रविवार, 21 अगस्त 2022

आदिवासी अंचलों में लगेगी चौपाल, सरकार की गिनाएंगे नाकामी

कांग्रेस की आदिवासी वोट बैंक साधने की रणनीति


मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलांे ने विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर मैदानी सक्रियता बढ़ाना षुरू कर दिया है। कांग्रेस अब आदिवासी वोट बैंक को साधने की कवायद में जुट गई है। कांग्रेस ने फैसला किया है कि वह आदिवासी अंचलों में जाकर चौपाल लगाएगी और सरकार की नागामी को गिनाएगी।
प्रदेश में भाजपा की आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटों पर बढ़ती सक्रियता को देख अब कांग्रेस ने भी इन सीटों पर फोकस कार्यक्रम करने की रणनीति तय की है। कांग्रेस को इस बात की ंिचता है कि कहीं उसके हाथ से यह वोट बैंक छीटक न जाए। वैसे राष्ट्रपति चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस के विधायकों ने झटका देकर क्रॉस वोटिंग की है, उससे वह अब तक उबर नहीं पाई है। इसके चलते अब कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ-साथ आदिवासी वर्ग के मतदाता को साधने की रणनीति पर काम करना शुरू किया है। कांग्रेस ने तय किया है कि प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लोगों पर हो रहे अत्याचार और आदिवासियों की अन्य समस्याओं को लेकर उनके बीच पहुंच जाए। इसके लिए अब उसने आदिवासी अंचलों में चौपाल लगाने का फैसला किया है।
कांग्रेस का आदिवासी विभाग भगवा ब्रिगेड की मॉब लिंचिंग सरीखे मुद्दों के जरिए 89 ब्लॉकों में सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की तैयारी शुरु कर रहा है। कांग्रेस आदिवासी विभाग के अध्यक्ष और विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने बताया कि नेमावर, सिवनी, लटेरी जैसी हिंसक घटनाओं पर अब तक पीड़ितांे को इंसाफ नहीं मिला है। हम प्रदेष के आदिवासी अंचलों में जाकर आदिवासियों के साथ चौपाल कार्यक्रम आयोजित करेंगे और उनके बीच ही उनकी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करेंगे। इस दौरान सरकार की नाकामियों को भी गिनाया जाएगा। बाद में आदिवासी वर्ग की समस्याओं को लेकर प्रदेष स्तर पर आंदोलन भी किए जाएंगे।

जोमैटो ने मांगी माफी, हटाया विज्ञापन

महाकाल थाली विवाद पर गृह मंत्री ने दिए थे जांच के निर्देश


महाकाल की थाली वाले विज्ञापन को लेकर फूड कंपनी जोमैटो ने माफी मांगी है। साथ ही विज्ञापन को भी हटा दिया हैं। महाकाल मंदिर के पुजारियों के विरोध के बाद मध्यप्रदेष के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उज्जैन एसपी को वीडियो की जांच करने के निर्देष दिए थे।
दरअसल, ऑनलाइन फूड डिलेवरी कंपनी जोमैटो ने अपने विज्ञापन में महाकाल मंदिर उज्जैन से जोड़ते हुए महाकाल थाली पर एड बनाया है। कंपनी का यह विज्ञापन फिल्म अभिनेता ऋतिक रोशन ने किया है। विज्ञापन में फिल्म एक्टर ऋतिक रोशन कह रहे हैं कि थाली का मन किया, उज्जैन में हैं, तो महाकाल से मंगा लिया। इस विज्ञापन को देखने के बाद से उज्जैन में महाकाल मंदिर के प्रबंधन ने जोमैटो कंपनी और विज्ञापन में अभिनय करने वाले ऋतिक रोशन से माफी मांगने की मांग करते हुए विज्ञापन को तत्काल प्रभाव से बंद करने की अपील की हैं।  इस विवाद को लेकर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस वायरल वीडियो पर बयान देते हुए कहा कि एसपी उज्जैन को वीडियो की सत्यता जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। गृहमंत्री ने कहा कि शुरुआती दौर में वीडियो मॉर्फ लग रहा है।
कंपनी ने दी सफाई
विरोध के बाद जोमैटो कंपनी ने विज्ञापन को हटा लिया और माफी भी मांगी है। जोमैटो ने अपनी सफाई में कहा है कि यह विज्ञापन उनके भारत भर में जारी कैंपेन का हिस्सा है। इसमें वह स्थानीय तौर पर प्रसिद्ध फूड आउटलेट्स के सबसे अधिक चर्चित मेन्यू को प्रमोट कर रहे हैं। हम उज्जैन के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं। इस विज्ञापन को बंद कर दिया गया है। हमारा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। हम इसके लिए माफी मांगते हैं।
 

महाकाल थाली विवाद, एसपी को दिए जांच के निर्देश


अभिनेता ऋतिक रोशन के कथित महाकाल की थाली वाले वीडियो को लेकर मामला गर्मा गया है। इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उज्जैन एसपी को वीडियो की जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रथम दृष्टया यह वीडियो मॉर्फ लग रहा है। 

दरअसल, ऑनलाइन फूड डिलेवरी कंपनी जोमैटो ने अपने विज्ञापन में महाकाल मंदिर उज्जैन से जोड़ते हुए महाकाल थाली पर एड बनाया है। कंपनी का यह विज्ञापन फिल्म अभिनेता ऋतिक रोशन ने किया है। विज्ञापन में फिल्म एक्टर ऋतिक रोशन कह रहे हैं कि थाली का मन किया, उज्जैन में हैं, तो महाकाल से मंगा लिया। इस विज्ञापन को देखने के बाद से उज्जैन में महाकाल मंदिर के प्रबंधन ने जोमैटो कंपनी और विज्ञापन में अभिनय करने वाले ऋतिक रोशन से माफी मांगने की मांग करते हुए विज्ञापन को तत्काल प्रभाव से बंद करने की अपील की हैं।  

इस विवाद को लेकर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री  मिश्रा ने इस वायरल वीडियो पर बयान देते हुए कहा कि एसपी उज्जैन को वीडियो की सत्यता जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। गृहमंत्री ने कहा कि शुरुआती दौर में वीडियो मॉर्फ लग रहा है। इस वायरल वीडियो में ऋतिक रोशन महाकाल थाली ऑर्डर करने की अपील कर रहे हैं। तो वहीं महांकाल मंदिर के पुजारियों ने जोमैटो के विज्ञापन पर आपत्ति की है।

शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

भाजपा, अबकी बार दो सौ पार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा हार गए तो जीतने की तैयारी शुरू कर दो

मुख्यमंत्री  शिवराज   सिंह चौहान ने कहा कि हार गए तो जीतने की तैयारी शुरू कर दो, गिरो और कपड़े छाड़ों और चल दो, क्योंकि हार से मन पर असर नहीं पड़ता। अबकी बार तय करो, दो सौ पार।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात आज प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित एक बैठक के दौरान कही। दरअसल प्रदेश कार्यालय में आयोजित कुशाभाऊ ठाकरे की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने इस दौरान बंद कमरे में नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी की। इस बैठक में उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव को लेकर नया नारा अबकी बार दो सौ पार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हार गए तो जीतने की तैयारी ष्षुरू कर दो, गिरो और कपड़े छाड़ों और चल दो, क्योंकि हार से मन पर असर नहीं पड़ता। अबकी बार तय करो, दो सौ पार। बैठक में सभी को संभलकर बयानबाजी देने की नसीहत भी दी गई।
जिसने पार्टी का फैसला नहीं माना, उसे भुगतना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं देखता हूं, मै घमंडी तो नहीं हो गया। मैं हमेशा अपने आप को तोलता रहता हूं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए नसीहत देते हुए कहा कि मैं सबसे दो टूक कहना चाहता हूं कि जिन्होंने पार्टी के फैसले को नहीं माना उसे भुगतना होगा। बता दें कि इस बार के निकाय और पंचायत चुनाव में बागी नेताओं की लंबी सूची हैं, जिसने पार्टी के फैसले को न मानते हुए बगावत की थी।
जीत-हार सभी परिस्थितियों में एक समान रहे स्वर्गीय ठाकरे
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि जो हर परिस्थिति में एक समान हो वही मुझे प्रिय है। कुशाभाऊ ठाकरे का जीवन इसका अनुपम उदाहरण है। वह जीत-हार सभी परिस्थितियों में एक समान रहे और संगठन को गढ़ते रहे। जब डॉ. मुरली मनोहर जोशी  श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहराने गए तब हजारों कार्यकर्ताओं के जोश को आदरणीय कुशाभाऊ ठाकरे के एक वाक्य ने अनुशासित कर दिया था। उन्होंने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे का जीवन संगठन को गढ़ने और कार्यकर्ताओं के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उनके साथ अनेकों स्मृतियां हैं, जब उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए स्वयं भी छोटा से छोटा काम करने में भी परहेज नहीं किया।

शुक्रवार, 12 अगस्त 2022

सामाजिक सम्मेलन कर वोट बैंक साधने की तैयारी में कांग्रेस

28 से शुरू होगा अलग-अलग समाजों के सम्मेलन आयोजित करने का सिलसिला


प्रदेश में कांग्रेस अब समाजों का साधने की तैयारी कर रही है। इसकी शुरूआत 28 अगस्त को सिंधी समाज के सम्मेलन के साथ होगी। कांग्रेस की इस कवायद को भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी करना माना जा रहा है। 

कांग्रेस ने अब 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। मैदानी मोर्चा पर वह पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना चाहती है। इसके चलते अब समाजों के सम्मेलन कर भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने इस रणनीति के तहत 28 अगस्त को राजधानी भोपाल में सिंधी समाज का सम्मेलन आयोजित किया है। सम्मेलन में सिंधी समाज के प्रबोद्धजनों को भी आमंत्रित किया गया है। 

सम्मेलन को कांग्रेस के भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी माना जा रहा है, सिंधी समाज भाजपा का कोर वोटर माना जाता है, इंदौर भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में सिंधी समाज का प्रभाव मजबूत है। ऐसे में कांग्रेस में बसे इन वोटरों को साधने की तैयारी में जुटती नजर आ रही है। 

बताया जा रहा है कि अगले 2 महीने में कांग्रेस कोरी, रजक ,सोनी और विश्वकर्मा समाज का सम्मेलन आयोजित करेगी। इन सम्मेलनों में कांग्रेस हर समाज को उचित प्रतिनिधित्व देने का आश्वासन देगी। साथ ही जो समस्याएं सम्मेलनों के जरिए निकलकर आएंगी, उन्हें अपने वचन पत्र में ष्षामिल कर लोगों को आश्वस्त किया जाएगा कि कांग्रेस इन समस्याओं को दूर करेगी।  

रविवार, 3 जुलाई 2022

मंच पर नहीं मिल रहा दिग्गजों को स्थान, बढ़ रही नाराजगी

नरोत्तम, प्रज्ञा और अब अनूप मिश्रा हुए खफा


प्रदेश भाजपा में लंबे समय से भाजपा संगठन की कार्यशैली के चलते भाजपा के कद्दावर नेताओं को मुख्यमंत्री और अन्य कार्यक्रमों में मंच पर स्थान नहीं मिल रहा है। इसके चलते भाजपा नेताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हाल ही में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान भाजपा की सांसद प्रज्ञा सिंह और फिर अब पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा की नाराजगी सामने आई है। 

प्रदेश में भाजपा संगठन और वरिश्ठ नेताओं के बीच तालमेल कुछ गढ़बढ़ाया सा नजर आ रहा है। लंबे समय से अपनी हो रही उपेक्षा के चलते वैसे तो प्रदेश के कई वरिश्ठ नेता खफा हैं और कई बार सोशल मीडिया पर इसका विरोध भी करते नजर आए हैं। मगर सार्वजनिक मंचों पर अपने ही क्षेत्रों में जब संगठन इनकी उपेक्षा करता है तो इनकी नाराजगी और बढ़ जाती है। हाल ही में ग्वालियर नगर निगम के चुनाव के दौरान पार्टी के संकल्प पत्र का विमोचन समारोह में भी ऐसी ही नाराज देखने को मिला। यहां पर मंच पर सभी दिग्गज नेताओं को स्थान तो मिला, मगर पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा को मंच पर स्थान नहीं दिया गया। इससे नाराज होकर वे नीचे पहली कतार में लगी कुर्सी पर जाकर बैठ गए। उन्हें वहां बैठा देख अन्य भाजपा नेता भी उनके पास आकर बैठ गए। इस दौरान वे खुद को उपेक्षित और अपमानित होना महसूस करते रहे। बाद में कार्यक्रम के दौरान ही नाराज होकर वे चले गए। मामले ने इतना तूल पकड़ा की ग्वालियर के ब्राहम्णों ने मोर्चा खोल दिया। हालांकि बाद में महापौर प्रत्याशी सुमन ष्शर्मा को पता चला तो वे कार्यक्रम स्थगित कर मिश्रा के घर पर पहुंची और पैर पड़कर माफी मांगती रही। मिश्रा को मनाने पहुंची सुमन को काफी देर तक मिन्नतें करनी पड़ी साथ ही आंसू तक बहाने पड़े। बाद में कहीं जाकर मिश्रा माने और गुस्सा छोड़ा। इसके बाद भाजप नेताओं ने चैन की सांस ली। 

गृह मंत्री भी हो चुके हैं नाराज


  • संगठन द्वारा वरिश्ठ नेताओं की उपेक्षा किए जाने का यह कोई पहला अवसर नहीं था। इसके पहले फरवरी माह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पौधारोपण कार्यक्रम को लेकर पार्टी ने एक कार्यक्रम रखा था, जिसमें मंच पर नरोत्तम मिश्रा के लिए कुर्सी नहीं रखी गई थी। मंच पर खुद के लिए कुर्सी नहीं देख मिश्रा नाराज हो गए और जनता के पीछे जाकर बैठ गए थे। इसके बाद भाजपा के जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी उन्हें मनाने पहुंचे तो उन्हें भी जमकर फटकार सुनने को मिली।  गृहमंत्री ने मंच पर आने से मना कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा तब उनकी नाराजगी दूर हुई और वो मंच पर आकर बैठे। 

सांसद ने भी जताई थी नाराजगी

भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह भी नगरीय निकाय के संकल्प पत्र के विमोचन अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मंच पर कुर्सी न मिलने से नाराज हो गई थी। वे भी बगीचे में लगी बैंच पर


जाकर बैठ गई थी। इस दौरान उनके समीप केवल उनके समर्थक ही नजर आए थे, मगर भाजपा नेताओं ने उनसे दूरी बनाए रखी थी। हालांकि मीडिया ने जब उनसे यह पूछा कि स्वास्थ्य के चलते वे यहां बैठी है, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, मगर उनके चेहरे के हॉव-भाव संगठन के प्रति नाराजगी जताते रहे। 


सोमवार, 30 मई 2022

भाईचारा बनाए रखने निर्विरोध निर्वाचन पर शिवराज का जोर

मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में समरस पंचायतों पर जोर है। वे चाहते हैं कि पंचायतों में चुनाव के दौरान लड़ाई-झगड़े ज्यादा होते हैं, इससे भाईचारा पर प्रभाव पड़ता है। इसके लिए प्रदेश में पंचायत चुनाव में समरस पंचायत याने



निर्विरोध निर्वाचन पर जोर दिया जाए और अधिक से अधिक पंचायतों में पदाधिकारियों का निर्वाचन निर्विरोध हो। मुख्यमंत्री ने इसके लिए ऐसी पंचातयों को पुरस्कृत करने भी की घोषणा की है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में लोगों के बीच प्रेम, भाईचार और समरसता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। वे इसके लिए लगातार पंचायतों को लेकर चुनाव में समरस पंचायतों पर जोर देकर लोगों को इस बात के लिए प्रेरित कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव याने गांव की सरकार में अधिक से अधिक पंचायतों में बिना चुनाव कराए निर्विरोध पदाधिकारियों का निर्वाचन हो। इससे झगड़े तो कम होंगे साथ ही समरसता भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अधिकारियों के साथ बैठक भी की और इस बात पर जोर भी दिया कि समरस पंचायतों को लेकर काम किया जाए।
भाईचारे में न आए कमी
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव उत्सव के समान हैं। लोकतंत्र के इस विशाल आयोजन में आपसी भाईचारे, प्रेम और समरसता में किसी भी तरह की कमी नहीं आए, इसलिए निर्विरोध निर्वाचन को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। अतः समरस पंचायतों और विकास की दृष्टि से आदर्श ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। ऐसी ग्राम पंचायतें, जहाँ निर्विरोध और सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न होंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।
गांवों का भला होगा तो अच्छा होगा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि पंचायत के चुनाव में कई बार लड़ाई झगड़ा बहुत बढ़ती है, एक कोशिश यह हो जाए की कुछ पंचायत ऐसी हो जाएं समरस पंचायत वहां चुनाव नहीं होंगे हम मिलकर तय करेंग। ताकि इन समरस पंचायतों में कुछ सुविधाएं हम देंगे। जैसे उस पंचायत में जितने भी हितग्राही हैं विभिन्न योजनाओं के सभी को एक साथ लाभान्वित कर देंगे आउट ऑफ द वे जाकर। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे गांव में हम गरीब कल्याण और बाकी योजनाओं को शत प्रतिशत सैचुरेट कर देंगे, आप इसके लिए उन्हें प्रेरित करें. गांव का भला हो जाएगा तो अच्छा रहेगा।
काम कठिन, पर कोशिश करें
मुख्यमंत्री अधिकारियों से कहा कि मैं मानता हूं कठिन काम है लेकिन, कई जगह हो सकता है और जहां हो सकते हैं वहां आप लोग पूरी कोशिश करिए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री और विधायकों को भी इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि वे पंचायतों में निर्विरोध चुनाव के लिए प्रेरित करे सके।  
सरपंच के निर्विरोध निर्वाचन पर 5 लाख रूपए
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी पंचायत में सरपंच का निर्वाचन अगर निर्विरोध रूप से किया जाता है तो उस पंचायत को 5 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। संपूर्ण पंचायत अर्थात समस्त पंच और सरपंच निर्विरोध निर्वाचित होते हैं तो पंचायत को 7 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरपंच पद के लिए वर्तमान निर्वाचन और पिछला निर्वाचन निरंतर निर्विरोध रूप से होने पर पंचायत को 7 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
सभी पदों पर महिलाओं के निर्विरोध निर्वाचन पर 15 लाख रूपए
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि अगर पंचायत में सरपंच एवं पंच के सभी पदों पर महिलाओं का निर्वाचन होता है तो पंचायत को 12 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार पंचायत में सरपंच एवं पंच के सभी पदों पर महिलाओं का निर्वाचन निर्विरोध रूप से होने पर पंचायत को 15 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।