शुक्रवार, 12 जून 2015
परिवारवाद से दूर हुई भाजपा
गरोठ में होने जा रहे उपचुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने काफी मंथन के बाद मैदान में घुटे हुए और क्षेत्र में खासा पहचान वाले नेताओं को मैदान में उतारा है. भाजपा ने बहोरीबंद उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद यहां पर परिवार से दूरी बनाई है. वहीं कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और चार मर्तबा चुनाव जीत चुके सुभाष सोजतिया को यहां मैदान में उतारा है.
मंदसौर जिले के गरोठ विधानसभा के विधायक स्वर्गीय राजेश यादव के निधन के बाद यह सीट रिक्त थी. यहां पर 27 जून को मतदान होना है. बुधवार को नामांकन का अंतिम दिन होने से एक दिन पहले दोनों ही दलों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी. दोनों दलों ने भाजपा ने जहां संघ की पृष्ठभूमि वाले चंदरसिंह सिसोदिया को मैदान में उतारा है, तो कांग्रेस ने यहां पर पूर्व मंत्री रहे सुभाष सोजतिया पर भरोसा जताया है. दोनों ही नेता जमीन से जुड़े हैं और क्षेत्र के मतदाताआें के बीच खासा पकड़ भी रखते हैं.
संघ की पृष्ठभूमि वाले सिसोदिया वर्तमान में भाजपा की मंदसौर जिला इकाई के उपाध्यक्ष है साथ ही गरोठ जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष भी है. वे बीते विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रभारी भी रहे. इसके अलावा कई पदों पर वे सांगठनिक पदों पर भी वे रहे हैं. सरपंच पद से लेकर जनपद अध्यक्ष तक का चुनाव उन्होंने लड़ा और जीता भी. इस बार भी प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में उनसे आगे संघ के ही देवीलाल धाकड़ का नाम था. इसके बाद अचानक चुनाव समिति की बैठक वाले दिन संगठन ने तय नामों के पैनल में स्वर्गीय राजेश यादव की पत्नी सीमा यादव का नाम आया था. मगर संगठन ने यहां पर इस बार परिवारवाद से दूरी बनाना बेहतर समझा. इसके पीछे मूल कारण यह रहा कि बहोरीबंद में हुए उपचुनाव में भाजपा ने स्वर्गीय प्रभात पाण्डे के पुत्र को मैदान में उतारा था. भाजपा को यहां पर सदभावना लहर के तहत विजय मिलने की पूरी उम्मीद थी. मगर ऐसा नहीं हुआ. यहां पर भाजपा को करारी हार मिली और सत्ता से बाहर रहते हुए भी कांग्रेस ने यहां पर चुनाव जीता. इस हार को इस बार उपचुनाव में भाजपा ने सबक के रुप में लिया है और जमीन से जुड़े सिसोदिया को उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतारा है.
वहीं कांग्रेस के लिए गरोठ उपचुनाव एक बार फिर चुनौती के रुप में सामने आया. कांग्रेस के सामने वैसे तो एक दर्जन दावेदार यहां से थे, मगर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव यहां पर पूर्व मंत्री और चार बार चुनाव जीते सुभाष सोजतिया को यहां पर मैदान में उतारना चाहते थे. पूर्व में सिसोदिया चुनाव लड़ने से मना करते रहे, मगर प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं विशेषकर दिग्विजयसिंह के प्रयासों से वे राजी हो गए और कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया.
दोनों ही दल अब अपने प्रत्याशी मैदान में उतार चुके हैं. दोनों प्रत्याशी जमीन से जुड़े हैं और चुनाव लड़ने का भी खासा अनुभव भी है. इस बार दोनों प्रत्याशियों को संगठन पर पूरा भरोसा है कि संगठन पूरी ताकत से उनके पक्ष में मैदान में दिखाई देगा. सोजतिया खुद संगठन का साथ मिलने की स्थिति में यहां से चुनाव लड़ने को तैयार हुए हैं. उन्हें भरोसा है कि सभी वरिष्ठ नेताओं और संगठन यहां पर पूरी ताकत से उनके पक्ष में चुनाव मैदान में उतरकर प्रचार करेगा.
छोटे दलों ने बनाई दूरी
गरोठ विधानसभा उपचुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के बीच सीधा मुकाबला होना तय हो गया है. यहां पर छोटे दलों ने चुनाव मैदान में अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है. बहुजन समाज पार्टी से सालों से ही प्रदेश में उपचुनाव में प्रत्याशी मैदान में उतारती ही नहीं है. वहीं समाजवादी पार्टी ने भी इस बार चुनाव मैदान में प्रत्याशी न उतारने का फैसला किया है. सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव ने कहा कि हमारा पूरा लक्ष्य अब संगठन को मजबूत करना है. इस कारण हम जिला इकाईयों को सक्रिय कर रहे हैं. उपचुनाव लड़ने से ज्यादा हमारा उद्देश्य संगठन को मजबूती देना है. हम सीधे अब विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. इसके अलावा जनता दल यू ने भी यहां पर चुनाव लड़ने से दूरी बना ली है. जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव का कहना है कि उपचुनाव वैसे तो सत्ता के पक्ष में ही जाते रहे हैं. इस वजह से चुनाव मैदान में हम प्रत्याशी नहीं उतारेंगे.
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