शासन को भेजा प्रस्ताव, अफसरों ने रुकवायाराज्य के वन मंत्री सरताज सिंह वन महकमें के दागी अफसर आऱएऩ सक्सेना को पीसीसीएफ वाइल्ड बनाने मामले में अफसर और मंत्री आमने-सामने हो गए हैं़ अफसर नहीं चाहते कि सक्सेना को यह पद मिले, जबकि मंत्री ने शासन को प्रस्ताव भेजकर अपनी मंशा जता दी है़ फिलहाल मामला शासन के पाले में अटक गया है़ मुख्यसचिव और प्रमुख सचिव वन भी मंत्री के फैसले के खिलाफ हैं
वन विभाग के 1978 बैच के अधिकारी आऱएऩसक्सेना की पदोन्नति के मामले में वन मंत्री सरताज सिंह और शासन आमने-सामने हो गया है़ पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के पद पर पीक़े़शुक्ला के स्थान पर वन मंत्री अपने चहेते अफसर आऱएऩसक्सेना को पदोन्नत कर यह कुर्सी दिलाना चाहते हैं उन्होंने इसके लिए वन विभाग की ओर से प्रमुख सचिव वन के माध्यम से मुख्य सचिव आऱपरशुराम को एक प्रस्ताव भी भेज दिया है, मगर यह प्रस्ताव लेकर गए प्रमुख सचिव खुद इसका विरोध मुख्य सचिव के सामने कर आए़ बताया जाता है कि प्रमुख सचिव वन खुद सक्सेना को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ नहीं बनाना चाहते हैं उसके पीछे उनका तर्क साफ है कि सक्सेना से वरिष्ठता के आधार पर और भी अफसर हैं, जिन्हें यह मौका दिया जाना चाहिए़ मगर मंत्री सक्सेना को ही यह पद दिलाना चाहते हैं, उन्होंने मुख्य सचिव को भी अपनी मंशा से अवगत करा दिया है़
वन विभाग के अफसर भी इस मामले को लेकर अब लामबंद हो गए हैं इन अफसरों ने भी मुख्य सचिव को अपनी मंशा से अवगत करा दिया है़ अफसरों ने सक्सेना के लोकायुक्त में चल रहे प्रकरण के बारे में भी शासन को जानकारी दे दी है़ अफसरों द्वारा यह बताया गया है कि सक्सेना जब डीएफओ के पद पर पदस्थ थे, तब वे आर्थिक अनियमितताओं के मामले में फंसे थे और मामला लोकायुक्त गया था जांच के बाद उन पर शासन को कार्यवाही के लिए लिखा गया था, मगर अब तक शासन ने कोई कदम नहीं उठाया़ इसके अलावा सक्सेना द्वारा अपनी पत्नी सुनीता सक्सेना डब्ल्यूडब्ल्यू एफ की छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश की प्रमुख को ग्रीन इंडिया मिशन के तहत गलत तरीके से अनुदान देने के मामले में भी फंसे हैं यह मामला भी लोकायुक्त के पास है़ जल्दबाजी क्यों कर रहे मंत्रीराज्य में इस वर्ष हो रहे विधानसभा के चुनाव को लेकर लगने वाली आचार संहिता को देख मंत्री सरताज सिंह इस मामले को जून माह में ही निपटाना चाहते हैं़ शुक्ला सितम्बर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इस कारण सक्सेना को उनके स्थान पर सक्सेना को पदस्थ कर अपने चहेते अफसर को मंत्री यह पद दिलाना चाहते हैं़ अगर आचार संहिता के पूर्व वे ऐसा नहीं कर पाए तो सक्सेना को यह पद मिलना मुश्किल हैं, क्योंकि उनके रास्ते में उने वरिष्ठ अफसर रोढ़Þा बनेंगे, चुनाव के बाद अगर वन मंत्री हटे तो भी सक्सेना के लिए नुकसान ही होगा़ यही कारण है कि वन मंत्री सरताज सिंह इस मामले को लेकर गंभीर हैं और वे शासन के सामने अड़ गए हैं कि यह मामला जल्द निपटाया जाए, जबकि शासन इस मामले में मंत्री के प्रस्ताव को रोक कर बैठ गया है़
वन विभाग के 1978 बैच के अधिकारी आऱएऩसक्सेना की पदोन्नति के मामले में वन मंत्री सरताज सिंह और शासन आमने-सामने हो गया है़ पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के पद पर पीक़े़शुक्ला के स्थान पर वन मंत्री अपने चहेते अफसर आऱएऩसक्सेना को पदोन्नत कर यह कुर्सी दिलाना चाहते हैं उन्होंने इसके लिए वन विभाग की ओर से प्रमुख सचिव वन के माध्यम से मुख्य सचिव आऱपरशुराम को एक प्रस्ताव भी भेज दिया है, मगर यह प्रस्ताव लेकर गए प्रमुख सचिव खुद इसका विरोध मुख्य सचिव के सामने कर आए़ बताया जाता है कि प्रमुख सचिव वन खुद सक्सेना को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ नहीं बनाना चाहते हैं उसके पीछे उनका तर्क साफ है कि सक्सेना से वरिष्ठता के आधार पर और भी अफसर हैं, जिन्हें यह मौका दिया जाना चाहिए़ मगर मंत्री सक्सेना को ही यह पद दिलाना चाहते हैं, उन्होंने मुख्य सचिव को भी अपनी मंशा से अवगत करा दिया है़
वन विभाग के अफसर भी इस मामले को लेकर अब लामबंद हो गए हैं इन अफसरों ने भी मुख्य सचिव को अपनी मंशा से अवगत करा दिया है़ अफसरों ने सक्सेना के लोकायुक्त में चल रहे प्रकरण के बारे में भी शासन को जानकारी दे दी है़ अफसरों द्वारा यह बताया गया है कि सक्सेना जब डीएफओ के पद पर पदस्थ थे, तब वे आर्थिक अनियमितताओं के मामले में फंसे थे और मामला लोकायुक्त गया था जांच के बाद उन पर शासन को कार्यवाही के लिए लिखा गया था, मगर अब तक शासन ने कोई कदम नहीं उठाया़ इसके अलावा सक्सेना द्वारा अपनी पत्नी सुनीता सक्सेना डब्ल्यूडब्ल्यू एफ की छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश की प्रमुख को ग्रीन इंडिया मिशन के तहत गलत तरीके से अनुदान देने के मामले में भी फंसे हैं यह मामला भी लोकायुक्त के पास है़ जल्दबाजी क्यों कर रहे मंत्रीराज्य में इस वर्ष हो रहे विधानसभा के चुनाव को लेकर लगने वाली आचार संहिता को देख मंत्री सरताज सिंह इस मामले को जून माह में ही निपटाना चाहते हैं़ शुक्ला सितम्बर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इस कारण सक्सेना को उनके स्थान पर सक्सेना को पदस्थ कर अपने चहेते अफसर को मंत्री यह पद दिलाना चाहते हैं़ अगर आचार संहिता के पूर्व वे ऐसा नहीं कर पाए तो सक्सेना को यह पद मिलना मुश्किल हैं, क्योंकि उनके रास्ते में उने वरिष्ठ अफसर रोढ़Þा बनेंगे, चुनाव के बाद अगर वन मंत्री हटे तो भी सक्सेना के लिए नुकसान ही होगा़ यही कारण है कि वन मंत्री सरताज सिंह इस मामले को लेकर गंभीर हैं और वे शासन के सामने अड़ गए हैं कि यह मामला जल्द निपटाया जाए, जबकि शासन इस मामले में मंत्री के प्रस्ताव को रोक कर बैठ गया है़
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