सरकारी कागजों में भले ही सडक परिवहन को प्रदेश सरकार बंद कर चुकी है, लेकिन सपनि अब भी सरकार के लिए मुसीबत ही बना हुआ है. हाल ही में उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए फैसले ने सरकार को परेशानी में डाल दिया है. अब सरकार इस निर्णय को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाकर स्टे लाने की तैयारी में जुटी है, वहीं कर्मचारी सरकार को स्टे न मिले इसके लिए प्रयास कर रहे हैं.
राज्य सरकार द्वारा सडक परिवहन निगम को भले ही बंद करने की बात कहकर कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी तो कुछ को निकाल दिया, मगर कर्मचारी संघ अब भी सपनि को लेकर अदालती कार्यवाही में सरकार को घेरे हुए है. बीते दिनों कर्मचारियों की पहल तब रंग लाई जब उच्च न्यायालय जबलपुर की इंदौर खंडपीठ ने याचिका क्रमांक १२४५/०७ पर सुनवाई कर यह फैसला सुनाया कि १ जनवरी १९९८ से सपनि के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का लाभ दिया जाए. न्यायालय के निर्णय से करीब १६ हजार कर्मचारी जो वर्ष १९९८ में सपनि में कार्यरत थे, लाभांवित होंगे. इनमें विभाजन के बाद जो छत्तीसगढ चले गए वे कर्मचारी भी शामिल हैं. इसके अलावा अदालत ने याचिका क्रमांग १५१६६/०७ पर अपना फैसला सुनाया कि सपनि की संपत्ति के विक्रय पर जो रोक लगी है, वह हटा दी जाए साथ ही जिन १७१ राष्ट्रीकृत मार्गों को लेकर विवाद बना था, उस पर पविहन विभाग अब अपने परमिट जारी कर सकेगा. इस दो मामलों में विभाग को जहां राहत मिली, वहीं महंगाई भत्ते वाले मामले में सपनि की परेशानी बढती नजर आ रही है. अब इस मामले को लेकर अफसर विधि सलाहकारों से सलाह ले रहे हैं.
सूत्रों की माने तो इस मामले को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है. सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर सरकार इस मामले में स्टे लाना चाहती है, ताकि कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के भुगतान करने से वह बच सके. वहीं सडक परिवहन निगम कर्मचारी संघ भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गया है. संघ द्वारा हाल ही में एक बैठक में लेकर यह निर्णय लिया गया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उसके पहले वे वहां याचिका लगाकर अपना पक्ष मजबूत कर लें. जिससे मामले में सरकार को स्टे न मिल सके. बैठक में कर्मचारियों की ओर से वकील करने और छत्तीसगढ के कर्मचारियों से चर्चा करने का भी फैसला मध्यप्रदेश के सडक परिवहन निगम के सेवानिवृत्त हो चुके और कार्यरत कर्मचारियों ने लिया है. कर्मचारी संघ किसी भी तरह से अब इस मामले में सरकार के पक्ष में फैसला जाने नहीं देना चाहता है. यही वजह है कि कर्मचारी अब हर मामले में वकीलों की सलाह पर ही कदम बढा रहे हैं. इन कर्मचारियों की अब अगली बैठक रविवार ३१ जुलाई को भोपाल में रखी गई है.
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