रविवार, 1 सितंबर 2013

सर्व समाज की ओर बरैया

बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूलसिंह बरैया ने भी अब प्रदेश में सर्वसमाज का नारा देते हुए विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में ताकत दिखानी शुरु कर दी है़ उन्होंने अब दूसरे दलों के साथ संपर्क करने के अलावा जोड़-तोड़ भी शुरु कर दी है़ कभी उमा भारती की टीम में युवा संगठन के रुप में उभरे जागो हिंद संगठन को अपने दल में मिलाकर बरैया ने भाजपा के लिए संकट खड़ा कर दिया है़ फूल सिंह बरैया इन दिनों पूरी ताकत के साथ विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में ताकत दिखा रहे हैं़ ग्वालियर-चंबल अंचल के अलावा वे मालवा और महाकौशल में भी अपने कदम बढ़Þा रहे हैं़ भाजपा छोड़ने के बाद श्री बरैया ने अपना अलग दल बहुजन संघर्ष दल बनाकर खुद संघर्ष किया और अब वे इस दल में दूसरे दलों को विलय करने में जुट गए हैं़ बरैया ने इस बार विधानसभा चुनाव में सर्वसमाज का नारा देते हुए सभी समाज को अपनी ओर आकर्षित किया है़ उन्होंने इसके लिए सबसे पहले अपने दल में कभी उमा भारती के समर्थक के रुप में युवा ब्रिगेड की कमान संभाल चुके दामोदर यादव के जागो हिन्द संगठन को अपने दल में मिलाकर युवाओं की फौज तैयार कर ली है़ इस संगठन को मिलाकर उन्होंने एक ओर जहां युवाओं को महत्व दिया है, वहीं सर्वसमाज का नारा देते हुए भाजपा के लिए संकट भी खड़ा कर दिया है़ दामोदर यादव उमा भारती की पार्टी भारतीय जनशक्ति में शामिल होकर कार्य कर चुके हैं़ इसके साथ ही उन्होंने अपना संगठन खड़ा किया था, और उमा भारती के निर्देश पर क्षिप्रा नदी के उत्थान के लिए अभियान की शुरुआत की थी़ इसके बाद जब उमा भारती भाजपा में शामिल हुई तो उन्होंने भाजपा में जाने के बजाए बहुजन संघर्ष दल की राह पकड़ी, जहां उन्हें राष्ट्रीय महासचिव तो बनाया ही साथ ही सेवढ़Þा विधानसभा क्षेत्र से उन्हें प्रत्याशी भी घोषित कर दिया गया़ श्री बरैया ने अब भाजपा और कांग्रेस की तर्ज पर युवाओं के सहारे युवाओं को आकर्षित करने का काम शुरु कर दिया है़ इसके साथ ही अब उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए बड़ी सभाएं लेना भी शुरु कर दिया है़ फिलहाल उनकी सभाएं ग्वालियर-चंबल अंचल के अलावा मालवा में चल रही है़ राजधानी भोपाल में वे सितंबर माह की 21 तारीख को भाजपा और कांग्रेस के लिए शक्ति प्रदर्शन कर चुनावी शंखनाद फंूकने की तैयारी कर चुके हैं़ 21 सितंबर को भोपाल के दशहरा मैदान पर श्री बरैया की एक बड़ी सभा होने जा रही है़ बरैया ने साफ संकेत दिए हैं कि वे सर्व समाज के नारे को बुलंद करते हुए प्रदेश में सभी समाज को समान रुप से महत्व देते हुए टिकट का वितरण करेंगे़ बरैया के इस सर्वसमाज के नारे के साथ ही उनके संपर्क में अब राज्य के कुछ अन्य छोटे दल भी हैं, जो जल्द ही उनके साथ गठबंधन कर या फिर विलय की रणनीति को अंजाम देंगे़

गुरुवार, 20 जून 2013

अन्ना की यात्रा, भाजपा में हड़कंप

समाजसेवी अन्ना हजारे की जनतंत्र यात्रा को लेकर मध्यप्रदेश भाजपा में हड़कंप सा मच गया है़ सत्ता और संगठन दोनों ही ने उनकी इस यात्रा से दूरी बना ली है़ संगठन की दूरी को देखते हुए भोपाल में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जनतंत्र मोर्चा को मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक ने अपने भवन ‘समन्वय भवन’ देने से मना कर दिया है़ वहीं राज्य मंत्रिमंडल के एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों में इस बात की बैचेनी हो रही है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर अन्ना की यह यात्रा उनके क्षेत्रों से गुजरेगी तो उनके लिए मुसीबत न बन जाए़
मध्यप्रदेश में समाजसेवी अन्ना हजारे की 4 जुलाई से निकलने वाली जनतंत्र यात्रा को लेकर एक ओर जहां जनतंत्र मोर्चा तैयारी में जुटा है, वहीं उसके लिए भाजपा संगठन और सत्ता परेशानी के कारण भी बन रहे हैं़ जनतंत्र यात्रा की स्वागत समिति के संयोजन डा़सुनीलम इन दिनों मध्यप्रदेश के उन स्थानों पर पहुंच रहे हैं, जहां से यह यात्रा निकलनी है़ वे वहां पर यात्रा की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं़ यात्रा के लिए उन्होंने भोपाल में राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के भवन ‘समन्वय भवन’ को अन्ना के इस यात्रा के दौरान भोपाल आगमन पर आयोजन के लिए मांगा तो उन्हें मना कर दिया़ बैंक के अध्यक्ष भंवरसिंह शेखावत ने उन्हें साफ कह दिया कि अन्ना के कार्यक्रम के लिए यह भवन नहीं मिल सकता है़
अन्ना के लिए संगठन के इशारे पर समन्वय भवन तो नहीं मिला, वहीं उन क्षेत्रों में भी यात्रा को लेकर भाजपा चिंतित हैं, जिन क्षेत्रों में भाजपा विधायक या मंत्री हैं़ यात्रा के तय मार्ग के मुताबिक राज्य के करीब एक दर्जन मंत्री ऐसे हैं जो इस यात्रा को लेकर चिंतित हैं़ अन्ना की यात्रा के दौरान मोर्चा से भ्रष्टाचार को लेकर जनसंगठनों से साक्ष्य सहित मामले अन्ना को देने की बात कही है़ बस यही बात मंत्रियों की चिंता का कारण है़ इसी वजह से भाजपा सत्ता और संगठन दोनों ही अन्ना की यात्रा से दूरी बनाए हुए हैं़ भाजपा संगठन इस मामले में पूरी तरह से मौन है़ न तो यात्रा को लेकर भाजपा का समर्थन दिया जा रहा है, न ही खुलकर विरोध किया जा रहा है, मगर अब तक जो भी कदम संगठन द्वारा उठाए जा रहे हैं वे इस मामले में यात्रा विरोधी ही नजर आ रहे हैं
यात्रा की भोपाल यात्रा के दौरान समन्वय भवन उपलब्ध न कराने को लेकर राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष भंवरसिंह शेखावत का कहना है कि जनमोर्चा की ओर से डा़सुनीलम ने उनसे दूरभाष पर चर्चा की थी़ मगर हम भवन राजनीति कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध नहीं कराते हैं हमें इस मामले में रिजर्व बैंक के नियमों का पालन करना होता है़ यह पूछे जाने पर की पूर्व में यहां राजनीतिक कार्यक्रम हुए हैं, अन्ना   की टीम ने ही एक कार्यक्रम समन्वय भवन में किया है़ उन्होंने कहा कि यह सच है, मगर फिलहाल बार हमने रिजर्व बैंक के नियमों के तहत भवन देने से मना किया है़

वे मंत्री जो हैं चिंतित* उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
* राज्य सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा
* ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल
* पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री गोपाल भार्गव
* चिकित्सा शिक्षा मंत्री अनूप मिश्रा
* सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन
* वन मंत्री सरताज सिंह
* नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर
* वित्त मंत्री राघवजी
* गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता
* मंत्री बिना विभाग तुकोजीराव पवार
* सामान्य प्रशासन मंत्री कन्हैयालाल अग्रवाल
* खाद्य राज्यमंत्री पारस जैन
* गृह राज्य मंत्री नारायण सिंह कुशवाह
* स्वास्थ्य राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया
* शिक्षा राज्य मंत्री नानाभाऊ मोहोड़
* नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री मनोहर ऊंटवाल
* आदिम जाति कल्याण राज्यमंत्री हरीशंकर खटीक
* कृषि राज्य मंत्री बृजेन्द्र प्रतापसिंह
 

दिल्ली से प्रदेश की नब्ज टटोल रहे मोहन प्रकाश


कांग्रेस में हुए फेरबदल के बाद मध्यप्रदेश के प्रभारी बनाए गए मोहन प्रकाश ने दिल्ली से ही प्रदेश की नब्ज जानने की कवायद शुरु कर दी है़ उन्होंने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया से मुलाकात कर प्रदेश के पूर्व प्रभारी हरिप्रसाद द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली़ वे प्रदेश  अगली रणनीति तय करने के बाद प्रदेश के दौरे पर आएंगे़ राजस्थान के रहने वाले मोहन प्रकाश के प्रदेश आते ही कांग्रेस के कर्नाटक पैटर्न पर चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गई   है़
कर्नाटक में कांग्रेस की विजय के शिल्पकार माने जाने वाले मोहन प्रकाश को मध्यप्रदेश की कमान सौंपकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने साफ संकेत दिए हैं केन्द्रीय नेतृत्व मध्यप्रदेश को गंभीरता से ले रहा है़ राहुल गांधी के निकट माने जाने वाले मोहन प्रकाश को प्रदेश की कमान सौंपकर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को भी यह संदेश दिया है कि वे एकजुट होकर पहले विधानसभा फिर लोकसभा चुनाव के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में दिखाई दें़ हालांकि मोहन प्रकाश की नियुक्ति के पीछे भी बिखरे नेताओं को एक करने की कवायद माना जा रहा है़ पूर्व में हरिप्रसाद को लेकर गुटबाजी के आरोप लगते रहे, जिसे राहुल गांधी ने स्वीकार किया और उन्हें हटाकर अपने निकटतम मोहन प्रकाश को प्रदेश की कमान सौंपी़ कहा यह भी जा रहा है कि नाराज कमलनाथ को भी इस नियुक्ति के सहारे साधा गया है़ कमलनाथ कैंप के सज्जन वर्मा और बाला बच्चन को भी राष्ट्रीय स्तर पर सचिव का प्रभार देकर कमलनाथ को प्रदेश में सक्रिय करने के प्रयास किए गए हैं, वहीं इस बात के कयास भी शुरु हो गए हैं कि इस नियुक्ति के साथ राहुल गांधी ने सभी बड़े नेताओं को भी इस बात का संकेत दे दिया है कि चुनाव में वे कर्नाटक की तर्ज पर नया कुछ करेंगे़ साथ ही प्रत्याशी चयन से लेकर चुनाव प्रचार अभियान तक में वे अपने स्तर पर कमान की जिम्मेदारी सौंपेंगे़
मोहन प्रकाश की नियुक्ति के साथ आज प्रदेश के नेता इस बात खोज में लगे रहे कि ये किस नेता के खेमें से हैं़ प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं दिग्विजयसिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया या फिर सुरेश पचौरी के निकट हैं, मगर नेता इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए कि मोहन प्रकाश किस खेमे से हैं़ कोई कमलनाथ तो कोई दिग्विजय सिंह को इस नियुक्ति के लिए जिम्मेदार बता रहा है़ वहीं मोहन प्रकाश ने दिल्ली से प्रदेश कांग्रेस की नब्ज टटोलना शुरु कर दी है़ उन्होंने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया से करीब आधा घंटे तक दिल्ली में चर्चा की और प्रदेश कांग्रेस के बारे में जाना़ उन्होंने पूर्व प्रभारी हरीप्रसाद द्वारा बनाई रणनीति के बारे में भी जाना़ बताया जाता है कि मोहन प्रकाश प्रदेश को लेकर रणनीति तय कर, उसके बाद मध्यप्रदेश के दौरे पर आएंगे़ वे इस वर्ष होने वाले चुनाव को लेकर जल्द ही अपने स्तर पर रणनीति तय कर उसी के अनुरुप संगठन को सक्रिय करेंगे़

शपथ पत्र देकर पाएं अन्ना का समर्थन

 मध्यप्रदेश यात्रा के दौरान जनसंगठनों से मांगेंगे भ्रष्टाचार के मामलेअन्ना हजारे मध्यप्रदेश में अपनी यात्रा के दौरान जहां जनसंगठनों से भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी लेंगे, वहीं वे लोकसभा चुनाव में उनका समर्थन मांगने वालों से एक शपथ पत्र भी लेंगे़ इस शपथ पत्र में प्रत्याशी को जीत के बाद संसद पहुंचने के पूर्व उस क्षेत्र की जनता को इस्तीफा देने की बात कहेंगे, जहां से वे विजय हुए हैं इस शपथ पत्र में प्रत्याशी को यह भी कहना होगा कि अगर संसद में अन्ना के 25 सूत्री कार्यक्रम के तहत वो बात नहीं उठा सका या सरकार से वे बात नहीं मनवा सका जनता उसका इस्तीफा स्वीकार कर ले़
समाजसेवी अन्ना हजारे की जनतंत्र यात्रा का मध्यप्रदेश में 5 चरण 5 जुलाई से शुरु होगा़ इस चरण में वे मध्यप्रदेश के 26 जिलों में यात्रा के दौरान घूमेंगे़ अन्ना के साथ पूर्व जनरल बीक़े़सिंह, जनतंत्र यात्रा के संयोजक विनोद सिंह और जनतंत्र यात्रा स्वागत समिति के प्रदेश संयोजक डा़ सुनीलम उपस्थित रहेंगे़ अन्ना की यात्रा का उद्देश्य व्यवस्था परिवर्तन के 25 कार्यक्रमों को लागू कराने के लिए जन जागरण करना है़ इसके अलावा लोगों से स्वयं जाकर मिलना है़ अन्ना की यात्रा मध्यप्रदेश में रीवा जिले से शुरु होगी, जो पूरी 26 जिलों में 15 दिनों तक चलेगी़ इस यात्रा के दौरान वे अपने 25 सूत्री कार्यक्रम के बारे में लोगों को बताएंगे और उनमें जागरुकता भी लाएंगे़ इसके अलावा भ्रष्टाचार का मुद्दा उनका मुख्य है, साथ ही प्रदेश के किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं, छात्रों, सूचना के अधिकार कार्यकर्ताओं एवं भूतपूर्व सैनिकों से वे मिलेंगे और उनकी बात सुनेंगे़ अन्ना हजारे प्रदेश में अपनी यात्रा के दौरान जनसंगठनों के पदाधिकारियों से भी मुलाकात कर उनसे प्रदेश में हुए भ्रष्टाचारों के बारे में जानकारी लेंगे और इन भ्रष्टाचारों को उठाने के लिए तमाम दस्तावेज भी वे लेंगे़ अन्ना ने जनसंगठनों से अपील भी की है कि वे उनकी यात्रा के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे तो उन्हें दें ही साथ ही जिस क्षेत्र में वे कार्य कर रहे हैं, उस क्षेत्र की वास्तविक स्थिति भी वे बताएं
अन्ना अपनी इस यात्रा के दौरान सभी वर्ग के लोगों के बीच पहुंचेंगे और लोगों से उनकी समस्याओं के बारे में जानेंगे़ इसके अलावा उन्होंने यह भी साफ कह दिया है कि लोकसभा चुनाव के लिए जो प्रत्याशी उनका समर्थन चाहते हैं उन्हें उनके 25 सूत्री कार्यक्रम के लिए एक शपथ पत्र उस क्षेत्र की जनता को देना होगा, जिस क्षेत्र से वे चुनाव लड़ने की मंशा रखते हैं़ इस शपथ पत्र में इन कार्यक्रमों को लागू कराने के लिए संसद में दबाव बनाने की बात कहनी होगी, साथ ही जनता को अपना इस्तीफा भी सौंपना होगा़ इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि अगर वह 25 सूत्री कार्यक्रम के लिए संसद में दबाव नहीं बना पाए तो जनता उसका इस्तीफा स्वीकार कर लें़ ऐसे प्रत्याशियों को ही अन्ना की टीम समर्थन करेगी और उसके क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर उस प्रत्याशी को विजयी बनाने का भरसक प्रयास करेगी़


झंडे, बैनर टोपी से स्वागत नहीं जनतंत्र यात्रा स्वागत समिति के प्रदेश संयोजक डा़ सुनीलम ने कहा कि अन्ना की जनतंत्र यात्रा के दौरान स्वागतकर्ताओं से यह साफ कहा जा रहा है कि पार्टीगत झंडे, बैनर और टोपियों से उनका स्वागत नहीं किया जाए़ इसके अलावा राष्ट्रीय झंडे से उनका स्वागत किया जाए तो उचित होगा़ उन्होंने बताया कि अन्ना के स्वागत के लिए सभी जिलों में स्वागत समितियों का गठन किया गया है, इसके अलावा अन्ना की यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करने वे स्वयं आज भोपाल से सीधी के लिए रवाना हो रहे हैं़ सीधी से वे उन सभी जिलों में जाएंगे, जहां अन्ना की यात्रा होगी़ इस यात्रा के तैयारियों की वे समीक्षा करेंगे़

अखिलेश के बल पर सीट बढ़Þाने की कोशिश

 सपा अध्यक्ष चुनाव के पूर्व  प्रदेश में उत्तरप्रदेश के नेताओं की कराना चाहते हैं सभाएंसमाजवादी पार्टी प्रदेश में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करिश्माई चेहरे के बल पर मध्यप्रदेश में अपनी सीटें बढ़ाने का प्रयास कर रही है़ समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव इस संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह से मिलकर इस आशय की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं
मध्यप्रदेश विधानसभा के हो रहे इस वर्ष के अंत में चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव हर तरह से यह प्रयास कर रहे हैं कि इस बार सपा की विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा सीटें हों़ इसके लिए उन्होंने जहां छोटे दलों के सहारे तीसरा मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ने की कवायद शुरु की है, वहीं वे अब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करिश्माई चेहरे के बल पर प्रदेश के युवा मतदाता को पार्टी की ओर मोड़ना चाहते हैं़ इसके लिए उन्होंने बकायदा कवायद भी शुरु कर दी है़ गौरी यादव ने पिछले दिनों अपने उत्तरप्रदेश प्रवास के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह से चर्चा कर इस बात के लिए उन्हें मना लिया है कि वे अखिलेश यादव को मध्यप्रदेश में सक्रिय करें इतना ही नहीं मुलायम से उन्होंने एक दर्जन मंत्रियों को भी मध्यप्रदेश में लगातार दौरे कर संगठन और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए कहा है़
श्री यादव की बात पर   मुलायम सिंह ने अपनी सहमति दे दी है, मगर अभी अखिलेश से इस संंबंध में कोई चर्चा नहीं हुई है़ बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष श्री यादव ने स्वयं इस संबंध में अखिलेश से चर्चा न कर इस संबंध में मुलायम सिंह को आगे लाने का प्रयास किया है़ बताया जाता है कि श्री यादव अपने इस कार्यकाल को अच्छा कार्यकाल साबित करने के प्रयास में जुटे हैं़ वे चाहते हैं कि उनके इस कार्यकाल में पार्टी के ज्यादा से ज्यादा विधायक विधानसभा पहुंचे तो संगठन में उनकी स्थिति और मजबूत हो साथ ही राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने वे ताकतवर दिखें़
सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने कहा कि उनकी मुलाकात पिछले दिनों पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह से हुई है़ उन्होंने अखिलेश यादव को मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अधिक से अधिक समय देने को कहा है़ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष इस संंबंध में गंभीर है और जल्द ही अखिलेश यादव से चर्चा करेंगे़

दागी अफसर को पीसीसीएफ बनवाने अड़े वन मंत्री सरताज

 शासन को भेजा प्रस्ताव, अफसरों ने रुकवायाराज्य के वन मंत्री सरताज सिंह वन महकमें के दागी अफसर आऱएऩ सक्सेना को पीसीसीएफ वाइल्ड बनाने मामले में अफसर और मंत्री आमने-सामने हो गए हैं़ अफसर नहीं चाहते कि सक्सेना को यह पद मिले, जबकि मंत्री ने शासन को प्रस्ताव भेजकर अपनी मंशा जता दी है़ फिलहाल मामला शासन के पाले में अटक गया है़ मुख्यसचिव और प्रमुख सचिव वन भी मंत्री के फैसले के खिलाफ हैं
वन विभाग के 1978 बैच के अधिकारी आऱएऩसक्सेना की पदोन्नति के मामले में वन मंत्री सरताज सिंह और शासन आमने-सामने हो गया है़ पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के पद पर पीक़े़शुक्ला के स्थान पर वन मंत्री अपने चहेते अफसर आऱएऩसक्सेना को पदोन्नत कर यह कुर्सी दिलाना चाहते हैं उन्होंने इसके लिए वन विभाग की ओर से प्रमुख सचिव वन के माध्यम से मुख्य सचिव आऱपरशुराम को एक प्रस्ताव भी भेज दिया है, मगर यह प्रस्ताव लेकर गए प्रमुख सचिव खुद इसका विरोध मुख्य सचिव के सामने कर आए़  बताया जाता है कि प्रमुख सचिव वन खुद सक्सेना को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ नहीं बनाना चाहते हैं उसके पीछे उनका तर्क साफ है कि सक्सेना से वरिष्ठता के आधार पर और भी अफसर हैं, जिन्हें यह मौका दिया जाना चाहिए़ मगर मंत्री सक्सेना को ही यह पद दिलाना चाहते हैं, उन्होंने मुख्य सचिव को भी अपनी मंशा से अवगत करा दिया है़
वन विभाग के अफसर भी इस मामले को लेकर अब लामबंद हो गए हैं इन अफसरों ने भी मुख्य सचिव को  अपनी मंशा से अवगत करा दिया है़ अफसरों ने सक्सेना के लोकायुक्त में चल रहे प्रकरण के बारे में भी शासन को जानकारी दे दी है़ अफसरों द्वारा यह बताया गया है कि सक्सेना जब डीएफओ के पद पर पदस्थ थे, तब वे आर्थिक अनियमितताओं के मामले में फंसे थे और मामला लोकायुक्त गया था जांच के बाद उन पर शासन को कार्यवाही के लिए लिखा गया था, मगर अब तक शासन ने कोई कदम नहीं उठाया़ इसके अलावा सक्सेना द्वारा अपनी पत्नी सुनीता सक्सेना डब्ल्यूडब्ल्यू एफ की छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश की प्रमुख को ग्रीन इंडिया मिशन के तहत गलत तरीके से अनुदान देने के मामले में भी फंसे हैं यह मामला भी लोकायुक्त के पास है़
 जल्दबाजी क्यों कर रहे मंत्रीराज्य में इस वर्ष हो रहे विधानसभा के चुनाव को लेकर लगने वाली आचार संहिता को देख मंत्री सरताज सिंह इस मामले को जून माह में ही निपटाना चाहते हैं़ शुक्ला सितम्बर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इस कारण सक्सेना को उनके स्थान पर सक्सेना को पदस्थ कर अपने चहेते अफसर को मंत्री यह पद दिलाना चाहते हैं़ अगर आचार संहिता के पूर्व वे ऐसा नहीं कर पाए तो सक्सेना को यह पद मिलना मुश्किल हैं, क्योंकि उनके रास्ते में उने वरिष्ठ अफसर रोढ़Þा बनेंगे, चुनाव के बाद अगर वन मंत्री हटे तो भी सक्सेना के लिए नुकसान ही होगा़ यही कारण है कि वन मंत्री सरताज सिंह इस मामले को लेकर गंभीर हैं और वे शासन के सामने अड़ गए हैं कि यह मामला जल्द निपटाया जाए, जबकि शासन इस मामले में मंत्री के प्रस्ताव को रोक कर बैठ गया है़

इंतजार जांच रिपोर्ट का, आदिवासी करेंगे विरोध

बैतूल जिले के चिचोली ब्लाक में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में  शादी के पूर्व युवतियों के कराए गए कौमार्य और गर्भ परीक्षण के मामले में आदिवासी लामबंद होने लगे हैं इस मामले में 90 आदिवासी युवतियों के साथ कराए गए इस परीक्षण की प्रशासन द्वारा कराई जा रही जांच का उन्हें इंतजार है़ आदिवासी इस जांच रिपोर्ट के बाद सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे़
बैतूल जिले के चिचोली ब्लाक के हर्दू गांव में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत हुई शादी के दौरान युवतियों के कौमार्य और गर्भ परीक्षण के मामले में आदिवासी लामबंद हो रहे हैं आदिवासियों का नेतृत्व करने वाले संगठन इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा की जा रही जांच का इंतजार कर रहे है आदिवासी श्रमिक संगठन और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी दोनों ही अपने-अपने स्तर पर इस मामले की जांच भी करा रहे हैं दोनों ही संगठनों ने इस मामले को आदिवासी युवतियों का अपमान माना है़ श्रमिक आदिवासी संगठन से जुड़े मंगलासिंग कोरकू का कहना है कि सरकार एक ओर  तो मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आदिवासी रीति रिवाज के साथ विवाह नहीं कराती है, वहीं इस तरह के परीक्षण कराकर आदिवासी युवतियों का अपमान भी करती है़
समाजवादी जन परिषद के अनुराग मोदी ने कहा कि इस मामले में जांच के आदेश भले ही जिला कलेक्टर ने दिए हैं, मगर यह केवल औपचारिकता का निर्वाह करने जैसा है़ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के दौरान आदिवासी युवतियों का कौमार्य और गर्भ परीक्षण का कार्य कलेक्टर की मंजूरी के नहीं हो सकता है़ उन्होंने इस घटना में ना सिर्फ जिले के आला अफसरों पर कार्यवाही की मांग की है, बल्कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से भी यह मांग कर डाली है कि वे आदिवासी समाज से इस मामले में माफी मांगे़
 गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुलजार सिंह   मरकाम ने इस मामले को आदिवासी समाज का अपमान बताया है़ उन्होंने कहा कि इस तरह का परीक्षण आदिवासी युवतियों का अपमान है़ इस योजना के तहत आदिवासी परंपरा के अनुसार विवाह भी नहीं होता है़ जब तक आदिवासी अपनी परंपरा के अनुरुप विवाह नहीं करता, तब तक उसका विवाह होना नहीं माना जाता है़ उन्होंने कहा कि हमने बैतूल जिला इकाई को इस मामले की वास्तविकता जानने को कहा है़ हम अपने स्तर से समाज के लोगों से जांच कराकर फिर अगला कदम उठाएंगे़ हमारा कदम जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ होगा, फिलहाल हम मामले में सरकार द्वारा कराई जा रही जांच का इंतजार कर रहे हैं