्ता अटूट है. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के उस बयान का बचाव करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की सड़कें अमेरिका से अच्छी हैं. आपने कहा कि मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि मध्यप्रदेश की तमाम सड़कें अमेरिका से अच्छी हैं. हो सकता है कुछ सड़कें खराब हों तो उनके सुधार का कार्य भी चल रहा है. आपने कहा कि हमें हीनता के उस भाव से मुक्ति पाना चाहिए कि अमेरिका में सब कुछ अच्छा है और भारत में सब कुछ खराब है. दरअसल हम भारतीयों की सबसे बड़ी दिक्कत है कि हम अंग्रेजियत और अंग्रेजों को श्रेष्ठ मानते हैं.
भंडारे में दिग्विजय ने बुलाया तो वे जाएंगी
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि दिग्विजय सिंह अराजनीतिक नर्मदा यात्रा कर रहे हैं उनकी इस यात्रा को अराजनीतिक बना रहने दीजिए. वे धार्मिक व्यक्ति हैं. आपने कहा कि वह 8 साल की उम्र में राघवगढ़ पैलेस में प्रवचन देने जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अगर दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा के बाद भंडारे में उन्हें बुलाएंगे तो वे जरूर जाएंगी.
नए लड़कों को सोच बदलना चाहिए
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि हार्दिक पटेल और उन जैसे राजनीति में आए नए और युवा नेताओं को अपना सोच बदलना चाहिए, सिर्फ मोदी विरोध के जरिए आप राजनीति नहीं कर सकते हैं, क्योंकि लोग इसे जलन मानते हैं. उत्तप्रदेश में अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने मोदी विरोध का खूब झंडा उठाया लेकिन क्या हुआ. इस देश के लोग व्यक्ति का विरोध पसंद नहीं करते हैं. मोदी विरोध विपक्ष को छोटा बनाता है. आपने कहा कि कन्हैया कुमार जब राजनीति में सक्रिय हुए तो उन्हें अच्छा लगा, पर कन्हैया ने जिस तरह मोदी विरोध का सहारा लिया उसके कारण वे भटक गए.

