रविवार, 3 जनवरी 2016

आश्वस्त चौहान, दावेदार मौन

मुख्यमंत्री पर भरोसा है नंदु भैया को, कुलस्ते सहित अन्य दावेदार नहीं खोल रहे पत्ते

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए कल सोमवार को होने वाले चुनाव को लेकर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान दोबारा ताजपोसी को लेकर आश्वस्त हैं, वहीं अन्य दावेदार इस मामले पर अब मौन साधे हुए हैं. वे कल ही अपने पत्ते खोलेंगे. 
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए  कल होने वाले चुनाव को लेकर वैसे तो गहमागहमी का माहौल शांत नजर आ रहा है. दावेदार भी दो दिनों से मौन रहकर अपनी जमावट में जुटे हैं, मगर इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन के अलावा अन्य पदाधिकारियों की बैठक के बाद करीब-करीब यह तय माना जा रहा है कि चौहान के नाम पर सहमति बनाई गई है. अमित शाह खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष के होने वाले चुनाव को देखते हुए प्रदेशों में फिलहाल किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं.  शाह की सहमति के बाद मुख्यमंत्री की ओर से नंदकुमार सिंह चौहान को करीब-करीब यह आश्वासन मिल गया है कि अध्यक्ष पद के लिए उनकी दोबारा ताजपोशी तय है. यही वजह है कि चौहान अपने अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे और समर्थकों के साथ खण्डवा में धुनिवाले दादा के दरबार पहुंचकर मत्था टेका और चादर भी चढ़Þाई. यहां पर उन्होंने अपने समर्थकोें के साथ चर्चा भी की. 
दावेदार हुए मौन
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने वाले दावेदार अब शांत हो गए हैं. इन दावेदारों ने मौन रहकर अपनी जमावट शुरु की है,अब सोमवार को ही वे अपने पत्ते खोलेंगे. मण्डला से सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते प्रमुख दावेदारों में से थे, मगर आज वे मौन हैं. कुलस्ते ने लोकमत समाचार से चर्चा में कहा कि वे कल भोपाल पहुंचेंगे, इसके बाद क्या स्थिति बनती है, तभी वे कुछ कह पाएंगे. कुलस्ते के अलावा अन्य दावेदारों राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल, अरविंद भदोरिया भी मौन है. वहीं परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह और राजस्व मंत्री रामपाल सिंह का नाम भी इस पद के लिए चला है. इसके अलावा पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने भी संकेत दिए हैं कि वे भी इस पद के लिए दावेदार है. भार्गव ने जिला अध्यक्ष चयन प्रक्रिया के दौरान सागर जिला अध्यक्ष को लेकर नाराजगी जताई थी और कहा था कि संगठन चाहे तो वे अध्यक्ष बन जाएंगे.
तोमर हैं नाराज, झा ने किया समर्थन
केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नंदकुमार चौहान के नाम पर खुलकर सहमत नजर नहीं आ रहे हैं. वे अरविंद भदोरिया के लिए प्रयासरत थे. मगर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के यह कहने पर की भविष्य की स्थिति को देखते हुए उनकी पसंद का अध्यक्ष वे चाहते हैं. इसके बाद भी उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर की. इस मतदाता सूची से राष्ट्रीय नेताओं के नाम दूर रखे जाने से तोमर खफा है. वहीं झा ने चौहान को अपना समर्थन दिया है, मगर सोमवार को परिस्थिति क्या निर्मित होती है, इसे देखकर झा भी अंमित झणों में अपना फैसला बदल सकते हैं. यहां उल्लेखनीय है कि 2012 में जब झा का नाम भी चौहान की तरह तय माना जा रहा था, तब तोमर का चयन कर सभी को चौंका दिया था. इसके बाद से झा खुद नाराज हैं.


अध्यक्ष के लिए तेज हुईकवायद


नेताओं में बेचैनी, कहीं 2012 जैसी न बन जाए स्थिति
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए 4 जनवरी को होने वाले चुनाव को लेकर दावेदारों ने कवायद तो तेज की है, मगर खुलकर कोईदावेदार सामने नहीं आ रहा है. यही वजह है कि भाजपा नेता बैचेन नजर आ रहे हैं, उन्हें यह लगने लगा है कि कहीं एक बार फिर 2012 के चुनाव की पुनरावृत्ति न हो जाए.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए वैसे तो यह माना जा रहा है कि वर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के नाम पर सहमति बना ली जाए, मगर दावेदारों की सक्रियता इस समीकरण को बिगाड.ती नजर आ रही है. दावेदार सक्रिय हैं, वे अपने स्तर पर दावेदारी भी कर रहे हैं, मगर मौन रहकर. अब तक केवल सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते ही एक ऐसे दावेदार सामने आए जिन्होंने खुलकर दावेदारी दिल्ली में राष्ट्रीय नेताओं के सामने की है. उनके अलावा अन्य नेताओं में से कोई भी दावेदार खुलकर सक्रिय नजर नहीं आ रहा है. हालांकि वे दावेदारी कर रहे हैं और वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी बात रख भी रहे हैं. ये दावेदार अधिकतर दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेताओं से मेल-मुलाकात कर रहे हैं. वैसे इस मामले में चुनाव अधिकारी की नियुक्ति और मतदान के तारीख तय होने के बाद अब दावेदारों की कवायद भी तेज हुई है. साथ ही खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सक्रिय नजर आ रहे है. इंदौर में राष्ट्रीय संगठन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर हुईउनकी करीब 10 मिनटकी मुलाकात को इससे जोड.कर देखा जा रहा है. दोनों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, हालांकि किस नाम को लेकर चर्चा हुई इस बात का खुलासा नहीं हुआ है. 
वैसे फिलहाल मुख्यमंत्री की पसंद नंदकुमार सिंह चौहान ही बने हुए हैं. इसके अलावा संगठन महामंत्री अरविंद मेनन भी उनके साथ हैं, मगर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राज्यसभा सांसद प्रभात झा का साथ चौहान को नहीं है, यह माना जा रहा है. झा इस बार मौन रहकर 2012 में मिले झटके से उबरने का प्रयास कर सकते हैं. पिछले चुनाव में झा का नाम भी ठीक चौहान की ही तरह तय माना जा रहा था, मगर ऐन वक्त पर पासा पलटा और तस्वीर बदल गई. झा के स्थान पर तोमर का नाम आ गया. इसी तरह इस बार भी किसी अप्रत्याशित विस्फोट को संगठन के नेता होना मान रहे हैं. इसके पीछे उनका मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में जो शांति है, वह किसी तूफान का संकेत भी दे रही है.
 भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की है. इस दिन दोपहर 4 से 4.30 बजे तक नामांकन भरने का समय तय किया है. 5 बजे नामांकन वापस लेने का समय तय किया है. इसके बाद यह तय हो जाएगा कि अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन है. वहीं चुनाव अधिकारी रामदास अग्रवाल आज इंदौर प्रवास पर रहे. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष चुनाव को लेकर प्रदेश के नेताओं से चर्चाकी है. यह माना जा रहा है कि आज इंदौर में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा के बाद किसी एक नाम पर सहमति बनाने की कवायद भी शुरु हुई है. 
क्षेत्रवाद भी बन रहा मुद्दा
भाजपा संगठन में एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर क्षेत्रवाद का मामला उठते नजर आ रहा है. पिछले दिनों दिल्ली पहुंचे महाकौशल के नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कुछ और नेताओं से चर्चाकी. इस चर्चा में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से कहा कि लंबे समय से चंबल-ग्वालियर, मालवा, निमाड. को अध्यक्ष पद प्रतिनिधित्व मिला है. इस बार महाकौलश के अलावा विंध्य या बुंदेलखंड से अध्यक्ष पद के लिए किसी एक व्यक्ति के नाम पर सहमति बनाईजाए. वैसे महाकौशल से विनोद गोटिया इस पद के लिए दावेदार के रुप में सामने भी आए हैं. इसके अलावा विंध्य एवं बुंदेलखंड के नेता मौन रहकर दावेदारी कर हैं.

बुधवार, 23 दिसंबर 2015

होगा जिला अध्यक्षों के काम का आकलन


 कांग्रेस नये साल में बदलेगी डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिला अध्यक्ष

प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों के चार माह के काम काज का आकलन करेगी. यह आकलन ही यह बताएगा कि व्यक्ति पद पर बना रहेगा या नहीं. इस आकलन की रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा प्रदेश के राष्ट्रीय नेताओं को दी जाएगी, ताकि वे भी यह जान सकेंगे की उनका समर्थक पद पर रहने काबिल है या नहीं.
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद  जब विरोध के स्वर मुखरित हुए तो प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला टाल दिया था. इसके बाद जिला अध्यक्षों की बैठक में उन्हें जिला स्तर पर सक्रियता दिखाने को कहा गया था. अब प्रदेश अध्यक्ष नये साल में याने जनवरी माह के पहले सप्ताह में एक बैठक जिला अध्यक्षों की लेने जा रहे हैं. इस बैठक में जिला अध्यक्षों से पिछले चार माह में उनके जिलों किए गए कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन और अन्य गतिविधियां जिसमें जिला अध्यक्ष की सक्रियता दिखाई दे, वह रिपोर्ट साथ लाने को कहा जा रहा है. प्रदेश अध्यक्ष ने यह रास्ता इसलिए निकाला है कि ताकि जहां पर उन्हें जिला अध्यक्ष को बदलना है, वे वहां बदलकर किसी दबाव से बच जाएं. जिला अध्यक्ष अपने चार माह के कामकाज की रिपोर्ट बनाने में जुटे हैं. सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने यह इसलिए तय किया है कि वे जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अगर करते हैं तो विवादों से बच जाएं साथ ही जिला अध्यक्षों के कामकाज का आकलन भी किया जा सके. राजधानी में होने वाली जिला अध्यक्षों की इस बैठक प्रदेश पदाधिकारी जिला अध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट लेंगे. इसके बाद इस रिपोर्ट को प्रदेश अध्यक्ष यादव ने वरिष्ठ नेताओं खासकर प्रदेश  प्रभारी मोहन प्रकाश के अलावा दिग्विजयसिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी को भी भेजने की रणनीति तय की है. जिला अध्यक्षों के इस लेखा-जोखा की रिपोर्ट तैयार कराने के पीछे प्रदेश कांग्रेस का मकसद साफ है कि जिला इकाईयों को और अधिक सक्रिय किया जाए साथ ही जहां पर निष्क्रिय जिला अध्यक्ष हंै उन्हें बदला जाए.
बच जाएंगे वरिष्ठों के दबाव से
प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव जिन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, मगर वहां पर दिग्गज नेताओं के कारण वे नहीं बदल पा रहे हैं. इस स्थिति से बचने के लिए उन्होंने यह रास्ता निकाला है. जिला अध्यक्षों को लेखा-जोखा भी वे इसलिए वरिष्ठ नेताओं को भेजकर यह दिखाना चाहते हैं कि आपके समर्थक नेता जिले में कितने सक्रिय हैं. सूत्रों की माने तो इस रिपोर्ट के साथ वे उन जिलों के जिला अध्यक्षों की जानकारी भी वरिष्ठों देंगे, जहां से उनकी शिकायतें आई हैं. 
डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में बदले जाएंगे अध्यक्ष
प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के साथ ही यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे वर्तमान जिला अध्यक्षों में से करीब दो दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलना चाहते हैं, अगर उस वक्त विरोध न होता तो वे अध्यक्षों की नियुक्ति कर देते, मगर विरोध के कारण यह सूची अटक गई है. इसके बाद यादव ने अब फिर नये साल में जिला अध्यक्षों को बदलने का मन बनाया है, मगर इस बार वे पहले जिला अध्यक्षों के कामकाज का लेखा-जोखा देंखेंगे. इसी कामकाज के आधार पर ही यह तय होगा कि वर्तमान जिला अध्यक्ष बने रहेगा या नहीं. फिलहाल इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, राजगढ़, सीहोर, होशंगाबाद, विदिशा, उज्जैन सहित डेढ़Þ दर्जन जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी यादव कर चुके हैं.

अध्यक्ष को लेकर घमासान

सहमति से जिला अध्यक्ष निर्वाचन कराना चाहती है भाजपा, दिल्ली तक पहुंच रहे दावेदार
प्रदेश भाजपा में चल रहे संगठनात्मक चुनाव को लेकर अब जिला अध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों की सक्रियता तेज हो गई है. इस पद के लिए घमासान को देखते हुए संगठन ने वर्तमान जिला अध्यक्षों और चुनाव अधिकारियों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में इस बात पर सहमति बनाने का प्रयास किए जाएंगे कि जिला अध्यक्ष का निर्वाचन सहमति से हो.
भाजपा में संगठनात्मक चुनाव के तहत अब जिला अध्यक्षों के चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है. इस प्रक्रिया के शुरू होने के पहले ही पद के लिए दावेदारों का घमासान मच गया है. हर जिले में एक से ज्यादा दावेदार इस पद के लिए सामने आ रहे हैं. इस वजह से संगठन खुद अब चिंतित हो उठा है. जिला अध्यक्ष पद के लिए जब दावेदारों की दावेदारी बढ.ती नजर आईतो संगठन ने अब जिला अध्यक्षों और जिला चुनाव अधिकारियों की बैठक मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में बुलवाई है. इस बैठक में सभी जिलों की जानकारी मंगवाईगई है. साथ ही इस बैठक में संगठन इस बात की गाइड लाइन तय करना चाहता है कि जिन जिलों में चुनाव की प्रक्रिया होनी है, वहां सहमति से चुनाव कराए जाएं और मतदान की स्थिति निर्मित न हो. प्रदेश चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह के मुताबिक जिला अध्यक्ष निर्वाचन की प्रक्रिया इसी माह की 27-28 तारीख को कराईजानी है. प्रयास इस बात का है कि सभी जिलों में सहमति से जिला अध्यक्ष का निर्वाचन हो जाए. 
दूसरी ओर दावेदारों ने अपने आकाओं पर पद पाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है. दावेदार किसी भी रूप से इस पद को पाना चाहते हैं. कुछ दावेदार तो इसके लिए दिल्ली तक पहुंच गए और कुछ ने भोपाल में डेरा डाल रखा है. सबसे ज्यादा संकट भाजपा के लिए भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर शहर जिला अध्यक्ष का पद बन गया है. यहां पर दावेदारों की संख्या काफी है. इन शहरों में वर्तमान जिला अध्यक्ष और स्थानीय विधायक आमने-सामने होते नजर आ रहे हैं. विधायक अपने सर्मथक को जिला अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, तो वर्तमान अध्यक्ष अपने सर्मथकों को आगे बढ.ा रहे हैं. अध्यक्ष पद पाने के लिए दावेदारी कर रहे लोग अपने आकाओं के पास निरंतर पहुंच रहे हैं. जिला अध्यक्षों के निर्वाचन के बाद इस महीने में सांसदों और विधायकों की बैठक भी आयोजित की जा रही है. इस बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर चर्चा की जाएगी. इसके बाद अगले माह भाजपा को नया अध्यक्ष भी मिल जाएगा. इन जिलों में नए चेहरों की तलाश
भोपाल, सीहोर, राजगढ., विदिशा, छिंदवाड.ा, बैतूल, होशंगाबाद, भिंड, बड.वानी, आगर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, नीमच, रतलाम, अलीराजपुर, गुना, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर नगर, ग्वालियर ग्रामीण, सागर, टीकमगढ., पन्ना, रीवा, सीधी,सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, जबलपुर नगर, जबलपुर ग्रामीण में संगठन नया चेहरा जिला अध्यक्ष के रूप में लाना चाहता है.
वहीं रायसेन, खरगोन, खंडवा, मंदसौर, धार, शिवपुरी,अशोक नगर, अनुपपूर, सिवनी में मौजूदा अध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी सौंपे जाने का संगठन ने करीब-करीब मन बना लिया है. जबकि सतना में जिला अध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया जा रहा है.इसी तरह की स्थिति सागर की भी है. यहां पर वर्तमान जिला अध्यक्ष के पक्ष में परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह हैं, जो चुनाव नहीं कराना चाहते हैं. मगर अन्य नेता यहां पर चुनाव कराने का मन बना चुके हैं.

लामबंद हो रहे पांच दल

गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाईदल प्रदेश में एक साथ करेंगे हर जिले में संघर्ष
प्रदेश में हाल ही में हुए लोकसभा के उपचुनाव में एक होकर ताकत दिखाने का प्रयास कर चुके पांच राजनीतिक दलों ने अब एक और साझा कार्यक्रम बनाया है. ये दल अब एक साथ 2018 को लक्ष्य बनाकर प्रदेश के हर जिले में संघर्षकरेंगे. इन दलों के प्रदेश प्रमुखों ने तय किया है कि इस दौरान वे जनता के बीच पहुंचकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अब तक प्रदेशहित के लिए क्या किया इसकी जानकारी देंगे. 
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में हाल में हुए उपचुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे से दूरी बनाकर चलने वाले पांच राजनीतिक दल एक हुए और उपचुनाव लड.ा. इसके बाद उनका हौसला कुछ ज्यादा बढ.ता नजर आने लगा है. अब इन पांच दलों जनता दल यू, माकपा, भाकपा, राष्ट्रीय समानता दल और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने यह तय किया कि वे प्रदेश में अब अपनी नींव को मजबूत करेंगे. अलग-अलग होकर चुनाव लड.ने के बजाय संगठित होकर वे चुनाव लडे.ंगे. इन दलों के प्रदेश प्रमुखों ने राजधानी में हाल ही में एक बैठक की और बैठक में रतलाम-झाबुआ उपचुनाव की समीक्षा की. समीक्षा के बाद यह तय किया गया कि चुनाव लड.ने के साथ-साथ वे अब संगठित होकर जनता के साथ मिलकर प्रदेश सरकार और कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंकेंगे. इसके लिए वे जल्द ही रणनीति तय करने जा रहे हैं.
बैठक में यह तो तय हो गया कि अब वर्ष2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से रणनीति बनाकर काम किया जाए. इसके लिए तय यह किया गया कि हर जिले में एक मंच पर ये दल एक साथ बैठकर संघर्षकरेंगे. हर जिले में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ बिगुल फूंकेंगे. जनता के बीच जाकर उन्हें यह बताने का प्रयास करेंगे. कि भाजपा और कांग्रेस ने अब तक प्रदेश हित में कितना और कैसे काम किया. इसके अलावा निम्न और मध्यमवर्गीय तबके लिए ये दल कितने काम करने में सफल रहे हैं. 
राष्ट्रीय स्तर पर भले ही ये दल बिखरे नजर आ रहे हों, मगर मध्यप्रदेश में इन दलों ने एकजुटता दिखाने का जो प्रयास किया है वह भविष्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को चिंता में डालने का काम करेंगे. इन दलों ने जनता के बीच जाकर दलित व पिछड.ों पर हो रहे अत्याचारों के मामले पर मुहिम छेड.ने की रणनीति बनाई है और अब जल, जंगल और जमीन की लड.ाईको ये जनता के बीच ले जाकर तेज करेंगे. विशेष कर इन दलों की रणनीति आदिवासी और पिछडे. वर्ग बाहुल्य वाले जिलों में संघर्ष तेज करने की है. 
जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव का कहना है कि हमने सबसे पहले गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर पिछला विधानसभा चुनाव लड.ा. हालांकि परिणाम हमारे पक्ष में नहीं रहा, लेकिन हम मजबूत होकर उभरे. जहां भी हमारे प्रत्याशी मैदान में थे, हमें पूर्व की अपेक्षा ज्यादा मत मिले. यादव ने कहा कि अब हम प्रदेश में गठबंधन कर अपना प्रभाव प्रदेश में दिखाएंगे. जिस दल का जिस क्षेत्र में प्रभाव है, हम उस क्षेत्र में उस दल की ताकत हो और बढ.ाएंगे. इसके लिए एक एजेंडा जल्द ही तैयार किया जाएगा.
 माकपा के प्रदेश सचिव बादल सरोज का कहना है कि प्रदेश की जनता में भाजपा और कांग्रेस को लेकर लगातार नाराजगी बढ. रही है. प्रदेश का मतदाता अब मजबूत विकल्प की तलाश कर रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में हम अब संगठित होकर चुनाव लड.ने की तैयारी कर चुके हैं. रतलाम-झाबुआ में हमने पहला चुनाव लड.ा. अब मैहर में होने वाले उपचुनाव में हम मजबूती के साथजनता के बीच पहुंचेंगे. हमे विश्‍वास है यहां पर नतीजा चौंकाने वाला होगा. इसके साथ ही प्रदेश भर में हम एक साथ संघर्ष करेंगे.