रविवार, 24 मार्च 2013

संगमा मप्र में हुए सक्रिय

नेशनल पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पी़ए़संगमा अब छत्तीसगढ़Þ के बाद मध्यप्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं़ संगमा ने राजधानी में आदिवासी नेताओं और प्रदेश के छोटे दलोें के नेताओं से मुलाकात कर चर्चा की़ इस दौरान उन्हें छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने को लेकर भी छोटे दलों के नेताओं ने सक्रियता दिखाई़ हालांकि संगमा ने अभी अपने पत्ते खोले नहीं हैं, मगर उन्होंने नेताओं को इस बात का संकेत जरुर दिया है कि पहले संयुक्त मोर्चा गठित हो जाए, फिर इस मुद्दे पर विचार करेंगे़ नेशनल पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पी़ए़संगमा इन दिनों मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हैं़ संगमा शनिवार से भोपाल में ठहरे हुए हैं़ वे यहां पर आए तो एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम में हैं, मगर साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश के छोटे दलों विशेषकर आदिवासी का नेतृत्व करने वाले दलों और आदिवासी नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की़ संगमा ने राजधानी आने के बाद छत्तीसगढ़Þ की तर्ज पर संयुक्त मोर्चा बनाने में रुचि दिखाई है़ उनकी इस रुचि को देखते हुए छोटे दलों के नेताओं ने भी स्वीकार किया है कि वे इस मुद्दे पर विचार करेंगे़ हालांकि इन नेताओं की संगमा के साथ हुई चर्चा के बाद संगमा को मध्यप्रदेश में दो तरह के प्रस्ताव दिए हैं़ बताया जाता है कि संगमा को दिए प्रस्ताव में पहला तो मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में वे संयुक्त मोर्चा में जिन दलों को शामिल करने की मंशा दिखा रहे हैं, उनके समर्थन में विधानसभा चुनाव के दौरान उनका नेतृत्व करें और चुनाव प्रचार में अहम भूमिका का निर्वाह करें़ इसके अलावा छोटे दलों के नेताओं द्वारा यह कहा गया कि अगर वे मध्यप्रदेश में सक्रियता दिखाते हैं और भाजपा उनका साथ देती है तो वे छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से संयुक्त मोर्चा के उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतरे़ संगमा ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया है़ सूत्रों की माने तो संगमा को कहा गया है कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जब भाजपा ने उन्हें अपना समर्थन दिया था तो छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए भी वे भाजपा को इस बात के लिए तैयार करें कि वह अपना उम्मीदवार न उतारकर उन्हें समर्थन दे़ संगमा ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया और विचार करने की बात कही है़ हालांकि अभी उन्होंने कुछ पत्ते नहीं खोले हैं़ सूत्रों के अनुसार आज संगमा की मुलाकात अरविंद नेताम और दिलीप सिंह भूरिया से हुई़ इस मुलाकात में उन्होंने आदिवासी नेतृत्व को ताकत देने की बात कही़ संगमा ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में आदिवासी नेतृत्व करने वाले दलों के नेताओं से भी मुलाकात कर कहा कि वे संयुक्त मोर्चा के साथ चुनाव लड़े जिससे आदिवासी मजबूत हों और छोटे दलों को भी मजबूती मिले़ सूत्रों की माने तो संगमा ने अब छत्तीसगढ़Þ के बाद मध्यप्रदेश को अपना लक्ष्य बनाकर कांग्रेस के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खड़ा करने के संकेत दिए हैं़ यहां उल्लेखनीय है कि संगमा के साथ फिलहाल प्रजातांत्रिक पार्टी, भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं ने आज चर्चा की़ इसके अलावा कुछ और छोटे दलों से भी उनकी चर्चा होना बताया जा रहा है़

‘नाना’ के पास बढ़Þ सोना, बिसेन हुए वाहन विहीन

राज्य के दो मंत्री नानाभाऊ मोहोड़ और गौरीशंकर बिसेन अपनी संपत्ति का नपा-तुला खुलासा करने में माहिर हैं़ संपत्ति के मामले में नाना कर्जदार हैं, तो बिसेन पर वर्तमान में कोई कर्ज नहीं है़ नाना के पास मंत्री बनने के बाद जेवरात बढ़Þे हैं, मगर बिसेन इस मामले में पीछे हैं़ उन्हें शस्त्र रखने का शौक जरुर हो गए है़ साथ ही मंत्री बनने के पहले जहां उनके पास दो-दो वाहन हुआ करते थे, वे अब नहीं रहे हैं़ स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री नानाभाऊ मोहोड़ और सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन संपत्ति का ब्यौरा देने में खासे नपे-तुले अंदाज में चलते हैं़ नानाभाऊ मोहोड़ ने मंत्री बनने के बाद सोने में बढ़Þौत्री की है, जबकि बिसेन इस मामले में पिछड़े हैं़ विधायक का चुनाव लड़ते वक्त बिसेन के पास जितना नगद था उसमें बढ़Þोत्री हुई है, तो नाना इस मामले में पीछे हैं़ नाना को शस्त्र का शौक नहीं है, बल्कि बिसेन ने मंत्री बनने के बाद शस्त्र के रुप में रिवाल्वर रखना शुरु कर दिया है़ नाना अब भी अपनी पैतृक संपत्ति को ही संभाले हुए है, अतिरिक्त संपत्ति क्रय करने के मामले में वे अब भी पीछे हैं़ मंत्री बनने के बाद उन्होंने सौंसर में अपना मकान बनवाया है़ जबकि बिसेन इस मामले में कुछ आगे हैं़ वे अपनी पत्नी और स्वयं के नाम पर भी मकान क्रय कर चुके हैं़ बिसेन और उनकी पत्नी दोनों ही नगद रखने में पीछे नहीं हैं, जबकि नाना नगद रखने में पीछे हैं और उनकी पत्नी तो नगद रुपए रखती ही नहीं हैं़ नानाभाऊ मोहोड़ ने विधायक का चुनाव लड़ते वक्त निर्वाचन आयोग को जो संपत्ति का ब्यौरा दिया था उसके अनुसार उनके पास तब नकद 1,15,000 रुपए था और पत्नी के पास 20,000 रुपए नगद बताए थे़ इसके लिए वाहन के रुप में स्कार्पियो एवं हिरोडोण्डा बताए थे़ साथ ही सोना 25 तोला बताया था़ उन्होंने मांगरली गांव में 0.922 हैक्टेयर कृषि भूमि और यहीं पर एक मकान होना बताया था़ इसके बाद हाल ही में विधानसभा के बजट सत्र में उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्यौरा देते हुए यह बताया कि उनके पास नगद 45,000 रुपए , मांगरुली में 0.922 हैक्टेयर भूमि यही पर एक मकान है़ इसके अलावा एक मकान सौंसर में भी है़ सोना उनके पास 75 ग्राम और पत्नी के पास 470 ग्राम याने कुल साढ़े 54 तोला है़ वाहन के रुप में अब भी उनके पास एक स्कार्पियो है़ घरेलू सामान के रुप में 1,75,000 रुपए का है़ इसके अलावा भवन निर्माण का बैंक लोन 12,25,663 रुपए है़ इस तरह उनकी नगदी तो कम हुई है, मगर सोना के जेवरात बढ़ गए हैं और वे बैंक के कर्जदार भी हो गए हैं़ साथ ही उनकी पत्नी के पास नगद राशि अब कुछ नही है़ सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने निर्वाचन आयोग को जो आय का ब्यौरा दिया था उसके अनुसार उनके पास 5 लाख रुपए नगद और पत्नी के पास 2 लाख रुपए नगद थे़ वाहन के रुप में दो बुलेरो गाड़ी थी़ इसके अलावा सोना 20 ग्राम और चांदी 110 ग्राम थी़ जबकि उनकी पत्नी रेखा बिसेन के पास सोना 50 ग्राम और चांदी 120 ग्राम थी़ बालाघाट के गर्रा में कृषि भूमि और मकान था तो भोपाल के रिवेरा टाउन में भी उनका एक डुप्लेक्स मकान होना उन्होंने बताया था, साथ ही उस वक्त वे भी बैंक के कर्जदार थे़ हाल ही में बिसेन ने जो अपनी संपित्त का ब्यौरा दिया है उसके अनुसार अब उनके पास 4 लाख रुपए नगद एवं आधा दर्जन विभिन्न बैंक खातों में 8 लाख रुपए जमा होना बताया है़ साथ ही डेढ़Þ लाख रुपए की पालिसी 50 ग्राम सोना 110 ग्राम चांदी होना बताया है़ बालाघाट जिले के ग्राम गर्रा में मकान एवं कृषि भूमि बताई है़ जबकि बालाघाट में मकान होना भी बताया है़ इसके अलावा भोपाल के रिवेरा टाउन में डुप्लेक्स मकान के अलावा एक रिवाल्वर होना उन्होंने स्वीकार किया है़ बिसेन की पत्नी के पास अब नगद के रुप में 1.50 लाख रुपए हैं़ दो बैंक खातों में 5 लाख 7 हजार रुपए पौने छह लाख की पालिसी है़ उनके पास 200 ग्राम सोना और 50 ग्राम चांदी है़ बिसेन के पास वर्तमान में उनके नाम पर कोई वाहन नहीं है, लेकिन रिवाल्वर रखने का शौक मंत्री बनने के बाद उन्हें हो गया है़ कुल मिलाकर बिसेन ने निर्वाचन आयोग को जो ब्यौरा दिया था उसके बाद मंत्री बनने के पश्चात उन्होंने सोने-चांदी का लोभ तो नहीं दिखाया, मगर शस्त्र रखने का शौक जरुर वे करने लगे हैं़

जिले के रह गए मंत्री

भारतीय जनता पार्टी के महाजनसंपर्क अभियान प्रभारियों के सामने जो बातें सामने आई उनमें मंत्रियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं में रोष दिखाई दिया़ मंत्रियों के अलावा जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल का अभाव होना और पार्टी विधायकों एवं संगठन पदाधिकारियों के बीच तालमेल न होने की बातें भी सामने आई हैं़ हालांकि महाजनसंपर्क अभियान केवल नगरीय क्षेत्रों तक ही सिमटकर रह गया, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ता और प्रभारी नहीं पहुंच पाए़ भातीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश में 25 फरवरी से चलाए गए महाजनसंपर्क अभियान का समापन कल 20 मार्च को हो गया़ इस अभियान में जिलों के प्रभारियों के सामने जो बातें आई उसने पार्टी संगठन को चिंता में डाल दिया़ प्रभारियों द्वारा अपने प्रभार वाले जिलों की जनसंपर्क के दौरान मिली शिकायतें और उपलब्धियों के बारे में 23 एवं 24 मार्च को होने वाले समीक्षा बैठक में जानकारी देनी है़ इस बैठक में कई जिलों के जिला अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की नाराजगी भी सामने आ सकती है़ महाजनसंपर्क अभियान के लिए जिलो के प्रभारियों के सामने जो बातें आई उसमें सबसे चिंता में डालने वाले बात यह रही कि जनप्रतिनिधि, संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मंत्रियों की कार्यशैली से खासे खफा नजर आए़ इनका सीधा कहना था कि मंत्रियों द्वारा अपने जिलों और विशेषकर अपने विधानसभा क्षेत्रों की सुध ली जाती है़ इसके अलावा जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ता उपेक्षित ही रहते हैं़ मंत्रियों के अलावा कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों खासकर विधायकों की शिकायतें रही कि अफसर उनकी सुनते ही नहीं हैं़ अफसरों द्वारा कोई कार्यवाही विधायकों के द्वारा की गई अनुशंसा पर नहीं की जाती है़ कुछ जिलों में संगठन पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच गुटबाजी भी सामने आई, जिसके कारण कार्यकर्ता के काम ही नहीं हो पा रहे हैं़ कार्यकर्ता अपने और आम नागरिक के काम के लिए भटकता रहता है, मगर उसकी बात सुनने को कोई तैयार नहीं होता है़ खासकर प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल का अभाव इस महाजनसंपर्क अभियान के दौरान प्रभारियों को दिखाई दिया़ इस अभाव ने प्रभारियों को चिंता में डाल दिया है़ अब प्रभारियों ने अपने-अपने प्रभार वाले जिलों की रिपोर्ट तैयार करनी शुरु कर दी है़ यह रिपोर्ट वे समीक्षा बैठक में देंगे़ इस बैठक में जिला अध्यक्ष और संगठन मंत्रियों को भी बुलाया गया है़ इस बैठक में प्रदेश संगठन के सामने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल न होने के कारण कार्यकर्ता और आम नागरिक को जो परेशानी हो रही है सरकार को आने वाले चुनाव में किस तरह की चुनौती मिलेगी इस बात से रुबरु कराया जाएगा़ बालाघाट की प्रभारी और पूर्व राज्यसभा सदस्य अनुसूईया उइके ने बताया कि उन्हें कार्यकर्ता और आम नागरिक से जो भी शिकायतें मिली हैं, वे उसके बारे में संगठन को बताएंगे़ उन्होंने कहा कि आम आदमी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के कामों से तो संतुष्ट नजर आया, मगर योजनाओं के क्रियान्वयन नहीं होने से उसे योजनाओं को लाभ नहीं मिला है़ उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर कार्यकर्ता भी अधिकारियों से खफा नजर आए हैं तो कुछ स्थानों पर पार्टी में उभरे असंतोष को भी देखा गया़ मगर यह तो सभी राजनीतिक दलों में होता है़ इस अभियान के जरिए यह बात जरुर हमारे सामने आई कि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और कई क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं का सही तरह से क्रियान्वयन नहीं हुआ इसके पीछे क्या कारण है इसके बारे में हम समीक्षा बैठक में बताएंगे़ उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत यह जानकारी एकत्रित करना थी कि लोगों को सरकार की योजनाओं का कितना लाभ मिल रहा है, लोग सरकार के प्रति कैसा रुख रखते हैं़ हमने यह जानकारी ली और संगठन के सामने सारे बात रखेंगे़ बिजली की समस्या भी आई सामने महाजनसंपर्क अभियान के तहत जिला प्रभारियों और संगठन मंत्रियों के सामने बिजली की समस्या भी आई़ किसानों के अलावा आम आदमी ने इसकी शिकायत की़ यह शिकायतें मालवा, महाकौशल, नर्मदांचल, विंध्य, बुंदेलखंड अंचल में सर्वाधिक मिली़ किसानों ने तो बिजली के कारण उनकी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने तक की बात कही़ किसानों ने बताया कि जब उन्हें बिजली की आवश्यकता होती है तो सरकार बिजली उपलब्ध नहीं कराती है़ कई ग्रामीणों ने तो अनाब-शनाब बिजली के बिल दिए जाने और न भरने पर बिजली काटने की बातें भी बताई़ कई क्षेत्रों में सरपंच और सचिवों की शिकायतें भी की गई़ पार्टी कार्यकर्ताओं ने यहां तक आरोप लगाया कि सरपंच और सचिव मिलकर अपने हिसाब से काम करते हैं, उन्हें सरकार की चिंता नहीं है़ मजदूरों के भुगतान का मामला हो या फिर पंचायतों द्वारा कराए जाने वाले कार्यों का मामला वे अपने हिसाब से काम करते हैं़ सरपंच, सचिव के अलावा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से खफा कार्यकर्ता राज्य के बालाघाट, सिवनी, शिवपुरी, झाबुआ, सागर, दमोह जिलों में दिखाई दिए़ मुख्यमंत्री से संतुष्ट, मगर योजनाओं की जानकारी नहीं महाजनसंपर्क अभियान में जिलो के प्रभारियों के सामने यह बात भी सामने आई कि आम जनता के सामने एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की छवि अच्छी दिखी, मगर उनके द्वारा चलाई गई योजनाओं की जानकारी अब भी ग्रामीण अंचलों में नहीं दिखाई दी़ कई जिलों के ग्रामीणों से जब प्रभारियों ने योजनाओं का नाम लेते हुए यह जानना चाहा कि इस योजना का लाभ मिल रहा है या नहीं़ इसका जवाब ग्रामीणों द्वारा उन्हें ना में मिला़ विशेषकर अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्रों में तो ऐसे सरकार की कई योजनाओं की जानकारी का अभाव दिखाई दिया़ कुछ जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन न हो पाने की शिकायतें भी मिली़ वहां पर अफसरों को कार्यकर्ता ने निशाने पर रखा़

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

सांसद हुए आमने-सामने

भारतीय जनता पार्टी के दो सांसद एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं़ भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले आनन-फानन में सांसद अशोक अर्गल सहित तीन सदस्यों की सदस्यता समाप्त और एक सदस्य का नाम मतदाता सूची में नहीं होने का मामला तूल पकड़ गया है़ मामले को लेकर अर्गल ने अदालत की शरण ली है, वहीं वर्तमान राज्य मुख्य आयुक्त ने मामले की जांच कराने की बात कही है़ भारतीय जनता पार्टी के दो सांसद जीतेन्द्र बुंदेला और अशोक अर्गल एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं़ इस बार फिर भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के लिए जनवरी माह की 24 तारीख को वाले चुनाव को लेकर मामला गर्मा गया है़ पिछले तीन साल पहले जब इस पद के लिए चुनाव हुए थे, तब भी दोनों के बीच मामला गर्मा गया था़ चुनाव मैदान में अर्गल और बुंदेला आमने सामने थे, मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हस्तक्षेप के कारण मामला टल गया और अर्गल मैदान से हट गए थे़ पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार अधिसूचना जारी होने के पहले भारत स्काउट गाइड की कार्यकारिणी की बैठक में अशोक अर्गल सहित उनके दो समर्थकों चंद्रप्रकाश शिवहरे, महेन्द्र अग्रवाल की सदस्यता समाप्त करने और डी़एस़ राघव के नाम मतदाता सूची मे नहीं होने का फैसला कर डाला़ इस बात की खबर जब अर्गल और उनके समर्थकों को लगी तो मामले ने तूल पकड़ना शुरु कर दिया़ बात इतनी बड़ी की अर्गल और उनके समर्थकों ने एन चुनाव के पहले उन्हें अयोग्य घोषित कर सदस्य भी नहीं रहने दिया तो मामले को अदालत ले गए़ उधर जब मामला अदालत पहुंचने की खबर राज्य मुख्य आयुक्त जीतेन्द्र बुंदेला तक पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच बैठा कर इस बात से पल्ला छाड़ लिया कि अधिसूचना जारी हो गई है अब वे कुछ नहीं कर सकते़ हालांकि बुंदेला तर्क देते हैं कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही वे इस मामले में कुछ कह पाएंगे़ भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त और खजुराहो संसदीय क्षेत्र से भाजपा के सांसद जीतेन्द्र बुंदेला ने लोकमत समाचार से कहा कि जिस दिन कार्यकारिणी की बैठक थी वे बैठक में शामिल नहीं हुए़ वे गुजरात चुनाव के कारण और परिवार के आयोजन होने की वजह से बैठक में नहीं पहुंचे थे़ अर्गल का उनके पास जब पत्र आया तो उन्होंने इस मामले में जांच बैठा दी है़ जांच समिति जल्द ही रिपोर्ट देगी, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है़ वैसे इस मामले में अब अधिसूचना जारी हो चुकी है, इस कारण वे अब कुछ कर नहीं सकते हैं़ अयोग्य घोषित किए गए चंद्रप्रकाश शिवहरे का कहना है कि उन्हें जब अयोग्य घोषित कर सदस्य भी नहीं रहने दिया तो उन्होंने और सांसद ने मामले को अदालत तक पहुंचा दिया है़ फिलहाल अवकाश है, जनवरी माह के पहले सप्ताह तक ही अदालत इस मामले में कुछ कदम उठाएगी़

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

मिट्टी और पानी के लिए नमूने

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूनियन कार्बाइड कारखाने के समीप बनी बस्तियों में पानी खराब होने के मामले में परीक्षण करने के आदेश देने के बाद आज इंडियन इंस्टीटयूट आफ टाकसिक रिसर्च (आईआईटीआर) लखनऊ की टीम ने मिट्टी और पानी के नमूने एकत्रित किए हैं़ करीब दो दर्जन से ज्यादा नमूने इस चार सदस्यीय दल ने लिए हैं़ दल और संगठन दोनों ने 70 से ज्यादा सेम्पल लिए हैं़ राजधानी के गैस पीड़ितों द्वारा यूनियन कार्बाइड कारखाने के समीप बनी बस्तियों आरिफ नगर और जे़पी़नगर सहित करीब डेढ़Þ दर्जन बस्तियों मेें पीने के पानी की खराबी को लेकर कई मर्तबा मुद्दा उठाया, मगर जब सरकार ने इस मामलें ध्यान नहंी दिया तो संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले को पहुंचाया़ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करने के बाद यह आदेश दिए थे कि यहां की मिट्टी और पानी की जांच कराई जाए़ स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा लंबे समय से यह बात उठाई जा रही थी कि यूनियन कार्बाइड कारखाने परिसर में जो रसायन कचरे के रुप में पड़ा था उसके जहरीले होने से कारखाने के आस-पास की बस्तियों में पानी का पानी भी जहरीला सा हो गया है, इस पानी के पीने से लोग गंभीर भयावह बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं और कईयों की तो इस मामले में जान तक चली गई है़ संस्थाओं द्वारा मामले को लगातार निचली अदालत से उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने के बाद कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और यहां की मिट्टी और पानी के परीक्षण कराने के निर्देश दिए थे़ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आज इंडियन इंस्टीटयूट आफ टाकसिक रिसर्च (आईआईटीआर) लखनऊ की चार सदस्यीय टीम भोपाल पहुंची़ यह टीम डाक्टर वी़पी़शर्मा और एल़एऩश्रीवास्तव के नेतृत्व में भोपाल पहुंची है़ इस टीम ने सुबह से कारखाने परिसर और आस-पास बनी बस्तियों से मिट्टी और पानी के सैम्पल लेना शुरु किया़ शाम तक टीम द्वारा 30 मिट्टी और 7 सेम्पल पानी के लिए थे़ इतने ही सेम्पल गैस राहत भोपाल गैस पीड़ित संगठन ने लिए हैं़ संगठन इसकी जांच अपनी तरह से कराएगा़ यह टीम आज ही भोपाल से लखनऊ के लिए रवाना हो गई़ इसके बाद दोबारा एक और टीम के 15 अक्तूबर को भोपाल आने की खबर है़ बताते हैं कि आज के जो सेम्पल लिए हैं उनकी जांच के बाद आने वाली टीम जो जांच में सामने आएगा उस पर कार्य करेगी़ इसके बाद अपनी जांच रिपोर्ट तैयार करके सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी़ गैस पीड़ित संगठन की पदाधिकारी रचना ढ़Þीगरा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह दल आया था जिसने आज सेम्पल कलेक्सन का कार्य किया है़ यह दल लखनऊ जाकर सेम्पल की जांच करेगा़ इसके बाद 15 अक्तूबर को लखनऊ से ही एक दल के और आने की संभावना है़ लखनऊ से आए दल ने 30 मिट्टी के और 7 पानी के सेम्पल लिए हैं़ इतने ही सेम्पल हमारे संगठन ने भी लिए हैं़ हम अपने सेम्पलों की जांच अलग से कराएंगे़

1 नहीं 11 सीटें चाहिए मध्यप्रदेश से

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों से साफ कहा है कि उन्हें विधानसभा चुनाव में सरकार और लोकसभा की 1 नहीं 11 सीटें चाहिए़ मायावती ने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में संगठन के कार्यों की सराहना भी की और अधिक मजबूती के साथ मैदान में डटे रहते हुए भाजपा एवं कांग्रेस को टक्कर देने की बात कही़ बहुजन समाज पार्टी द्वारा मंगलवार को लखनऊ में आयोजित रैली में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से पहुंचे कार्याकर्ताओं की संख्या को देख बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती प्रसन्न तो हुई़साथ ही उन्होंने दोनों ही प्रदेशों में बसपा की सरकारें बनाना की बात पदाधिकारियों से कही़ मायावती ने रैली के दूसरे दिन बुधवार को कोर कमेटी की बैठक में प्रदेश के पदाधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि वे मध्यप्रदेश में संगठन के हो रहे कार्यों से खुश तो हैं, मगर जिस तरह से कार्य हो रहे हैं उसी तरह से प्रदेश में बसपा के पक्ष में परिणाम आने चाहिए़ मायावती ने कहा कि जिस तरह से मध्यप्रदेश में संगठन मजबूत हुआ है और बीते विधानसभा चुनाव एवं लोकसभा चुनाव में जो परिणाम आए हैं वे संतोषजनक तो नहीं, लेकिन फिर भी बसपा के ग्राफ को बढ़Þाने वाले ही साबित हुए हैं़ उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बसपा के वर्तमान में 7 विधायक और 1 सांसद हैं़ वे इससे संतुष्ट नहीं हैं़ अब प्रदेश में बसपा को सरकार बनाने के लिए काम करना चाहिए और लोकसभा में 1 नहीं बल्कि 11 सांसद मध्यप्रदेश से पहुंचना चाहिए़ लखनऊ से मध्यप्रदेश वापस लौटे कार्यकर्ता मायावती द्वारा प्रदेश संगठन के कामों की प्रशंसा करने पर खुश हैं, मगर इस बात को लेकर चिंतित भी है कि प्रदेश में सरकार बनाने के लिए वे अब किस तरह का कार्य करें़ प्रदेश के बसपा नेताओं की जल्द ही इस मामले को लेकर बैठक होनी है, इस बैठक में विधानसभा के 2013 एवं लोकसभा के 2014 के चुनाव के लिए वे रणनीति बनाएंगे़

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

संदेश पढ़गे शिक्षक

शिक्षक दिवस पर राज्य की स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस ने जो संदेश पढ़Þा, उसे अब विभाग शिक्षकों को पढ़Þने के लिए हर जिले में भेज रहा है़ इस संदेश को पहले तो हजारों की संख्या में प्रकाशित कराया गया, इसके बाद अब इसे विशेष वाहन और विशेष वाहक के जरिए हर जिले में भेजने की व्यवस्था शिक्षा विभाग ने की है, जिस पर लाखों का खर्च किया जाएगा़ राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों में शिक्षा का स्तर सुधारने से ज्यादा शिक्षकों के लिए काम करता नजर आ रहा है़ कभी विभाग संघ से जुड़ी किताबों को शिक्षकों को पढ़Þने की बात कहकर उन तक किताबें पहुंचाने का कहता है, विभाग कागजों पर निर्देश भी देता है, मगर निर्देशों पर अमल नहीं होते और न ही किताबें शिक्षकों तक पहुंच पाती है़ किताबों तक तो ठीक था अब स्कूल शिक्षा मंत्री ने एक कदम और आगे बढ़Þाकर नया फैसला सुना दिया, जिसके तहत अफसर इस काम में जुट गए़ स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस ने 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर जो संदेश का वाचन किया था वे उसे अब हर शिक्षक तक पहुंचाना चाहती है़ इसके पीछे मकसद क्या है यह तो विभाग के अफसर भी नहीं बता रहे हैं, मगर विभाग मंत्री के निर्देश पर अमल कर रहा है़ विभाग ने इसके लिए पहले तो संदेश को प्रकाशित कराया और अब उसे हर जिले में हर शिक्षक तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है़ सूत्रों के अनुसार विभाग द्वारा इसके यह तय किया गया कि 4 अक्टूबर तक राज्य के हर जिले में मंत्री के संदेश को शिक्षकों तक पहुंचा दिया जाए़ जिलों में पहुंचाने के लिए विभाग ने विशेष वाहन और विशेष वाहक का इंतजाम किया है़ राजधानी भोपाल से पहले यह संदेश संभाग मुख्यालय उज्जैन,इंदौर, भोपाल, होंशगाबाद, सागर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और शहडोल भेजे जाएंगे़ यहां से फिर विशेष वाहन और वाहक के जरिए संदेश को जिलों में और फिर जिलों में पदस्थ अफसर संदेश को शिक्षकों तक पहुंचाने का काम करेंगे़ विभाग द्वारा करीब 5 लाख से अधिक की संख्या में संदेश का प्रकाशन कराया गया है़