बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

पटेल ने मजबूर किया था भोपाल, हैदराबाद के निजामों को रियासत विलय के लिए: शिवराज





मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर जम्मू कश्मीर का मामला भी सरदार वल्लभ भाई पटेल देखते तो कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में नही जाता. भोपाल के नवाब और हैदराबाद के निजाम ने गड़बड़ करने की कोशिश की तब लौह पुरुष सरदार पटेल का ही प्रताप था की इन रियासतों को विलय के लिए मजबूर होना पड़ा.
आजाद भारत के पहले गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रालय के सामने वल्लभभाई पटेल पार्क में सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यकर्ता राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई.   इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को एक बनाए रखने का काम लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था.  भारत का वर्तमान स्वरूप सरदार पटेल के अथक प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने देश की पांच सौ रियासतों को मिलाने का काम किया था. भोपाल के नवाब और हैदराबाद के निजाम ने गड़बड़ करने की कोशिश की तब लौह पुरुष सरदार पटेल का ही प्रताप था की इन रियासतों को विलय के लिए मजबूर होना पड़ा.
मुख्यमंत्री ने कहा दुर्भाग्य था कि कश्मीर का मामला सरदार पटेल के पास नही था. यदि जम्मू कश्मीर का मामला भी सरदार वल्लभ भाई पटेल देखते तो कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में नही जाता. चौहान ने कहा कि लौह पुरुष सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता के प्रतीक है. आज स्टैच्यू आॅफ यूनिटी का लोकार्पण गुजरात की धरती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों हो रहा है जो पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है.
 इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाते हुए कहा कि हम संकल्प करे कि अपने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनायें रखने में हम अपने आप को समर्पित करेंगे. जरूरत पड़ी तो अपने देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देंगे लेकिन देश की एकता और अखंडता को कभी टूटने नही देंगे.

भाजपा महिला मोर्चा ने मांगे 57 टिकट, भाजपा हुई चिंतित


मध्यप्रदेश में भाजपा में चल रही टिकट को लेकर माथापच्ची के बीच दावेदारों द्वारा किए गए शक्ति प्रदर्शन ने भाजपा को चिंता में डाले रखा है. वहीं भाजपा की चिंता तब बढ़ गई जब महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष लता ऐलकर ने पार्टी से इस बार चुनाव में महिला मोर्चा को 24 फीसदी टिकट दिए जाने की मांग कर डाली है. महिला मोर्चा द्वारा 57 महिलाओं को टिकट दिए जाने की मांग का पत्र भी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को सौंपा है.
मध्यप्रदेश भाजपा में इस बार टिकट वितरण को लेकर लगातार नई-नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. भाजपा पर संघ का तो दबाव है ही, साथ ही भाजपा के लिए दावेदारों की संख्या इस बार कुछ ज्यादा है. एक सीट पर भाजपा के सामने 4 से 6 दावेदार सामने आए हैं. दावेदारों ने प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन तक कर डाला. भाजपा द्वारा इन दावेदारों को भाजपा शांत भी नहीं कर पाई थी कि भाजपा के सामने नई मुसीबत यह बन गई कि भाजपा महिला मोर्चा ने भी अपने महिलाओं के लिए पार्टी से 24 फीसदी टिकट दिए जाने की मांग कर डाली. महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष लता ऐलकर ने इस मांग का पत्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को दिया है. इस पत्र में उन्होंने जिक्र किया है कि इस बार टिकट वितरण में महिला महिलाओं को अधिक से अधिक स्थान दिया जाए. ऐलकर ने पत्र में कहा है कि भाजपा इस चुनाव में 57 महिलाओं को टिकट दें. 
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भाजपा की 22 महिला विधायक है, इनमें से वर्तमान में पांच महिला विधायक माया सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, अर्चना चिटनिस, कुसुम महदेले एवं ललिता यादव वर्तमान में मंत्री है.  पार्टी सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों में माया सिंह का ग्वालियर पूर्व सीट पर विरोध हो रहा है. इसके अलावा छतरपुर से ललिता यादव का विरोध भी किया जा रहा है.  संगठन के सर्वे में भी यह सीट कमजोर मानी गई है, फिर भी महिला मोर्चे की सूची में उनका नाम रखा गया है. पन्ना से कुसुम महदेले की जगह आशा गुप्ता के लिए टिकट की सिफारिश महिला मोर्चा ने की है. बाकी सभी महिला विधायकों को फिर उम्मीदवार बनाने की सिफारिश की गई है.
इन महिलाओं को टिकट दिए जाने की सिफारिश
महिला मोर्चा द्वारा भोपाल के गोविंदपुरा से बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर, बालाघाट से महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष लता ऐलकर, शिवपुरी से यशोधरा राजे सिंधिया, ग्वालियर पूर्व से मायासिंह, बुरहानपुर से अर्चना चिटनिस, छतरपुर से ललिता यादव, हटा से उमा देवी खटीक, बड़ामलहरा से रेखा यादव शहडाले से प्रमिला सिंह, पन्ना से आशा गुप्ता, सिहोरा से नंदनी मरावी, बैरसिया से मोहिनी शाक्य, सुरखी से पारुल साहू, पृथ्वीपुर से अनीता सुनील नायक, मनावर से रंजना बघेल, चाचौड़ा से ममता मीना, अशोक नगर से गीता जाटव, पंधाना से योगिता बोरकर, इंदौर क्रमांक-चार से मालिनी गौड़, रतलाम से संगीता चारेल, होशंगाबाद जिले में राजो मालवीय को टिकट दिए जाने की सिफारिश की है.




कपड़ा मंत्री मेरी बहन, 12 हजार साड़ियां मंगवाकर बटवाऊंगा

 कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का वीडियो हुआ वायरल, कांग्रेस ने की शिकायत

मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि कपड़ा मंत्री उनकी बहन है, मैंने 10 हजार साड़ियां मंगवाई है, ये साड़ियां क्षेत्र में बटवाऊंगा. कांग्रेस ने इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग को की है.
मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री बिसेन का यह कहते हुए एक वीडियो वायरल हुआ है. इस वीडियो को लेकर कांग्रेस ने इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से की है. शिकायत विशाल बिसेन ने कहा कि मंत्री के इस वीडियो में वो अपने अथवा अपनी बेटी के चुनाव की रणनीति बता रहे हैं, जिसमे उनके द्वारा कहा गया है कि केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी उनकी बहन है और वे सूरत गुजरात से दस हजार प्रिंटेड साड़ियां मंगवाकर जिनकी कीमत तीस लाख रुपए होगी वह क्षेत्र में बटवाएंगे. साथ ही उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि किस तरीके से मंडी निधि से निर्माण कार्यों एवं कृषि महाविद्यालय एवं मेडिकल कालेज की आड़ में करोड़ों रुपए कमाए गए है एवं भविष्य में कमाएं जाएंगे. इसके अलावा किस तरीके से चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के समतुल्य बनने के लिए भविष्य के लोकसभा चुनाव लड़कर एवं जीतकर केंद्रीय मंत्री बना जाएगा. उन्हें यह भी कहते दिखाई एवं सुनाई पड़ रहा है कि वो किस तरीके से सैकड़ो करोड़ो में ठेका करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से केंद्रीय कृषि मंत्री बनने का काम करेंगे.
एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि एवं प्रदेश सरकार में मंत्री द्वारा आगामी चुनावों में धनबल का उपयोग करने की बात कहना लोकतांत्रिक मयार्दाओं का हनन है और भ्रष्टाचार में कमाए गए करोड़ों रुपए के आधार पर राजनीति में पद हासिल करने की बात करना यह स्पष्ट करता है कि आगामी चुनावों में गौरीशंकर बिसेन अथवा उसकी पुत्री मौसम हरिनखेड़े चुनावों में आचार संहिता और निर्वाचन प्रणली का हनन करने की तैयारी में है. कांग्रेस ने इस वीडियो को लेकर शिकायत की है कर गौरीशंकर बिसेन पर तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग की है. साथ ही बिसेन की पुत्री  मौसम हरिनखेड़े को आगामी चुनाव लड़ने हेतु आयोग्य घोषित किया जाए.

सोनिया के नाम दिग्विजय का फर्जी पत्र वायरल

 टिकट दिलाने का किया जिक्र, दिग्विजय ने बताया फर्जी

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह का सोनिया गांधी के नाम लिखा एक पत्र वायरल हुआ है. इस पत्र में सिंह ने 57 प्रबल दावेदारों को टिकट दिलाने की बात कही है. सिंह ने इस पत्र को फेसबुक और ट्वीटर पर जारी कर फर्जी बताया है. उन्होंने कहा कि  यह पत्र मैंने नहीं लिखा है.
सिंह ने खुद आज अपने फेसबुक और ट्वीटर एकाउंट पर एक पत्र डाला है. सिंह ने इस पत्र को फ्राड बताया है. उन्होंने कहा है कि यह पत्र मैंने नहीं लिखा है. सोनिया गांधी के नाम सिंह द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि मैं राहुल गांधी और आप तक 57 प्रबल दावेदारों के नाम पहुंचा रहा हूं. यह लोग सालों से पार्टी के साथ जुड़े हैं और मध्यप्रदेश कांग्रेस के अंदर बने किसी भी गुट से नाता नहीं रखते हैं. इन्होंने सालों से केवल पार्टी के हित में काम किया है और आगे भी करेंगे. शायह यही वजह है कि उन्हें मौका न दिया जने का डर खा रहा है. मेरा आपसे अनुरोध है कि विगत 3-4 चुनावों की तरह बाहर से आए अन्य पार्टियों के नेताओं की जगह हम इस बार पार्टी और हमारी विचारधारा से जुड़े पुराने लोगों को आगे आने का मौका दें.
पत्र में उल्लेख किया गया है कि आपको पता है कि 6 महीने तक पैदल नर्मदा परिक्रमा करने के बाद भी मैंने पार्टी के हित में इस चुनाव से खुद को दूर रखा है. प्रदेश के नेताओं द्वारा पूरी तरह उपेक्षा किए जाने और कार्यकर्ताओं एवं मीडिया द्वारा उठाए गए सवालों के बाद भी मैं अपने निर्णय पर अड़ा रहा, परंतु जब सुनने में आया कि राज्य चुनाव समिति, टिकट वितरण प्रक्रिया को धंधे की तरह चला रही है, तो मुझे बहुत पीड़ा हुई और आपको यह पत्र लिखने का विचार आया. 

दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों पर टिकी नजर, टिकट को लेकर संशय

पत्ते नहीं खोल रहे दोनों नेता, लोकसभा के बजाय विधानसभा लड़ाने पर पार्टियों का जोर

मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के दोनों पूर्व अध्यक्षों नंदकुमार सिंह चौहान और अरुण यादव को भाजपा और कांग्रेस इस बार लोक सभा के बजाए विधानसभा चुनाव में मैदान में  उतार सकती है. दोनों ही नेता भी इस बात को दबी जुबान से स्वीकार तो कर रहे हैं, मगर अरुण यादव इसके लिए तैयार नजर नहीं आते हैं. नंदकुमार सिंह चौहान की करीब-करीब सहमति इस बात को लेकर है. 
मध्यप्रदेश में इस बार विधानसभा के पहले प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल काफी उलझन महसूस कर रहे हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने सांसदों को और लोकसभा चुनाव हारे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का फैसला लिया है. नंदकुमार सिंह चौहान खंडवा संसदीय क्षेत्र से सांसद है, भाजपा उन्हें खण्डवा जिले के मांधाता विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारना चाहती है. वहीं वर्तमान विधायक लोकेन्द्र सिंह इसका विरोध कर चुके हैं, मगर वे यह कहते हैं कि अगर पार्टी का निर्णय होगा तो वे स्वीकार करेंगे. नंदकुमार सिंह चौहान का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से विधानसभा चुनाव लड़ने की मंशा नहीं जताई है, मगर पार्टी अगर उन्हें मैदान में उतारेगी तो विधानसभा चुनावा लड़ेंगे. 
भाजपा के अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव को भी कांग्रेस मांधता सीट से ही चुनाव मैदान में उतारना चाहती है, मगर यादव उसके लिए तैयार  नहीं है. यादव यहां पर राजपूत समाज के मतदाताओं की अधिकता के कारण  पूर्व विधायक राजनारायण सिंह पूरनी  को मैदान में उतारने की तैयारी में है. वैसे राजनारायण सिंह भी खुद इस बार चुनाव न लड़कर यहां से उनके पुत्र  उत्तम पाल सिंह को मैदान में उतारना चाहते हैं. यादव के छोटे भाई सचिन यादव कसरावद से विधायक है. इस वजह से भी वे विधायक के बजाय लोकसभा का चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं. वैसे मांधता सीट पर कांग्रेस की ओर से नारायण पटेल और परमजीत सिंंह नारंग का नाम भी सामने आया है. दोनों ही अपनी दावेदारी कर चुके हैं. नारंग को सिंधिया समर्थक माना जाता है, जबकि राजनारायण सिंह दिग्विजय समर्थक है. 
विजय शाह अपने पुत्र को सौंपेंगे विरासत!
भाजपा द्वारा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान को विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लेती है तो इस बार विजय शाह का हरसूद विधानसभा से चुनाव लड़ने पर संशय है. हालांकि अभी पार्टी ने शाह को इस तरह से कोई इशारा नहीं दिया है. माना जा रहा है कि शाह को विधानसभा चुनाव लड़ाकर पार्टी लोकसभा चुनाव के वक्त उन्हें लोकसभा के लिए खंडवा-बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतार सकती है. इस स्थिति में शाह अपने पुत्र दिव्यशक्ति शाह को हरसूद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बना रहे हैं. वैसे माना जा रहा है कि इस स्थिति में शाह की पत्नी और खंडवा की पूर्व महापौर शाह का भी संगठन आगे ला सकता है. फिलहाल भावना शाह का इरादा पुत्र को हरसूद विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारने का है.

भाजपा के पूर्व सांसद के बेटे ने ली आप की सदस्यता


 आम आदमी पार्टी के बढ़ते जनाधार को देखते हुए अन्य दलों के दिग्गज नेताओं का आप से जुड़ने का सिलसिला लगातार जारी है. इसी क्रम में आज भाजपा के दिग्गज नेता और सतना के दो बार सांसद रहे रामानंद सिंह के बेटे राजवंश सिंह ने आप की सदस्यता ग्रहण की है.  इसके अलावा बसपा के प्रदेश महासचिव रहे विदय राज मालवीय ने भी आप का दामन थामा है.  साथ ही बैगा समाज के नेता और वरिष्ठ समाजसेवी गिरधारी बैगा ने भी आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली.
आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आज तीनों नेताओं को पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने पार्टी की सदस्यता दिलाई. सदस्यता लेने के लिए रामानंद सिंह के बेटे राजवंश तो नहीं आए, मगर उन्होंने अपने बेटे अनुराग को भेज कर यह पुष्टि मीडिया के सामने की कि उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है.पारिवारिक कारणों से राजवंश सिंह कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, उनके प्रतिनिधि के रूप में बेटे अनुराग सिंह मौजूद थे.  अनुराग ने कहा कि हमारा परिवार बरसों से राजनीति के माध्यम से समाजसेवा कर रहा है. मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी ही एकमात्र उम्मीद प्रदेश वासियों के लिए है. इस पार्टी से जुड़कर हम क्षेत्र के विकास और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की अवधारणा को मजबूत करेंगे. 
बसपा में छात्र संगठन के प्रदेश सचिव और प्रदेश महासचिव रह चुके विद्यराज फिलहाल आदि महाराजा बली पुनुरोत्तथान कल्याण संघ के अध्यक्ष हैं. उन्होंने कई सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं और पदयात्राएं भी की हैं. इस मौके पर विद्यराज मालवीय ने कहा कि आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश में बदलाव की राजनीति कर रही है.  भाजपा और कांग्रेस ने लगातार प्रदेश को लूटा है और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है. आम आदमी पार्टी इस लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली एकमात्र पार्टी है. इसलिए राजनीतिक रूप से अब पार्टी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे.  
गिरधारी बैगा ने बताया कि वे लंबे समय से राजनीति और समाजसेवा में हैं, लेकिन किसी दल से सीधे तौर पर नहीं जुड़े रहे हैं. आम आदमी पार्टी के सिद्धांत और विचारधारा से प्रभावित होकर वे आप की सदस्यता ले रहे हैं.

गौशाला खोलने के हमारे वचन पर दुखता है पेट


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आज सवालों की श्रृंखला में प्रदेश के गौ-धन में कमी आने के मामले को लेकर शिवराज सरकार पर करारा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार गौ माता के नाम पर हल्ला को खूब मचाती है, मगर लगातार गौ-धन की कमी पर कुछ नहीं करती. उन्होंने कहा कि हम अगर पंचायत में गौशाला खोलने का वचन दें तो इनका पेट दुखने लगता है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि भाजपा के लोग गौ-माता के नाम पर खूब हल्ला मचाते हैं. हम हर पंचायत में गौ-शाला खोलने का वचन दें, तो इनके पेट दुख जाते हैं. कमलनाथ ने कहा कि मामा सरकार की पोल खोल रही है मोदी सरकार की लाइव स्टाक सेंसस की रिपोर्ट ,जो यह बताती है कि  18 वीं सेंसस में मध्यप्रदेश में गौ-धन की संख्या में भारी कमी आई है. मध्यप्रदेश में 18 वीं सेंसस में 2 करोड़ 19 लाख गौधन था, जो 5 सालों में कम होकर 1 करोड़ 96 लाख रह गया. यानी मामा के शासनकाल में 23 लाख 13 हजार गौ-धन खत्म हो गया. उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को  जवाब दीजिए देना चाहिए कि  23 लाख 13 हजार गौ-धन कहां गया? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भैंसों की संख्या 91 लाख 29 हजार से कम होकर 81 लाख 87 हजार रह गई. मामा को जवाब देना चाहिए कि 9 लाख 41 हजार भैंसें कहाँ गायब हो गयीं? उन्होंने कहा कि सभी तरह के पशुधन में 43 लाख 62 हजार की कमी आई है. क्या मध्यप्रदेश में अवैध कत्लखाने चल रहे हैं ? इतना ही नहीं, शिवराज सिंह की सरकार ने हमारे राज्य की देशी प्रजातियों को खत्म करने का काम किया है. मध्यप्रदेश में 26 लाख 79 हजार देशी प्रजाति के पशु खत्म हो गए.  क्या यह सही है कि आपने प्रावधान तो गौ शाला के लिए प्रति गाय लगभग 17 रुपए किया, मगर 2 रु भी खर्च नहीं किए ? उन्होंने कहा कि 2013-14 में सालाना 608 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 66 पैसे,  2014-15 में सालाना 635 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 73 पैसे,  2015-16 में सालाना 591 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 61 पैसे,  2016-17 में सालाना 577 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 58 पैसे, 2017-18 में सालाना 679 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 86 पैसे.  कमलनाथ ने पूछा है कि क्या गौ माता का खाना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?