प्रदेश की भाजपा सरकार की चिंता एक बार फिर उसके काबिना के सदस्यों ने बढाई है. विवादों में घिरे मंत्रियों के कारण सरकार संगठन के निशाने पर भी है. भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के एक दिन पहले सहकारिता मंत्री के विवादों में घिरने से सरकार की फजीहत तो हो रही है, साथ ही विवादों में रहने वाले मंत्री चिंतित हो गए हैं.
प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच भले ही बेहतर तालमेल की बात कही जा रही हो, लेकिन वास्तविक तौर पर दिखाई कुछ और ही दे रहा है. संगठन अवसर मिलते ही सत्ता पर नकेल कसने से बचता नहीं है. वहीं सरकार के मंत्री किसी न किसी विवाद में उलझ कर सरकार की चिंता को बढा देते हैं. विशेषकर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के पूर्व ऐसा कुछ विवाद होता है कि सरकार को संगठन का निर्णय स्वीकारना पडता है. रतलाम में हुई प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा के नेतृत्व में पहली कार्यसमिति की बैठक के बाद से कुछ ऐसा ही चल रहा है. इस बैठक के बाद मंत्री अनूप मिश्रा को इस्तीफा देना पडा था. इसके बाद उज्जैन बैठक में पूर्व मंत्री कमल पटेल और विधायक आशारानी सिंह का मामला छाया रहा. अब जबकि सिंगरौली में कल शनिवार से हो रही बैठक के पहले सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन विवादों में घिरकर सत्ता और संगठन दोनों के निशाने पर आ गए हैं. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की फटकार के बाद अब संगठन उन्हें सिंगरौली बैठक में फटकार लगा सकता है. इसके अलावा मामले ने ज्यादा तूल पकडा तो बिसेन की कुर्सी तक जा सकती है.
बिसेन के विवाद में घिरने से पूर्व में विवादों में रहे मंत्रियों में भी चिंता छाने लगी है. कार्यसमिति की बैठक के पूर्व उठे इस विवाद ने मंत्रियों को चिंतित कर दिया है. हाल ही में नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर और जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया के बीच मंत्रिमंडल की बैठक में ही हुए विवाद के चलते श्री गौर चिंतित हो गए हैं, उन्होंने दिल्ली कूच कर दिया है. वे कार्यसमिति की बैठक होने तक दिल्ली में ही रहेंगे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलते रहेंगे. इसके अलावा वित्त मंत्री राघवजी, स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस, आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह, कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, खा मंत्री पारस जैन, गृह और जेल राज्यमंत्री नारायण कुशवाह की चिंता कुछ ज्यादा बढी हुई है. इन सबकों इस बात को लेकर चिंता होने लगी है कि अगर कार्यसमिति के बाद मंत्रिमंडल विस्तार का मन सत्ता और संगठन ने बना लिया तो इनकी छुट्टी हो सकती है. ये मंत्री कभी भ्रष्टाचार तो कभी बयानों को लेकर विवादों में घिरे रहे हैं. कांग्रेस भी इनमें से अधिकांश को अपना निशाना बनाती रही है. माना जा रहा है कि कार्यसमिति की बैठक में बिसेन का मुद्दा उठने के बाद इन मंत्रियों पर भी संगठन उंगली उठाएगा. इनके अलावा उोग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर भी विवाद उठा, मगर सत्ता और संगठन के बीच उन्होंने तालमेल बैठाकर मामले को तब शांत कर दिया था. मगर हाल में उठे विवाद की वजह से वे भी चिंतित बताए जाते हैं.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें